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Mahatma Gandhi statue in the Parliament premises. (File Photo: IANS)

बकरीद और गांधी

बकरीद का त्यौहार हिन्दू व मुसलमानों को एक तरह की चिंता की स्थिति में डाल देता है। ऐसा नहीं होना चाहिए। हमें सहनशील होना चाहिए। हिन्दू, मुसलमानों के त्यौहारों में क्यों दखल देते हैं?

मुसलमान बकरीद के दिन पशुओं की बलि देते हैं। इन पशुओं में गाय भी शामिल है। परंतु मुसलमानों को गाय की बलि क्यों चढ़ानी चाहिए जब गाय से हिन्दुओं का भावनात्मक संबंध है।

क्यों न मुसलमान सन् 1921 को याद करें जब मुसलमानों ने हिन्दुओें की भावनाओं का ख्याल रखते हुए हजारों गायों को बचाया था। इस बात को स्वयं हिन्दुओं ने स्वीकार किया था।

बकरीद के दिन मुसलमानों को हिन्दुओं की भावनाओं का ध्यान रखना चाहिए और हिन्दुओं को भी मुसलमानों के रीति-रिवाजों का सम्मान करना चाहिए, भले ही वे उन्हें अच्छे न लगते हों।

इसी तरह मुसलमानों को भी हिन्दुओं के मूर्तिपूजा के रीति-रिवाजों का सम्मान करना चाहिए और सारा मामला ईश्वर पर छोड़ देना चाहिए। ईश्वर को ही फैसला करने दें, पड़ोसियों को नहीं।

(बकरीद पर गांधीजी के ये विचार (Gandhiji’s thoughts on Bakrid) जुलाई 8, 1924 के ‘यंग इंडिया’ में प्रकाशित हुए थे)।
– एल एस हरदेनिया

About L S Hardenia

एल.एस. हरदेनिया, (लेखक वरिष्ठ पत्रकार व धर्मनिरपेक्षता के प्रति प्रतिबद्ध कार्यकर्ता हैं)

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