Breaking News
Home / सी बी आई : केंद्र सरकार के हाथ का खिलौना!

सी बी आई : केंद्र सरकार के हाथ का खिलौना!

देश में सभी भ्रष्ट और अपराधियों को सबक सिखाने वाली एक मात्र संस्था सी बी आई केंद्र सरकार के हाथों का खिलौना बन गयी है  क्या भाजपा क्या  कांग्रेस और क्या जनता दल सभी पर कहीं न कहीं सी बी आई के दुरूपयोग के आरोप लगे है और इसीलियें सी बी आई संस्था के निदेशक पद पर वफादार आदमियों की पदोन्नति की कोशिश की जाती है वोह तो भला हो कि कुछ मामलों में हाईकोर्ट की दखलदाजी से सी बी आई की कार्यप्रणाली मजबूत रहीहै लेकिन एंडरसन, बोफोर्स से लेकर छोटे बड़े सभी मामलों में सरकार के हाथ में ही सी बी आई की चाबी रही है ।
हाल ही में इस बात का सबूत सी बी आई के पूर्व निदेशकों ने अपनी प्रकाशित पुस्तकों में किया है. मेरा मानना  है कि ऐसे सभी अधिकारी जो अपने पदों पर बने रहने के लियें सरकार के सभी दबाव झेलकर पद बनाये रखने के लियें चुप रहते है अपराध में शामिल रहते है और फिर नो सो चूहे खाकर बिल्ली हज को चली की तर्ज़ पर खुद को बेदाग़ और दबंग साबित करने की होड़ में किताबें लिख कर मीडिया में खबरें बनवाते है मीडिया भी उनमें से किसी से यह सवाल नहीं करता कि जब उन पर दबाव था तो उन्होंने इस्तीफा देकर इस सरकारी अपराध को जनता तक क्यूँ नहीं पहुंचाया । पूर्व सी बीआई निदेशकों ने शायद खुद के द्वारा नौकरी पर चढने के पहले ली जाने वाली शपथ का कानून नहीं पढ़ा जिसमें नोकरी के दौरान जो भी कार्य किये गये  है उस मामले की कोई जानकारी किसी भी सूरत में सार्वजनिक नहीं की जाएगी और वैसे  भी यह सब ऑफिशियल सीक्रेट एक्ट के प्रावधानों के तहत दंडात्मक अपराध है पहले तो ऐसे लोग जो नौकरी के दौरान समझौते करते है महत्वपूर्ण पदों पर जाते है जो सरकार कहती है वोह करते है और अगर सरकार गलत कहती है तो ऐसे बेईमान नेताओं के नाम यह अधिकारी जनता तक नहीं पहुंचाते है फिर पद मुक्त होने और सरकार चले जाने के बाद बिना दस्तावेजी रिकोर्ड की बातों को अहमियत देकर किताबें लिख कर झूंठी प्रसिद्धि और रुपया कमाते है ऐसे लोगों के खिलाफ कानूनी कार्यवाही होना चाहिए और उन्हें भी जेल का रास्ता दिखाना चाहिए ताकि कुर्सी और पद पर रहते ही ऐसे अधिकारी सरकार या किसी भी नेता के दबाव का सार्वजनिक विरोध करें और सरकार का सच जनता के सामने आये तभी यह देश में बेठे नेताओं को बेनकाब कर सकेंगे ।
अब हम बात करते है सरकारी एजेंसियों पर सरकार के दबाव की तो सब जानते  है कि आई बी जो देश के आतंकवाद की खबरें और दूसरी खबरें देश के लोगों को देने के लियें वचन बद्ध  है उनसे विपक्ष के नेताओं और अधिकारीयों की जासूसी करवाई जाती है और फिर जब भी यह लोग सरकार से जाते है तो कार्यभार देने के पहले लाखों फाइलें नष्ट करके जाते  है मीडिया सरकार के इस सच को खूब अच्छी तरह जानता  है लेकिन कभी भी मीडिया ने इस मामले में कोई स्टिंग ओपरेशन नहीं किया अभी राडिया मामले में मीडिया  की भूमिका सब देख चुके हें कोन कितना नंगा  है जनता सब जानती  है लेकिन सी बी आई की स्वायत्तता के लियें प्रधानमन्त्री और विपक्ष के नेता के अलावा सुप्रीम कोर्ट के जज की सदस्यता वाली एक समिति बनना चाहिए जो कम से कम ६ माह में सी बी आई की कारगुजारियों और अनुसन्धान की समीक्षा करें सी बी आई को आने वाली दिक्कतों का ध्यान रखे और अधिकारियों  के प्रमोशन एवार्ड रिवार्ड के मामले में बिना पक्षपात के कार्यवाही हो तो सी बी आई काफी हद तक चरित्रवान बन सकेगी और निष्पक्ष कार्यवाही की भी उम्मीद रहेगी ।

………………………………………….

अख्तर खान “अकेला”
लेखक स्वतंत्र पत्रकार हैं
कोटा राजस्थान

About हस्तक्षेप

Check Also

World Food Day 2019 in Hindi, विश्व खाद्य दिवस,

ब्रेकिंग : गूगल पर ट्रेंड हो रहा है विश्व खाद्य दिवस, जानिए इतिहास और उद्देश्य

नई दिल्ली, 16 अक्टूबर 2019. विश्व खाद्य दिवस 1945 में संयुक्त राष्ट्र के खाद्य और कृषि …

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

%d bloggers like this: