Breaking News
Home / अनदेखी न करें हिमालय की चेतावनी की

अनदेखी न करें हिमालय की चेतावनी की

कुलभूषण उपमन्यु
पिछले कुछ वर्षों से हिमालय की अस्थिरता बढ़ती ही जा रही है। उत्तराखंड और किन्नौर की गत वर्ष जून त्रासदी के बाद इस वर्ष जम्मू-कश्मीर प्रकृति के तांडव का शिकार हुआ है। लाखों लोग प्रभावित हुए हैं और सैकड़ों काल का ग्रास बन गए। पूरे देश की संवेदनाएं त्रासदी के शिकार लोगों के साथ जुड़ गई हैं। लगता है पश्चिम हिमालय कुछ ज्यादा ही अस्थिर होता जा रहा है। गीता में भगवान कृष्ण ने कहा है- ‘स्थिर रहने वालों में मैं हिमालय हूं।’ क्या हुआ कि अब वही स्थिर हिमालय अस्थिर हो गया है। इसका मौसम अप्रत्याशित रूप से गड़बड़ा गया है। तापमान वृद्धि दर भी हिमालय में सामान्य से लगभग एक डिग्री ज्यादा है। इसी के चलते ग्लेशियर पिघल कर नई झीलें बना रहे हैं। 90 के दशक की सतलुज की बाढ़ पारछू नदी के आसपास की ऐसी झीलों के फटने का परिणाम थी। उत्तराखंड में भी इसी तरह के तथ्य सामने आ रहे हैं।
विष्णु प्रयाग बांध के टूटने से उस क्षेत्र के नीचे तबाही और बढ़ गई थी। अंधाधुंध निर्माण कार्यों और मलबे के डंपिंग से ये त्रासदियां ज्यादा विकराल रूप धारण कर ले रही हैं। जम्मू-कश्मीर में तात्कालिक कार्य तो जान बचाने का ही है। प्रधानमंत्री ने इसे तत्काल राष्ट्रीय आपदा घोषित करके, पर्याप्त सहायता राशि देकर और आगे की जरूरत के मुताबिक देने का वादा करके सराहनीय कदम उठाया है। सेना और आपदा प्रबंधन कार्यदल रात-दिन एक करके लोगों को बचाने और राहत पहुंचाने में जुट गए हैं। इसकी जितनी सराहना की जाए, कम है। देश भर से सरकारें संस्थाएं और व्यक्ति आपदा में सहायता के लिए आगे आ रहे हैं। नि:संदेह इस आपदा से भी निपट लेंगे, लेकिन जो काल का ग्रास बन गए, उन्हें कैसे वापस लाएंगे। जिनके आशियाने उजड़ गए, उन्हें बसाने के लिए भी लंबे समय तक संवेदनशील प्रयास जारी रखने होंगे।
इस सबके साथ ही हमें गंभीरता से हिमालय के अस्थिर होने के कारण तलाशने होंगे। जो हमारे हिस्से की गलतियां हैं, उन पर मंथन करके दीर्घकालीन समाधान के प्रयास तेज करने होंगे। स्थानीय स्तर पर भू-स्खलन या बादल फटने से आपदाएं तो हिमालय में आती ही रहती हैं, लेकिन जिस पैमाने पर पूरे-पूरे प्रदेश को विध्वंस के कगार पर खड़ा कर देने वाली त्रासदियां उत्तराखंड व जम्मू-कश्मीर में सामने आई हैं या किन्नौर में जो पिछले वर्ष घटा है, यह अकल्पनीय और अभूतपूर्व है। इसके कारण तलाश करके तत्काल कार्यवाही शुरू करनी होगी।
सबसे पहले हिमालय में विकास के नाम पर अंधाधुंध छेड़छाड़ को रोककर विशेषज्ञ दल बैठ कर सोचें, वैश्विक अनुभवों से भी सीखें। यह तय किया जाए कि हिमालय में क्या-क्या गतिविधियां पूर्णत: निषेध की जाएंगी। कुछ गतिविधियां पूर्ण सावधानी के साथ करनी होंगी और कुछ हिमालय में प्राथमिक स्तर पर की जाने योग्य होंगी।
ग्लेशियर बचाने के लिए न केवल हिमालय, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन को कम करने के प्रयास करने होंगे। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इस मुद्दे को गंभीरता से लिए जाने पर बल देना होगा। क्योंकि इस लापरवाही से समुद्र का जलस्तर बढ़ने से समुद्र तटीय क्षेत्रों के और कुछ द्वीपों के समुद्र में डूब जाने का भी खतरा पैदा होने वाला है। ग्लेशियर यदि 2050 तक खत्म हो गए, जैसा कि अंदेशा पैदा हो गया है, तो सदानीरा नदियां बरसाती बन कर रह जाएंगी। हिमालय से जुड़े सभी देशों में हिमालय की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए विकास मॉडल की पहल संयुक्त राष्ट्र संघ के स्तर से भी शुरू होनी चाहिए, लेकिन भारत ही इसकी शुरुआत करने में सक्षम है, जिसकी प्राचीन संस्कृति धरती को मां मानती है। यहीं से इसकी रक्षा का उद्घोष होना चाहिए। विज्ञान से सत्य का शोधन होगा और संस्कारों से दृढ़ इच्छाशक्ति पैदा होगी। इन दोनों के संयोग से ही वैकल्पिक विकास के लिए तकनीक विकास और स्थानीय समुदायों की आजीविका संवर्द्धन और हिमालय की पारिस्थितकी को बचा पाना संभव हो सकेगा। हिमालय संरक्षण के आधार स्तंभ, वन संरक्षण को उच्च प्राथमिकता देकर ही अच्छी शुरुआत हो सकेगी।
-0-0-0-000-0-0-0-
हिमालय की चेतावनी,सतलुज की बाढ़,झीलों के फटने का परिणाम,तापमान वृद्धि दर,विष्णु प्रयाग बांध के टूटने,अंधाधुंध निर्माण कार्य, राष्ट्रीय आपदा, आपदा प्रबंधन कार्यदल,भू-स्खलन, बादल फटना,विज्ञान से सत्य का शोधन,वैकल्पिक विकास ,हिमालय संरक्षण, वन संरक्षण, पारछू नदी ,Indiscriminate construction, national disaster, disaster management task force, landslides, cloud bursts, purification of truth from science, alternative development, Himalayan conservation, forest conservation,

About the author

कुलभूषण उपमन्यु (अध्यक्ष हिमालय नीति अभियान समिति, चंबा, हिमाचल प्रदेश)

About हस्तक्षेप

Check Also

Health news

जानिए क्या है खतरनाक बीमारी एमडी

मांसपेशियों की डिस्ट्रोफ़ियां (एमडी) – muscular dystrophies (MD)  30 से अधिक आनुवंशिक रोगों का एक …

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

%d bloggers like this: