Breaking News
Home / याकूब मेमन की फांसी को रिहाई मंच ने भारतीय लोकतंत्र द्वारा दिन दहाड़े इंसाफ की हत्या बताया

याकूब मेमन की फांसी को रिहाई मंच ने भारतीय लोकतंत्र द्वारा दिन दहाड़े इंसाफ की हत्या बताया

न्यायपालिका भी देश के लोकतांत्रिक ढांचे को नेस्तानाबूत करने पर आमादा है
मेमन की फांसी ने साबित किया अंबेडकर नहीं, मनु के सिद्धांत पर चलाया जा रहा है देश
लखनऊ, 30 जुलाई 2015। रिहाई मंच ने राष्ट्रपति और देश के सर्वोच्च न्यायालय द्वारा याकूब मेमन को दी गई फांसी को पूरी दुनिया के सामने किया गया फर्जी एनकाउंटर करार देते हुए कहा है कि इसने साबित कर दिया है कि कार्यपालिका, व्यवस्थापिका के साथ ही साथ न्यायपालिका भी देश के लोकतांत्रिक ढांचे को नेस्तानाबूत करने पर आमादा है। इस घटना ने यह भी साबित किया कि पुलिस का मनोबल बचाने के नाम पर बाटला हाउस फर्जी एनकाउंटर जैसी घटनाओं की जांच न करवाने वाली न्यायपालिक खुद भी इसमें बराबर की भागीदार है।
रिहाई मंच के अध्यक्ष मुहम्मद शुऐब ने कहा कि भारत के संविधान की मूल आत्मा में निहित धर्मनिरपेक्षता का गला घोंटते हुए याकूब मेमन को दी गई फांसी इंसाफ का कत्ल है। दुनिया का इतिहास गवाह है कि जिस मुल्क में इंसाफ नहीं होता वह मुल्क बिखर जाता है। इंसाफ के बिना कोई भी व्यवस्था काम नहीं कर सकती। उन्होंने कहा कि डा0 भीमराव अंबेडकर ने मनुष्य को मनुष्य से भेद करने और हिंसा करने वाली जिस मनुस्मृति को जलाकर समता और समानता की बुनियाद पर भारत के संविधान की रचना की उसको धता बताते हुए सुप्रीम कोर्ट ने जिस तरह मनुस्मृति तक को याकूब मेमन की फांसी का आधार बनाया उसने साबित कर दिया है कि देश अंबेडकर नहीं मनु के सिद्धांत पर चलाया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि मुंबई सांप्रदायिक हिंसा के लिए श्रीकृष्णा आयोग द्वारा दोषी बताए गए बाल ठाकरे को कभी गिरफ्तार तक नहीं किया गया, बल्कि उनकी मौत पर राजकीय सम्मान दिया गया। वहीं याकूब जो खुद गवाह भी था, की राजकीय हत्या की गई उसने साफ कर दिया है कि वर्तमान सरकार मुस्लिमों को दोयम दर्जे का नागरिक मानती है।
शुऐब ने कहा कि राष्ट्रपति ने याकूब मेमन की फांसी के खिलाफ रहे पूर्व रॉ अधिकारी बी रामन के तथ्यों नकारते हुए जिस तरह से उसकी दया याचिका को खारिज किया, उसने साबित किया कि देश के राष्ट्रपति को अपने नागरिक के जीवन से ज्यादा उन दोषी खुफिया और सुरक्षा अधिकारियों के उस आपराधिक मनोबल की चिंता है जो सांप्रदायिक व नस्लीय है। वहीं जिस तरीके से सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने याकूब मेमन की याचिका को खारिज किया और याचिका खारिज होने के 14 दिन बाद ही फांसी होने के तर्क को नकार दिया उसने साबित किया कि एक दिन पहले सुप्रीम कोर्ट के ही न्यायाधीश दवे जिन्होंने मनुस्मृति को आधार बनाते हुए फांसी की बात कही वह उनके साथ है। जबकि याकूब के डेथ वारंट से लेकर उसे अंतिम समय तक इंसाफ हासिल करने के अभी मौके थे, जिसको न्यायालय द्वारा खत्म कर दिया गया।
रिहाई मंच नेता राजीव यादव ने कहा कि गुजरात 2002 और इशरत जहां जैसे बेकसूरों का कत्ल करवाने वाली भाजपा सरकार ने याकूब के इंसाफ पाने के हक को छीनते हुए पूरी दुनिया के सामने गुंडई और दबंगई से न्यायपालिका द्वारा दिन दहाड़े फर्जी एनकाउटर करवाया है। उन्होंने कहा कि याकूब की फांसी के बाद जिस तरह से कांग्रेस समेत सपा के आजम खान जैसे नेताओं ने इसे सही कहा उसने साफ किया कि यह तथाकथित धर्मनिरपेक्ष दल हिन्दुत्ववादी फासीवाद के सामने न सिर्फ घुटने टेक चुके हैं बल्कि सांप्रदायिक हिन्दुत्ववादी वोटों के खातिर नरम हिन्दुत्ववादी नीतियों को आत्मसात कर चुके हैं।

About हस्तक्षेप

Check Also

Donald Trump Narendra Modi

हाउडी मोदी : विदेशी मीडिया बोला मोदी को ज्यादा समय घर पर बिताना चाहिए, क्योंकि वो घूमते हैं और इकोनॉमी डूबती है

विदेशी मीडिया में हाउडी मोदी (Howdy modi in foreign media) : मोदी को ज्यादा से ज्यादा …

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

%d bloggers like this: