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अम्बेडकर पेरियार स्टडी सर्किल पर पाबन्दी मोदी शासन में अभिव्यक्ति की आज़ादी पर एक और हमला

‘ अम्बेडकर पेरियार स्टडी सर्किल ‘ पर मानव संसाधन मंत्रालय के निर्देश पर लगाये गये प्रतिबन्‍ध 
आईआईटी मद्रास में छात्र संगठन अम्बेडकर पेरियार स्टडी सर्किल पर पाबन्दी मोदी शासन में अभिव्यक्ति की आज़ादी पर एक और हमला
लखनऊ, 30 मई। नौजवान भारत सभा ने चेन्नई में आईआईटी मद्रास के छात्रों के संगठन ‘अम्बेडकर पेरियार स्टडी सर्किल’ पर मानव संसाधन मंत्रालय के निर्देश पर लगाये गये प्रतिबन्‍ध की कड़ी निन्‍दा करते हुए उसे मोदी शासन में अभिव्‍यक्ति की आज़ादी और स्‍वतंत्र विचारों पर बढ़ते हमलों की एक और कड़ी करार दिया है।
नौजवान भारत सभा के अध्यक्ष अरविन्द ने कहा कि एपीएससी पर महज़ इसलिए प्रतिबन्ध लगाया गया है कि उसने नरेन्द्र मोदी सरकार के एक साल पूरे होने पर एक परचे के माध्यम से अपनी आलोचना रखी थी और विचार-विमर्श का आयोजन किया था। किसी ‘‘अज्ञात’’ की शिकायत पर ‘‘संज्ञान’’ लेते हुए मानव संसाधन मंत्रालय के निर्देश पर आईआईटी संस्थान के प्रबन्धन ने विगत 22 मई को यह तानाशाही कदम उठाया।
नौ.भा.स. ने कहा कि गत 28 मई को दिल्ली विश्वविद्यालय में आइसा से जुड़े छात्रों पर भाजपा के छात्र संगठन एबीवीपी द्वारा हमला किया गया, विभिन्‍न लेखकों-कलाकारों पर संघ परिवार से जुड़े कट्टरपंथी संगठनों द्वारा पिछले एक वर्ष में बार-बार हमले किये जाते रहे हैं और ऐसे मामलों में सरकार चुप्पी की चादर ओढ़कर बैठ जाती है। न तो ऐसे हमलावर संगठनों पर प्रतिबन्ध ही लगता है और न ही उन्हें कोई सजा मिलती है। लेकिन जब कोई शान्तिपूर्ण ढंग से अपनी आलोचना रखता है तो उस पर प्रतिबन्ध लगा दिया जाता है। अपनी पार्टी की आलोचना करने पर छात्र समूह पर प्रतिबन्ध लगवाना मानव संसाधन मंत्री स्मृति ईरानी की तुच्‍छता और बौनेपन को भी प्रदर्शित करता है। कहने को शिक्षा मंत्रालय भी इन्हीं के मातहत है लेकिन ये खुद बेहद कम पढ़ी-लिखी हैं और अनेक बार इन्हें पोंगा पण्डितों के फेर में पड़े हुए रंगे हाथों पकड़ा गया है। शिक्षा व्यवस्था में और विभिन्न पाठ्यक्रमों में हो रहे फेरबदल यह दिखाते हैं कि किस तरह से इसे संचालित करने का काम राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और उसके अनुषंगिक संगठन करते हैं। अतार्किकता, पुनरुत्थानवाद व कूपमण्डूकता को प्रोत्साहन दिया जा रहा है और वैज्ञानिक, तार्किक व जनवादी नज़रिये को हतोत्साहित किया जा रहा है।
नौजवान भारत सभा के महासचिव छिन्दरपाल ने कहा कि इस प्रकार से जनवादी अधिकारों का हनन भारतीय राज्य के सिकुड़ते जनवादी चरित्र को प्रदर्शित करता है। उन्होंने कहा कि हम फ्रांस के प्रबोधक वोल्तेयर की उक्ति के कायल हैं जिन्‍होंने चर्च द्वारा दार्शनिक दिदेरो की रचनाओं पर प्रतिबन्ध लगाने का विरोध करते हुए कहा था कि भले ही मैं तुम्हारी बातों से सहमत न होऊं लेकिन तुम अपनी बातें कह सको इसके लिए मैं अपनी जान तक दे सकता हूँ।
नौजवान भारत सभा ने सरकार के जनवाद विरोधी रवैये की कड़े शब्दों में निन्दा की है और आईआईटी मद्रास में अम्बेडकर पेरियार स्टडी सर्किल से जुड़े छात्र-युवा साथियों के जनवादी अधिकारों का पुरजोर समर्थन करते हुए सरकार व आईआईटी प्रबंधन से बिना शर्त प्रतिबन्ध हटाने की माँग की है कि छात्रों के उक्त समूह से हटाया जाये। साथ ही आम जनता से हार्दिक अपील की है कि जनवाद पर होने वाले हर हमले का जवाब व्यापक एकजुटता और जन लामबन्दी से दिया जाये।

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