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Mayawati shared with Narendra Modi and Atal Bihari Vajpayee

मोदी के सिर से 2002 का गुजरात और अखिलेश के सिर 2013 का मुजफ्फरनगर का खूनी दाग़ धोया नहीं जा सकता -मायावती

मोदी के सिर से 2002 का गुजरात और अखिलेश के सिर 2013 का मुजफ्फरनगर का खूनी दाग़ धोया नहीं जा सकता -मायावती

लखनऊ: बसपा सुप्रीमो मायावती ने आज भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि नोटबंदी से गरीबों को परेशानी हुई है। भाजपा के खिलाफ लोगों में गुस्सा है। लोग भाजपा के झांसे में न आएं।

सपा-भाजपा पर साठगांठ का आरोप लगाया

उन्होंने भाजपा और सपा पर साठगांठ का आरोप लगाया और कहा कि कांग्रेस और सपा के गठबंधन का आखिरी फैसला भाजपा के नफे, नुकसान और इशारे पर ही होगा। दरअसल, केंद्र सरकार सपा को डरा रही है। उन्होंने इसे मुस्लिम वोट को बांटने की साजिश करार दिया और कहा कि समाजवादी पार्टी और भाजपा के मधुर संबंध हैं। बीएसपी ही मुस्लिम समाज की हितैषी पार्टी है। मोदी सरकार ने कोई वादा पूरा नहीं किया।

केंद्र की मोदी सरकार पर बीएसपी सुप्रीमो ने आरोप लगाया कि उन्होंने 2.5 साल में कोई वादा पूरा नहीं किया। इसलिए लोगों का ध्यान भटकाने के लिए भाजपा के रोज नए-नए हथकंडे अपना रही है। जनता उन्हें चुनावों में सबक सिखाएगी ।

नोटबंदी को लेकर मायावती ने कहा कि यह फैसला बिना तैयारी के लिए गया। जनता चुनावों में उन्हें सबक सिखाएगी। यह निर्णय अब उनके गले की हड्डी बन गया है।

सुश्री मायावती की प्रेस कांफ्रेंस के मुख्य अंश

मीडिया बन्धुओं, आज की यह प्रेस कान्फ्रेंस उत्तर प्रदेश में जल्दी ही होने वाले विधानसभा आमचुनाव को ध्यान में रखकर खासकर यहाँ बीजेपी द्वारा अपने राजनैतिक स्वार्थ में आये दिन किस्म-किस्म के इस्तेमाल किये जा रहे इनके षड़यन्त्रों व हथकण्डों से प्रदेश की जनता को व विशेषकर मुस्लिम समाज के लोगों को सजग व सचेत करने के लिए ही बुलायी गयी है ताकि बीजेपी किसी भी कीमत पर इस चुनाव में अपने मकसद में कामयाब ना हो सके।

और इस सन्दर्भ में यहाँ मैं यह कहना चाहूँगी कि केन्द्र में बीजेपी व प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की सरकार को बने हुये अब ढाई वर्ष पूरे हो चुके हैं और इनके इस आधे शासनकाल की अवधि में इन्होंने अपने लोकसभा चुनावी वायदों का अभी तक लगभग एक चौथाई हिस्सा भी कार्य पूरा नहीं किया है जिसकी खास वजह से ही अब उत्तर प्रदेश सहित पूरे देश की जनता में इस पार्टी के प्रति जबरदस्त नाराजगी व आक्रोश व्याप्त है। इससे इनको इस बात का काफी हद तक यह एहसास भी हो चुका है कि अब बीजेपी को, उत्तर प्रदेश में होने वाले विधानसभा आमचुनाव में कतई भी सफलता मिलने वाली नहीं है, जबकि इन्होंने अपने पक्ष में हवा बनाने के लिये सबसे पहले यहाँ विरोधी पार्टियों के कुछ बिकाऊ माल व स्वार्थी किस्म के लोगों को तोड़कर उन्हें अपनी पार्टी में शामिल कराया और उसे फिर मीडिया में भी खूब प्रचारित कराया गया।

इसके बाद इन्होंने किस्म-किस्म के अनेकों और घिनौने हथकण्डों का इस्तेमाल करके और फिर अन्त में अपनी परिवर्तन यात्रा व रैली आदि के जरिये भी अपने पक्ष में हवा बनाने के लिये यहाँ पूरी-पूरी ताकत लगाई है जिस पर इन्होंने अपने चोर दरवाजे के पीछे से बड़े-बड़े पूँजीपतियों व धन्नासेठों का करोड़ों, अरबों रूपया भी पानी की तरह बहाया है।

इसके साथ-साथ इसी दौरान खुद प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने व इनकी सरकार के अधिकतर केन्द्रीय मन्त्रियों ने भी यहाँ प्रदेश मंे सपा सरकार के मुखिया की तरह ही काफी बेहिसाब शिलान्यास व घोषणा आदि करने की भी पूरी बाढ़ लगा दी है। साथ ही अपनी विरोधी पार्टियों में से खासकर बसपा की सर्वोच्च नेतृत्व के विरुद्ध तो इन्होंने अपनी अनाप-सनाप बयानबाजी करने में भी कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी है। लेकिन इनके द्वारा इन सब हथकण्डों को इस्तेमाल करने के बावजूद भी इनको यहाँ अपनी पार्टी के जनाधार को बढ़ाने में अधिकांश हताशा व निराशा ही मिली है।

इसके बाद फिर इन्होंने थक-हारकर उत्तर प्रदेश सहित पूरे देश की जनता का अपने लोकसभा चुनावी वायदों पर से ध्यान बांटने के लिए पिछले महीने 8 नवम्बर को यहाँ कालेधन व भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने की आड़ में बिना पूरी तैयारी के व जल्दबाजी में ही नोटबन्दी का यह ऐसा अपरिपक्व फैसला ले लिया, जो उल्टा ही अब यह इनके लिए गले की हड्डी बन गया है और जिसकी जबरदस्त मार से अब पूरे देश के लगभग 90 प्रतिशत गरीब, मजदूर, किसान व अन्य मेहनतकश एवं मध्यमवर्गीय लोग अभी तक भी पूरे तौर से उभर नहीं पा रहे हैं जबकि इनके अब 50 दिन भी लगभग पूरे होने वाले हैं। लेकिन इसकी सजा यहाँ उत्तर प्रदेश के भी ये दुःखी व पीडि़त लोग इनको इस चुनाव में जरूर देंगे, ऐसा हमारी पार्टी का व आम लोगों का भी यह मानना है।

इसे भाँपकर ही फिर इन्होंने यहाँ उत्तर प्रदेश में होने वाले विधानसभा आमचुनाव में बसपा की अकेले ही सरकार बनने के अन्देशे को देखते हुये ही इसे रोकने हेतु प्रदेश में खासकर मुस्लिम समाज के वोटों को बांटने के लिए सपा मुखिया श्री मुलायम सिंह यादव व इनके पूरे परिवार की विशेषकर आय से अधिक सम्पत्ति होने तथा इनकी अन्य ओर कमजोरियों को भी ध्यान में रखकर इन्हें अपनी केन्द्र सरकार के इनकम टैक्स, ई.डी. व सी.बी.आई आदि का डर दिखाकर इन पर यह दबाव बनाने की भी काफी आमचर्चा है कि सपा यह चुनाव कांग्रेस पार्टी के साथ गठबन्धन करके लड़े जिसकी वजह से ही आजकल सपा व कांग्रेस पार्टी के गठबन्धन होने की खबरें आये दिन अब मीडिया में आने लगी हैं। ल

ेकिन फिर भी यहाँ खास ध्यान देने की बात यह है कि इन दोनों पार्टियों के अर्थात् सपा व कांग्रेस पार्टी के उत्तर प्रदेश में होने वाले विधानसभा आमचुनाव में इनके गठबन्धन करने की अन्तिम मोहर बीजेपी के कहने पर तभी ही यहाँ लगने वाली है जब बीजेपी को यह लगेगा कि सपा व कांग्रेस पार्टी के गठबन्धन करके चुनाव लड़ने से यहाँ बीजेपी को कुछ फायदा होने वाला है, तब फिर ये लोग अपना ग्रीन सिगनल यहाँ उत्तर प्रदेश में सपा मुखिया श्री मुलायम सिंह यादव को कांग्रेस पार्टी के साथ गठबन्धन करने के लिए देने वाले हैं अर्थात् इस चुनाव में सपा व कांग्रेस पार्टी का गठबन्धन बीजेपी के इशारे पर ही इनके अपने खुद के नफे-नुकसान को ही ध्यान में रखकर तब फिर होने वाला है।

इसलिए इन सब बातों को ध्यान में रखकर अब प्रदेश के खासकर मुस्लिम समाज के लोगों को इस चुनाव में अपना वोट बहुत ही सोच-समझकर केवल ऐसी पार्टी को ही देना है जो अपनी पूरी ईमानदारी से इनके हित व कल्याण का तथा इनकी सुरक्षा का भी पूरा-पूरा ध्यान रख सके और इस मामले में इनकी एक मात्र ईमानदार व हितैषी पार्टी यहाँ केवल बहुजन समाज पार्टी ही है जिसने अपने हर शासनकाल में समाज के सभी वर्गो की तरह इनके भी अर्थात् मुस्लिम समाज के भी जान-माल व मजहब की विकट परिस्थितियों में भी पूरी-पूरी सुरक्षा करने के साथ-साथ इनके विकास व उत्थान के लिए भी अनेकों जरूरी बुनियादी व ठोस कदम उठाये हैं जो पूर्व की व वर्तमान सपा सरकार में भी नहीं उठाये गये हैं जिसका संक्षेप में वर्णन बसपा की सरकार के समय में जारी की गई एक सरकारी पुस्तक में भी किया गया है जिसे खासकर अपनी पार्टी के कुछ लोगों से प्राप्त करके उसकी एक प्रति आज मेरे आने से पहले ही आप लोगों को भी दे दी गई है ताकि इस मामले में मीडिया को भी सही तथ्यों की जानकारी मिल जाये।

लेकिन इसके साथ-साथ अब मैं सपा के बीजेपी के साथ शुरू से ही चल रहे मधुर सम्बन्धों का तथा इनकी खासकर मुस्लिम समाज के प्रति अब तक जो भी दोगली सोच व कार्यशैली आदि रही है, तो उनमें से कुछ जरूरी बातों का यहाँ उल्लेख करते हुये प्रदेश के इस समुदाय के लोगों को सावधानी के तौर पर यह कहना चाहूँगी कि वैसे तो उत्तर प्रदेश की वर्तमान सत्ताधारी समाजवादी पार्टी की पहचान यहाँ गुण्डों, माफियाओं, अराजक व आपराधिक एवं भ्रष्ट तत्वों को हर जगह व हर स्तर पर काफी ज्यादा संरक्षण देने वाली पार्टी के रूप में ही जानी जाती है, परन्तु इसके साथ-साथ इस पार्टी का साम्प्रदायिक दंगों व तनाव आदि के मामले में भी रिकार्ड अब तक का काफी ज्यादा खराब रहा है, जिस कारण ही यहाँ इस पार्टी के शासनकाल में हमेशा ही कानून का नहीं बल्कि अराजक व जंगलराज ही रहता है।

इतना ही नहीं बल्कि इस मामले में एक तरफ जहाँ कांग्रेस पार्टी व भाजपा के शासनकाल में भी यहाँ हुये भीषण साम्प्रदायिक दंगों के कारण बड़े पैमाने पर हिन्दू-मुस्लिम अर्थात् इन दोनों ही धर्म के मानने वाले लोगों के जान-माल की काफी हानि होती रही है किन्तु वहीं दूसरी तरफ सपा के शासनकाल में चाहे वह श्री मुलायम सिंह यादव की सरकार रही हो या फिर वर्तमान में उनके पुत्र की सरकार चल रही हो तो इन दोनों समय में ही यहाँ उत्तर प्रदेश के लोग साम्प्रदायिक दंगों व तनाव आदि की आग में जलते रहे हैं और इनसे काफी ज्यादा नुकसान केवल यहाँ गरीब हिन्दू व मुस्लिम समाज के आम लोगों का ही होता है ना कि बड़े राजनेताओं का।

उदाहरण के तौर पर जैसे श्री मुलायम सिंह यादव के शासनकाल में खासकर भाजपा की मिलीभगत से वोटों का ध्रुवीकरण व सौदा आदि करके अपने राजनीतिक व चुनावी लाभ लेने के लिए अयोध्या में कारसेवकों पर गोली चलवायी गयी जिस कारण ही फिर सन् 1989 व 1990 के दौरान बिजनौर, अलीगढ़, कानपुर, आगरा व सबसे भीषण गोण्डा के करनैलगंज का हिन्दू-मुस्लिम साम्प्रदायिक दंगा हुआ, जिसमें काफी लोगों की जाने गयी थीं, जिसका खूनी दाग श्री मुलायम सिंह यादव के दामन पर हमेशा ही लगा हुआ रहेगा।

इसी प्रकार विरासत में सत्ता प्राप्त करने वाले उनके पुत्र व उत्तर प्रदेश के वर्तमान मुख्यमंत्री के शासनकाल में भी अब तक बड़ी तादाद में यहाँ साम्प्रदायिक दंगे व तनाव आदि हो चुके हैं और इन सबमें सबसे ज्यादा भयानक सन् 2013 का मुजफ्फरनगर का साम्प्रदायिक दंगा तो ऐसा है कि इसका खूनी दाग उसी प्रकार से कभी भी धोया नहीं जा सकता है जिस प्रकार गुजरात में श्री नरेन्द्र मोदी की सरकार के दौरान सन् 2002 का साम्प्रदायिक दंगे का खूनी दाग लाखों कोशिशों के बावजूद भी अब तक नहीं मिटाया जा सकता है।

इसके साथ ही मुजफ्फरनगर के साम्प्रदायिक दंगे में जान-माल की हुई भारी हानि के मामले में तो अपने बाप के करनैलगंज के रिकार्ड को भी वर्तमान मुख्यमंत्री ने तोड़ा है। इस भीषण दंगे में लगभग एक लाख से ज्यादा लोग घर से बेघर होकर इधर-उधर शरणार्थी का जीवन बिताने को मजबूर हुये जिनके कैम्पों पर इस सपा सरकार ने बुलडोजर तक भी चलवा दिया था, तो तब फिर उस समय काफी हंगामा होने पर इन पीडि़त परिवारों के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने का सपा सरकार ने वायदा किया था, किन्तु इनका यह वायदा भी अभी तक खोखला व इनको गुमराह करने वाला ही साबित हुआ है।

मैं समझती हूँ कि प्रदेश में ऐसी मुस्लिम व जनविरोधी सपा सरकार को कभी भी यहाँ माफ नहीं किया जाना चाहिये। इसी ही प्रकार कांग्रेस पार्टी के शासनकाल में यहाँ उत्तर प्रदेश में खासकर सन् 1980 में मुरादाबाद में हुये भीषण दंगे व सन् 1987 में मेरठ के हाशिमपुरा-मलियाना दंगे के साथ-साथ सन् 1988 के मुजफ्फरनगर एवं सन् 1989 के बदायूँ के साम्प्रदायिक दंगों को भी भला कौन भुला सकता है। और अब वर्तमान सपा सरकार में भी हुआ खासकर मुजफ्फरनगर भीषण काण्ड व दादरी काण्ड आदि को भी यहाँ मुस्लिम समाज के लोग कदापि नहीं भुला सकते है, जिसमें पीड़ित परिवार के लोगों को अभी तक भी न्याय नहीं मिला है और अब तो बीजेपी के दबाव में आकर सपा सरकार द्वारा दादरी-काण्ड के पीडि़त परिवार को ही फँसाने का पूरा-पूरा प्रयास चल रहा है, जबकि उत्तर प्रदेश में बसपा के चारों शासनकाल मंे समाज के सभी वर्गों के साथ-साथ जिस प्रकार से मुस्लिम समाज के विकास व उत्थान में तथा इनकी सुरक्षा आदि में भी अति महत्वपूर्ण कदम उठाये गये हैं, तो उसकी तुलना में 10 प्रतिशत कार्य भी वर्तमान सपा सरकार में इनके हितों में नहीं किये गये हैं।

इनके अलावा यह बात भी किसी से छिपी नहीं है कि उत्तर प्रदेश में जब भी बसपा की सरकार बनी है तब यहाँ बीजेपी कमजोर हुई है, लेकिन वहीं दूसरी तरफ प्रदेश में जब भी सपा की सरकार बनी है तब यहाँ बीजेपी मजबूत हुई है। इस बात का खास उदाहरण यह है कि जब उत्तर प्रदेश में बसपा की सरकार के रहते हुये सन् 2009 में देश में लोकसभा के आमचुनाव हुये थे तो तब बीजेपी के उत्तर प्रदेश से केवल 9 सांसद ही चुनकर गये थे और इसके बाद जब सन् 2014 में देश में लोकसभा के आमचुनाव हुये तो उस समय यहाँ सपा की सरकार थी तब इस सपा सरकार के चलते हुये यहाँ उत्तर प्रदेश में बीजेपी के 9 से बढ़कर 73 लोकसभा के सदस्य जीतकर गये हैं। लेकिन इसके साथ-साथ यहाँ मैं फिर से यह बात जरूर स्पष्ट कर देना चाहती हूँ कि बसपा ने पूर्व में बीजेपी के साथ मिलकर जरूर सरकार बनायी है, लेकिन हमने अपने असूलों व सिद्धान्तों को सर्वोपरि रखते हुये सपा की तरह कभी भी यहाँ बीजेपी के साथ मिलकर चुनाव नहीं लड़ा है।

इतना ही नहीं बल्कि जब भी उत्तर प्रदेश में बसपा की सरकार बनी है तो तब यहाँ हर स्तर पर कानून द्वारा कानून का राज कायम हुआ है तथा हर मामले में विकास भी निष्पक्ष व ईमानदारी से ही किया गया है, लेकिन वहीं दूसरी तरफ जब भी सपा की सरकार बनती है तो तब यहाँ कानून का नहीं बल्कि सपा के गुण्डों, बदमाशों, माफियाओं, अराजक, भ्रष्ट व साम्प्रदायिक तत्वों का ही जंगलराज चलता है और विकास भी फिर यहाँ निष्पक्ष व पूरी ईमानदारी से नहीं किया जाता है।

इस प्रकार इन सब कारणों से ही अब यहाँ प्रदेश की जनता इनसे व इनकी पार्टी से भी काफी दूरी बना चुकी है जिसकी खास वजह से अब इस पार्टी की सरकार के मुखिया खुद आगे आकर आये दिन कांग्रेस पार्टी से गठबन्धन करने की ही बात करते रहते हैं। लेकिन इसके साथ-साथ यहाँ खास ध्यान देने की बात यह भी है कि वर्तमान में यहाँ आक्सीजन पर चल रही कांग्रेस पार्टी से भी अब यह सपा सरकार का मुखिया समझौता करने के लिए हमें इतना ज्यादा उतावला क्यों नजर आ रहा है, जिसने पिछला विधानसभा आमचुनाव अकेले ही लड़कर यहाँ अपनी पूर्ण-बहुमत की सरकार बनायी थी किन्तु अब उसे इस चुनाव में कांग्रेस जैसी पार्टी का भी सहारा लेने की जरूरत महसूस हो रही है।

इसकी गहराई में जाकर इसे भी प्रदेश की जनता को समझना बहुत जरूरी है वरना आगे चलकर फिर ये लोग इसका नाजायज राजनैतिक लाभ भी उठा सकते है, जबकि इस मामले में इसके पीछे वास्तव में सच्चाई यह है कि इस चुनाव में सपा, कांग्रेस पार्टी के साथ गठबन्धन करके भी यहाँ प्रदेश की सत्ता में वापस आने वाली नहीं है और इस बात का एहसास खुद सपा व इनकी सरकार के मुखिया को भी है।

लेकिन यह सब जानते हुये भी सपा अपने परिवार की आपसी वर्चस्व की लड़ाई पर व अपनी सरकार की कमियों पर भी पर्दा डालने के लिये अर्थात् प्रदेश की जनता का ध्यान बांटने के लिए फिर अपनी हार का पूरा ठीकरा कांग्रेस पार्टी के ऊपर ही मढ़ देगी ताकि वर्तमान सपा सरकार का मुखिया आगे चलकर फिर इसकी आड़ में अपनी खराब इमेज को जनता की आँखों में कुछ हद तक ओझल कर सके जिसे उत्तर प्रदेश की जनता के साथ-साथ कांग्रेस पार्टी को भी समझना बहुत जरूरी है, वरना फिर कांग्रेस पार्टी खासकर यहाँ उत्तर प्रदेश में और भी ज्यादा गर्त में अर्थात् खड्डे में ही चली जायेगी।     

इसके साथ-साथ यहाँ मैं प्रदेश के खासकर मुस्लिम समाज के लोगों को सावधानी के तौर पर यह भी कहना चाहूँगी कि पिछले कुछ समय से सपा परिवार में मची आपसी वर्चस्व की लड़ाई भी अब इतनी ज्यादा गहरी हो चुकी है कि अब इस चुनाव में सपा व कांग्रेस पार्टी का गठबन्धन बनने पर भी इनको इसका कुछ भी लाभ मिलने वाला नहीं है, क्योंकि यह बात सर्वविदित है कि अब सपा दो खेमों में अर्थात् अखिलेश व शिवपाल यादव के इन दो खेमों मंे बंट चुकी है जो इस चुनाव में अन्दर-अन्दर एक दूसरे के खेमे को चुनाव हराने की पूरी-पूरी कोशिश करेंगे जिससे फिर सपा का अपना खास यादव बैस वोट इन दोनों खेमों में बंट जायेगा तो ऐसी स्थिति में फिर यहाँ मुस्लिम समाज का जो भी वोट सपा को या सपा व कांग्रेस गठबन्धन को भी पड़ता है, तो फिर उससे सीधे तौर पर इस चुनाव में यहाँ इसका बीजेपी को ही फायदा मिलने वाला है।

वैसे मुझे यह पूरा भरोसा है कि सपा परिवार के वर्तमान हालातों में प्रदेश के मुस्लिम समाज के लोग अपना वोट सपा को या सपा व कांग्रेस गठबन्धन को भी देकर कतई भी खराब नहीं करेंगे, क्योंकि इन्होंने सन् 2014 के लोकसभा के हुये आमचुनाव से काफी कुछ सबक सीखा है और अब इस बार उत्तर प्रदेश के मुस्लिम समाज के लोग बीजेपी की विरोधी पार्टियों में से केवल उसी ही पार्टी को व उसी ही गठबन्धन के उम्मीद्वारों को अपना वोट देंगे, जो बीजेपी के उम्मीद्वार को हराने में उनको सक्षम नजर आयेगा, ऐसी अब यहाँ मुस्लिम समाज के लोगों में यह आम-धारणा बन चुकी है और अब इनकी यह धारणा इनको यहाँ पूरी होती हुई केवल बसपा में ही नजर आ रही है जिसका प्रदेश में अकेले ही दलित बैस वोट लगभग 24/25 प्रतिशत है, जो प्रदेश की हर विधानसभा की सीट पर कम से कम लगभग 50 व 60 हजार के करीब वोट जरूर है।

वैसे तो इनका अधिकांश विधानसभा की सीटों पर इससे भी ज्यादा वोट है और फिर यह दलित वोट यहाँ मुस्लिम समाज के साथ मिलकर अपने आप में ही बहुत बड़ी ताकत बन जाता है जबकि वहीं दूसरी तरफ सपा का यादव बैस वोट पूरे उत्तर प्रदेश में लगभग 5 या 6 प्रतिशत ही है जो मुश्किल से यह निर्णायक वोट हमें प्रदेश की केवल 50 या 60 सीटों पर ही देखने के लिए मिलता है।

इसके अलावा अब सपा के पक्षपाती विकास एवं इनके जंगलराज से और साथ ही बीजेपी की लोकसभा चुनावी वायदा खिलाफी से एवं इनके नोटबन्दी के फैसले से भी तंग आकर अब बड़ी तादाद् में अपरकास्ट समाज एवं अन्य पिछड़े वर्गों के लोग भी बसपा से जुड़ते हुये हमें नजर आ रहे हैं। इस प्रकार इन सब बातों को मद्देनजर रखते हुये अब इस चुनाव में बसपा ही बीजेपी को यहाँ सत्ता में आने से रोक सकती है अर्थात् सपा व कांग्रेस पार्टी नहीं तथा इनका गठबन्धन भी बीजेपी को यहाँ सत्ता में आने से नहीं रोक सकता है। लेकिन इसके साथ-साथ सावधानी के तौर पर यहाँ मैं प्रदेश की जनता को यह भी कहना चाहती हूँ कि हो सकता है कि इस चुनाव में अब यहाँ भारतीय जनता पार्टी के लोग अपने लोकसभा चुनावी वादाखिलाफी पर से तथा इनके बिना पूरी तैयारी के व जल्दबाजी में लिये गये अपने नोटबन्दी के फैसले पर से भी प्रदेश की जनता का ध्यान बांटने के लिए यहाँ अयोध्या के विवादित स्थल को भी अपने राजनैतिक स्वार्थ में भुनाने की भी पूरी-पूरी कोशिश कर सकते है। इसके साथ ही यह पार्टी चुनाव के दौरान भी यहाँ हिन्दू-मुस्लिम दंगे-फँसाद भी करवा सकती है ताकि इस चुनाव को हिन्दू-मुस्लिम साम्प्रदायिक-रंग दिया जा सके। इससे भी इन दोनों धर्मो के लोगों को जरूर सावधान रहना है। अर्थात् इन्हें बीजेपी को किसी भी कीमत पर यहाँ उत्तर प्रदेश की सत्ता में नहीं आने देना है।

अब अन्त में, मुझे उत्तर प्रदेश की जनता पर यह पूरा भरोसा है कि जिस प्रकार से आँख बन्द करके सभी धर्मनिरपेक्ष वोटरों ने बिहार में एकजुट होकर व एकमत होकर भाजपा को हराने का फैसला लिया था, अब ठीक उसी प्रकार से यहाँ उत्तर प्रदेश में भी उसी एकजुटता का परिचय देकर भाजपा की खतरनाक नीतियों व कार्यक्रमों के विरुद्ध बसपा के साथ मजबूती से खड़े होने का निर्णायक समय आ गया है और ऐसा करके फिर सीधे ही भाजपा की रीढ़ पर चोट पहुँचायी जा सकती है। इसलिए सर्वसमाज के साथ-साथ खासकर मुस्लिम समाज के लोगों को भी बसपा के साथ मिलकर यहाँ भाजपा को परास्त करने में बढ-चढ़कर अपना सहयोग करने की भी इन्हें जरूरत है, ताकि इस चुनाव में बीजेपी को उसके लोकसभा चुनावी वादाखिलाफी की एवं बिना पूरी तैयारी के लिये गये इनके नोटबन्दी के फैसले की भी जरूर सजा दी जा सके।

इन्हीं जरूरी बातों के साथ अब मैं एडवान्स में ही आप सभी लोगों को व पूरे देशवासियों को भी नववर्ष सन् 2017 की हार्दिक शुभ-कामनायें देते हुये अपनी बात यहीं समाप्त करती हूँ। धन्यवाद

प्रेस कान्फ्रेंस में सम्बोधन के बाद एक सवाल के जवाब में सुश्री मायावती ने कहा कि भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अमित शाह को अपना व प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी का चेहरा गौर से देखना चाहिये कि नोटबन्दी के व्यापक दुष्प्रभाव के कारण उनकी पार्टी की हालत खासकर उत्तर प्रदेश में काफी ज्यादा खराब है और जिस कारण उनके चेहरे का नूर उड़ा हुआ है व उनकी हवाइयाँ उड़ी हुई हैं। और जहाँ तक बसपा का सवाल है तो बसपा एक मूवमेन्ट वाली पार्टी है। इसने बहुत उतार-चढ़ाव देखे हैं और अनेकों षड़यन्त्रों व साम, दाम, दण्ड, भेद आदि हथकण्डों को झेला है। नोटबन्दी से बसपा मूवमेन्ट को कोई फर्क नहीं पड़ा है, बल्कि पार्टी के लोग हर स्तर पर उत्तर प्रदेश में सरकार बनाने के लिये अपनी पूरी तैयारी में हैं।

एक अन्य प्रश्न के उत्तर में सुश्री मायावती जी ने कहा कि जब श्री अमित शाह यह कहते हैं कि उत्तर प्रदेश विधानसभा आमचुनाव में भाजपा का मुकाबला सपा के साथ है तो वे ऐसा कहकर केवल यहाँ प्रदेश के मुस्लिम समाज के लोगों को ही गुमराह करना चाहते है, जिससे मुस्लिम समाज के लोग सावधान रहे। वैसे बसपा यह चुनाव जीत रही है और प्रदेश में अपनी अगली सरकार जरूर बनायेगी।

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