न ढंग की शिक्षा और न ढंग के अस्पताल, फिर भी हिन्दू राष्ट्र का सपना!!!

अपने ही देश में बेगाने हैं वे
काठमांडू। सार्क सम्मलेन में भाग लेने नेपाल आए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वजह से इस बार नेपाल की राजधानी काठमांडू में सुरक्षा के कुछ ज्यादा ही कड़े इंतजाम नजर आए जिसके चलते लौटते समय त्रिभुवन अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर ज्यादा ही समय बैठना पड़ा तो पशुपतिनाथ मंदिर भी घूम लिए। नेपाल चैंबर में डाक्टर भीमराव अंबेडकर की एक पुस्तक का विमोचन हुआ और उसके बाद दलित मुद्दों पर हो रही चर्चा में बैठे थे। दूसरे सत्र की शुरुआत हो चुकी थी तभी ओवैश ने बताया कि ढाई बजे से शहर के सारे रास्ते बंद हो जाएंगे और कब खुलेंगे कोई पता नहीं। यह सब एक दो दिन से चल रहा था और बहुत सी घरेलू उड़ाने रद्द भी की जा चुकी थीं। यह जानकारी ढाई बजने से ठीक पांच मिनट पहले मिली तो होटल से सामान उठा कर टैक्सी वाले से पूछा कितनी देर लगेगी हवाई अड्डे तक पहुँचने में तो उसका जवाब था बीस मिनट से लेकर तीन घंटे तक। अपनी उड़ान साढ़े छह बजे की थी और तीन घंटे पहले पहुँचने का निर्देश दिया गया था। साथ में दीपक मिश्र थे जो भक्तपुर में एक जनसभा को संबोधित कर आ रहे थे और उन्हें नेपालगंज की बस पकड़नी थी तो यह तय हुआ उनके साथ ही टैक्सी से निकला जाए। रास्ता बंद होने के बावजूद ड्राइवर भीतर के रास्ते से करीब आधे घंटे में ही एयरपोर्ट पहुँचने वाला था तभी उसने बताया कि बगल में पशुपतिनाथ मंदिर है। समय था इसलिए तय हुआ मंदिर देखते हुए चलेंगे। मंदिर में एक दो फोटो लेने का प्रयास किया तो सुरक्षा गार्डों ने रोक दिया। पर मंदिर का ज्यादातर हिस्सा देख लिया गया जो पहले भी देख चूका हूँ। पीछे बहने वाली बागमती अब और प्रदूषित हो चुकी है। बहरहाल मंदिर से कुछ ही देर में हवाई अड्डे पहुँच गए जो भले ही अंतरराष्ट्रीय हो पर भारत के छोटे से छोटे हवाई अड्डे से भी ज्यादा बदहाल था। अपने यहाँ हैदराबाद मुंबई और दिल्ली का टी थ्री टर्मिनल तो बहुत दूर की बाद है।
आव्रजन के बाद सुरक्षा जांच में देखा कि नेपाली लोगों की लाइन भी अलग है और उनका जूता भी उतरवा कर एक्सरे मशीन से गुजारा जा रहा था। काठमांडू के बड़े होटलों के कैसीनो में नेपालियों का जाना पहले से वर्जित है। यह सब बहुत ही हैरान करने वाला लगा, जहां एक छोटी सी क्रांति के बाद करीब सात सौ साल की राजशाही ख़त्म हो गई हो और हिंदू राष्ट्र पर लाल झंडा लहराने लगा हो। ऐसे में अपने ही देश में नेपालियों को कुछ जगह अगर दोयम दर्जे के नागरिक जैसा बर्ताव झेलना पड़े तो यह शर्मनाक है।
वैसे भी नेपाल में उद्योग तो कोई ख़ास है नहीं व्यापार पर भी भारतीय लोगों का ज्यादा दबदबा है। तराई वाले क्षेत्र के नेपाली नेपाली जिन्हें मधेशी कहते है वे नेपाल की अर्थव्यवस्था का काफी हद तक नियंत्रण करते हैं। उत्तर प्रदेश से लेकर बिहार तक के लोग यहां के बाजार में मिल जाएंगे। बड़े होटलों में उनकी हिस्सेदारी है तो मुर्गा मछली बेचने के कारोबार में भी वे नजर आते हैं। शहर के बीच जमल के बाजार में बिहार के एक सज्जन मछली का बड़ा कारोबार करते नजर आए। वे आंध्र प्रदेश से मछली मंगवा कर यहां बेचते हैं। सामने रोहू और टेंगन पड़ी थी। बोले, यहां का मछरी महंगा होता है और हम रोहू डेढ़ सौ- दो सौ रुपया बेचते हैं। नेपाल का मछरी तीन चार सौ रुपया के भाव बिकता है इसलिए हम लोगों का मछरी ज्यादा बिक जाता है। समझे ना। समझ में आ गया।
मोदी का जनकपुर का दौरा रद्द होने के बाद भारतीय मीडिया में खबर आई थी कि नेपाली जनता बहुत नाराज है सड़क पर उतर आई है। हालाँकि यह नाराजगी नेपाली से ज्यादा भारतीय नेपालियों की थी जिसके पीछे अपना हित छिपा था। मोदी उसी अंदाज में यहां भी अपना जलवा दिखाना चाहते थे जैसे अन्य देशों में दिखा चुके थे। वे अपने दौरे को एक इवेंट बनाना चाहते थे। पर वाम धारा वाले राजनैतिक दलों ने सवाल खड़ा किया कि नेपाल में उनकी जनसभा का क्या औचित्य है। इसे लेकर मामला बिगड़ा। पर राजशाही ख़त्म होने के बावजूद नेपाल में एक बड़ा तबका आज भी हिन्दू राष्ट्र और राजशाही के समर्थन में है यह ध्यान रखना चाहिए। इस तबके के लिए नरेंद्र मोदी एक अंतरराष्ट्रीय हिंदू नेता हैं जिसके आगे कोई दूसरा नेता नहीं ठहरता। इसलिए मोदी के लिए नेपाल में अन्य भारतीय नेताओं के मुकाबले अलग जगह भी है। उनके हिंदू राष्ट्र का सपना मोदी ही पूरा कर सकते हैं, यह उनका दृढ़ विश्वास है। अब वे अदानी के साथ आए या अंबानी के साथ कोई फर्क नहीं पड़ता।
मीडिया ने मोदी को जिस विकास का पर्याय बना दिया है वह विकास नेपाल को ज्यादा चाहिए। अच्छी सड़कें, कल कारखाना और बिजली। नदियों के पानी से बिजली पैदा करने की क्षमता नेपाल में बहुत है और इसी पर उद्योगपतियों की नजर भी है। इस मामले में नेपाल में वामपंथी, समाजवादी और दक्षिणपंथी लगभग साथ हैं। इसे लेकर जन सार्क सम्मलेन में लोगों ने आगाह भी किया कि बिजली पैदा कर कारपोरेट अपने को ज्यादा मजबूत करेगा और नेपाल के प्राकृतिक संसाधनों का जो बड़ा नुकसान होगा वह इसके मुनाफे से बहुत ज्यादा होगा। यह बहस अभी जारी है।
नेपाल का नागरिक किन हालात में नेपाल और भारत में रहता है इस पर ज्यादा सवाल नहीं उठता। गरीबी के चलते सीमा पर नेपाली महिलाओं का इस्तेमाल कर तस्करी कराई जाती है और पकड़े जाने पर सालों जेल में सड़ जाती हैं, कोई जमानत वाला नहीं मिलता। सोनौली से लेकर नेपालगंज तक सर्वेक्षण करा लें पता चल जाएगा। तस्करी कराने वाले भारतीय होंगे तो करने वाले नेपाली। न ढंग की शिक्षा और न ढंग के अस्पताल। फिर भी हिन्दू राष्ट्र का सपना।
आज जब हवाई अड्डे पर नेपालियों को जूता निकाल कर एक्सरे मशीन से निकालते हुए देखा तो वाकई शर्म आई। यह कैसा हिंदू राष्ट्र रहा जहां इस तरह का बर्ताव अपने देश वालों से किया जाता है। नेपाली अस्मिता का सवाल जो उठाते हैं, वे इसे क्या सामान्य सुरक्षा का सवाल मानकर आँखे बंद कर लेंगे। तभी एक जहाज उड़ा तो उसकी आवाज से ध्यान टूटा और तभी बोर्डिंग के लिए बुलाया जाने लगा। त्रिभुवन हवाई अड्डे का प्राकृतिक दृश्य देखने वाला था।
O- अंबरीश कुमार

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