सज़ा-ए-मौत भी नाकाफ़ी!

रश्मि रविजा

बाल यौन शोषण एक ऐसा विषय है….जो सबको बहुत चुभता है..पर  उस पर चर्चा करने से सब बचते हैं…अगर कहीं इस तरह की घटना देखने को मिलती  है तो…बहुत ही extreme  reaction होता है, लोगो का… ‘ऐसे व्यक्ति को फांसी चढ़ा देना  चाहिए….कोड़े लगाने चाहिए.’.वगैरह वगैरह…और कर्त्तव्य की इतिश्री  हो गयी. पर इस पर संयत रूप से विचार-विमर्श बहुत कम होता है.

फिल्म I am में इस समस्या पर दृष्टिपात किया गया है…और बहुत ही संयमित तरीके से…कहीं कोई अवांछनीय दृश्य नहीं हैं…सबकुछ संकेतों में ही बताया गया है. अभिमन्यु (संजय सूरी ) एक हंसमुख लड़का है…डोक्यूमेंट्री फिल्म्स बनाता है….गिटार बजाता है…लड़कियों से फ्लर्ट करता है…पब-डिस्को जाता है…आज के जमाने का एक cool dude . पर जब वह अकेला होता है…तो उदासी में सिगरेट के धुएं उडाता रहता है और उस धुएं में उसका अतीत चलचित्र की तरह उसने सामने से गुजरने लगता है. जब वह सात-आठ साल का था तो उसके सौतेले पिता ने उसके साथ दुर्व्यवहार किया…और यह सिलसिला सालो तक चलता रहा. अक्सर ऐसे निकृष्ट लोग…बच्चो को यही धमकी देते हैं कि “माँ को बताया तो तुम्हारी माँ को जान से मार दूंगा ” और नन्ही सी जान मुहँ नहीं खोलते.

अभिमन्यु को  ये ग्लानि भी होती है कि बाद में उसने अपने पिता की इस कमजोरी का इस्तेमाल भी करना शुरू किया और गियर वाली साइकिल…महंगे खिलौनों की मांग करता रहा…यहाँ  तक कि ‘फिल्म्स डिविज़न’ में पढ़ने की महंगी फीस भी उसके पिता को देनी पड़ी…और यही अभिमन्यु के लिए उसके चंगुल से निकलने का जरिया भी बना. (पर अभिमन्यु को आज ग्लानि हो रही है,जब वह पच्चीस-छब्बीस साल का है…तेरह वर्ष के बच्चे की सोचने की क्षमता क्या होगी?)

अभिमन्यु की एक फ्रेंड है…उसे बहुत चाहती है..उसका ख्याल रखती है…पर अभिमन्यु अपने अतीत की वजह से उस से कोई भावात्मक सम्बन्ध नहीं बना पाता. बचपन की उस घटना ने उसका पूरा व्यक्तित्व छिन्न-भिन्न कर दिया है….वह ऊपर से सामान्य दिखता है..पर भीतर से है नहीं. उसके पिता अब मृत्यु शैय्या पर हैं….और माँ बार-बार फोन कर रही है..”एक बार आ कर मिल जा…तुम्हारे लिए इतना किया है उन्होंने” वो खुद को तैयार नहीं कर पाता,जाने के लिए और जब जाता है..तब उनकी मृत्यु हो चुकी  होती है. माँ के शिकायत करने पर वह माँ को उनकी असलियत  बताता है…हर माँ की तरह जब वो विश्वास नहीं करती…तब पूछता है, “माँ …तुम्हे दस सालों में कुछ भी नहीं पता चला…???”
ऐसा लगता है..ये सवाल दुनिया की हर माँ से किया गया है…माँ भी एक सामान्य प्राणी ही है..सौ उलझने हैं जिंदगी की…पर एक बच्चे को दुनिया में लाए तो फिर अपने जिस्म पर सौ आँखे उगा ले कि अपने बच्चे के साथ किसी ऐसे दुर्व्यवहार  का तुरंत ही पता चल जाए उसे.

पर माँ भी किस किस पर अविश्वास करे , मामा-चाचा सब तो अपने ही होते हैं और कई जगह तो पिता ही ऐसे निकृष्ट कर्म में लिप्त होते हैं…एक फ्रेंड की परिचित है….वो विदेश की अपनी बढ़िया नौकरी….ऐशो आराम सब छोड़ कर अपनी बेटी को ले स्वदेश वापस लौट आई .जब उसे पता चला कि उसका पति ही….
आज उसका भविष्य बिलकुल अनिश्चित है….लेकिन अपनी बेटी को उस नरक से निकाल लाई. पर उस दोषी पिता का क्या??…वो तो निर्द्वंद्व घूम रहा है…उक्त महिला के पास ना इतना धन है ना साधन कि वो केस लड़ सके…फिर वो अपनी बेटी को भी वकीलों के प्रश्नोत्तर से बचाना चाहती है…उसे अपने लिए नौकरी भी ढूंढनी है….बस इसे एक दुस्वप्न  समझ कर छोड़ दिया है….

दो महिलाए बेस्ट फ्रेंड्स थी…पारिवारिक समबन्ध थे….एक फ्रेंड के पति ने दूसरे फ्रेंड की बेटी के साथ दुर्व्यवहार की कोशिश की.बेटी ने विरोध किया और माँ को बता दिया…लेकिन जब बेटी की माँ ने अपनी सहेली  से उसके पति की शिकायत की तो सहेली ने अपने पति का विश्वास किया और सहेली से नाता तोड़ लिया. यही होता है हमेशा और ऐसी विकृत मनोवृत्ति वालों को खुली छूट मिल जाती है.

संयोग से ये फिल्म देखी और दूसरे ही दिन…अखबार में एक खबर पर नज़र पड़ी…
A Delhi court has recommended to the central government to explore the possibility of castrating rape and molestation convicts. Sentencing a man to 10-year imprisonment for raping his stepdaughter for four years, additional sessions judge Kamini Lau called for a “public debate” on the possibility of surgical and chemical castration as punishment for rape.
Lau said countries like the US, UK and Germany have imposed chemical and surgical castration as an alternate to contain the growing menace of rape and molestation. Indian legislatures should with seriously explore this possibility too, particularly in cases involving the rape of minors, serial offenders and child molesters, the court said.

ये तो अभी एक सुझाव मात्र था पर विरोध अभी से शुरू हो गए,

Advocate Mukul Rohatgi., said “It would lead to Talibanisation of the Indian criminal justice system,”
Law Commission vice-chairman KTS Tulsi said: “It takes us back to the stone age. I wholly disagree with it.”
तो फिर आखिर क्या सजा दी जाए दोषियों को…जो किसी का पूरा जीवन बर्बाद कर देते हैं…मनोवैज्ञानिको को ही ये रिसर्च करना चाहिए कि इस तरह की विकृतियाँ उत्पन्न ही क्यूँ होती है…आधे केस में तो ऐसे दुराचार करनेवाले खुद भी बचपन में शिकार हुए होते हैं.
यह एक बहुत ही गंभीर समस्या है…जिसके अधिकाँश केस, आवरण के भीतर ही दबे रह जाते हैं
..(वैसे फिल्म में बताया गया है कि…ये अभिमन्यु का किरदार सत्य घटना पर आधारित है )

पिंकी  वीरानी ने “कोमा में पड़ी अरुणा शानबाग’ की कहानी दुनिया के सामने लाई…उन्होंने बाल यौन  शोषण पर एक किताब भी लिखी है,”Bitter   Chocolate ” इस किताब में भी कोई  sleazy details नहीं हैं…बल्कि बहुत गंभीरता से इस समस्या पर विचार किया गया है. करीब १०० केस का जिक्र है..जहाँ पिंकी खुद पीड़ित बच्चों से मिली हैं. वे प्रकरण…आपके रोंगटे खड़े कर देंगे…..और किसी अपने जैसे मानव द्वारा ऐसे कर्म के लिए शर्मसार कर के नज़रें झुकाने को बाध्य कर देंगे.

एक बारह वर्षीया पीड़िता द्वारा लिखी ये कविता भी उस किताब में दी गयी है

I asked you for help, and you told me you would
If I told you the things he did to me.
You asked me to trust you, and you made me
Repeat them to fourteen different strangers

I asked you for protection
And you gave me a social worker.
Do you know what it is like
I have more social workers than friends?

I asked you for help
And you forced my mother to choose between us.
She chose him, of course.
She was scared, she had a lot to lose.

I had a lot to lose too.
The difference is, you never told me how much.
I asked you to put an end to the abuse
You put an end to my whole family.
You took away my nights of hell
And gave me days of hell instead.
You have changed my private nightmare
Into a very public one.

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

%d bloggers like this: