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राजनीति चमकाने के लिए मेरठ प्रहलाद नगर के साम्प्रदायिक सौहार्द को बिगाड़ने का प्रयास

नई दिल्ली/मेरठ, 01 जुलाई 2019। आरएसएस मानसिकता के लोग और मीडिया (RSS mindset people and media) कैसे हर विवाद को हिंदू-मुस्लिम का रंग देने प्रयास करने लगते हैं, इसका जीता-जागता उदाहरण मेरठ के प्रह्लाद नगर (Prahalad Nagar of Meerut) में देखने को मिला। प्रह्लाद नगर से हिंदुओं के पलायन की बातें (Talk of migrating Hindus) अफवाहों का पुलिंदा मात्र हैं। दरअसल क्षेत्र में गंदगी होने तथा तंग गलियों के चलते काफी हिंदू परिवारों ने शहर के दूसरे क्षेत्र में जाकर अपने घर बना लिये हैं। क्योंकि बाहर के व्यक्ति यहां की समस्याओं को देखते हुए यहां के मकानों को खरीदकर रहना नहीं चाहते तो वे मकान खाली पड़े हैं। काफी लोग दूसरे शहरों में नौकरी करने चले जाने के चलते वहां पर ही जाकर बस गये।

छेड़छाड़ के मामले में जो जानकारियां मिल रही हैं उसके अनुसार छेड़खानी की वारदातों तो होती रहती हैं पर वे किसी विशेष जाति धर्म के लड़कियों के साथ नहीं, बल्कि इस तरह की वारदातों का शिकार हर धर्म और वर्ग की लड़की बनती हैं।

प्रहलादनगर की बसीवट की बात करें तो इन गलियों में कुछ सिख परिवार भी हैं। हिंदू-मुस्लिम के नाम पर सियासत करने वाले लोग डर की वजह से यहां पर 1000 हिंदू परिवारों में से सिर्फ 150 परिवारों के बचे रहने की दावा कर रहे हैं।

जमीनी हकीकत यह है कि तंग गलियों और पास ही में इस्लामाबाद बस्ती में दूध की डेयरियों के चलते गोबर से उठने वाली दुर्गंध के चलते बड़े स्तर पर हिंदू दूसरे क्षेत्र में जाकर बस गये हैं।

दरअसल प्रहलाद नगर के एक भाजपा कार्यकर्ता भावेश मेहता ने नमो ऐप पर इलाके में हो रही चोरी, छेड़खानी और हवा में फायरिंग की घटनाओं की शिकायत की थी। उसके बाद क्या था। मुद्दों से भटकते जा रहे मीडिया ने इसे ‘हिंदू पलायन’ के रूप में परोसना शुरू कर दिया। विशेष पार्टी के लिए काम कर रहे सोशल मीडिया के वीरों ने इसे मुसलमानों के डर की वजह से हिंदुओं के पलायन’ का रूप दे दिया।  खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पलायन की बात को सिरे से नकार कर रहे हैं।

ऐसा भी नहीं है कि प्रहलाद नगर का इस तरह की अफवाह का यह पहला मामला हो। इससे पहले कैराना में भी खाली पड़े घरों को हिंदुओं के पलायन का रूप दिया गया था।

बात प्रहलाद नगर की करें तो यहां पर अधिकतर लोग वे हैं जो बंटवारे के बाद पाकिस्तान से आकर यहां पर बस गये थे। यह क्षेत्र रिफ्यूजी इलाके के नाम से जाना जाता था।

प्रहलाद नगर के पीछे का मोहल्ला इस्लामाबाद है। इस्लामाबाद में दूध के डेयरी और कारखाने हैं। लोगों का यहां अपने मकान छोड़कर दूसरी जगह मकान बनाने का मुख्य कारण यह है कि आस-पास के क्षेत्र में गोबर की दुर्गंध उठती रहती है और कारखानों से निकलने वाली आवाज लगातार परेशान करती है। गलियों के दोनों ओर बदबूदार नालियों से भरी हुई हैं। पुलिस का भी यही दावा है कि किसी का डर के चलते पलायन होने का एक भी केस संबंधित थाने में दर्ज नहीं है।

दरअसल यह क्षेत्र साम्प्रदायिक सौहार्द की एक मिसाल कायम हुए है। यहां पर 10 मंदिर और गुरुद्वारे हैं। हवाई फायरिंग के मामले में पता चला है कि यह नाबालिग बच्चों की करामात थी।

दरअसल खेल के मैदान में हवाबाजी के लिए कुछ लड़कों ने यह फायरिंग की थी। पुलिस के पास छेड़खानी की कोई शिकायत नहीं आई है। मामले को सुलझाने के लिए जिला प्रशासन ने सिटी मजिस्ट्रेट एवं सीओ की एक संयुक्त कमिटी का गठन किया है। हां इतना जरूर है कि इस क्षेत्र की गलियों में पुराने पड़ चुके घरों पर ताले लगे हुए हैं। कुछ गलियों में ‘ये घर बिकाऊ है’ के पोस्टर भी लगे हैं।

ऐसा नहीं है कि स्थानीय नेताओं ने मामले को तूल दिया हो। भाजपा के पूर्व पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डॉ लक्ष्मीकांत वाजपेयी का भी आरोप है कि प्रहलाद नगर ही नहीं, मेरठ के 4 थाना क्षेत्र के करीब 30 मोहल्लों से एक संप्रदाय विशेष से डरकर हिंदुओं ने अपने मकान बेच दिए हैं।

मेरठ दक्षिण के विधायक सोमेंद्र तोमर भी मानते हैं कि प्रहलाद नगर का हिंदू डरा हुआ है। वाजपेयी ने संप्रदाय विशेष पर अपनी ‘लैंड जिहाद’ की नीति अपनाने का आरोप लगाया है। ये आरोप ऐसे समय में लग रहे हैं जब केंद्र और उत्तर प्रदेश में भाजपा की सरकारें हैं।

CHARAN SINGH RAJPUT चरण सिंह राजपूत, लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं।
चरण सिंह राजपूत, लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री आदित्यनाथ इस तरह के किसी पलायन से इनकार कर रहे हैं। उनका कहना है कि उनके मुख्यमंत्री रहते हिंदुओं का पलायन कैसे हो सकता है।

दरअसल पश्चिमी उत्तर प्रदेेश में मेरठ, मुजफ्फरनगर और बिजनौर धर्म और जाति के नाम पर राजनीति चमकाने के लिए बहुत उपजाऊ जमीन है। इसलिए विभिन्न धर्मों के नेता अपनी राजनीति चमकाने के लिए इस तरह की अफवाहों का सहारा लेते रहते हैं। अखिलेश सरकार में मुजफ्फरनगर दंगे होने का भी बड़ा कारण इसी तरह की अफवाहों का होना था।

वैसे तो लगभग हर दल जाति और धर्म के नाम पर अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकने से बाज नहीं आती हैं पर भाजपा इस मामले में माहिर मानी जाती है।

चरण सिंह राजपूत

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