Breaking News
Home / बोलते भी जमकर हैं और करते भी जमकर हैं बेनी प्रसाद वर्मा

बोलते भी जमकर हैं और करते भी जमकर हैं बेनी प्रसाद वर्मा

बिखराव के पश्चात् भी पक्के समाजवादी चरित्र के नेता टूटते नहीं बल्कि निखरते हैं
बेनी प्रसाद वर्मा का जन्म दिन 11फरवरी को है। सत्य तो यह है कि शख्सियत कभी जन्म नहीं लेती है, जन्म तो माँ के गर्भ से अबोध शिशु का होता है। वही अबोध शिशु माँ की कोमल छाँव, पिता के अनुशासनात्मक व्यक्तित्व व जिस समाज परिवेश में जन्मता है, उसके संस्कार, उसकी पीड़ा, उसकी अनुभूति को लेकर शनैः-शनैः जीवन पथ पर अपने कदम बढ़ाता है। जन्मते ही अबोध नवजात शिशु का व्यक्तित्व व जीवन में हासिल होने वाली दुश्वारियाँ, उपलब्धियाँ, ख्याति का बोध अगर परिजनों, इष्ट जनों को तनिक भी हो जाये तो क्या कहने ?
विकास से कोसों दूर उत्तर प्रदेश के जनपद बहराइच के ग्राम मटेरा की एक बेटी रामकली वर्मा का विवाह बाराबंकी जनपद के मोहन लाल वर्मा निवासी सिरौली गौसपुर के साथ हुआ। इस दम्पत्ति की खुशियों का ठिकाना उस वक्त नहीं रहा जब 11 फरवरी, 1941 को मोहन लाल वर्मा व रामकली वर्मा को पुत्र रत्न की प्राप्ति हुयी। संयोगवश रामकली वर्मा को पुत्ररत्न की प्राप्ति अपने मायके ग्राम मटेरा जनपद बहराइच में हुयी। ग्राम मटेरा व ग्राम सिरौलीगौसुपर दोनों जगह हर्ष की लहर व्याप्त हुयी। उस वक्त दोनों ग्रामों के किसी भी व्यक्ति को यह तनिक भी आभास नहीं हुआ कि आज जिस नवजात शिशु के जन्म के कारण उनको प्रसन्नता की अनुभूति हो रही है, कालांतर में लाखों-लाख किसानों, मजदूरों, आमजनों की ज़िन्दगी में मुस्कान लाने का कार्य भी यह हमारा शिशु करेगा।
11 फरवरी, 1941 में माँ रामकली वर्मा के कोख से जन्म लेने वाले इस शिशु का नाम बेनी प्रसाद रखा गया। ग्रामीण परिवेश और उसकी दुश्वारियों के बीच बेनी प्रसाद ने अपनी प्राथमिक शिक्षा बदोसरायं व कोटवाधाम से एवं उच्च शिक्षा व उपाधि लखनऊ विश्वविद्यालय लखनऊ से हासिल किया। गाँव किसान के बेटे बेनी प्रसाद ने जब अपनी आँखें इस नश्वर जगत में खोलीं तो माँ की ममत्व की छाव, लघु प्यार तो मिला ही, बाल्यकाल से युवा अवस्था तक पहुँचते-पहुंचते उच्च शिक्षा ग्रहण करने तक बेनीप्रसाद वर्मा ने ग्रामीण परिवेश में व्याप्त सामाजिक-जातीय विषमता को बहुत ही करीब से देखा ही नहीं, भोगा भी। मात्र 15 वर्ष की आयु में बेनी प्रसाद का विवाह मालती देवी वर्मा से हुआ। ग्रामीण जीवन की विषमताओं को अपनी जीवनसंगिनी के संग साझा करते हुये विचार मंथन व वैवाहिक जीवन उच्च शिक्षा ग्रहण का दौर चला। मालती देवी व बेनी प्रसाद वर्मा के तीन पुत्र क्रमशः राकेश कुमार वर्मा, दिनेश कुमार वर्मा, ऋषि कुमार वर्मा एवं दो पुत्रिया क्रमशः शालिनी वर्मा, अर्चना वर्मा की प्राप्ति हुयी।
उच्च शिक्षा ग्रहण करने के दौरान वैवाहिक जीवन का निर्वाहन करते-करते विधि के विधान के अनुरूप ही बेनी प्रसाद वर्मा के व्यक्तित्व पर प्रख्यात समाजवादी नेता स्व. रामसेवक यादव की दृष्टि पड़ गई। स्व.0 रामसेवक यादव ही वो जौहरी थे जिन्होंने उस दौर में सैकड़ो युवाओं को राजनीति में अवसर दिया। और गरीब गाँव गुरबा की राजनीति करने के लिये समाजवाद का ककहरा पढ़ाया था। उत्तर प्रदेश ही नहीं देश की राजनीति में स्व. रामसेवक यादव के स्नेह पात्र बने रहे बेनी प्रसाद वर्मा और मुलायम सिंह यादव दोनों अपना-अपना झण्डा गाड़ चुके थे। समाजवाद की पाठशाला से एक ही मार्ग दर्शक के कुशल निर्देशन में राजनीति सीखने वाले बेनी व मुलायम में आज भले ही अभी संपन्न हुए लोकसभा चुनावों के दौरान एवं पूर्व में राजनैतिक तल्खी व्याप्त थी, दोनों ग्रामीण पृष्ठिभूमि के नेता पानी पी पीकर के एक दूजे पर प्रहार करते थे, परन्तु लोकसभा चुनावों में नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा को मिले स्पष्ट बहुमत के पश्चात् दोनों नेताओं की तरफ से व्यक्तिगत – राजनैतिक टीका टिप्पणी पर विराम लगा जो कि सामाजिक रूप से अच्छा होने के साथ साथ समाजवादी आन्दोलन के लिए भी एक सार्थक शुभ सन्देश है। वास्तविकता तो यह है कि समाजवाद के इन दोनों योद्धाओ की मिली जुली राजनैतिक ताकत, वर्षो का सखापन सामंतवादी-पूंजीवादी ताकतों को अखरने लगा था, परिणति इन दोनों जमीन से जुड़े राजनैतिक योद्धाओ का अलग-अलग होना और उससे भी दुःखद गाहे बगाहे एक दूसरे पर हमलावर होने के रूप में सामने आता था।
यह समाजवादी नेताओ व आन्दोलन के साथ एक भीषण त्रासदी रही है कि जब भी देश में-प्रदेश में समाजवादी आन्दोलन जनता के हृदय में स्थापित होने लगता है, समाजवादी आंदोलन के बड़े नेताओ में आपसी मतभेद बिखराव का कारण बन जाते हैं। सच यह भी है कि बिखराव के पश्चात् भी पक्के समाजवादी चरित्र के नेता टूटते नहीं बल्कि निखरते हैं। सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव से 2007 में अलग होने के पश्चात् बेनी प्रसाद वर्मा ने समाजवादी क्रांति दल का गठन किया। राजनैतिक चिंतको को पक्का यकीन हो गया कि समाजवादी पार्टी और बेनी प्रसाद वर्मा दोनों का टूटना व बिखराव निश्चित है। 2007 का उ.प्र. विधानसभा चुनाव हुआ। बेनी प्रसाद वर्मा ने अपनी राजनैतिक ताकत दिखाई, उनके सपा के अलग होने के कारण सपा हार गयी, चुनाव में बेनी प्रसाद वर्मा हारे, उनके प्रत्याशी भी हारे तथा बसपा उप्र में काबिज हुयी। राजनैतिक चिंतकों को लगा उनका आँकलन सच हुआ। इधर कांग्रेस को बेनी प्रसाद वर्मा की जमीनी पकड़ का अंदाजा हुआ और कांग्रेस के आलाकमान ने अपने हाथ को आगे बढ़ाकर समाजवादी नेता बेनी प्रसाद को अंगीकार कर लिया और दूसरी तरफ समाजवादी पार्टी ने भी बसपा राज्य के खिलाफ संघर्ष की राह पकड़ी। 2009 के लोकसभा चुनाव में गोण्डा सीट जीते और बाराबंकी (सु), बहराइच (सु), बलरामपुर, डुमरियागंज, महराजगंज, फैजाबाद आदि सीटों को कांग्रेस की झोली में डालने के प्रमुख कारण बने थे।
पंद्रहवीं लोकसभा में पाँचवी बार गोण्डा सीट से निर्वाचित होकर पहुँचने वाले बेनी प्रसाद वर्मा को इस्पात मंत्रालय (स्वतंत्र प्रभार) भारत सरकार का ओहदा मिला। व्यापक जनाधार व बेबाक अंदाज के कारण राजनीतिक विरोधियो पर पूरे दम खम से प्रहार करने की अद्भुत क्षमता के कारण कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी ने बेनी प्रसाद वर्मा को अखिल भारतीय कांग्रेस कार्य समिति में भी शामिल किया और कुछ ही दिनो बाद राजनैतिक कद में और इजाफा करते हुये इस्पात मंत्री भारत सरकार बना दिया गया। उप्र की राजनीति में जमीनी जनाधार वाले नेता बेनी प्रसाद वर्मा को आगे कर कांग्रेस नेता राहुल गाँधी ने पूरे उ0प्र0 में व्यापक दौरा किया। वहीं संघर्ष का रास्ता अख्तियार कर चुके सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव ने भी 2012 के विधानसभा चुनाव के लिये अपने पुत्र अखिलेश यादव को आगे करके संघर्ष की यात्रा पुनः शुरू कर दी। बसपा की प्रमुख मायावती के खिलाफ उपजा जनाक्रोश वोटो में तब्दील हुआ। पूर्ण बहुमत से सपा की सरकार बनी और आश्चर्यजनक तरीके से तकरीबन 175 सीटों पर कांग्रेस को पिछले चुनावों की तुलना में कम से कम 15 से 20 हजार मतों का इजाफा हुआ। कांग्रेस उम्मीदवारो के मतो में इस भारी इजाफे को राहुल गाँधी की मेहनत छवि व बेनीप्रसाद वर्मा की जमीनी पकड़ की देन माना गया। एक तरफ युवा समाजवादी अखिलेश यादव अपना राजनैतिक वर्चस्व उ0प्र0 में पुनः स्थापित करने में कामयाब हुये। वहीं दूसरी तरफ सपा से अलग होकर विपक्ष में चले गये समाजवादी नेता बेनीप्रसाद वर्मा ने भी अपने व्यक्तित्व व राजनैतिक कदम कांग्रेस नेतृत्व में अपनी पकड़ में गुणोत्तर वृद्धि की। उ0प्र0 में सपा सरकार बनने के पश्चात से ही बेनी प्रसाद वर्मा इस्पात मंत्री भारत सरकार अपनी पूरी रौ में आते दिखे। अपने तीक्ष्ण सटीक बेबाक बयानों के तीर सपा प्रमुख सपा सरकार पर अनवरत् छोड़ने वाले बेनी प्रसाद वर्मा ने उत्तर प्रदेश के ग्रामीण पिछड़े इलाको में विकास कार्यों का पिटारा भी खोल दिया था।
कहते हैं कि राजनीति एक दिन का खेल नहीं है और ना ही हार जीत स्थायी होती है और यह सच भी है। मटेरा की माटी में जन्मे सिरौलीगौसपुर के लाल बेनी प्रसाद वर्मा खुद में एक बेमिसाल शख्सियत है। वे राजनीति के क्षितिज में एक ऐसे सितारे की तरह चमके थे जिसकी चमक से गाँव गरीब, किसान, मजदूर, आमजन की जिन्दगी में रोशनी देती रहती थी। बेनी प्रसाद वर्मा चाहे उत्तर प्रदेश के किसी विभाग के मंत्री रहे हों या केंद्र के जिस विभाग के मंत्री रहे, उस विभाग के माध्यम से उसका सीधा फायदा ग्रामीण तबके को पहचानने में अपनी समझ व विभाग में अपनी पकड़ का भरपूर इस्तेमाल करते रहे थे। अपने पेशेवर परंपरागत विरोधियो की तनिक भी परवाह न करने वाले बेनी प्रसाद यूँ ही विकास पुरूष की उपाधि से नहीं नवाजे गये हैं। उनके द्वारा कराये गये विकास कार्य ग्रामीण जनों के जुबान पर हमेशा रहते हैं। बेनी प्रसाद वर्मा संभवतः अकेले ऐसी शख्सियत हैं जिनके ऊपर मंत्रालयों के द्वारा विकास कार्यों के लिये अत्यधिक धन खर्च करने का आरोप उनके विरोधी लगाते हैं और बेनी प्रसाद वर्मा हैं कि अपने ही धुन में ग्रामीण तरक्की के नये गीत रचते चले जाते हैं।
बेनी प्रसाद वर्मा -केंद्रीय इस्पात मंत्री, भारत सरकार रहते हुए अख़बारों की सुर्ख़ियों में छा गये थे और आश्चर्य की बात यह है कि जितनी सुर्खियां, चर्चा बेनी प्रसाद वर्मा ने अपने परंपरागत-पेशेवर विरोधियों की बदौलत बटोरी थी उतनी सुर्खी व चर्चा अपने विषय में कराने के लिए राजनेताओं को ना जाने कितने पापड़ बेलने पड़ते हैं।
दरअसल कुछ राजनेता अति बेबाक और अपने धुन के पक्के होते हैं। वे बोलते भी जमकर हैं और करते भी जमकर हैं। बाराबंकी के बेनी प्रसाद वर्मा भी बेबाक और धुन के पक्के व्यक्तित्व के स्वामी हैं। बेनी प्रसाद वर्मा उन राजनेताओं में से हैं जो बोलते हैं तो विपक्षियों के पास उनकी बात का जवाब नहीं होता है और जो भी करते हैं वो लाजवाब ही होता है। इस्पात मंत्रालय में हजारों लोग राष्ट्रीय इस्पात उपभोक्ता समिति सदस्य नामित हो गए थे, क्या यह पहली बार हुआ है कि बेनीप्रसाद वर्मा ने हजारों लोगों को अपने मंत्रालय में सदस्य नामित किया था। दूरसंचार मंत्री रहते हुए भी उन्होंने ग्रामीण इलाके के लोगों को मंत्रालय में जिम्मेदारी -लाभ दिया था और इस बार भी दिया। इस्पात मंत्रालय की राष्ट्रीय इस्पात उपभोक्ता समिति समिति की बैठक में सदस्यों को आने-जाने का किराया, स्थानीय यात्रा भत्ता आदि व उपहार देना मंत्रालय के नियमानुसार सही था। बेनी प्रसाद वर्मा एक ऐसे नेता हैं कि अपने मंत्रालय की बारीक़ जानकारी हासिल करके उस मंत्रालय का फायदा आम जन और अपने विश्वस्तों को देने में तनिक भी कोताही नहीं करते हैं। दुर्भाग्य तो यह है कि बेनी प्रसाद वर्मा से राजनैतिक-सामाजिक-आर्थिक लाभ उठा चुके तमाम लोग उनपे सिर्फ इसलिए हमलावर होते रहे कि बेनी प्रसाद वर्मा अपने राजनैतिक फायदे के लिए अपने मंत्रालय का धन खर्च कर रहे थे। क्या राजनैतिक फायदे के लिए ही सही विकास कार्य करना और ग्रामीण पृष्ठभूमि के लोगों को भारत सरकार के इस्पात मंत्रालय की राष्ट्रीय इस्पात उपभोक्ता समिति का सदस्य बना देना, उनको पाँच सितारा होटल में आयोजित बैठक में बुला लेना बेनी प्रसाद वर्मा का गुनाह हो गया था ? क्या ग्रामीण पृश्ठभूमि के सदस्य बने लोगों को मंत्रालय के नियमानुसार किराया, उपहार देकर कोई विधि विरुद्ध कार्य हुआ था ? सवाल यह भी है कि आखिर कब तक कार्य करने वालों को कठघरे में खड़ा करने का दुष्चक्र रचा जाता रहेगा। वस्तु स्थिति तो यह है कि इस्पात मंत्री रहते बेनी प्रसाद वर्मा के द्वारा कराये गए तमाम इकाइयों की शुरुआत,  सोलर लाइट वितरण, हैण्ड पाईप लगवाने, सड़क निर्माण और अब ग्रामीण इलाकों के लोगों को राष्ट्रीय इस्पात उपभोक्ता समिति के सदस्य रूप में जोड़के उनको सम्मान,जिम्मेदारी व लाभ देने के कारण बेनी प्रसाद की बढ़ती लोकप्रियता से उनके विरोधी परेशान व हताश थे।
ग्रामीण पृष्ठिभूमि से निकल कर स्पष्टवादिता के साथ राजनीति करने वाले बेनी प्रसाद वर्मा अपने द्वारा कराये गए विकास कार्यों के बावजूद पिछला लोकसभा चुनाव गोंडा संसदीय सीट से हार गए। बेनी प्रसाद वर्मा की लोकसभा में पराजय को मोदी लहर के कारण हुई हार करार दिया गया लेकिन वास्तविकता उस सीट पर अलग ही थी। बेबाक बेनी प्रसाद वर्मा अपनों के द्वारा छले गए। गोंडा के कार्यकर्ताओं और जनता के मन की बात बेनी प्रसाद वर्मा तक नही पहुंची। वस्तुस्थिति को बताकर चुनावी रणनीति को दुरुस्त करने करवाने के स्थान पर खासम खास लोगों ने सिर्फ विजय की तस्वीर पेश की। विकास कार्यों को करवाने वाले आर्थिक रूप से लाभान्वित लोग उन्ही लोगों को आँखे दिखाने लगे थे जिनकी मेहनत, समर्थन और मतों की बदौलत बेनी प्रसाद वर्मा गोंडा से सांसद निर्वाचित हुए थे। विकास पुरुष की छवि और उनके द्वारा किये गए कार्यों को गोंडा में प्रचारित करने के स्थान पर सिर्फ आर्थिक लाभ अर्जित करने में लगे खासम खास लोग स्थानीय जन से बेहतर संवाद नही रख सके थे। चुनाव परिणाम आने पर सब कुछ साफ हो गया लेकिन तब तक बहुत देर हो चुका था।
लोकसभा चुनाव में पराजय के बाद एक अवसर ऐसा भी आया जब अगर बेनी प्रसाद वर्मा कांग्रेस छोड़ देते तो राज्यसभा के सदस्य बन जाते लेकिन कांग्रेस नेतृत्व का साथ इस संकट की घडी में कतई न छोड़ने की मंशा रखने वाले बेनी प्रसाद वर्मा कांग्रेस में ही बने रहे। कांग्रेस आलाकमान की अपनी समझ व रणनीति जो भी हो लेकिन अब उत्तर प्रदेश हो या कोई अन्य राज्य सभी जगह कांग्रेस को जनाधार वाले तेज तर्रार नेताओ को बागडोर सौंपनी चाहिए।
राजनेताओं को आम जनता और अपने कार्यकर्ताओं के हित को प्राथमिकता देनी चाहिए। सत्ता हो तो सत्ता के माध्यम से जन हित के कार्य करना और अगर विपक्ष में हो तो संघर्ष के द्वारा जन उम्मीदों को पूरा करने के लिए सत्ता पर दबाव बनाना यही राजनेताओं का कर्तव्य होता है। बेनी प्रसाद वर्मा एक अनुभवी वरिष्ठ राजनेता हैं। राजनीति के पेचीदगी हो या विषमता हर पहलू से विधिवत वाकिफ बेनी प्रसाद वर्मा को अपनी राजनैतिक ख़ामोशी को त्यागकर पुनः जनहित की जन संघर्ष की राजनैतिक यात्रा को प्रारंभ करना चाहिए। किसी एक चुनाव की पराजय यह कतई साबित नही करती कि राजनेता दुबारा जीतेगा नही और न ही कोई जीत यह साबित करती है कि जीतने वाला हारेगा नहीं।
अरविन्द विद्रोही

About the author

अरविन्द विद्रोही , लेखक स्वतंत्र पत्रकार व सामाजिक कार्यकर्ता हैं।

About हस्तक्षेप

Check Also

Priyanka Gandhi Vadra. (File Photo: IANS)

DHFLघोटाला : प्रियंका के ट्वीट से खलबली .. पावर कारपोरेशन के चैयरमैन आलोक कुमार को बचाना भारी पड़ सकता है सरकार को ..

#DHFLघोटाला : प्रियंका के ट्वीट से खलबली .. पावर कारपोरेशन के चैयरमैन आलोक कुमार को …

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

%d bloggers like this: