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असहिष्णुता हिन्दुत्व का हथियार है – अमलेन्दु उपाध्याय

नफ़रत फैलाने वालों (Hate propaganda) के खिलाफ सोशल मीडिया (social media) पर खुले मोर्चा…  बीडीशर्मा, रमाशंकर विद्रोही और मोहम्मद नसीम को श्रद्धांजलि दी गई …. मानवाधिकार दिवस (Human Rights Day) की पूर्व संध्या व हस्तक्षेप.कॉम के पांच साल पूरा होने पर “असहिष्णुता की चुनौतियाँ और सोशल मीडिया” ( “Challenges of Intolerance and Social Media”) पर हुआ सेमिनार

लखनऊ। हस्तक्षेप.कॉम के संपादक व वरिष्ठ पत्रकार अमलेन्दु उपाध्याय ने कहा है कि एक खास विचारधारा-संघ के लोग समाज में नफ़रत के बीज बोकर असहिष्णुता फैला कर देश तोड़ने का कुचक्र रच रहे हैं।

श्री उपाध्याय आज लखनऊ स्थित यूपी प्रेस क्लब में इंसाफ अभियान उत्तर प्रदेश व नागरिक परिषद् द्वारा मानवाधिकार दिवस की पूर्व संध्या पर खबरों के चर्चित पोर्टल हस्तक्षेप.कॉम के पांच साल पूरा होने पर “असहिष्णुता की चुनौतियाँ और सोशल मीडिया” विषय पर मुख्य वक्ता के तौर पर अपने विचार रख रहे थे।

श्री उपाध्याय ने कहा कि जब हम अपने धर्म या समाज को सर्वश्रेष्ठ घोषित करके गर्व करने लगते हैं, तभी असहिष्णुता का बोध पैदा होने लगता है। हम अपने धर्म/ संप्रदाय या समाज की अच्छाईयों का बखान कर सकते हैं लेकिन दूसरे धर्म/ संप्रदाय या समाज से स्वयं को श्रेष्ठ साबित नहीं कर सकते। उन्होंने कहा कि आरएसएस के नेतृत्व में हिन्दुत्ववादी तबका हिन्दू धर्म को नुकसान पहुंचाकर इस देश के सामाजिक ताने-बाने और देश की एकता-अखण्डता को तोड़ना चाहता है।

उन्होंने कहा कि गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने बिल्कुल सही कहा कि देश में समाज में असहिष्णुता नहीं है, लेकिन यह भी सही है कि आरएसएस की विचारधारा समाज में नफ़रत का ज़हर फैलाकर असहिष्णुता पैदा कर रही है।

पूर्व विधायक रामलाल ने कहा कि देश के सामने असहिष्णुता ज्वलंत समस्या है। एक विचारधारा के रूप में असहिष्णुता षड़यंत्र के रूप में फैलती जा रही है। असहिष्णुता फैलाने वाले लोगों को भारतीय संविधान में आस्था नहीं है। डॉ. अंबेडकर को मुस्लिम विरोधी घोषित करके झूठ फैलाया जा रहा है। डॉ. अंबेडकर ने तो हिन्दू धर्म का परित्याग किया था।

खबर लहरिया की लक्ष्मी शर्मा ने कहा कि हिन्दू या मुसलमान, दो अलग चीजें नहीं हैं, हम इंसान हैं। हमें विचार करना चाहिए कि हम नफ़रत क्यों फैला रहे हैं। अपने अनुभव शेयर करते हुए उन्होंने कहा कि पुलिस ने हमसे कहा कि शाम को आइए, बहुत सी ख़बरें मिलेंगी। हमारी टीम को गालियां दी गईं।

इंसाफ अभियान के अध्यक्ष राजीव यादव ने कहा कि सोशल मीडिया महिलाओं के लिए बहुत असुरक्षित हो गया है। यह लॉ एंड आर्डर का सवाल है, उसी के दायरे में इसका समाधान किया जाए।
इमरान खान ने कहा कि जब हम दूसरे के सम्मान को ठेस पहुंचाते हैं, जब हम दूसरे की भावनाओं को ठेस पहुंचाते हैं, वहीं हम संविधान का उल्लंघन करते हैं।

उन्होंने कहा कि भावनाओं में मीडिया भी बह जाता है। मीडिया भी अपनी आज़ादी का दुरुपयोग करता है

युवा पत्रकार जीशान अख्तर ने कहा कि सांप्रदायिक हिंसा के साथ-साथ जातिगत हिंसा पर भी चर्चा होनी चाहिए। असहिष्णुता केवल धार्मिक ही नहीं है बल्कि जातिगत भी है और दलितों व अल्पसंख्यकों को खास तौर पर टारगेट करके नफरत फैलाई जा रही है और उनके मानवाधिकारों का हनन किया जा रहा है।

सामाजिक कार्यकर्ता ताहिरा हसन ने कहा कि एक मुट्ठी भर लोग हैं, जिन्हें सत्ता के लोग कंट्रोल नहीं कर रहे हैं। अगर इसी तरह हिंसा बढ़ेगी तो हम पाकिस्तान बन जाएंगे।

उन्होंने कहा कि जिन्होंने गांधी को कत्ल किया, वो हमसे राष्ट्रभक्त होने का सुबूत मांग रहे हैं। 6 दिसंबर 1992 को बाबरी मस्जिद का कत्ल किया जाना सबसे बड़ी आतंकी घटना थी। उन्होंने कहा कि डॉ. अंबेडकर ने जो रोशनी दी है, उससे शिक्षा लेने की आवश्यकता है। हमें जातिवादी हिंसा पर भी बोलना चाहिए।

एटा से आए युवा सोशल एक्टिविस्ट अंकुर यादव ने कहा कि हमें अपनी बातों को उन लोगों तक पहुंचाना है, जो असहिष्णुता फैलाने वाले लोगों का हथियार बन जाते हैं। हमें सोशल मीडिया के बक्से से निकलकर जनता के बीच जाना चाहिए।

युवा व चर्चित पत्रकार अभिषेक श्रीवास्तव ने अपनी बात रखते हुए कहा कि मंगलौर में एक पब से लड़कियों को निकालकर मारा गया था, इसी असहिष्णुता के विरोध में सोशल मीडिया पर पहला सफल कैंपेन (The first successful campaign on social media) पिंक चड्डी कैंपेन (
pink chaddee Campaign) 2009 में चला। उन्होंने कहा कि आंदोलन ज़मीन पर ही होगा, फेसबुक पर नहीं।

अभिषेक श्रीवास्तव ने आगे कहा कि हर जगह एक बाजार की गुंजाइश है और हर बाजार में जगह की गुंजाइश है।

उन्होंने कहा कि टेलिविजन मोदी का एजेंडा सेट कर रहा है। टेलिविजन और मोदी का एजेंडा एक दूसरे से जुड़ा हुआ है। नए माध्यमों से अपनी बात कहने की छूट मिली है, लेकिन हमें देखना होगा कि हमारी कितनी सुनी जा रही है। समाज में ऑफलाइन बोलने के खतरे ज्यादा हैं। खबर ब्रेक करने की मानसिकता में बहुत गड़बड़ हो रहा है। सोशल मीडिया की कामयाबी माहौल की अर्जेंसी से जुड़ा मुद्दा है।

हस्तक्षेप.कॉम की महत्ता को रेखांकित करते हुए अभिषेक श्रीवास्तव ने कहा कि सोशल मीडिया पर हस्तक्षेप ने नए लेखकों को स्पेस दिया, तमाम जनपक्षधर मुद्दे उठाए।

(नागपुर) से आए अशोक मुण्डे जिनका एक पैर कृत्रिम है व पर्वतारोही हैं, ने अपने विचार रखते हुए कहा कि वे रामदेव से ज्यादा व्यायाम करते हैं।

उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र या देश के युवा अगर दलित हैं, तो उनके साथ दुर्व्यवहार हो रहा है। आरएसएस दलितों को यूज़ एंड थ्रो करता है।

उन्नाव से आए हुए ज़मीर खान ने कहा कि जो मुसलमान मज़हब के नाम पर दहशतगर्दी या असहिष्णुता फैलाते हैं, वह मुसलमान नहीं है।

निरंजन देव (छात्र नेता इलाहाबाद विश्वविद्यालय) ने कहा कि बहुमत के नशे में चूर लोग इतिहास के साथ व्यभिचार कर रहे हैं। वैज्ञानिक सोच के साथ दमनकारी रवैया अपना रहे हैं।

हस्तक्षेप.कॉम के एसोसिएट एडिटर व सुप्रसिद्ध मानवाधिकार कार्यकर्ता रणधीर सिंह सुमन एडवोकेट (बाराबंकी) ने कहा कि सोशल मीडिया बहुत क्रांतिकारी टूल है। इंटरनेट ने बड़े पैमाने पर लेखक पैदा किए जो प्रिंट मीडिया से संभव नहीं था। उन्होंने कहा कि संघ गिरोह ने सोशल मीडिया पर ज्ञान के स्रोत पर कब्जा करके समाज को विभक्त किया है। संघ गिरोह ने हिन्दू धर्म को नुकसान पहुंचाकर हिन्दुत्व को खड़ा किया।

श्री सुमन ने कहा कि हस्तक्षेप.कॉम के माध्यम से बहुत से छोटे-बड़े अखबारों की रोजी-रोटी चल रही है। विचार से आंदोलन खड़ा होता है। इसके लिए हमें सोशल मीडिया का प्रयोग करना चाहिए।
हम बहुत सारे काम नहीं कर पाते, जबकि संघ के लोग सीआईए और मोसाद से संचालित हो रहे हैं।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहीं पीयूसीएल की महासचिव वंदना मिश्रा ने कहा कि असहिष्णुता बहुत छोटा शब्द है। जो समय चल रहा है, वह बहुत गंदा समय है। असहिष्णुता राजनीतिक विचारधारा है। असहिष्णुता फासीवादी विचारधारा है। हमें नहीं भूलना चाहिए कि बिहार में हारने के बाद मोदी मजबूर हुए हैं, इसलिए संविधान को सर्वोच्च कहने के लिए बाध्य हुए हैं, लेकिन उनके साधू-साध्वियां वहीं ज़हर भरी भाषा बोल रहे हैं।

मोदी देश और विदेश दोनों में एक्सपोज़ हो रहे हैं।

कार्यक्रम की शुरुआत में बीडीशर्मा, रमाशंकर विद्रोही और मोहम्मद नसीम को श्रद्धांजलि दी गई।

सेमिनार में रिहाई मंच के अध्यक्ष मुहम्मद शुएब, इंसाफ अभियान के प्रदेश महासचिव दिनेश चौधरी, अरविन्द विद्रोही, ओमेन्द्र मिश्रा, डॉ. इमरान इदरीस, गुफरान सिद्दीकी, मसीहुद्दीन संजरी, एस. के. पंजम, इनायत उल्ला खां, रफ़त फातिमा, ज़मीर अहमद खान, डॉ. हमदा ज़रीन, ज़मीर अहमद खान, डॉ. ज़मीर अहमद, शबरोज़ मोहम्मदी, अजीजुल हसन, पीसी कुरील, शरद पटेल, रीतेश कुमार त्रिपाठी, डॉ. रूपेश सिंह, सुनील कुमार, एहसानुल हक मलिक, मो. आकिल, शिवनारायण कुशवाहा, अतहर हुसैन, नरेंद्र यादव, सैयद मुईद, केपी यादव, साहित्यकार किरन सिंह, वरिष्ठ कवि अजय सिंह, रंगकर्मी दीपक कबीर, सुरेश चंद्र, विजय यादव, देवीदत्त पांडेय, के के शुक्ला, ओ पी सिन्हा, आदियोग, अंकुर जायसवाल, फिल्मकार शाह आलम व नदीम आदि उपस्थित थे।

About अमलेन्दु उपाध्याय

अमलेन्दु उपाध्याय, लेखक वरिष्ठ पत्रकार, राजनीतिक विश्लेषक व टीवी पैनलिस्ट हैं। वे hastakshep.com के संस्थापक/ संपादक हैं।

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