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शारदा की आड़ में क्या बाकी चिटफण्ड कम्पनियों के हित साधे जा रहे हैं?

एक्सकैलिबर स्टीवेंस विश्वास
कोलकाता। सहारा श्री सुब्रत राय को सर्वोच्च न्यायलय के मुताबिक न्यायिक हिरासत में भेजे जाने के बावजूद सहारा में निवेश करने वाले निवेशकों का पैसा लौटने की संभावना कम है। आरोप तो कि सहारा में वास्तविक निवेशकों के निवेश के बाजाय राजनेताओं और दूसरे लोगों के बंहिसाब कालाधन खपाया ज्यादा गया है। शारदा समूह के पोंजी घोटाले के राजनीतिक एजेण्डे के बारे में गिरफ्तार सांसद कुणाल घोष के सनसनीखेज बयानों के बावजूद बंगाल में चिटफण्ड फर्जीवाड़े के मामले में राजनेताओं के कालाधन का मामला सामने नहीं आया। अब चिटफण्ड के शिकार निवेशकों के लिये सदमे की बात यह है कि श्यामल सेन आयोग का गठन शारदा समूह समेत तमाम चिटफण्ड कम्पनियों से पैसा वापस दिलाने के लिये किया गया और आयोग ने लाखों की तादाद में दूसरी कम्पनियों के लाखों निवेशकों के आवेदन भी लिये हैं। लेकिन अब आयोग ने शारदा समूह के अलावा बाकी कम्पनियों के निवेशकों को पैसा वापस दिलाने के सरकारी वायदे से पल्ला झाड़ लिया है।

तो क्या शारदा की आड़ में बाकी चिटफण्ड कम्पनियों के हित साधे जा रहे हैं?
इसी बीच बंगाल के उपभोक्ता मामलों के मंत्री साधन पांडे ने कहा है कि पिछले कुछ माह में सरकार को चिटफण्ड कम्पनियों द्वारा फिर से कारोबार शुरू करने सम्बंधी अनेक रपटें मिलीं हैं। दरअसल सच तो यह है कि सुदीप्तो और देवयानी की गिरफ्तारी और सेबी व दूसरी केन्द्रीय एजेंसियों की तत्कालीन सक्रियता के मद्देनजर पोंजी कारोबार में व्यवधान जरुर आया, लेकिन मामला दफा रफा तय हो जाने के साथ ही फिर वही ढाक के तीन पात। पांडे ने बताया, हमें अभी तक कुल 125 शिकायतें मिली हैं। इसमें कुछ पुरानी और नयी सभी प्रकार की कम्पनियाँ शामिल हैं। इस प्रकार की सभी शिकायतों को मुख्यमंत्री कार्यालय भेज दिया गया है।
केन्द्रीय एजेंसियों की तरफ से चिटफण्ड के खिलाफ शारदा फर्जीवाड़े मामले में जो अभूतपूर्व सक्रियता दिखायी गयीं, सीबीआई जाँच की माँग जो होती रही और सेबी को जो पुलिसिया अधिकार दिये गये,उनका कुल जमा नतीजा सिफर निकला है। शुरुआती दौर में जब मामला बेहद गर्म था तो मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कुछ हजार लोगों को सांकेतिक मुआवजा देकर मामला रफा दफा कर दिया। अब शारदा समूह के खिलाफ कब जाँच पूरी होगी, कब अदालती लड़ाई खत्म होगी और कब शारदा संपत्ति बेचकर निवेशकों को पैसे लौटाये जा सकेंगे, वह कोई भी बता नहीं सकता। लेकिन राज्य सरकार और श्यामल सेन आयोग ने साफ तौर पर शारदा के अलावा बाकी चिटफण्ड कम्पनियों के निवेशकों के आवेदनों को किनारे करके उऩके दावे पर एकतरफा चुप्पी साध ली है। नतीजतन बंगाल में लगभग दस लाख निवेशकों का पैसा पानी में चला गया है, ऐसा अंदेशा है।
सरकारी आँकड़ों के मुताबिक पाँच लाख निवेशकों ने दूसरी कम्पनियों की धोखाधड़ी के खिलाफ श्यामल सेन आयोग से आवेदन किये तो शारदा के पाँच लाख निवेशकों के दावों के कागजात सही नहीं पाये गये। जबकि कुल सत्रह लाख आवेदन जमा हुये। शारदा के पाँच लाख और बाकी कम्पनियों के पाँच लाख यानी कुल दस लाख निवेशकों के आवेदन खारिज हो जाने के बावजूद बाकी सात लाख निवेशकों के लिये अब तक कुल 167 करोड़ का ही मुआवजा दिया गया है।
आयोग की दलील है कि शारदा से रिकवरी अभी हुयी नहीं है और न दूसरी चिटफण्ड कम्पनियों के खिलाफ कोई मुकम्मल कानूनी कार्रवाई हुयी है। आयोग, शारदा समूह के निवेशकों को पैसा दिलाने के लिये राज्यसरकार की ओर से गठित पाँच सौ करोड़ के कोष से ही मुआवजा बाँट सकता है जो नियमानुसार सिर्फ शारदा समूह के निवेशकों को ही मिल सकता है।

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