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नीतीशाय: नमन्, जनताय: नमन्

खेल का रहस्य मैंने गरीब परवर ऐयार भूतनाथ से जाना था । लेखन की शैली दुर्गा प्रसाद खत्री से जाना था कि एक वास्तु शास्त्र की चीज होती है तिलिस्म । तिलिस्म में ही एक सत्ता शास्त्र होता है । आज कल सत्ता शास्त्र ह नीतीश कुमार के नाम से जाना जाता है । क्या तिलिस्म की दुनिया बनाई बाबू नीतीश कुमार ने । सारा आयडिया पांच साल पापड़ बेलते बेलते आया था । बिहार को विकास का ताजा बासी खाना खिलाते खिलाते आया था । बिहार में तरह तरह के प्रवास से आया था । दुर्गा प्रसाद  खत्री का चंद्रकांता और चंद्रकांता संतत्ति क्या था । प्रेम कहानी का राजपाट संस्कृति है । राजपाट जब लोकप्रिय हो जाता है तो वह भी राजपाट संत्तति कहलाता है । अब बिहार के राजपाट में नीतीशाय: संत्तति का आगमन हो चुका है । नीतीश कुमार संत्तति में सगी संतान नहीं होती ।   संतान नहीं जनता कहलाते हैं । कभी जो दोस्त कहलाते थे तरक्की कर भूतनाथ कहलाते हैं । भूतनाथ बन चुके दोस्त जो कल तक चंपू कमिटी कहलाते थे ,अब बिना सलाह दिये भी सलाहकार कहलाते हैं । अभी तक उनकी हैसियत के बारे में पता नहीं चला है जो नीतीश कुमार को देसी – विदेसी –अमरेकी प्रमाणपत्र दिलवाते थे । अब नीतीश कुमार ही प्रमाण हैं और वही प्रमाण पत्र । हम अपनी ऐयारी में कहेंगे नीतीशाय: नमन और अपने संपूर्ण अहंकार के साथ नीतीश कुमार कहेंगे जनताय:नमन् ।
हमारा नीतीशाय: नमन् बड़ा मतलबी मतलबी चीज है । अब हमारी यही इच्छा है कि चंपू कमिटी की सदस्यता हमें भी मिल जाए । सदस्यता न भी मिले तो हम विशेष आमंत्रित मान लिए जाएं । विशेष आमंत्रित न भी मानें तो अपनी दहलीज पर खड़े रहने का मौका मिल जाए । अब तो मुश्किल यह भी है कि बिहार के वोटर ने एक सूरमा को बहुत पहले अपने तिलिस्म में बांध दिया था । तिलिस्म की चाबी नीतीश कुमार ने महादलित को सौंप दी । महादलित अपना ही तिलिस्म बना रहा है । इसमें फंसे हैं राम बिलास पासवान । लालू जी जीतते तो वह लालू जी के तिलिस्म में फंसे रहते । लालू जी को कभी अपना जिन्न निकालना होता तो राम बिलास जी को निकाल देते । मुश्किल यह भी है कि लालू जी के जिन्न का समय पूरा हो गया । जाते जाते वह लालू जी को भी अपने तिलिस्म में बांध गया । दोनों फंसे हैं अपने अपने तिलिस्म में । अब दोनों प्रार्थना करें कि नीतीश कुमार संपूर्ण अहंकारी – एकाधिकारवादी हो जाएं तो ही तिलिस्म जनता तोड़ेगी । तब तक लालू जी की पार्टी टूटेगी । नेता चुनाव न जितवा सके , सरकार में न हो तो अपनी यादों के तिलिस्म में बंधा चमकता रहता है । चमक से पार्टी के लोगों की आंख चौंधियाती है और वह अपने से पराये हो जाते हैं।
नीतीश कुमार का जनताय: नमन्  बड़ी ऊंची ऊंची चीज है । इतनी ऊंची है कि नीतीश कुमार ही शिखर पर पहुंच गए हैं । नीतीश कुमार मन्नुभाई मुनीम नहीं हैं कि हैं उनका शिखर की बुनियाद सोनिया गांधी पर टिकी हो । यहां तो बुनियाद भी खुद हैं – शिखर भी स्वंय । यहां मनुष्य अकेला होता है । या फिर होते हैं भूतनाथ । भूतनाथ से अकेला भी नहीं बचता । जनताय: नमन् ही इकलौता मंत्र है जिससे शिखर पुरुष तानाशाह होने से बचता है । पर तुलसी दास ने कहा था “ पर हित सरिस धर्म नहिं भाई ,पर पीड़ा सम नहिं अधमाई ।

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