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सेकुलर बनने लिये अपने करीबी लोगों को लटकवा देंगे मोदी !

शेष नारायण सिंह
जिन लोगों ने  गुजरात में 2002 में नरसंहार किया था और मुसलमानों को चुन-चुन कर मारा था अब नरेन्द्र मोदी की सरकार उनको फाँसी दिलाने के लिये प्रयास करेगी। यह लोग नरेन्द्र मोदी के सबसे करीबी लोग हैं और बताया जाता है कि 2002 के बाद नरेन्द्र मोदी ने इनको बचाने के लिये सब कुछ किया, इन लोगों को सम्मानित किया और पुरस्कृत किया। नरोदा पटिया मामले में 28 साल की सज़ा पा चुकी माया कोडनानी को तो उन्होंने 2002 के उनके काम के कारण बाद में मन्त्री पद से भी सम्मानित किया। यह लोग 2002 और 2007 के चुनावों में भाजपा के मुख्य प्रचारक रहा करते थे लेकिन 2012 के चुनाव के पहले निचली अदालत का फैसला आ चुका था इसलिये इन लोगों को पृष्ठभूमि में डाल दिया गया था। अब नीतीश कुमार ने नरेन्द्र मोदी की प्रधानमन्त्री पद की दावेदारी में ऐसा अड़ंगा डाल दिया है कि नरेन्द्र मोदी अपने सबसे भरोसेमन्द कार्यकर्ताओं के लिये फाँसी की माँग करके अपने आपको सेकुलर साबित करने के लिये प्रयास कर रहे हैं। खबर है कि अगले हफ्ते उच्च न्यायालय में नरेन्द्र मोदी की सरकार यह अर्जी डाल देगी कि नरोदा पटिया में मुसलमानों का संहार करने वाले लोगों को फाँसी की सज़ा दे दी जाये। मोदी को उम्मीद है कि उसके बाद देश उन्हें सेकुलर मान लेगा और नीतीश कुमार भी खुश हो जायेंगे।

नरेन्द्र मोदी को 2002 के गुजरात नरसंहार के लिये जिम्मेवार माना जाता है हालाँकि उनके खिलाफ कहीं भी किसी भी अदालत ने कोई फैसला नहीं दिया है। लेकिन जनता की नज़र में उनको सेकुलर कह पाना किसी के लिये भी भारी होगा। भाजपा के अध्यक्ष राजनाथ सिंह, नरेन्द्र मोदी को सेकुलर मानते हैं। गुजरात सरकार के ताज़ा रुख से लगता है कि अपने आपको सेकुलर साबित करने के लिये नरेन्द्र मोदी उन लोगों को भी कुर्बान करने को तैयार हैं जो उनके बहुत करीबी माने जाते हैं। नरेन्द्र मोदी की सरकार में मन्त्री रह चुकी माया कोडनानी को निचली अदालत ने 28 साल की सज़ा सुनायी थी। उनके साथ ही ऐसे बहुत से लोगों को सज़ा सुनायी थी जिनके बारे में जनता को मालूम था कि उन लोगों ने 27-28 फरवरी 2002 के उस प्रोग्राम में हिस्सा लिया था। जब सज़ा सुनायी गयी थी तो भाजपा ने उनको निर्दोष बताने की कोशिश की थी। अब राष्ट्रीय चुनाव की तैयारियाँ चल रही हैं। लोकसभा 2014 के बारे में सबको मालूम है कि गुजरात नरसंहार 2002 का बैगेज जिसके पास होगा उसके लिये खासी मुश्किल पेश आयेगी। शायद इसीलिये नरेन्द्र मोदी की सरकार उच्चा न्यायालय में माया कोडनानी के लिये फाँसी की सज़ा की माँग करेगी। उनके साथ और भी लोगों को सज़ा हुयी थी। एक बाबू बजरंगी भी हैं जिन्हें पूरी ज़िन्दगी जेल में रहने की सज़ा हुयी है।कुछ लोग बरी भी हो गये हैं। गुजरात सरकार ने तय

किया है कि वह उच्च न्यायालय में अपील करेगी और माया कोडनानी और बाबू बजरंगी समेत कई लोगों की सज़ा बढाने की बात करेगी। सरकार की तरफ से अपील निचली अदालत के फैसले के आने के सात महीने बाद की जा रही है जबकि तीन महीने के अन्दर कर दिया जाना चाहिये था। अब अपील करने के लिये उच्च न्यायालय में दरखास्त देकर मंजूरी लेनी पड़ेगी लेकिन राज्य सरकार मंजूरी लेगी। जानकार बताते हैं कि सरकार ने इस केस में कुछ न करने का मन बना लिया था। शायद इसीलिये तीन महीने के समय में अपील नहीं की। जानकार बता रहे हैं कि जिस 2002 के नरसंहार के लिये विपक्ष नरेन्द्र मोदी को जिम्मेवार ठहराने की कोशिश कर रहा है,  उसी 2002 के नरसंहार के मामले में वे अपनी पार्टी के नेता और मन्त्री माया कोडनानी समेत करीब एक सौ ऐसे लोगों को बड़ी से बड़ी सज़ा दिलवाना चाहते हैं। यहाँ तक कि अदालत की तरफ से जेल की सज़ा पायी हुयी नेता को भी फाँसी दिलवाने के लिये प्रयास कर रहे हैं। माया कोडनानी के अलावा दस और लोगों को फाँसी देने की माँग भी राज्य सरकार की तरफ से की जायेगी, 22 अपराधियों को 24 साल की सज़ा हुयी है, सरकार यह अपील करेगी कि उनकी सज़ा 30 साल कर दी जाये। निचली अदालत ने 29 अभियुक्तों को बरी कर दिया था। सरकार अपनी अपील में प्रार्थना करेगी कि उन 29 लोगों को बरी न किया जाये उनको भी सज़ा दी जाये।

2014 के लोकसभा चुनावों में गुजरात सरकार के इस फैसले से भाजपा को क्या फायदा होगा, बता पाना मुश्किल है लेकिन जो पार्टियाँ मुसलमानों के वोट लेकर लोकसभा में पहुँचने वाली हैं उनको नरेन्द्र मोदी का समर्थन करने का बहाना ज़रूर मिल जायेगा क्योंकि वे अपने मतदाताओं को समझा सकती हैं कि 2002 के नरसंहार के जिम्मेवार लोगों को फाँसी दिलवाने की माँग करके नरेन्द्र मोदी ने मुसलमानों के साथ न्याय किया है। वक़्त ही बतायेगा कि इसका क्या असर होने वाला है। इसके बाद ममता बनर्जी, नवीन पटनायक, चंद्रबाबू नायडू, जयललिता, करूणानिधि,मायावती जैसे भाजपा के पुराने सहयोगी अपने मतदाताओं को बता सकते हैं कि भाजपा अब सेकुलर हो गयी है। या भाजपा की तरफ खिंच रहे नये सहयोगी मुलायम सिंह यादव भी अपने लोगों को भाजपा को सेकुलर बताकर भाजपा के साथ जा सकते हैं।

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