Home / ज़ुल्मो सितम के कोहे गिरां, रूई की तरह उड़ जायेगें
शेष नारायण सिंह कांग्रेस के महामंत्री दिग्विजय सिंह की राजनीति रंग लाने लगी है . अपनी पार्टी के भ्रष्टाचार में डूबे हुए सूरमाओं के ऊपर से मीडिया का ध्यान हटाने का जो प्रोजेक्ट उन्होंने शुरू किया था , वह अब चमकना शुरू हो गया है . जिन लोगों ने उनकी पार्टी के बड़े नेताओं को भ्रष्ट साबित करने का मंसूबा बनाया था,उनके हौसले पस्त हैं . नागपुर में विराजने वाले उन लोगों के मालिकों के ख़ास लोगों को ही दिग्विजय सिंह के खेल ने अपनी जान बचाने के लिए मजबूर कर दिया है. आर एस एस के बड़े पदों पर विराजमान लोग इस क़दर दहशत में हैं कि इनके सबसे बड़े अधिकारी ने सूरत की एक सभा में सफाई दी कि आर एस एस के जो लोग भी गलत काम करते हैं ,उन्हें संगठन से निकाल दिया जाता है . यानी वे यह कहना चाह रहे हैं कि असीमानंद और इन्द्रेश कुमार अब उनके साथ नहीं हैं . उनको भी मालूम है कि असीमानंद से तो शायद पिंड छूट भी जाए लेकिन इन्द्रेश कुमार से जान नहीं बचने वाली है क्योंकि वह आज तक उनके संगठन में राष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय पदाधिकारी है . अभी कुछ दिन पहले तक बीजेपी के लोग इन्द्रेश कुमार के पक्ष में बयान देते पाए जा चुके हैं . शुरू में तो आर एस एस ने दिग्विजय सिंह को यह कहकर धमकाने की कोशिश की थी कि वे हिन्दुओं के खिलाफ हैं इसलिए आतंकवाद को भगवा रंग दे रहे हैं . लेकिन दिग्विजय सिंह ने तुरंत जवाबी हमला बोल दिया और ऐलान कर दिया कि भगवा रंग तो बहुत ही पवित्र रंग है , वास्तव में उनका विरोध संघी आतंकवाद से है . लगता है कि भ्रष्टाचार के कांग्रेसी खेल से फिलहाल मीडिया का ध्यान बंटाने में दिग्विजय सिंह कामयाब हो गए हैं क्योंकि आतंकवाद की खबरें अगर बाज़ार में हो तो भ्रष्टाचार का नंबर दूसरे मुकाम पर अपने आप पंहुच जाता है .कांग्रेस के पक्ष में गुवाहाटी में संपन्न बीजेपी के राष्ट्रीय सम्मलेन में भी काम हो गया . सोनिया गाँधी को कटघरे में खड़ा करने की अपनी उतावली में बीजेपी आलाकमान ने सारे तीर सोनिया गाँधी के नाम कर दिए .नतीजा यह होगा कि अब बीजेपी के ज़्यादातर प्रवक्ता कांग्रेस अध्यक्ष के खिलाफ ही बयान देते रहेगें और मीडिया में आर एस एस के प्रभाव के मद्दे नज़र इस बात में दो राय नहीं कि बीजेपी प्रवक्ताओं का बयान पहले पन्ने पर ही छपेगा.यही गलती चौधरी चरण सिंह ने १९७८ में की थी जब अपनी मामूली सोच के तहत इंदिरा गाँधी को पहले पन्ने की खबर बना दी थी . उसके बाद इंदिरा गाँधी कभी भी पहले पन्ने से नहीं हटीं और जनता पार्टी टूट गयी. दिग्विजय सिंह ने एक बार फिर वही माहौल बना दिया है कि बीजेपी वाले अब सोनिया गाँधी को प्रचारित करते रहेगें और आर एस एस के लोग अपने आपको भला आदमी साबित करने में सारी ताक़त लगाते रहेगें. आर एस एस और उस से जुड़े हुए पत्रकार और बुद्धिजीवी आजकल यह बताने में लगे हुए हैं कि असीमानंद का बयान अदालत में नहीं टिकेगा . यह बात सभी जानते हैं . हम तो यह भी जानते हैं कि असीमानंद की हड्डियों का चूरमा बनाकर ही पुलिस ने बयान लिया है और वह बयान किसी भी हालत में बचाव पक्ष के वकीलों की बहस के सामने नहीं टिकेगा लेकिन उनके बयान के आधार पर जो जांच हो रही है वह आर एस एस और संघी आतंकवाद के पोषकों को बहुत नुकसान पंहुचाएगा . असीमानंद ने बताया है कि इन्द्रेश कुमार को कर्नल पुरोहित पाकिस्तानी जासूस मानता था . अगर यह साबित हो गया तो आर एस एस का हिन्दुओं का प्रतिनधि बनने का सपना हमेशा के लिए दफ़न हो जाएगा. देश को पूरी तरह से याद है कि अपने आपको पूरी दुनिया के सामने स्वीकार्य बनाने के लिए बीजेपी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार ने किस तरह से पाकिस्तान के संस्थापक जिन्ना का गुणगान किया था . उसके बाद पूरे देश में उनके खिलाफ माहौल बना. यहाँ तक कि उनकी अपनी पार्टी में भारी मतभेद पैदा हो गया था . अगर आर एस एस में ट]] >

ज़ुल्मो सितम के कोहे गिरां, रूई की तरह उड़ जायेगें

शेष नारायण सिंह
कांग्रेस के महामंत्री दिग्विजय सिंह की राजनीति रंग लाने लगी है . अपनी पार्टी के भ्रष्टाचार में डूबे हुए सूरमाओं के ऊपर से मीडिया का ध्यान हटाने का जो प्रोजेक्ट उन्होंने शुरू किया था , वह अब चमकना शुरू हो गया है . जिन लोगों ने उनकी पार्टी के बड़े नेताओं को भ्रष्ट साबित करने का मंसूबा बनाया था,उनके हौसले पस्त हैं . नागपुर में विराजने वाले उन लोगों के मालिकों के ख़ास लोगों को ही दिग्विजय सिंह के खेल ने अपनी जान बचाने के लिए मजबूर कर दिया है. आर एस एस के बड़े पदों पर विराजमान लोग इस क़दर दहशत में हैं कि इनके सबसे बड़े अधिकारी ने सूरत की एक सभा में सफाई दी कि आर एस एस के जो लोग भी गलत काम करते हैं ,उन्हें संगठन से निकाल दिया जाता है . यानी वे यह कहना चाह रहे हैं कि असीमानंद और इन्द्रेश कुमार अब उनके साथ नहीं हैं . उनको भी मालूम है कि असीमानंद से तो शायद पिंड छूट भी जाए लेकिन इन्द्रेश कुमार से जान नहीं बचने वाली है क्योंकि वह आज तक उनके संगठन में राष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय पदाधिकारी है . अभी कुछ दिन पहले तक बीजेपी के लोग इन्द्रेश कुमार के पक्ष में बयान देते पाए जा चुके हैं . शुरू में तो आर एस एस ने दिग्विजय सिंह को यह कहकर धमकाने की कोशिश की थी कि वे हिन्दुओं के खिलाफ हैं इसलिए आतंकवाद को भगवा रंग दे रहे हैं . लेकिन दिग्विजय सिंह ने तुरंत जवाबी हमला बोल दिया और ऐलान कर दिया कि भगवा रंग तो बहुत ही पवित्र रंग है , वास्तव में उनका विरोध संघी आतंकवाद से है . लगता है कि भ्रष्टाचार के कांग्रेसी खेल से फिलहाल मीडिया का ध्यान बंटाने में दिग्विजय सिंह कामयाब हो गए हैं क्योंकि आतंकवाद की खबरें अगर बाज़ार में हो तो भ्रष्टाचार का नंबर दूसरे मुकाम पर अपने आप पंहुच जाता है .कांग्रेस के पक्ष में गुवाहाटी में संपन्न बीजेपी के राष्ट्रीय सम्मलेन में भी काम हो गया . सोनिया गाँधी को कटघरे में खड़ा करने की अपनी उतावली में बीजेपी आलाकमान ने सारे तीर सोनिया गाँधी के नाम कर दिए .नतीजा यह होगा कि अब बीजेपी के ज़्यादातर प्रवक्ता कांग्रेस अध्यक्ष के खिलाफ ही बयान देते रहेगें और मीडिया में आर एस एस के प्रभाव के मद्दे नज़र इस बात में दो राय नहीं कि बीजेपी प्रवक्ताओं का बयान पहले पन्ने पर ही छपेगा.यही गलती चौधरी चरण सिंह ने १९७८ में की थी जब अपनी मामूली सोच के तहत इंदिरा गाँधी को पहले पन्ने की खबर बना दी थी . उसके बाद इंदिरा गाँधी कभी भी पहले पन्ने से नहीं हटीं और जनता पार्टी टूट गयी. दिग्विजय सिंह ने एक बार फिर वही माहौल बना दिया है कि बीजेपी वाले अब सोनिया गाँधी को प्रचारित करते रहेगें और आर एस एस के लोग अपने आपको भला आदमी साबित करने में सारी ताक़त लगाते रहेगें. आर एस एस और उस से जुड़े हुए पत्रकार और बुद्धिजीवी आजकल यह बताने में लगे हुए हैं कि असीमानंद का बयान अदालत में नहीं टिकेगा . यह बात सभी जानते हैं . हम तो यह भी जानते हैं कि असीमानंद की हड्डियों का चूरमा बनाकर ही पुलिस ने बयान लिया है और वह बयान किसी भी हालत में बचाव पक्ष के वकीलों की बहस के सामने नहीं टिकेगा लेकिन उनके बयान के आधार पर जो जांच हो रही है वह आर एस एस और संघी आतंकवाद के पोषकों को बहुत नुकसान पंहुचाएगा . असीमानंद ने बताया है कि इन्द्रेश कुमार को कर्नल पुरोहित पाकिस्तानी जासूस मानता था . अगर यह साबित हो गया तो आर एस एस का हिन्दुओं का प्रतिनधि बनने का सपना हमेशा के लिए दफ़न हो जाएगा. देश को पूरी तरह से याद है कि अपने आपको पूरी दुनिया के सामने स्वीकार्य बनाने के लिए बीजेपी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार ने किस तरह से पाकिस्तान के संस्थापक जिन्ना का गुणगान किया था . उसके बाद पूरे देश में उनके खिलाफ माहौल बना. यहाँ तक कि उनकी अपनी पार्टी में भारी मतभेद पैदा हो गया था . अगर आर एस एस में ट]] >

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