Breaking News
Home / संन्यास लें नामवर जी…

संन्यास लें नामवर जी…

राजेन्द्र राजन   

दूसरी परम्परा के उद्घोषक, प्रतिगामी विचारपोषकों के विरुद्ध देश के कोने-कोने तक पहुँच प्रगतिशीलता का परचम फहराने वाले डॉ. नामवर सिंह अब क्या ‘शव साधक’ बन गये हैं! आनंद मोहन व पप्पू यादव जो हिंदी क्षेत्र ही नहीं, सम्पूर्ण देश में सामाजिक सद्भाव के शत्रु, रक्तपात, अपराध और दबंगई के पर्याय माने जाते हैं, को महिमामंडित करने वालों की कतार में नामवर जी का पुरोहित बन जाना, आश्चर्य से ज्यादा पीड़ादायक है।

जब उम्र के कारण या प्रसिद्धि के शिखर तक जा पहुँचने की वजह से अहंकार जनित संस्कार के कारण वे सही निर्णय ले पाने में असमर्थ हो गये हैं तब अच्छा हो कि वे संन्यास ले लें।

नामवर बनने में उनकी अपनी योग्यता और क्षमता को नकारा नहीं जा सकता है लेकिन सच यह भी है कि कम्युनिस्ट पार्टी और प्रगतिशील लेखक संघ ने उन्हें इस लायक बनने में भरपूर सहयोग प्रदान किया। भारतीय साहित्य में ध्रुवतारा बनने की बजाय इस तरह के कारनामें से कहीं वे अनगिनत तारे में एक की संज्ञा नहीं ले लें।

इतिहास ‘सीकरी’ की ओर मुखातिब साहित्यकारों से निर्मित नहीं हुआ है। लोभ-लाभ, यश, दंभ से मुक्त चिंतकों ने ही इतिहास रचा है। क्या नामवर जी इसे, यानी अपनी ही चिंतनधारा को भूल गए या तिलांजलि दे दी है! ऐसा तो नहीं माना जा सकता है कि ‘भारत रत्न’ पाने की चाह में सचिन तेंदुलकर की तरह वह भी सर्वव्यापक बनकर उपभोक्तावादी संस्कृति के प्रचारक के वेष में खरबपतियों की कतार में अपना नाम शुमार कराना चाहते हैं! यह दुःखद एवं निंदनीय है।

About the author

राजेन्द्र राजन, लेखक विप्लवी पुस्तकालय, गोदरगावाँ के संरक्षक हैं।

About हस्तक्षेप

Check Also

Union Minister for Human Resource Development, Dr. Ramesh Pokhriyal ‘Nishank’

आईआईटी के सामने नई मुसीबत, मंत्रीजी का हुक्म- साबित करो संस्कृत वैज्ञानिक भाषा है

नई दिल्ली, 17 अगस्त। देश के प्रमुख संस्थान आईआईटी और एनआईटी भी मोदी जी के …

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

%d bloggers like this: