खेत खाए गदहा , मार खाए जोलहा

कुछ कहावतें मजेदार होती हैं । मसलन एक कहावता बहुत ही मजेदार है । नारियां क्षमा करें , यह कहावत उनके खिलाफ है । पर है बहुत मजेदार । नारी ,अगर इस कहावत को अपने पर न लें और अलग अलग रुपकों में इसको समझें तो उन्हें भी मजा आएगा । तो कहावत है कि इयार का गुस्सा भतार पर !

अब इसे यूं भी समझ सकते हैं कि हार का गुस्सा ईवीएम पर । या यूं कह सकते हैं कि मनमोहन का गुस्सा योजना आयोग पर । पता सिर्फ यह लगाना है कि मालिक कौन है । यहां भतार मालिक का प्रतीक है और इयार प्रतीक है उसका जो मालिक की गैर मौजूदगी में एक झलक पाता है ।

यह झलक क्या है । झलक गृह मंत्रालय है । इसका इयार कौन है पी चिदंबंरम । अगर हमने इयार खोज लिया तो भतार भी खोजना पड़ेगा । बहुत परदे में रहता है गृह मंत्रालय । कुछ कुछ उस गाने की तरह कि परदा जो खुल गया तो फिर…भतार हो जाएगा नाराज ।

तो भतार श्री बहुत नाराज हैं । दिल्ली में बहुत बलात्कार होता है , उससे बहुत नाराज हैं । आसान लोकतांत्रिक तरीका तो यह था कि दिल्ली पुलिस को दिल्ली की नगरपालिका नुमा राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र की सरकार के जिम्मे छोड़ देते ।

अब यह पत्रकार लोग पेड न्यूज से बाहर निकल कर , राडिया टेप की आवाज में घुस कर कुछ अजीब गरीब सवाल पूछते हैं पुलिस के भतार से कि बताइए कि दिल्ली में हुए बलात्कार के लिए कौन जिम्मेदार है । भतार को लगता है कि पत्रकार लोग इयार का गुस्सा भतार पर निकाल रहे हैं ।

यह भतार बड़ा ही गंभीर है । आम तौर पर मनुष्य जब भतार हो जाता है तो गंभीर नहीं रहता । भतार तो हंसता हुआ नूरानी चेहरा , काली जुल्फें रंग सुनहरा होता है । क्या आपने कभी देखा है अपने गृह मंत्री को कभी सफेद बालों में । नहीं न ।

लेकिन गंभीरता से जवाब देना था । दे दिया  । दिल्ली में बाहर से आए लोग गंद फैलाते हैं । उन इलाकों का भी नाम बताया जहां यह बाहरवाला पाया जाता है । यह बाहरवाला ही दिल्ली को दिल्ली बनाता है । परसो तक ब्रहमचारी राहुल गांधी यही कहते थे ।

तब याद आया इस भतार को कि अरे ,वह तो भतार नहीं इयार है । इयार भी क्या है । घर में घुसा बाहरवाला ही है । फटाक से कहा कि गुनाहगार नहीँ बाहरवाला ,मैं भी हूं बाहरवाला । पर असली सवाल यह भी कि दिल्ली में कौन है अंदरवाला ।

बंटवारे के बाद बसाए गए यहां अंदर के बाहरवाला । दफ्तरों में सजाए गए बाहरवाला । साग सब्जी नौकरी के लिए बुलाए गए पहाड़वाला । कुछ बड़ा निर्माण कार्य हुआ तो सामने आया बिहार वाला । पूरी की पूरी बस्ती बसाई दक्षिणवाला ।

अब यहां पर यही मुद्दा कि कहावत कहां फिट होती है कि इयार का गुस्सा भतार पर । सब एक दूसरे के इयार हैं । यहां का इयार वहां का भतार है । तब तय हुआ कि कहावत बदली जाए । इसी से इयार और भतार का रिश्ता नहीं जुड़ेगा । गृह मंत्री गृह मंत्री ही बना रहेगा ।

दिल्ली की परंपरा में बना दी गई मंत्रियों का समूह । मामला मुहावरा बदलने का था । पहले वाले मुहावरे का वजन भी बनाए रखना था । माल महाराज का और मिरजा को होली खेलना था । तो जनाब इसी पर मुहावरा बना कि खेत खाए गदहा , मार खाए जोलहा ।

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