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Search Results for: कार्यपालिका

जब कार्यपालिका फेल हो जाती है, न्यायपालिका तभी दखल देती है-चीफ जस्टि‍स टीएस ठाकुर

हमारा इरादा किसी के अधिकार क्षेत्र में दखल देना नहीं  : न्यायमूर्ति ठाकुर नयी दिल्ली 06 जून। उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश तीरथ सिंह ठाकुर ने न्यायपालिका के अधिकार क्षेत्र …

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कारपोरेट राजनीति के बदलाव का गांधीवादी तरीका

Mahatma Gandhi statue in the Parliament premises. (File Photo: IANS)

लोकसभा चुनाव 2019 के नतीजे आने पर कई संजीदा साथियों ने गहरी चिंता व्यक्त की कि नरेंद्र मोदी की एक बार फिर जीत संविधान और लोकतंत्र के लिए बहुत बुरा …

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विडंबना : महान है ये जनता भी, इसे क्रांति चाहिए पर क्रांतिकारी नहीं

CHARAN SINGH RAJPUT चरण सिंह राजपूत, लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं।

अक्सर लोगों को यह कहते हुए सुना जाता है कि अन्याय से लड़ने वाले लोग (People fighting injustice) अब नहीं रहे हैं। इन लोगों के अनुसार देश में इतना अन्याय …

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ऐसे तो हर आंदोलनकारी को देशद्रोही बना देंगे ये लोग

News Analysis and Expert opinion on issues related to India and abroad

लंबे समय से अराजक एजेंडे पर काम कर रहे संघी मानसिकता के लोग लगातार अपने मकसद में कामयाब हो रहे हैं। संघियों के स्थापित होने के पीछे समाजवादियों का परिवारवाद, …

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सरकार की अराजकता और विपक्ष के नकारेपन के खिलाफ जनता को खड़ा होना ही होगा

Narendra Modi An important message to the nation

ऐसा लग रहा है कि जैसे लोग भांग खाये घूम रहे हों। पूंजीपतियों के दबाव में मोदी सरकार ने किसानों को उसके खेत में और मजदूरों को फैक्टरियों, निजी कार्यालयों …

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भारत में लोकतंत्र का भविष्य

Election Commission of India. (Facebook/@ECI)

देश के उदारवादी तबके के बुद्धिजीवी और प्रगतिशील लोगों के साथ साथ आमजनों का भी बहुत बड़ा तबका है जो भारत में लोकतंत्र के भविष्य (future of democracy in India) …

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अराजक ताकतवर लोगों के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय की हुंकार से आएगी नई क्रांति

Supreme Court Chief Justice Ranjan Gogoi

नई दिल्ली। मुट्ठी भर लोगों ने देश की व्यवस्था (System of the country) को ऐसे कब्जा लिया है कि आम आदमी बस इसमें इस्तेमाल हो रहा है। ये लोग कार्यपालिका, …

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सवर्ण आरक्षण और 13 प्वाइंट रोस्टर के जो नहीं खिलाफ, हम उनके खिलाफ

लखनऊ 11 फरवरी 2019। सामाजिक न्याय (Social Justice) और संविधान (Constitution) पर हो रहे हमलों के खिलाफ शाहिद आजमी की नौंवी बरसी (9th anniversary of Shahid Azmi) पर सामाजिक न्याय के …

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कांग्रेस और मुसलमानों के बीच की दूरी : कांग्रेस ने सत्ता खोई तो मुसलमानों ने सियासी, समाजी महत्व

कांग्रेस और मुसलमानों के बीच की दूरी : कांग्रेस ने सत्ता खोई तो मुसलमानों ने सियासी, समाजी महत्व देश के मुसलमानों में अवांछित हो जाने का एहसास गुलाम नबी आज़ाद …

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सीबीआई मामले में सर्वोच्च न्यायालय के फैसले का संदेश : जनतंत्र का अर्थ है तानाशाही का प्रतिरोध

सीबीआई मामले में सर्वोच्च न्यायालय के फैसले का संदेश जनतंत्र का अर्थ है तानाशाही का प्रतिरोध Democracy means resistance to dictatorship —अरुण माहेश्वरी सीबीआई मामले में सर्वोच्च न्यायालय के कल …

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दिवाकर सिंह और राकेश टिकैत जैसे किसान नेता चुनाव में बुरी तरह हारते क्यों हैं ?

दिवाकर सिंह और राकेश टिकैत जैसे किसान नेता चुनाव में बुरी तरह हारते क्यों हैं ? किसान, राजनीति और दुर्गति सत्येन्द्र पीएस उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले में गोरखपुर औद्योगिक …

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कौन सच्चा, गोलवरकर या भागवत : आरएसएस का ‘ग्लासनोस्त’ क्षण !

कौन सच्चा, गोलवरकर या भागवत : आरएसएस का ‘ग्लासनोस्त’ क्षण ! -अरुण माहेश्वरी नई दिल्ली में भविष्य का भारत विषय पर आरएसएस के सरसंघचालक मोहन भागवत के तीन भाषणों की …

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क्या भारत का संविधान जमीन पर काम कर भी रहा है?

क्या भारत का संविधान जमीन पर काम कर भी रहा है? धर्मनिरपेक्षता बनाम हिन्दुज्म – एक संघर्ष उदय चे भारत के संविधान की प्रस्तावना कहती है कि-        "हम भारत …

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नफरत की हिंसा को जिलाए रखने के लिए एक मॉब लिंचिंग का ही आसरा

नफरत की हिंसा को जिलाए रखने के लिए एक मॉब लिंचिंग का ही आसरा –रामशरण जोशी गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने संसद में भीड़ हिंसा पर बोलते हुए दिल्ली में 1984 …

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क्रमशः विकृत होती जाती लोकतांत्रिक व्यवस्था

क्रमशः विकृत होती जाती लोकतांत्रिक व्यवस्था क्या हम वापिस कबीला युग की ओर बढ़ रहे हैं!       वीरेन्द्र जैन हिन्दी के सुप्रसिद्ध राजनीतिक कवि मुकुट बिहारी सरोज की एक कविता है- …

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नवसाम्राज्यवादी जुए के नीचे राष्ट्र-भक्ति और राष्ट्र-द्रोह की फर्जी जंग

नवसाम्राज्यवादी जुए के नीचे राष्ट्र-भक्ति और राष्ट्र-द्रोह की फर्जी जंग प्रेम सिंह     भारत का नागरिक जीवन, खास कर पिछले दो दशकों से, राष्ट्र-भक्ति और राष्ट्र-द्रोह के बीच छिड़ी जंग …

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द किंग इज़ डेड, लांग लिव दि किंग : फिसल पड़े, तो हर-हर गंगे !

पी. के. खुराना सन् 1422 में फ्रांस के सम्राट चार्ल्स-6 की मृत्यु के बाद उनके पुत्र चार्ल्स-7 द्वारा सम्राट बनने के अवसर पर पहली बार एक ऐसी घोषणा की गई …

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प्रतिकूल न्याय : हमारे लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर कर रही है सरकार की बहुसंख्यकवादी राजनीति

प्रतिकूल न्याय : हमारे लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर कर रही है सरकार की बहुसंख्यकवादी राजनीति कई आतंकवादी विरोधी मामले में जो चीजें हुई हैं, वह भारतीय न्याय व्यवस्था की गिरावट …

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संविधान की रक्षक न्यायपालिका खुद भारतीय संविधान की हत्या करने पर उतारू है

चंद्रशेखर को रिहा करो लोकतान्त्रिक संस्थाओं पर हमले बंद करो      सम्मेलन राजिंदर सच्चर को याद करते हुए सहारनपुर दलित हिंसा के एक साल मीडिया विजिल के दो साल पर लोकतांत्रिक …

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अपनी मनमर्जी चलाने की कोशिश में मोदी सरकार ने न्यायपालिका को गहरे संकट में धकेल दिया है

मोदी सरकार और न्यायपालिका का संकट राजेंद्र शर्मा पिछले एक हफ्ते की तीन घटनाओं ने देश की शीर्ष न्यायपालिका के गहरे संकट में होने की सचाई को ही नहीं इस …

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आरएसएस की तरह की एक जन्मजात वर्तमान संविधान-विरोधी सरकार द्वारा संविधान की रक्षा की बातें मिथ्याचार के सिवाय और कुछ नहीं

न्यायपालिका और उसकी स्वतंत्रता का सत्य —अरुण माहेश्वरी राजनीति में जिस प्रकार लोगों के नित नये रंग दिखाई देते हैं उनसे शायद गिरगिट को भी रंग बदलने की अपनी क्षमता …

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क्या है रचनात्मक विपक्ष की भूमिका और उसमें क्या हैं अड़चनें

पक्ष, विपक्ष और जनता पी. के. खुराना चुनाव होते हैं, कोई राजनीतिक दल जीत जाता है,कोई हार जाता है। विजयी दल का नेता इसे जनता की जीत बताता है और …

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सिमटती आजादी : पिछले एक साल में भारत में पत्रकारिता के लिए माहौल खराब हुआ है

मीडिया वेबसाइट हूट की इंडिया फ्रीडम रिपोर्ट, 2017 इस नतीजे पर पहुंची है कि पिछले एक साल में भारत में पत्रकारिता के लिए माहौल खराब हुआ है. गौरी लंकेश समेत …

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उच्चतम न्यायालय इकलौती लोकतांत्रिक संस्था नहीं जिसे विश्वसनीयता के संकट का सामना करना पड़ रहा

उच्चतम न्यायालय से परे सुप्रीम कोर्ट में जो चल रहा है वह ‘प्याली में तूफान’ और ‘आपसी पारिवारिक विवाद’ से कहीं अधिक है. 12 जनवरी, 2018 को शीर्ष अदालत के …

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निरंकुश रहना चाहते हैं हमारे सत्ताधीश, संसदीय जनतंत्र को तो मानो वे बहुत मजबूरी में झेल रहे

ललित सुरजन कल 26 जनवरी है। गणतंत्र दिवस। भारतीय संविधान को अंगीकार तथा आत्मार्पित करने का दिन। उसकी रक्षा के लिए शपथ लेने का दिन। इस अवसर पर अपने देश …

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प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा पर महाभियोग प्रस्ताव ला सकती है माकपा

CPI-M can bring impeachment motion on Chief Justice Deepak Mishra नई दिल्ली, 23 जनवरी। मार्क्‍सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने कहा है कि वह देश के प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा के …

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जानिए क्यों अदालत में नहीं टिक पाएगा गुजरात में मोदी के मुख्य सचिव रहे अचल कुमार जोती का फैसला

चुनाव आयोग ने दिल्ली की आम आदमी पार्टी (आप) सरकार को तगड़ा झटका दिया है। चुनाव आयोग ने 'ऑफिस ऑफ प्रॉफिट' होल्डिंग के मामले में आप के 20 विधायकों को …

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अच्छे दिन की मिनिमम गवर्नमेंट मैक्सिमम गवर्नेंस : उ. प्र. में न्याय पंचायतों का खात्मा

उ. प्र. में न्याय पंचायतों का खात्मा, एक अनुचित निर्णय अरुण तिवारी स्वयं को भारतीय संस्कृति और परम्पराओं का पोषक दल बताने वाले भारतीय जनता पार्टी के विचारकों के लिए …

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सरकार बेईमान जज चाहती है ताकि वह उन्हें ब्लैकमेल कर सके – प्रशांत भूषण

लखनऊ, 16 दिसम्बर 2017। आतंकवाद के नाम पर कैद बेगुनाहों की रिहाई के आंदोलन के 10 साल पूरे होने पर रिहाई मंच द्वारा लखनऊ प्रेस क्लब में ‘न्यायिक भ्रष्टाचार और …

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पढ़ें मधु लिमये क्यों थे आरएसएस के विरोधी

Madhu Limaye मधु लिमये

श्री मधु लिमये जी का यह आलेख अवश्य बांचें, चाहे उससे असहमति भी हो आरएसएस क्या है? मैने राजनीति में 1937 मे प्रदेश किया। उस समय मेरी उम्र बहुत कम …

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राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव क्यों?

0 राजेंद्र शर्मा अगर चुनाव से अर्थ कांटे की टक्कर है, तो नीतीश कुमार के भाजपा-नीत एनडीए के उम्मीदवार, रामनाथ कोविंद के समर्थन की घोषणा करने के बाद, अब राष्ट्रपति …

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हमारे संविधान ने खुद ही लोकतंत्र को मज़ाक बना डाला है : कब तक तोते पालेंगे हम ?

पी. के. खुराना हम एक लोकतांत्रिक देश हैं और हम गर्व से कहते हैं कि हम विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र हैं। हमारा संविधान हमें कई अधिकार देता है जिनमें …

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‘हिन्दुत्व’ के रंगमंच पर दलित कठपुतली

नरेंद्र कुमार आर्य डॉ. अम्बेडकर का मानना था कि संविधान के तहत राष्ट्रपति अंग्रेजी संविधान के तहत ब्रिटिश राजा(मुकुट) की तरह ही शासन का प्रमुख होगा : "वह राज्य का …

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राष्ट्रपति ने मीडिया को दिखाया आईना, कहा – सत्ता में बैठे लोगों से सवाल करना चाहिए

नई दिल्ली, 25 मई। मीडिया से 'कल्याणपरक पत्रकारिता' करने की बात करते हुए राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने गुरुवार को कहा कि अगर प्रेस सत्ता में बैठे लोगों से सवाल पूछने …

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न्यायपालिका का भी कुछ कम ‘योगदान’ नहीं अयोध्या मामला उलझाये रखने में

कृष्ण प्रताप सिंह मानना पड़ेगा कि बार-बार रुलाने वाली देश की थकाऊ, उबाऊ और अभिजात व अमीरपरस्त न्यायप्रणाली के प्रति देशवासियों में अभी भी गजब का विश्वास है। बाबरी मस्जिद …

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धर्मनिरपेक्ष राजनीति की सीमाएं संघ परिवार तय करता है जिसे लांघकर कोई भी दल आत्महत्या नहीं करना चाहता

साम्प्रदायिकता ही तय करती है धर्मपिरपेक्षता की सीमा कथित धर्मनिरपेक्ष राजनीति की सीमाएं संघ परिवार तय करता है जिसे लांघकर कोई भी दल राजनीतिक आत्महत्या नहीं करना चाहता शाहनवाज आलम …

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कपिल मिश्रा अच्छे आदमी हैं, लेकिन आप क्यों भूलते हैं कि वह राजरोगी भी हैं !

दिल्ली : जलमंत्री कपिल मिश्रा को भी लगा राजरोग अरुण तिवारी परसों खबर मिली कि विशेषज्ञ समिति ने माना है कि श्री श्री रविशंकर द्वारा गत् वर्ष यमुना पर किए …

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दलित-मुस्लिम एकता के लिए डॉ. आंबेडकर को अनुसरण करने की जरूरत

एच.  एल.  दुसाध भाजपा-कांग्रेस के शासन में दलित-मुस्लिमों पर उत्पीड़न बढ़ा गत 10 फरवरी को देश के कई अखबारों में अमेरिका की एक स्वतंत्र संस्था की एक ऐसी रिपोर्ट छपी …

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ट्रंप के राष्ट्रपतित्व की सचाइयों के सामने

  प्रकाश कारात अमरीका में ट्रंप के राष्ट्रपतित्व के पहले दस दिनों ने अगर कुछ भी दिखाया है, तो यही कि ट्रंप चुनाव प्रचार के दौरान उसने जो वादे किए …

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आफताब आलम : पता ही नहीं चला कि कब काशीपुर क्रिकेट टीम का कैप्टन हुजी का कैप्टन बन गया

राजीव यादव नई दिल्ली, 18 जनवरी। दिसंबर 2007 में आतंकवाद के नाम पर उठाए गए आफताब आलम की 22 दिनों की रिहाई के बाद जेएनयू में उनसे पहली बार मुलाकात …

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जब-जब लोकतंत्र पर खतरे होते हैं तो न्यायपालिका ही लोकतंत्र को उन खतरों से बचाती है

जब-जब लोकतंत्र पर खतरे होते हैं तो न्यायपालिका ही लोकतंत्र को उन खतरों से बचाती है -एल.एस. हरदेनिया न्यायमूर्ति जगदीश सिंह खेहर ने ऐसे समय देश के मुख्य न्यायाधीश का …

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मोदी जिस छिछोरे राजनीतिक संस्कार का बीज बो रहे हैं, उसका वृक्ष विषैला फल देगा

मोदी जिस छिछोरे राजनीतिक संस्कार का बीज बो रहे हैं, उसका वृक्ष विषैला फल देगा पुष्परंजन गंगा का पवित्र पानी कम से कम केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद को प्रतिदिन पीना …

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स्वतंत्र न्यायपालिका देश में लोकतंत्र की सफलता का प्रमुख आधार – न्यायमूर्ति ठाकुर

संविधान महज दस्तावेज नहीं बल्कि पवित्र ग्रंथ है – न्यायमूर्ति ठाकुर नई दिल्ली, 1 दिसंबर। उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश तीरथ सिंह ठाकुर ने स्वतंत्र न्यायपालिका को लोकतंत्र की रीढ़ …

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मोदी सरकार के एजेंट की तरह ही काम कर रहे हैं नजीब जंग

एक तानाशाहीपूर्ण हमला/ इस जंग को रोको 0 प्रकाश कारात राष्ट्रीय राजधानी, दिल्ली में जो कुछ हो रहा है, सचमुच हैरान करने वाला है। 2015 की फरवरी में हुए विधानभाई …

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न्यायपालिका की आँखों में आँसू होना देश के भविष्य के लिए शुभ नहीं

न्यायपालिका की आँखों में आँसू होना देश के भविष्य के लिए शुभ नहीं क्या न्यायिक प्रकरणों का बढ़ता विलम्बन आपराधिक षड़यंत्र है? वीरेन्द्र जैन इन दिनों न्याय व्यवस्था पर खतरा …

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नए नरसंहार की तैयारी का मोहन भागवत का ऐलान, लेकिन बगैर गांधारी के धृतराष्ट्र साबित होंगे

‘महाभारत के लिए तैयार रहें हिंदू’ मोहन भागवत की ललकार रणधीर सिंह सुमन मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संघचालक मोहन भागवत ने  कहा है कि देश में …

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फेंकुजी अब दिल्ली में हैं ? दो साल में जनतंत्र का हुलिया कैसे बदला ?

बीते दो साल में जनतंत्र का हुलिया कैसे बदला ? पवित्र किताब की छाया में आकार लेता जनतंत्र – 2 भारतीय लोकतंत्र: दशा और दिशा को लेकर चन्द बातें – …

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एक और इमर्जेंसी !!!

इमर्जेंसी को दोहराने से बचने के लिए उसे याद रखना बहुत जरूरी है राजेंद्र शर्मा इकतालीस बरस पूरे होने पर इमर्जेंसी का जिक्र तक मुश्किल से सुनायी दे रहा है। …

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गुलबर्ग हत्याकांड-देरी से मिला अधूरा न्याय

नेहा दाभाड़े गत 2 जून 2016 को एक विशेष न्यायालय ने गुजरात के गुलबर्ग सोसायटी हत्याकांड मामले में निर्णय सुनाया। छियासठ में से 24 लोग दोषी पाए गए और 36 …

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बांसवाड़ा-दलितों ने भरी हुंकार, आरक्षण हमारा अधिकार

अनुसूचित जाति की बांसवाड़ा में ऐतिहासिक रैली जयपुर। राजस्थान के बांसवाड़ा जिले में बीती 17 जून 2016 को अनुसूचित जाति के लोगों ने राज्य सरकार की दलित विरोधी नीतियों के …

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बाबासाहब की मान्यता थी हिंदू राष्ट्र, देश के लिए सबसे बड़ी आपदा होगा

अंबेडकर और राष्ट्रवाद बाबासाहब को ‘राष्ट्रवादी’ या ‘देशभक्त’ बताना, तथ्यों के साथ खिलवाड़ बाबासाहब ‘‘अल्पसंख्यकों के हितों’’ की बात करते हैं, ‘राष्ट्र’’ के हितों की नहीं -इरफान इंजीनियर जिन राजनैतिक …

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उत्तराखंड की हार के बाद निशाने पर न्यायपालिका

रावत जी, बेहतर है कि घोड़ों के दम पर जीने के बजाय विधानसभा भंग कर दें और बजरंगियों से निबटने का मौका वोटरों को दें। जेटली ने कहा कि अदालती …

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कन्हैय्या कुमार व त्याच्या सहकारी विद्यार्थी नेत्यांनीही “जय भीम-लाल सलाम” चाच नारा बुलंद केला आहे

सुनील खोब्रागडे (Sunil Khobragade) हैद्राबाद विद्यापीठातील पीएचडीचा विद्यार्थी रोहित वेमुला यांच्या संस्थात्मक हत्येच्या पार्श्वभूमीवर निर्माण झालेल्या व्यवस्था विरोधी विद्यार्थी आंदोलनात “जय भीम- लाल सलाम ” ही घोषणा मध्यवर्ती घोषणा झाली …

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न्याय की दिशा तभी सही जब सबको जल्द मिले न्याय : राष्ट्रपति

इलाहाबाद हाईकोर्ट के डेढ़ सौवें साल पर आयोजित समारोह का राष्ट्रपति  प्रणब मुखर्जी ने किया उद्घाटन दस रुपये का सिक्का और दो डाक टिकट जारी किए रतिभान त्रिपाठी इलाहाबाद, 13 …

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जो अपने मौलिक अधिकारों की बात उठाएगा, उसे तू सियाचिन भेजने की धमकी देगा ?

और क्या हमारे सैनिक सियाचिन में इसलिए तैनात हैं कि तू साम्प्रदायिकता फैला कर देश तोड़ दे ? राजीव नयन बहुगुणा हमारी सेना सियाचिन में माइनस से कई डिग्री नीचे …

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किशोर न्याय (संशोधन) विधेयक के मायने

हमारे राजनीतिक नेतृत्व और मीडिया में यह साहस ही नहीं कि वह तथाकथित जनभावनाओं के खिलाफ जा सके [button-red url=”#” target=”_self” position=”left”]जावेद अनीस[/button-red] दिसम्बर 2012 में दिल्ली में एक चलती …

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… और दो आर्यों ने 10 फीसदी आर्यों के हित को, राष्ट्रहित घोषित कर दिया

पांच हजार साल से भारत पर काबिज विदेशी आर्यों के एकाधिकार को चुनौती देने वाली आरक्षण व्यवस्था को राष्ट्रहित में तुरन्त समाप्त किया जाये! ============== डॉ. पुरुषोत्तम मीणा ‘निरंकुश’ सुप्रीम …

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सत्ता के लिये मीडिया ही कैडर है, मीडिया ही मुद्दा है, मीडिया ही सियासी ताकत है और मीडिया ही दुश्मन है

पुण्य प्रसून बाजपेयी लोकतंत्र ताक पर और तानाशाही का नायाब लोकतंत्र सतह पर समझ ले मीडिया, सत्ता ही है पूर्ण लोकतंत्र और पूर्ण स्वराज जो सत्ता के साथ खड़ा, वह …

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राष्ट्रीय संस्कृति का प्रश्न ?

संस्कृति का मतलब मोटे तौर पर जीवन शैली से है। राष्ट्र संस्कृति का मतलब राष्ट्र के लोगों का रहन – सहन खान – पान, पहनावा – ओढ़ावा आचार – विचार …

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व्यापमं में फंसी मामा की सरकार ने की नागरिकों के मौलिक अधिकार को कुचलने की कोशिश

मध्य प्रदेश में नागरिकों के मौलिक अधिकार को कुचलने की कोशिश ‘काले कानून को चुनौती दी जाएगी भोपाल: 23 अगस्त 2015- मध्यप्रदेश सरकार ने ताबड़तोड़ ढंग से एक ऐसा विधेयक …

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याकूब मेमन की फांसी को रिहाई मंच ने भारतीय लोकतंत्र द्वारा दिन दहाड़े इंसाफ की हत्या बताया

न्यायपालिका भी देश के लोकतांत्रिक ढांचे को नेस्तानाबूत करने पर आमादा है मेमन की फांसी ने साबित किया अंबेडकर नहीं, मनु के सिद्धांत पर चलाया जा रहा है देश लखनऊ, …

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वैश्विक प्रसन्नता सूचकांक-भारतीयों की खुशी को लगा भोगवाद का ग्रहण

वैश्विक प्रसन्नता सूचकांक भारतीयों की खुशी को लगा भोगवाद का ग्रहण हम भारतीयों का जीवन दर्शन रहा है- ‘संतोषी सदा सुखी।’ हालात के मुताबिक खुद को ढाल लेने और अभाव …

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कानून अंधा है तो सुप्रीम कोर्ट क्या है?

कानून अंधा है तो सुप्रीम कोर्ट क्या है? हवाओं में उलझे तारों का तानाबाना हर मछली के लिए खासो इंतजाम खटमल, धीरे से नंगे फिरंगियों की बारात में जाना, यही …

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नरसंहार का सौंदर्यबोध-काली जनता को कालों के वध से क्या ऐतराज भला?

नरसंहार का सौंदर्यबोध गोरा गोरा सपना संजोये काली काली जनता को कालों के वध से क्या ऐतराज भला? अशुभ काला नहीं, कालों पर गोरों का आधिपात्य है ब्रांड को बचाओ, …

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गौहत्या पर प्रतिबंध – वैज्ञानिक पशुपालन या सांस्कृतिक राष्ट्रवादी राज्य

गौहत्या पर प्रतिबंध के लिए हिंदू राष्ट्रवादी संगठनों का अभियान राजनीतिक है हिंदू राष्ट्रवादी संगठनों द्वारा गौरक्षा के लिए चलाए जा रहे अभियान का उद्देश्य राजनैतिक है। ये संगठन उच्च जातियों …

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गुजरात पुलिस द्वारा नमाजी टोपी पहनाकर मॉक ड्रिल करवाना सांप्रदायिक गुजरात मॉडल

भाजपा शासित मध्य प्रदेश और गुजरात की जेलों में मुस्लिम कैदियों और उनके परिजनों के साथ किया जाता है सांप्रदायिक भेदभाव नई दिल्ली। सूरत के ओलपाड क्षेत्र में किया गया …

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‘अखिल भारत शिक्षा संघर्ष यात्रा-2014’ रैली व भोपाल महा-पड़ाव से एकजुट संघर्ष की शुरूआत

भोपाल। शिक्षा के निजीकरण, बाज़ारीकरण व सांप्रदायीकरण के खिलाफ़ और ‘केजी से पीजी तक’ पूरी तरह मुफ़्त व सरकार द्वारा वित्त-पोषित ‘समान शिक्षा व्यवस्था’ की स्थापना के लिए, ‘अखिल भारत …

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नवउदारवादी नीतियों की मार से बदहाल जनता की और तबाही होगी

सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया) ‘चौखम्भा राज’ सम्मेलन का प्रस्ताव ‘‘संविधान बनाने की कला में अब अलग कदम चौखम्भा राज की दिशा में होगा। गाँव जिला, प्रान्त तथा केंद्र, यही चार समान …

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लोग से दूर होता ‘लोकतन्त्र’

सुनील कुमार 15 अगस्त 1947 के बाद कुछ लोग इसको सत्ता हस्तांतरण मानते हैं तो कुछ राजनीतिक स्वतन्त्रता तथा कुछ लोगों को यह पूर्ण स्वतन्त्रता लगती है। स्वतन्त्र भारत मानने …

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अनिल सद्गोपाल ने की मध्य प्रदेश में अखिल भारत शिक्षा संघर्ष यात्रा-2014 की घोषणा

अखिल भारत शिक्षा संघर्ष यात्रा-2014 की सार्वजनिक घोषणा भोपाल। महान क्रांतिकारी शहीद भगत सिंह के जन्म दिवस के मौके पर मध्य प्रदेश के अनेक जन-पक्षीय संगठनों ने अखिल भारत शिक्षा …

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जज साहब नहीं चुनेंगे जज साहब को-लोकसभा की मुहर

नई दिल्ली। न्यायपालिका और सरकार के बीच तनाव का कारण बना राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग विधेयक-2014 लोकसभा में पास हो गया है। विधेयक के पक्ष में 367 वोट पड़े। राष्ट्रीय …

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कॉलेजियम सिस्टम पर सरकार और न्यायपालिका आमने-सामने

नई दिल्ली। क्या देश सरकार बनाम न्यायपालिका के संघर्ष के रास्ते पर चल पड़ा है? भले ही ऐसा कहना अभी जल्दबाजी हो और ऐसा सोचना न्यायसंगत न हो, लेकिन इस …

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कुछ इस कदर बदहवास हुए आंधियों से लोग/ जो पेड़ खोखले थे, उन्हीं से लिपट गए

भविष्य में ‘जन अपराधों की भूमि’ के तौर पर न जाना जाए ‘दुनिया का यह सबसे बड़ा जनतंत्र’ “अभिव्यक्ति के खतरे उठाने का वक्त़’ अब आ गया है” & “गैरबराबरी …

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न्यायपालिका की आजादी को बाधित करने की कोशिश

जाहिद खान पूर्व सॉलिसिटर जनरल और वरिष्ठ वकील गोपाल सुब्रह्मण्यम की उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश के तौर पर नियुक्ति मामले में राजग सरकार ने जिस तरह से गैरजिम्मेवाराना बर्ताव किया …

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न्यायपालिका की स्वतंत्रता से समझौता हुआ तो पद छोड़ देंगे जस्टिस लोढ़ा

नई दिल्ली। प्रधान न्यायाधीश जस्टिस आरएम लोढ़ा ने है कहा कि अगर उन्हें पता चलता है कि न्यायपालिका की स्वतंत्रता से समझौता हुआ है तो वे पद छोड़ने वाले पहले …

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बुनियादी गलती हिंदू राष्ट्रवाद की काट जाति अस्मिता समझने की है

कारपोरेट तौर तरीके से चलेगी केसरिया कारपोरेट सरकार, लोकतांत्रिक और संवैधानिक प्रावधानों के बगैर सब कुछ तो सत्ता के लिए है, जनता के लिए क्या है, फिर-फिर वही कारपोरेट राज। …

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अल्पसंख्यकों के लिए क्या है राजनैतिक दलों के घोषणा पत्रों में

इरफान इंजीनियर   चुनावों के पहले लगभग सभी मुख्य राजनैतिक दल अपने-अपने घोषणापत्र जारी करते हैं। कुछ लोग इन घोषणापत्रों में कोई रूचि नहीं लेते और ना ही उन्हें कोई …

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जब मीडिया ही बहक जाए ….

लोकतंत्र के चार स्तंभों में कार्यपालिका, न्यायपालिका, विधायिका की हालत खराब है और यदि ऐसे में चौथे स्तंभ मीडिया की भी हालत बिगड़ी तो देश का क्या होगा…. अरविंद केजरीवाल …

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चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल

अमलेन्दु उपाध्याय क्या चुनाव आयोग ने एक समुदाय विशेष को “कुत्ते का बच्चा” कहने की अनुमति प्रदान कर दी है ? ऐसा घोषित तौर पर है नहीं, लेकिन यदि आप …

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भाजपा का धर्मनिरपेक्ष उदारवादी मुखौटा- कितना झूठ कितना सच

मु. आरिफ पिछले कुछ दिनों से भारतीय जनता पार्टी के नेता मुस्लिम मतदाताओं में अपनी उदारवादी और सकारात्मक छवि बनाने का प्रयास कर रहे हैं। भाजपा के नेता अल्पसंख्यकों को …

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लोकतंत्र का पहला खंभा बने को उतावले 5वें खंभे वाले लोग

ललित सुरजन यह हर कोई जानता है कि जनतन्त्र के तीन स्तम्भ होते हैं-विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका। इन तीनों की अपनी-अपनी स्वायत्त भूमिकाएं हैं और इनके बीच इस तरह से …

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जनतंत्र की रक्षा के लिये तमाम मतदाताओं से अपील

प्रिय नागरिक साथियों, सड़सठ साल पहले आज़ाद भारत ने एक जनतांत्रिक संविधान को स्वीकारा जिसने सभी की सहभागिता को सुनिश्चित करते हुये समानता और न्याय के लिये एक मंच का …

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चुनाव में कहां हैं बच्चे

मप्र में करीब एक लाख लोगों ने बाल अधिकारों के पक्ष में किये हस्ताक्षर भोपाल: 25 मार्च 2014. क्राई (चाइल्ड राइट्स एंड यू), मध्य प्रदेश  लोक संघर्ष साझा मंच और …

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मीडिया के लिये जनता एक “पक्ष” नहीं, बल्कि “उपभोक्ता” है

इस चुनाव से राजनीति साफ़ हुयी न हुयी, मीडिया और गंदा हो गया! जिस मीडिया की अस्मिता और अस्मत कहीं और लुट-बिक चुकी है, उसे ही “वर्जिन मीडिया” समझकर अपना …

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सांप्रदायिक हिंसा के पीछे अलगाववादी राजनीति नहीं बल्कि वोट बैंक की राजनीति

सांप्रदायिक हिंसा 2013 (भाग-2) इरफान इंजीनियर किश्तवार, जम्मू एवं कश्मीर 9 अगस्त को ईद-उल-फितर की नमाज के बाद अचानक पत्थरबाजी शुरू हो गयी। नमाज के बाद बाहर निकल रहे लोगों …

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गुरू गोलवलकर को त्याग दिया मोदी ने

देश के संघात्मक ढाँचे के विरोधी थे संघ और गोलवलकर    एल.एस. हरदेनिया पिछले रविवार (12 जनवरी 2014) को गोवा में एक आमसभा को संबोधित करते हुये गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र …

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मामा के राज्य में बच्चों की स्थिति बहुत दयनीय

नाबालिग बच्चियों के साथ बलात्कार में मप्र देश में अव्वल है विधानसभा चुनाव में राजनैतिक दल प्रदेश के बच्चों की समस्याओं को संवेदनशीलता के साथ अपने चुनावी वादों और कार्यक्रमों …

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विशेष राज्य का क्यों, केंद्रशासित राज्य का दर्जा क्यों न मिले झारखंड को

आलोका झारखंड को विशेष राज्य का दर्जा दिये जाने को लेकर लंबी बहस चल पड़ी है। ज्यादातर लोगों का मत है कि झारखंड को विशेष राज्य का दर्जा मिल जाने …

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वनांचल की गोद में स्थित सोनभद्र से क्यों प्रकाशित हो रहा है वनांचल एक्सप्रेस

शिवदास वनांचल! बहुराष्ट्रीय कंपनियों, पूंजीपतियों, माफियाओं, नौकरशाहों और सफेदपोशों की ‘लूट का केंद्र’! इन दिनों सभी की निगाहें रत्नगर्भा रूपी इस इलाके पर टिकी हैं। इसकी अकूत खनिज संपदा को …

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मोदी और राहुल दोनों को ही “पीएम इन वेटिंग” के गड्ढे में फेंक देगा इतिहास

मोदी के नहले पे राहुल का दहला। राहुल गाँधी इस घटना से एक ताकतवर संविधानेतर सत्ता केंद्र के रूप में उभरे हैं। श्रीराम तिवारी अभी कल तक तो मीडिया के …

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ग़ुलाम जे़हनियत के बीमार ख़्वाब

किशन पटनायक स्मृति व्याख्यान भाग-2 “बेशक, अँधेरा गाढ़ा होता जा रहा है- यह नवआपातकाल है” से आगे की कड़ी रविकिरण जैन  ‘‘अपने सभी खनिज संसाधनों समेत जमीन तथा अन्य उत्पादन …

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बहुत जरूरी है संविधान पर हमले के विरुद्ध सार्थक जन-हस्तक्षेप

सवा सौ करोड़ भारतीयों के भाग्य का फैसला दो वेतनभोगी नहीं कर सकते  श्रीराम तिवारी भारत में लोकतांत्रिक और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा का  दायित्व यदि न्यायपालिका का है तो …

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इशरत थी निर्दोष, गुनाहगारों को सजा बाकी

केन्द्रीय जाँच ब्यूरो (सीबीआई) ने सुबूतों के साथ यह साबित कर दिया है कि इशरत जहाँ निर्दोष थी। सीबीआई का दावा है कि 2004 में गुजरात पुलिस के फर्जी एनकाउन्टर …

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भारतीय राजनीति की आकाशबेल : भाजपा

सुन्दर लोहिया यह भारतीय राजनीति की विडम्बना है कि इसके संविधान में आस्था न रखने वाली पार्टी संसद की मुख्य विपक्षी पार्टी के पद पर आसीन है और तीन राज्यों …

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गण की चिन्ता करनी ही होगी भारतीय गणराज्य को वरना न रुकेगा माओवाद

माओवादी हमले और भारतीय राष्ट्र-राज्य  अरुण कुमार हाल हाल तक माना यह जा रहा था कि माओवादियों पर भारत सरकार ने अँकुश लगाने में सफलता हासिल कर ली है। 1994 …

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विकास के नाम पर आदिवासियों का विनाश होता आया है, हो रहा है और होगा

165 कि0मी0 की पदयात्रा पूरी कर आदिवासियों का राँची में धरना  संविधान की पाँचवी अनुसूची तथा माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा दिये गये ऐतिहासिक समता निर्णय 1997, का राज्य सरकार तथा …

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ऐसे नहीं मना पाएगा आम आदमी दीपावली

डॉ. आशीष वशिष्ठ  अंधकार पर प्रकाश की विजय का प्रतीक है दीपावली लेकिन देश के राजनैतिक, आर्थिक, सामाजिक हालात इस कदर बिगड़े हुए हैं कि दूर-दूर तक अंधेरा ही अंधेरा …

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निराधार करती आधार और जनसँख्या रजिस्टर परियोजना का सच

गोपाल कृष्ण दिसम्बर १३ को वित्त की संसदीय समिति की जो रिपोर्ट संसद के दोनों सदनों में पेश की गयी उसने ये जगजाहिर कर दिया की भारत सरकार की शारीरिक …

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इस आंदोलनकारी लोकपाल में क्यों हैं कुछ खास तंत्रों को छूट?

हरिशंकर  शाही  अन्ना हजारे अपने लोकपाल को देश में उसी रूप से लागू करवाने के लिए अनशन कर रहें हैं जिस रूप या मसौदे के साथ उनके साथियों की टीम …

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अन्ना का आंदोलन: छोटे खतरे से बड़े खतरे की ओर

उदित   राज इसमें कोई शक नहीं है कि देश में महाभ्रष्टाचार एवं महंगाई चरम सीमा पर है। मीडिया की सक्रियता एवं मुख्य रूप से सवर्ण मध्यमवर्ग में गुस्सा एवं …

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फर्जी मुठभेड़ के गुनहगार पुलिस वालों को दे दो फांसी : उच्चतम न्यायालय का फरमान

    शेष नारायण सिंह सुप्रीम कोर्ट ने फर्जी मुठभेड़ के मामलों में बहुत ही सख्त रुख अपनाया है . राजस्थान के फर्जी मुठभेड़ के अक्टूबर २००६ के एक मामले की …

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अब उच्चतम न्यायालय से ही आस

शेष नारायण सिंह ग्रेटर नोयडा एक्सटेंशन में बिल्डरों से ज़मीन वापस लेकर कोर्ट ने उस ज़मीन के असली मालिक किसानों को न्याय दिलवाने की कोशिश की है . कोर्ट ने …

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जन – लोकपाल ही क्यों ? जन – राज्य क्यों नही ?

सुनील दत्ता ( वर्तमान दौर की सत्ता सरकारों में विद्यमान छोटे – बड़े छिद्रों से बढ़ते रहे धन पूंजी के भ्रष्टाचार ने हर विधयेक व कानून को भ्रष्टाचार रोकने में …

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व्यवस्था ने आत्महत्याएं करवा दीं

सुनील दत्ता   बुन्देलखण्ड में सैकड़ो किसानो द्वारा आत्महत्या {ये आत्महत्याए केवल सरकारों की उपेक्षा के ही परिणाम नही है , बल्कि देश में बीस सालो से लागू वैश्वीकरणवादी नीतियों …

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पुनिया साहब, यूपी के बाहर भी दलित रहते हैं

डॉ . आशीष    वशिष्ट यूपी के बाराबंकी से कांग्रेसी सांसद एवं पूर्व नौकरशाह  पन्ना लाल पुनिया को राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग का अध्यक्ष बनाकर कंेद्र सरकार ने उनके कंधों …

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ज़न-लोकपाल मसौदे पर जनता की राय भी ली जानी चाहिए..

श्रीराम तिवारी अप्रैल के प्रथम सप्ताह में अन्ना और उनके साथियों द्वारा किये गए जन्तर-मंतर पर धरना और तत विषयक जन-लोकपाल विधेयक पर मेने ‘मात्र-जन-लोकपाल विधेयक से भृष्टाचार ख़त्म नहीं …

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शिवराज का हुक्म, पहनो नेकर

खतरनाक और असंवैधानिक है मुख्यमंत्री का आव्हान : शासकीय कर्मचारी आरएसएस के सदस्य बनें, शाखाओं में जाएं -एल. एस. हरदेनिया मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चैहान ने शासकीय कर्मचारियों …

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मज़बूरी का नाम मनमोहन सिंह-….देश चले भगवान भरोसे…

श्रीराम तिवारी यु पी ऐ प्रथम के दौर में जब -जब आर्थिक सुधारों के नाम पर देश की सम्पदा और मेहनतकशों के श्रम को मुफ्त में लूटने के लिए कार्पोरेट …

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संकट देश का जवाब पीएम का

पुण्य प्रसून बाजपेयी क्या किसी देश का कोई प्रधानमंत्री देश को इस आधार पर भी चला सकता है, जहां मंत्रियों को बनाने में उसकी न चले और वही मंत्री जब …

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कानूनी इलाज का शगल

विजय प्रताप कभी आप लखनऊ के चारबाग रेलवे स्टेशन से बाहर निकले तो आपकी नजरों का सामना दूर-दूर तक एक तरह के ही साइन बोर्ड या होर्डिंगों से होगा। ‘‘यौन …

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सत्ता का लोकतंत्र

पुण्य प्रसून बाजपेयी विनायक सेन का राजद्रोह न्यायपालिका के आईने में देखा जाये या राजनीति के आईने में। जो कानून छत्तीसगढ़ में लाया गया उसकी धारायें ही जब गुलाम भारत …

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भ्रष्टाचार से लड़ाई

विजय प्रताप राजनैतिक व्यवस्था में समस्या को बनाये रखना और उससे लड़ने के नाम पर हवा में तलवार भांजते रहना जरुरी होता है। तभी आप योद्धा माने जाते हैं। मौजूदा …

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हर शाख पर उल्लू बैठे हैं…..

सन १९७५ में श्रीमती इन्दिरा गांधी द्वारा थोपे गए आपातकाल के दौरान बालकवि वैरागी ने एक कविता लिखी थी – बोए थे फूल, उग आए नागफनी के कांटें/ किस-किस को …

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राम चबूतरे से हिन्दू राष्ट्र के सिंहासन तक

‘इस दृष्टिकोण से हिन्दुस्थान की विदेशी नस्लों को या तो निश्चित तौर पर हिन्दू संस्कृति और भाषा अपना लेनी चाहिए, हिन्दू धर्म का सम्मान तथा उस पर श्रद्धा रखना सीखना …

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विनायक सेन को उम्र कैद

शीतला सिंह छत्तीसगढ़ में रायपुर की एक अदालत ने पीपुल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीज (पीयूसीएल) के उपाध्यक्ष और सामाजिक कार्यकर्ता विनायक सेन सहित नक्सल विचारक नारायण सान्याल और कोलकाता के …

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संसदीय प्रणाली में प्रधानमंत्री का एकछत्र राज्य : लोकतंत्र की तानाशाही

P. K. Khurana

संसदीय प्रणाली में प्रधानमंत्री का एकछत्र राज्य : लोकतंत्र की तानाशाही पी. के. खुराना हमारे देश में ब्रिटिश प्रणाली की संसदीय व्यवस्था लागू है। दोनों में सिर्फ इतना फर्क है …

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मोदी या सिस्टम, किसे बदलें ? व्यापार, सरकार का काम नहीं, सरकार को व्यापार में नहीं होना चाहिए

Narendra Modi An important message to the nation

मैंने कोई तीर नहीं मारा था, यह सामान्य ज्ञान की बात थी। बैंक घोटाला सामने आते ही मैंने कहा था कि यह संभव ही नहीं है कि ऐसा सिर्फ किसी …

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तीन तलाक : धर्म के स्वनियुक्त ठेकेदारों के खिलाफ संघर्ष जारी रखना होगा

Irfan Engineer

तीन तलाक निर्णय और धर्मनिरपेक्षता उच्चतम न्यायालय की पांच जजों की एक संविधान पीठ ने, 3:2 के बहुमत से, सिविल रिट याचिका क्रमांक 118/2016 (सायरा बानो विरूद्ध भारतीय संघ व …

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अगस्त के इस आखिरी हफ्ते के संकेत : सरकार का वास्तविक मिशन आरएसएस से संबद्ध माने जाने वाले आतंकवादियों को रिहा किया जाए

–अरुण माहेश्वरी राजनीति के बारे में साधारण प्रकार की चर्चाएं अक्सर दृष्ट की परिधि में ही सीमित होती है और इसीलिये हमेशा दृष्ट के भ्रम के रोग से ग्रसित रहने …

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मोदी-शाह-भाजपा-आरएसएस चौकड़ी को जीवन भर याद रहेगा अगस्त का यह आखिरी हफ्ता

पिछले एक हफ्ते के सारे घटनाक्रम से ऐसा लगता है जैसे अब भारतीय राजनीति का यह ‘गाय, गोबर, गोमूत्र, बीफ, बाबावाद, लव जेहाद, लींचिग और ‘देशभक्ति’ के शोर के युग …

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अगर न्यायपालिका कानून बनाने लगी तो हम खतरनाक स्थिति में हैं-काटजू

Justice Markandey Katju

सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) ने जो किया वो गैरकानूनी और असंवैधानिक (Illegal and unconstitutional,) है – काटजू दिल्ली, 08 अगस्त 2016।  भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीईआई) द्वारा खेल एवं प्रशासनिक …

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सलमान खान प्रकरण : हत्यारा भद्रलोक और लावारिस लोकतंत्र

Anil Pushker अनिल पुष्कर कवीन्द्र, प्रधान संपादक अरगला (इक्कीसवीं सदी की जनसंवेदना एवं हिन्दी साहित्य की त्रैमासिक पत्रिका)

न्यायाधीश न्याय के मंदिर में एक किताब है जिस पर न ‘लोक’ है न ‘जन’                           संविधान की सूरत में लिपटा हुआ है ‘धर्म’ हर रोज प्रार्थना में उठे हाथ जो …

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फ़ासीवादी ताक़तें जिस पैमाने पर सक्रिय हैं, उसी पैमाने पर उनका जवाब देना होगा

National News

हमारे राष्ट्रीय जीवन के हर हिस्से पर क़ाबिज़ होना चाहता है साम्राज्यवादी भूमंडलीकरण, कॉरपोरेट पूँजी और हिंदू राष्ट्रवाद का गठजोड़ अल्पसंख्यकों में काम करने वाली फिरके़वाराना और दकि़यानूसी ताक़तें भी …

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