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तो गोडसे का महिमामंडन आरएसएस और मोदी की शह पर ?

NathuRam Godse

गोडसे का महिमामंडन- नाथूराम गोडसे का case re-open करवाके उसे भी clean chit न दिला दें- ट्विटर पर एक टिप्पणी

खतरनाक यात्रा है – गोडसे का महिमामंडन

नई दिल्ली। क्या राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इशारों पर महात्मा गांधी के हत्यारे नाथूराम गोडसे का महिमामंडन किया जा रहा है ? यह सवाल पिछले कुछ दिनों से भारतीय समाज में उठ रहा था लेकिन कल महात्मा गांधी की पुण्य तिथि पर संघ कबीले की साइबर वाहिनी जिस तरह से गोडसे के महिमागान पर उतरी और एक अखबार में खबर प्रकाशित हुई कि गोडसे की पार्टी गुप-चुप कुछ मंदिरों में गोडसे की मूर्ति स्थापित कराने जा रही है। इस खबर के बाद हिन्दू समुदाय में चिन्ता पैदा हो गई है। सवाल उठ रहे हैं कि क्या आरएसएस और प्रधानमंत्री की शह पर हिन्दू धर्म को हत्यारों का धर्म घोषित कराने के किसी षडयंत्र पर काम हो रहा है? हालांकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कल देशवासियों के नाम सन्देश भेजा था जिसमें कहा गया है कि “पूज्य बापू को उनकी पुण्यतिथि पर शत् शत् नमन।”

कल के अख़बारों में खबर है कि कुछ शहरों में नाथूराम गोडसे के मंदिर बनने वाले हैं। पिछले दिनों जब उत्तर प्रदेश के कुछ शहरों में नाथूराम गोडसे की मूर्ति लगाने की कोशिश की गयी तो भारी विरोध हुआ। लेकिन अब पता चला है कि गोडसे की पार्टी, हिन्दू महासभा के वर्तमान नेताओं ने तय किया है कि कुछ मंदिरों के संचालक साधुओं से बात की जायेगी और मौजूदा मंदिरों में ही गोडसे की मूर्तियाँ रखवा दी जायेगीं। तय यह भी किया गया है कि मीडिया में बात को लीक नहीं होने दिया जाएगा क्योंकि बहुत चर्चा हो जाने से उनको गोडसे के महिमा मंडन के काम में अड़चन आती है। नई रणनीति के हिसाब से पहले मूर्तियाँ लगा दी जायेगीं फिर मीडिया को खबर दी जायेगी।

नाथूराम गोडसे की पार्टी के सूत्रों के हवाले से देश के एक बहुत ही सम्मानित अखबार में खबर छपी है कि इलाहाबाद के माघ मेले में पिछले कुछ हफ़्तों में ऐसे बहुत सारे साधुओं से बात हुयी है जो अपने कंट्रोल वाले मंदिरों में मूर्तियाँ रखवा देगे। इन तत्वों का तर्क यह है कि नाथूराम गोडसे मूल रूप से अखंड भारत के पक्षधर थे। उनकी सोच को आगे बढ़ाने के लिए यह सारा काम किया जा रहा है।

अखबार की खबर के अनुसार इन लोगों ऐसे कुछ नौजवानों को इकठ्ठा कर लिया है जो महात्मा गांधी की समाधि , राजघाट पर भी नाथूराम गोडसे की मूर्ति रखने को तैयार हैं लेकिन अभी यह काम रोक दिया गया है। अभी फिलहाल पूरे देश में करीब पांच सौ मूर्तियाँ रखने की योजना है और जयपुर में मूर्ति बनाने वालों को आर्डर भी दे दिया गया है। महात्मा गांधी की हत्या से जुड़े सवालों पर अपनी बात रखने के लिए गोडसे के भक्तों ने बहुत सारा साहित्य बांटने की योजना भी बनाई है।

सामाजिक कार्यकर्ता राम पुनियानी ने महात्मा गांधी की पुण्य तिथि के मौके पर कहा, गोडसे की इस खुलेआम सराहना और बहुलवाद पर हमले से मैं हैरान नहीं हूं और लेकिन ऐसा देखकर दुख होता है। चीजें आरएसएस की पटकथा के मुताबिक आगे बढ़ रही हैं। लेकिन यह खतरानक यात्रा है।

वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक शेषनारायण सिंह ने कहा है-

“महात्मा गांधी का नाम भारत के राजनेताओं के लिए बहुत बड़ी राजनीतिक पूंजी है। अगर उनके हत्यारों को सम्मानित करने वालों को फौरन रोका न गया तो बहुत मुश्किल पेश आ सकती है। प्रधानमंत्री समेत सभी नेताओं को चाहिए कि नाथूराम गोडसे को भगवान बनाने की कोशिश करने वालों की मंशा को सफल न होने दें वरना भारत के पिछली सदी के इतिहास पर भारी कलंक लग जाएगा।“

वह कहते हैं –

सबको मालूम है कि महात्मा गांधी की हत्या किसी सिरफिरे का काम नहीं था। वह उस वक्त की एक राजनीतिक विचारधारा के एक प्रमुख व्यक्ति का काम था। महात्मा गांधी का हत्यारा कोई सड़क छाप व्यक्ति नहीं था, वह हिंदू महासभा का नेता था और ‘अग्रणी’ नाम के उनके अखबार का संपादक था।

इतिहासकार आलोक बाजपेयी कहते हैं-

“चूंकि आरएसएस एक फासीवादी परिधि में ही सोच पाती है, अतः छल-कपट, धोखा, झूठ का व्यापार और कुटिल चालाकी उनके सोच व कार्य पद्धति का एक अभिन्न अंग है। आरएसएस में मानवीय मूल्य और नैतिकता जैसी चीजों का स्थान नहीं रहता, क्योंकि फासीवादी सोच पद्धति में साध्य ही अभीष्ट रखा जाता है, साधन की शुचिता एक अनर्गल प्रलाप समझा जाता है। यही कारण है कि हिंसा (शारीरिक व मानसिक) उनका सबसे विश्वसनीय हथियार आज भी बना हुआ है। तो गांधी और आरएसएस के तौर-तरीके, सोच में इतना दुश्मनीपूर्ण अन्तर है कि आरएसएस के पास गांधी की हत्या पर दुखी होने का लेशमात्र भी कारण मौजूद नहीं है।“

वह कहते हैं-

“नाथूराम गोडसे, जो कि हिन्दू पुनरूत्थानवादी सोच और आरएसएस की विचारधारा से ग्रसित था, उसने 30 जनवरी, 1948 को गांधी की हत्या कर वह अवसर आरएसएस को दे दिया कि वह खुशियां मना सके, मिठाईयां बांट सके। अब वही सोच गोडसे की मूर्तियां लगा कर पुराना कर्ज उतारना चाहती है।“

वरिष्ठ पत्रकार और समाजवादी चिंतक चंचल जी कहते हैं- 

हत्यारे गिरोह का तर्क है कि उसने गांधी का ‘वध ‘ ( यह उसकी भाषा है, यह उस गिरोह की मानसिकता का प्रमाण है ) इस लिए किया कि गांधी ने मुल्क का बटवारा कराया। इतनी कम अकली और बेहूदी सोच में जी रहे, ये कातिल अपना इतिहास आज तक नहीं जान पाए हैं। जब कि जन संचार के माध्यम गाँव गाँव तक पहुँच चुके हैं, जन जन पहुँच चुका है। इनमे से कुछ लोग जो अब जानने समझने लगे हैं ,वो खुल्लम खुल्लायह बोलने लगे हैं कि गांधी को गोली मारकर गलती किये उसे नेहरु और पटेल को गोली मारना था। (केरल के इनके मुखपत्र पर यह सार्वजनिक रूप से कहा गया है ) यानी इनकी सोच में यह स्थायी भाव है कि जो इनके विचारों से मेल न खाए उसकी ह्त्या कर दो।

सोशल नेटवर्किंग साइट ट्विटर पर एक टिप्पणी आई है-

“डर तो इस बात का है कहीँ बीजेपी नाथूराम गोडसे का case re-open करवाके उसे भी clean chit न दिला दें”
डर तो इस बात का है कहीँ बीजेपी नाथूराम गोडसे का case re-open करवाके उसे भी clean chit न दिला दें ….. #WhatsApp

— HIV (@humourisvirus) January 27, 2015
 
भागवत जी ग़ुस्से में हैं मोदी ने फारनर से गाली सुनवाया है उनको ! इस पाप का प्रायश्चित्त करने के लिये गोडसे मंदिर मे उनसे माफ़ी माँगनी होगी

— शौर्यान्वित पात्रा (@sambitswar) January 27, 2015
 
भक्तो ओबामा जी तो गांधी जी के बहुत बड़े भक्त निकले अब आप के गोडसे जी का क्या होगा कोई न बड़े बड़े शहरों में छोटी बातें होती.. #ObamaInIndia

— CANeha (@Nk3010Neha) January 27, 2015
 
ओबामा गांधी के बारे में बात कर रहे हैं,गांधी को हमारे नेताओ के सिवा पूरी दुनिया मानती हैं । गोडसे भक्त मुखौटा हटाओ अब ।

— Gajendra Sharma (@Airavaata) January 27, 2015
 
इस बीच तथाकथित राष्ट्र भक्त गोडसे की फोटोशाप की तस्वीर सोशियल मीडीया और वेट्सअप पर वाइरल, गाँधी जी का अपमान! #HeRam #JaiHind

— के वी प्रदीप (@im_kv) January 26, 2015
 
गाँधी या गोडसे: हरिशंकर परसाई http://t.co/epleYI8qp3

— Lalit Surjan (@LalitSurjan) January 31, 2015
 
संघ ट्रेन्ड हिंदूमहासभाई गोडसे पिस्टल चलाता था। लेकिन किसी अंग्रेज को नहीं एकता की रामधुन सिखाने वाले गाँधी को गोली मारी।ये कैसी देशभक्ति !

— डॉ.पंकज श्रीवास्तव (@PankajSDr) January 30, 2015
 
गोडसे का मंदिर बनेगा, अच्छे दिन आएंगे।

— S P BAHUGUNA (@SPBAHUGUNA1) January 31, 2015
 
अब देशभर के मंदिरों में गोडसे की मूर्तियां लगाने की तैयारी http://t.co/4OgP9p2QYQ

— shahnawaz ahmad (@nawaznadwi786) January 30, 2015

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