Breaking News
Home / रेलवे की स्थिति तभी दुरुस्त होगी जब स्पष्ट दृष्टिकोण और कार्ययोजना हो- नीतीश
नई दिल्ली। एनडीए सरकार के पूर्व रेल मंत्री और जनता दल(यू) नेता नीतीश कुमार ने कहा है कि न तो इस बजट में जनता की अपेक्षाओं को महत्त्व दिया गया, न इसमें रेलवे के प्रति किसी स्पष्ट विज़न को आधार बनाया गया, न ही यात्रियों की मूल ज़रुरत अर्थात समयानुसार संचालन (punctuality) तथा संरक्षा (safety) को महत्त्व दिया गया। पता नहीं कब अच्छे दिन आयेंगे ! पूर्व रेल मंत्री ने कहा है कि रेलवे जिस कठिन दौर से गुज़र रहा है उसकी स्थिति में सुधार लाने के लिए क्या किया जाएगा रेलवे के बजट में इसका उल्लेख नहीं है। रेलवे में सेफ़्टी पर ध्यान दिया जाना चाहिए। इस बजट में सेफ़्टी का मात्र उल्लेख भर है। परन्तु इसके पहलुओं की बात नहीं की गयी है - ट्रैक रिन्युअल, सिग्नल आधुनिकीकरण, इन्फ्रास्ट्रक्चर को दुरुस्त करना, पुलों का निर्माण, कोच मेंटेनेंस – इन बिन्दुओं पर कोई चर्चा नहीं है। उन्होंने कहा कि इस सरकार से बहुत उम्मीदें हैं। यह पहला अवसर था कि रेलवे पर अपना नज़रिया पेश करते। परन्तु इस बजट में कोई नजरिया अथवा कार्ययोजना नहीं है। अतः, सरकार ने देश को और हमें निराश किया है। हमारे कार्यकाल में 2003 से 2013 तक के लिए सेफ़्टी प्लान बनाया गया था जिसमें क्या हुआ अथवा नहीं हुआ, इसका रेलवे बजट में कोई ज़िक्र नहीं है। 2001 में 17 हज़ार करोड़ का स्पेशल रेलवे सेफ़्टी फंड बनाया गया था जिससे जर्जर अथवा overaged assets को बदला गया था, सेफ़्टी के लिए anti-collision यंत्रो की बात की गयी थी। इस बजट में ऐसी कोई व्यवस्था नहीं की गयी है। unmanned crossings की बात हर बजट में की जाती है परन्तु इस बजट में ऊपरी पुलों और underbridge के लिए अपर्याप्त साधन दिए गए हैं। श्री कुमार ने कहा कि राज्य सरकारों का सरसरी तौर पर उल्लेख है परन्तु न तो ये बताया गया कि राज्य की सरकार से क्या उम्मीद है न ही राज्य के सन्दर्भ में किसी प्राथमिकता सूची की बात की गई। जो prioritization पहले से किया गया था उसकी स्थिति का कोई उल्लेख नहीं है। उन्होंने कहा कि इस बजट में कोई ख़ास बात अथवा इस साल क्या improvement आएगा अथवा क्या कार्ययोजना होगी, यह दिखाई नहीं देता। इन्होंने PPP को एक नारे के रूप में पेश किया परन्तु वायबिलिटी की बात नहीं की। जद(यू) नेता ने कहा कि सरकार Privatization का ज़िक्र कर रही है परन्तु खुल कर बोलना भी नहीं चाहती। रेलवे से देश का भावनात्मक लगाव है, लोग चाहते हैं कि इसकी बागडोर सरकार के हाथ में हो। रेलवे देश की अखंडता से भी जुड़ा है। अतः यूं ही privatization की बात कर देने से नहीं होगा। पूर्व रेल मंत्री ने कहा कि बुलेट ट्रेन की बात की गई है– इसके लिए जो ट्रैक की दूरी और overall standard चाहिए यह अपने देश में दूर कौड़ी है। आज जो स्थिति है उसमें ज़रूरी है कि जो उपलब्ध ट्रैक हैं उन्हें ही तेज़ रफ़्तार के लिए तैयार किया जाए, साथ ही हम सेफ़्टी पर पूरा ध्यान दें। जिन सेक्टरों में ज़मीन पहले से उपलब्ध है उसके बगल में नए ट्रैक डाले जाने की योजनायें बनाई जा सकती हैं। उन्होंने कह कि बिहार को जिन ट्रेनों से जोड़ा गया है उसमें सोच यही है कि यहाँ के लोगों को ढो कर उन मार्केट में अथवा उन जगहों पर पहुंचा दिया जाए जहां काम करने के लोग उपलब्ध नहीं हैं। इन ट्रेनों को उन राज्यों के हिसाब से दिया गया है बिहार की ज़रुरत के हिसाब से नहीं। पटना और मुंगेर के महासेतु के विषय में तो कोई उल्लेख नहीं है। अतः बिहार की ज़रूरतों को कोई महत्व नहीं दिया गया है। उन्होंने कहा कि रेलवे की स्थिति तभी दुरुस्त होगी जब स्पष्ट दृष्टिकोण और कार्ययोजना हो।

रेलवे की स्थिति तभी दुरुस्त होगी जब स्पष्ट दृष्टिकोण और कार्ययोजना हो- नीतीश

नई दिल्ली। एनडीए सरकार के पूर्व रेल मंत्री और जनता दल(यू) नेता नीतीश कुमार ने कहा है कि न तो इस बजट में जनता की अपेक्षाओं को महत्त्व दिया गया, न इसमें रेलवे के प्रति किसी स्पष्ट विज़न को आधार बनाया गया, न ही यात्रियों की मूल ज़रुरत अर्थात समयानुसार संचालन (punctuality) तथा संरक्षा (safety) को महत्त्व दिया गया। पता नहीं कब अच्छे दिन आयेंगे !
पूर्व रेल मंत्री ने कहा है कि रेलवे जिस कठिन दौर से गुज़र रहा है उसकी स्थिति में सुधार लाने के लिए क्या किया जाएगा रेलवे के बजट में इसका उल्लेख नहीं है। रेलवे में सेफ़्टी पर ध्यान दिया जाना चाहिए। इस बजट में सेफ़्टी का मात्र उल्लेख भर है। परन्तु इसके पहलुओं की बात नहीं की गयी है – ट्रैक रिन्युअल, सिग्नल आधुनिकीकरण, इन्फ्रास्ट्रक्चर को दुरुस्त करना, पुलों का निर्माण, कोच मेंटेनेंस – इन बिन्दुओं पर कोई चर्चा नहीं है। उन्होंने कहा कि इस सरकार से बहुत उम्मीदें हैं। यह पहला अवसर था कि रेलवे पर अपना नज़रिया पेश करते। परन्तु इस बजट में कोई नजरिया अथवा कार्ययोजना नहीं है। अतः, सरकार ने देश को और हमें निराश किया है। हमारे कार्यकाल में 2003 से 2013 तक के लिए सेफ़्टी प्लान बनाया गया था जिसमें क्या हुआ अथवा नहीं हुआ, इसका रेलवे बजट में कोई ज़िक्र नहीं है। 2001 में 17 हज़ार करोड़ का स्पेशल रेलवे सेफ़्टी फंड बनाया गया था जिससे जर्जर अथवा overaged assets को बदला गया था, सेफ़्टी के लिए anti-collision यंत्रो की बात की गयी थी। इस बजट में ऐसी कोई व्यवस्था नहीं की गयी है। unmanned crossings की बात हर बजट में की जाती है परन्तु इस बजट में ऊपरी पुलों और underbridge के लिए अपर्याप्त साधन दिए गए हैं।
श्री कुमार ने कहा कि राज्य सरकारों का सरसरी तौर पर उल्लेख है परन्तु न तो ये बताया गया कि राज्य की सरकार से क्या उम्मीद है न ही राज्य के सन्दर्भ में किसी प्राथमिकता सूची की बात की गई। जो prioritization पहले से किया गया था उसकी स्थिति का कोई उल्लेख नहीं है। उन्होंने कहा कि इस बजट में कोई ख़ास बात अथवा इस साल क्या improvement आएगा अथवा क्या कार्ययोजना होगी, यह दिखाई नहीं देता। इन्होंने PPP को एक नारे के रूप में पेश किया परन्तु वायबिलिटी की बात नहीं की।
जद(यू) नेता ने कहा कि सरकार Privatization का ज़िक्र कर रही है परन्तु खुल कर बोलना भी नहीं चाहती। रेलवे से देश का भावनात्मक लगाव है, लोग चाहते हैं कि इसकी बागडोर सरकार के हाथ में हो। रेलवे देश की अखंडता से भी जुड़ा है। अतः यूं ही privatization की बात कर देने से नहीं होगा।
पूर्व रेल मंत्री ने कहा कि बुलेट ट्रेन की बात की गई है– इसके लिए जो ट्रैक की दूरी और overall standard चाहिए यह अपने देश में दूर कौड़ी है। आज जो स्थिति है उसमें ज़रूरी है कि जो उपलब्ध ट्रैक हैं उन्हें ही तेज़ रफ़्तार के लिए तैयार किया जाए, साथ ही हम सेफ़्टी पर पूरा ध्यान दें। जिन सेक्टरों में ज़मीन पहले से उपलब्ध है उसके बगल में नए ट्रैक डाले जाने की योजनायें बनाई जा सकती हैं। उन्होंने कह कि बिहार को जिन ट्रेनों से जोड़ा गया है उसमें सोच यही है कि यहाँ के लोगों को ढो कर उन मार्केट में अथवा उन जगहों पर पहुंचा दिया जाए जहां काम करने के लोग उपलब्ध नहीं हैं। इन ट्रेनों को उन राज्यों के हिसाब से दिया गया है बिहार की ज़रुरत के हिसाब से नहीं। पटना और मुंगेर के महासेतु के विषय में तो कोई उल्लेख नहीं है। अतः बिहार की ज़रूरतों को कोई महत्व नहीं दिया गया है। उन्होंने कहा कि रेलवे की स्थिति तभी दुरुस्त होगी जब स्पष्ट दृष्टिकोण और कार्ययोजना हो।

About हस्तक्षेप

Check Also

Sony WH-XB900N wireless noise-cancelling headphones

आ गया सोनी का वायरलेस नॉइज कैंसिलिंग हेडफोन WH-XB900N

नई दिल्ली, 16 जुलाई। सोनी इंडिया (Sony India) ने अपने वायरलेस नॉइज कैंसिलिंग डब्ल्यूएच-एक्सबी900एन (WH-XB900N …

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

%d bloggers like this: