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मन मेरा गाने को है । कुछ कुछ संस्कृत में दुहराने को है । चाल – चरित्र – चिंतन में जाने को है । जाने के बाद हमने पाया कि स्वामी अवसरानंद ने सही कहा था कि सत्ता तो काजल की कोठरी है । पांच रुपए वाली बाजारू क्रीम से भी खुद को गोरा बना कर जाओगे । लेकिन दर्पण में अपना चेहरा ओबामा जैसा पाओगे । तब मन में उठेगा गान । कभी समझा नहीं था इस गान को क्योंकि तोता रटंत की तरह पढ़ता था । यह भी तो संस्कृत में होता था । यह इतना कठिन होता है कि समझना मुश्किल होता है । जैसे बहुत सारे लोगों को यह समझना 24 नवंबर को दोपहर से मुश्किल हो जाएगा कि वोट तो इतना गिरा था – मगर मेरा नहीं पराया पराय बिखरा था । तो पहले मेरा गान जान कर अपना ज्ञान बढ़ा लें । ‘   नमस्ते सदा वत्सले मातृ भूमि , त्वया हिंद भूमि भ्रष्टे भ्रष्टे , कर्नाटक हिंद भूमि कष्टे कष्टे , भ्रामकता का दक्षिण द्वार परेशान है हंसते हंसते  , कहै  वोकलिंग्गा येदिरुप्पा हम नहीं हैं किसी के जाल में फंसते –फंसते ।   ’ सत्ता अपनी है और पार्टी पराई हो गई है । जबरदस्ती का आरोप लगाती है । यह तो हम हैं येदिरुप्पा जिसने कर्नाटक में सत्ता की दुकान जमाई । आपकी भ्रामकता ने इसे दक्षिण प्रवेश का रास्ता समझा । यहां तो हाल यह है कि शिमोगा जाना मुश्किल हो रहा है । बार बार दिल्ली जा रहा हूं । दक्षिण का रास्ता बनाऊं या अपना मुख्य मंत्री पद बचाऊं । यह नहीं चलेगा कि सत्ता हो अपनी और पार्टी हो जाए पराई । हमने भी तो हिंदुत्व के नाम पर कर्नाटक में हुड़दंग मचाया था । कुछ नहीं थोड़ा सा जमीन कबजिया था । सब यही करते हैं तो हमने कौन सा नया चमत्कार दिखाया है । आप कौन होते होते हो तय करने वाले कि हम इस्तीफा दें दे । एक पन्ना कागज बरबाद कर दें । यह कागज बड़ी मुश्किल से आता है । आप कांग्रेस को हड़काओ ,कांग्रेस सुप्रीम कोर्ट को हड़काए । हम येदिरुप्पा वोकलिंगा , नहीं कोई संसद जिसे आप अपनी जिद में चलने नहीं देते । हम तो अपनी सत्ता चलाएंगे क्योंकि सत्ता अपनी है ,भले ही हो जाए पार्टी पराई । सत्ताधारी नहीं डरते जगहंसाई से । यह तो राजपाट का सोहाग भाग है । सीखो कांग्रेस से कैसे राजपाट भोगा जाता है । कितने दम से वह कैग की खिल्ली उड़ाती है । अदालत को समझाती है कि यह भ्रामकता का आदेश नहीं कि मुख्य मंत्री इस्तीफा दे दे । सीबीआई भी जांच में समय लगाती है । अदालत भी फैसला सुनाने में समय लगाती है । सत्ता क्या है ,यह कांग्रेस से सीखो क्योंकि कांग्रेस मानती है कि सत्ता भी अपनी है और पार्टी भी अपनी है । इसे कहते हैं बिग बॉस जो कभी था दस का दम । देश को चाहिए ऐसा ही दबंग कि साफ साफ कहे अदालत से कि नियुक्तियों पर सरकार बदनाम नहीं हुई । अदालत अपनी सोचे । हम भी आपकी नियुक्तियों पर सवाल उठा सकते हैं । हमने आरोपों के घेरे में घिरे को मुख्य सतर्कता आयोग बनाया तो बदनाम तो मुन्नी हुई । भ्रष्टाचार के लिए झंडु बाम हुई । और आप हो कि भ्रामक जनता पार्टी येदिरुप्पा वोकलिंगा से बदनाम हुई । कहावत ही है कि बदनाम हुए तो क्या नाम न हुआ । इसलिए स्मरण करो हमारा मूल गीत कि त्वया हिंद भूमि भ्रष्टे भ्रष्टे । यह तो सोचो जरा सत्ता मिलती है कष्टे – कष्टे । ऐसा न करो कि कहना पड़े हमें कि सत्ता अपनी और पार्टी पराई ।

सत्ता अपनी ,पार्टी पराई

मन मेरा गाने को है । कुछ कुछ संस्कृत में दुहराने को है । चाल – चरित्र – चिंतन में जाने को है । जाने के बाद हमने पाया कि स्वामी अवसरानंद ने सही कहा था कि सत्ता तो काजल की कोठरी है । पांच रुपए वाली बाजारू क्रीम से भी खुद को गोरा बना कर जाओगे । लेकिन दर्पण में अपना चेहरा ओबामा जैसा पाओगे । तब मन में उठेगा गान । कभी समझा नहीं था इस गान को क्योंकि तोता रटंत की तरह पढ़ता था । यह भी तो संस्कृत में होता था । यह इतना कठिन होता है कि समझना मुश्किल होता है । जैसे बहुत सारे लोगों को यह समझना 24 नवंबर को दोपहर से मुश्किल हो जाएगा कि वोट तो इतना गिरा था – मगर मेरा नहीं पराया पराय बिखरा था । तो पहले मेरा गान जान कर अपना ज्ञान बढ़ा लें । ‘   नमस्ते सदा वत्सले मातृ भूमि , त्वया हिंद भूमि भ्रष्टे भ्रष्टे , कर्नाटक हिंद भूमि कष्टे कष्टे , भ्रामकता का दक्षिण द्वार परेशान है हंसते हंसते  , कहै  वोकलिंग्गा येदिरुप्पा हम नहीं हैं किसी के जाल में फंसते –फंसते ।   ’

सत्ता अपनी है और पार्टी पराई हो गई है । जबरदस्ती का आरोप लगाती है । यह तो हम हैं येदिरुप्पा जिसने कर्नाटक में सत्ता की दुकान जमाई । आपकी भ्रामकता ने इसे दक्षिण प्रवेश का रास्ता समझा । यहां तो हाल यह है कि शिमोगा जाना मुश्किल हो रहा है । बार बार दिल्ली जा रहा हूं । दक्षिण का रास्ता बनाऊं या अपना मुख्य मंत्री पद बचाऊं । यह नहीं चलेगा कि सत्ता हो अपनी और पार्टी हो जाए पराई । हमने भी तो हिंदुत्व के नाम पर कर्नाटक में हुड़दंग मचाया था । कुछ नहीं थोड़ा सा जमीन कबजिया था । सब यही करते हैं तो हमने कौन सा नया चमत्कार दिखाया है । आप कौन होते होते हो तय करने वाले कि हम इस्तीफा दें दे । एक पन्ना कागज बरबाद कर दें । यह कागज बड़ी मुश्किल से आता है । आप कांग्रेस को हड़काओ ,कांग्रेस सुप्रीम कोर्ट को हड़काए । हम येदिरुप्पा वोकलिंगा , नहीं कोई संसद जिसे आप अपनी जिद में चलने नहीं देते । हम तो अपनी सत्ता चलाएंगे क्योंकि सत्ता अपनी है ,भले ही हो जाए पार्टी पराई ।

सत्ताधारी नहीं डरते जगहंसाई से । यह तो राजपाट का सोहाग भाग है । सीखो कांग्रेस से कैसे राजपाट भोगा जाता है । कितने दम से वह कैग की खिल्ली उड़ाती है । अदालत को समझाती है कि यह भ्रामकता का आदेश नहीं कि मुख्य मंत्री इस्तीफा दे दे । सीबीआई भी जांच में समय लगाती है । अदालत भी फैसला सुनाने में समय लगाती है । सत्ता क्या है ,यह कांग्रेस से सीखो क्योंकि कांग्रेस मानती है कि सत्ता भी अपनी है और पार्टी भी अपनी है ।

इसे कहते हैं बिग बॉस जो कभी था दस का दम । देश को चाहिए ऐसा ही दबंग कि साफ साफ कहे अदालत से कि नियुक्तियों पर सरकार बदनाम नहीं हुई । अदालत अपनी सोचे । हम भी आपकी नियुक्तियों पर सवाल उठा सकते हैं । हमने आरोपों के घेरे में घिरे को मुख्य सतर्कता आयोग बनाया तो बदनाम तो मुन्नी हुई । भ्रष्टाचार के लिए झंडु बाम हुई । और आप हो कि भ्रामक जनता पार्टी येदिरुप्पा वोकलिंगा से बदनाम हुई । कहावत ही है कि बदनाम हुए तो क्या नाम न हुआ । इसलिए स्मरण करो हमारा मूल गीत कि त्वया हिंद भूमि भ्रष्टे भ्रष्टे । यह तो सोचो जरा सत्ता मिलती है कष्टे – कष्टे । ऐसा न करो कि कहना पड़े हमें कि सत्ता अपनी और पार्टी पराई ।

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