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Jasbir Chawla's Poetry in Hindi, जसबीर चावला की कविता हिंदी में

ख़ून के धब्बे पड़ गये हैं ‘इल्म की किताबों’ पर

शूट आउट एट पेशावर स्कूल : शकील का ख़त अम्मी के नाम

Shoot out at peshawar school : Shakeel’s letter to Ammi

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अम्मी लो मैंने ज़िद छोड़ दी

नये बैग की

लंच बाक्स की

नई पानी की बोतल की

न चाहिये शार्पनर

न इरेज़र

सब कुछ तो ‘इरेज़’ कर दिया ‘तालीबान’* ने

हाँ जरूर चाहिये ढेरों ‘ब्लाटिंग पेपर’

ख़ून के धब्बे पड़ गये हैं ‘इल्म की किताबों’ पर

कुछ किताबों को रखवा देना मस्जिद में

पाक ‘क़ुरान’ के पास

मौलवी साहब को खास ताक़ीद करना

मदरसों में ‘इन्हे’ भी पढ़ाये

‘इंसानियत’ का पाठ पढ़ायें

शायद कोई सचमुच ‘तालिबानी’ बन जाये

‘मलाला’ आपा से कहना

‘तालीम’ की राह में अब वो अकेली नहीं रही

हमने भी गोलियाँ खाई हैं

बराबर के हकदार हैं उसके ‘नोबल’ में

और वो जो नये कपड़े कल ही सिल कर आये हैं

अब मुझे पहनाना

ठंडे पानी से अब जरा भी डर नहीं लगता

जितना जी चाहे नहलाना

* ‘तालिबान’ मतलब विद्यार्थी (‘Taliban’ means students)

 // जसबीर चावला //

जसवीर चावला की फेसबुक टाइमलाइन से साभार।

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