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चक्रकाल : यह वोह उत्तराखंड तो नहीं जिसका सपना देखा था

जब भी उत्तराखण्ड के पहाड़ों पर जाना होता है, तो हमेशा नये अनुभवों से दो-चार हुआ जाता है। बेपनाह खूबसूरती के बावजूद आज भी मूलभूत आवश्यकताएं न जुटा पाने पर अफसोस होता है। नरेन्द्र सिंह नेगी के गीत ‘‘ठण्ड़ो रे ठण्ड़ो, मेरे पहाड़ की हवा, पानी ठण्ड़ो’’ अपने आप में बहुत कुछ कह जाता है। बद्री-केदार-यमुनोत्रत्री-गंगोत्री-पिरान कलियर-हेमकुण्ड साहिब-नानकमत्ता जैसे सभी धर्मों के तीर्थ स्थलों का समावेश, ओली-वेदनी बुग्याल-द्यारा बुग्याल जैसे बर्फ के खेलों के स्थल, मसूरी-नैनीताल-रानीखेत-कौसानी जैसे पर्यटक स्थल, योग की अन्तर्राष्ट्रीय राजधनी ऋषिकेश, तो विश्व के सबसे बडे मेले को समेटने वाला हरिद्वार। राजकपूर ने तो ‘‘संगम’’ से लेकर ‘‘राम तेरी गंगा मैली’’ तक गंगा की खूबसूरती को बखूबी दिखाया। अमिताभ बच्चन को लक्ष्मण झूला पुल की खूबसूरती को ‘‘गंगा की सौगन्ध्’’ में देखने का मौका क्या मिला, उसी पुल पर बेटे की फिल्म ‘‘बंटी और बबली’’ का गाना भी फिल्माया गया। अन्तर्राष्ट्रीय धर्मगुरू डा. स्वामी राम, स्वामी शिवानन्द, श्री श्री रविशंकर, चिदानन्द मुनी, बी.के. आयंगर, स्वामी रामदेव, स्वामी चिन्मयानन्द, स्वामी स्वरूपानन्द आदि अनगिनत नाम हैं, जिन्होंने इसी देवभूमि से पूरे विश्व को योग और अध्यात्म  का संदेश दिया। महात्मा गांधी से स्वामी विवेकानन्द को भी ज्ञान प्राप्त करने इसी भूमि पर आना पड़ा तो स्वतंत्रता आन्दोलन के दौरान भूमिगत आन्दोलनों के लिए भी यही भूमि विख्यात रही। इतना सब कुछ होने के बावजूद आधारभूत सुविधाओं का अभाव क्या राज करने वालों में दूरदर्शिता के अभाव को नही दर्शाता। इस तथ्य के बावजूद कि शांत रहने वाली फिजा में घरेलू पर्यटकों की सेख्या लगातार बढ़ रही है। गोल्डन ट्राइएंगल ‘‘जयपुर-दिल्ली-आगरा’’ के बाद विदेशी पर्यटकों की तादात भी सबसे ज्यादा है। हम क्या दे रहे हैं, यह सवाल भी महत्वपूर्ण है। देश-विदेश के आंकडे साफ बता रहे हैं कि मध्यम वर्ग साल में अधिकतम तीन बार और कम से कम एक बार परिवार सहित किसी शांत, सकून वाली जगह पर जाकर, कई महीनों की  लगातार मेहनत की थकान उतारना चाहता है। पिछले कुछ सालों से गंगा व उसकी सहायक नदियों के किनारे बीच कैंपिंग व राफ्रिटंग के व्यवसाय में लगातार बढोत्तरी हुई है, किन्तु बीच के आवंटन व राफ्रिटंग के लाइसेंस पर जल क्रीड़ा के व्यवसाय में शामिल लोगों और सरकारी विभागों के बीच लगातार टकराव होता रहा है। वन विभाग और सिंचाई विभाग के बीच भी टकराव। अभी भी राष्ट्रीय पार्कों और सेन्चुरियों के मध्य घूमने की नीति तय नही है। सुविधानुसार जब चाहे नियमों की धज्जियां उड़ाई जा सकती है। पेइंग गेस्ट हाउस, टू व्हीलर टैक्सी जैसे कदम सरकारी कदमताल में ही उलझा है, जबकि पर्यटन स्थलों पर स्कूटर व मोटरसाईकिल आराम से किराये पर मिल जाती है। भारतीयों को तो छोडिए, विदेशियों को भी आराम से इनमें घूमते देखा जा सकता है, पर सरकार को इससे कुछ नहीं मिलता। पर्यटन को बढ़ावा देने वाली वीर चन्द्र सिंह गढ़वाली व खादी ग्रामोद्योग की स्वरोजगार योजनाओं से लाभार्थियों को बड़े पापड़ बेलने पड़ते हैं। पहाड़ों में बहुत से खूबसूरत स्थलों पर पर्यटक इसलिए नहीं जाते कि अभी भी वहां सड़कों का अभाव है। क्या किसी राज्य का पर्यटन विकास बिजली, पानी, सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधओं के हो सकता है। माना कि किसी राज्य के विकास के लिए 10 बरस बहुत ज्यादा नहीं होते, पर क्या इतने कम होते हैं। राज्य बनने से पहले सुपर डुपर हिट ‘‘टाइटैनिक’’ की हीरोइन केट विंस्लेट पिक्चर रिलीज होने से कुछ पहले ऋषिकेश आकर कैप्टन डी.डी. तिवारी के रिसोर्ट में ठहरी और कई दिन तक योग व अध्यात्म का अध्ययन किया। गंगा के तट पर होने वाली आरती केट को खूब भाई थी, पर पिक्चर रिलीज के बाद तो आम से ख

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