शब्दहस्तक्षेप

कहते हैं कि बहरा हो गया है हाकिम/ तभी तो सबकी फ़रियाद नहीं सुनता

ये रास्ते हैं इंसाफ़ के
जंहागीर के दरबार का भारी है घंटा
हर एक के हिलानें से नहीं बजता

कहते हैं कि बहरा हो गया है हाकिम
तभी तो सबकी फ़रियाद नहीं सुनता

कुछ लोग चाहें जितनी एड़ियाँ रगड़ें
मंहगा है इंसाफ़ सबको नहीं मिलता

कर ली आयद पाबंदी उसनें खुद पर
कहीं पर भी हो जुर्म वो नहीं बोलता

सब लिखा है मुल्क के आईन में
सुना हैं बस जहांगीर को नहीं दिखता

// जसबीर चावला //

 

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