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हर तरह के आतंकवाद से देश की एकता को भारी ख़तरा

विकीलीक्स के दस्तावेजों में अमरीकी राजदूत ने अपने आकाओं को सूचित किया है कि राहुल गाँधी ने उनसे कहा था कि दक्षिणपंथी हिन्दू आतंकवाद से देश को ज्यादा ख़तरा है . जब बात पब्लिक हुई तो आर एस एस और उसके अधीन संगठनों के नेता टूट पड़े और यह साबित करने में जुट गए कि राहुल गांधी हिन्दुओं के खिलाफ बोल रहे हैं . दिन भर टेलीविज़न चैनलों पर संघ के बडबोले हिमयातियों का क़ब्ज़ा रहा और राहुल गाँधी को हिन्दू विरोधी साबित करने के लिए बड़े बड़े सूरमा तरह तरह के ज्ञान देते रहे . कांग्रेस वाले भी भांति भांति की बातों से राहुल गांधी को हिन्दू प्रेमी साबित करते रहे . काग्रेसियों की इस दुविधा का लाभ संघी आतंकवाद के समर्थकों को मिल रहा था और अपने आपको देश के सभी हिन्दुओं का प्रतिनिधि साबित करने का सपना पूरा होता दिख रहा था . इस सारे खेल में बीजेपी के गंभीर नेता शामिल नहीं थे. अरुण जेटली और सुषमा स्वराज ने अपने आपको इस खेल से बाहर ही रखा . बीजेपी के दूसरी कतार के नेता ही दिन भर सक्रिय रहे. लेकिन शाम होते होते माहौल बदलना शुरू हो गया . जब टी वी समाचारों के किसी चैनल ने मणि शंकर अय्यर को उतारा और उन्होंने संघी आतंकवाद पर हमला बोलना शुरू किया. मणि शंकर अय्यर ने साफ़ कहा कि राहुल गाँधी ने क्या कहा ,उन्हें नहीं मालूम है . कांग्रेस का औपचारिक दृष्टिकोण क्या है यह भी उन्हें नहीं मालूम लेकिन इस बात में दो राय नहीं है कि संघी आतंकवाद से देश की एकता और अखंडता को बहुत ज्यादा ख़तरा है . उन्होंने कहा कि यह देश का सौभाग्य है कि आर एस एस और उसके मातहत संगठनों को देश के ज़्यादातर हिन्दू नफरत की नज़र से देखते हैं और आर एस एस की सभी हिंदुओं का प्रतिनधि बनने की कोशिशों का विरोध करते हैं . मणि शंकर के हस्तक्षेप के बाद आर एस एस वाले थोडा घबराये नज़र आने लगे . कांग्रेस में सक्रिय चापलूस नेताओं ने भी हिम्मत करके बात को आगे बढ़ाना शुरू कर दिया . और अब लगता है कि कांग्रेस का नेतृत्व आर एस एस के आतंकवाद को बहस की मुख्य धारा में लाने का मन बना चुका है . मुल्क तैयार है और कांग्रेसियों को भी अंदाज़ लग गया है कि आर एस एस के बडबोले नेताओं को काबू में करने की ज़रुरत है और उन्हें यह साफ़ बता देना भी ज़रूरी है कि संघी आतंकवाद बीजेपी की विचार धारा का एक ज़रूरी पह्लू है . जहां तक राहुल गाँधी का सवाल है उनका बयान उस दौर में दिया गया लगता है जब मुंबई के जांबाज़ पुलिस अफसर हेमंत करकरे जिंदा थे और कई आतंकी घटनाओं में आर एस एस वालों की साज़िश का पर्दाफ़ाश हो रहा था .दुनिया जानती है कि बहुमत के आतंकवाद के बाद देश के अस्तित्व पर ख़तरा आ जात अहै . पाकिस्तान इसका सबसे बड़ा उदाहरण है . जब वहां पर जिया उल हक के शासन काल में आतंकवाद के सहारे अपने देश में और भारत में पाकिस्तानी आई एस आई के ने नरक मचा रखा था तो जानकार समझ गए थे कि पाकिस्तान के विखंडन को कोई नहीं रोक सकता . आज पाकिस्तान की जो भी दुर्दशा है वह इसी बहुमत के आतंकवाद की वजह से है . भारत में भी अगर आर एस एस की चली तो वही पाकिस्तानी हालात पैदा हो जायेगे . मणि शंकर अय्यर के हस्तक्षेप के बाद संघी आतंकवाद के पोषक बैकफुट पर चले गए हैं .

पता चला है कि कांग्रेस के दिल्ली अधिवेशन में भी संघी आतंकवाद को देश में आतंकी माहौल पैदा करने के लिए ज़िम्मेदार ठहराने की योजना है . यह देश हित के लिए ज़रूरी भी है . टी वी न्यूज़ चैनलों पर अपने विचार रखते हुए मणि शंकर अय्यर ने जो कहा था अगर कांग्रेस के लोग उसे अपनी नीति का हिस्सा बना लें तो आर एस एस और उसके अधीन काम करने वाले संगठनों को अगले कई वर्षों तक अपने आपको निर्दोष साबित करने में लग जाएगा . कम से कम हमलावर होने का मौक़ा तो नहीं ही लगेगा .कांग्रेस के राजनीतिक प्रस्ताव में महात्मा गाँधी की हत्या को सबसे बड़ा आतंकवाद बताने की योजना है .यह भी कोशिश की जायेगी कि हिन्दू धर्म और सावरकर के हिंदुत्व के अंतर पर भी मीमांसा हो .दुनिया जानती है कि सावरकर का हिंदुत्व एक राजनीतिक विचारधारा है जिसका उद्देश्य बहुसंख्यक हिन्दुओं को राजनीतिक काम के लिए इस्तेमाल करना है . इसका सफल प्रयोग १९९२ के ६ दिसंबर को आर एस एस ने अयोध्या में किया था . बाबरी मस्जिद के ध्वंस के वक़्त अयोध्या पंहुचे लोग हिन्दू थे लेकिन उन्हें न तो हिंदुत्व से कुछ भी लेना देना था और न ही आर एस एस से. आर एस एस की कोशिश है कि आगे भी इस तरह की घटनाओं को अंजाम दिया जाय लेकिन उनका दुर्भाग्य है कि काठ की हांडी को दुबारा चढ़ाना असंभव माना जाता है . सभी हिन्दुओं का नुमाइंदा बनने की आर एस एस की कोशिश का भी वही हाल होगा जो इसके पहले के संघी आतंकवाद के पोषकों का हुआ था . आज अपना देश इतिहास के उस मोड़ पर है जब सभी धर्म निरपेक्ष जमातों को एक होकर देश को संघी आतंकवाद से बचाने में अपना योगदान करना चाहिए

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