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Search Results for: विधायिका

क्या विधायिका, न्याय पालिका एवं सरकारें संविधान का ईमानदारी से पालन कर रही हैं- रशादी

धारा 341 से धार्मिक प्रतिबन्ध हटाने की मांग को लेकर राष्ट्रीय ओलेमा कौंसिल का जंतर मंतर पर धरना व कार्मिक अनशन का सातवां दिन    नई दिल्ली- भारतीय संविधान की …

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अतिपिछड़ों के लिये भी विधायिका में आरक्षण का सवाल

अति पिछड़ी जातियों की राजनीतिक सहभागिता का उमड़ता सवाल देवेन्द्र कुमार बिहार की राजनीति में काफी सम्मान के साथ याद किये जाने वाले, समाजवादी धारा के अगुआ स्व. कर्पुरी ठाकुर …

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कारपोरेट राजनीति के बदलाव का गांधीवादी तरीका

Mahatma Gandhi statue in the Parliament premises. (File Photo: IANS)

लोकसभा चुनाव 2019 के नतीजे आने पर कई संजीदा साथियों ने गहरी चिंता व्यक्त की कि नरेंद्र मोदी की एक बार फिर जीत संविधान और लोकतंत्र के लिए बहुत बुरा …

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विडंबना : महान है ये जनता भी, इसे क्रांति चाहिए पर क्रांतिकारी नहीं

CHARAN SINGH RAJPUT चरण सिंह राजपूत, लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं।

अक्सर लोगों को यह कहते हुए सुना जाता है कि अन्याय से लड़ने वाले लोग (People fighting injustice) अब नहीं रहे हैं। इन लोगों के अनुसार देश में इतना अन्याय …

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अब मुसलमानों को सुना जाना चाहिए, उन्हें भी अपनी ’मन की बात’ कहने का अधिकार है

News Analysis and Expert opinion on issues related to India and abroad

मुस्लिम प्रतिनिधित्व का सवाल Question of Muslim representation भारत के मुस्लिम (Muslims of India) एक वंचित समुदाय (Deprived communities,) हैं जिनका दुनिया के सबसे बड़े संसदीय लोकतंत्र (parliamentary democracy) में …

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सरकार की अराजकता और विपक्ष के नकारेपन के खिलाफ जनता को खड़ा होना ही होगा

Narendra Modi An important message to the nation

ऐसा लग रहा है कि जैसे लोग भांग खाये घूम रहे हों। पूंजीपतियों के दबाव में मोदी सरकार ने किसानों को उसके खेत में और मजदूरों को फैक्टरियों, निजी कार्यालयों …

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युवराज कथा अनंता : घर का घर पाप छिपा रखने के लिए एकजुट होना/ जितना बड़ा घर होगा, उतना ही खाएगा देश को…

Amalendu Upadhyaya hastakshep अमलेन्दु उपाध्याय लेखक वरिष्ठ पत्रकार, राजनैतिक विश्लेषक व टीवी पैनलिस्ट हैं।

यह ख़बर मूलतः अक्टूबर 2010 में लिखी गई थी और इसमें बताया गया था कि किस तरह वंशवादी राजनीति (Dynastic politics) सभी दलों की बीमारी बन गई है। 2009 के …

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अरुंधति रॉय और डॉ. राम विलास शर्मा की आँखों से गांधी और अंबेडकर देखना

अरुंधति रॉय की किताब 'एक था डॉक्टर और एक था संत', (Arundhati Roy's book Ek Tha Doctor Ek Tha Sant)

विमर्शमूलक विखंडन और कोरी उकसावेबाजी में विभाजन की रेखा बहुत महीन होती है अरुंधति रॉय की किताब ‘एक था डॉक्टर और एक था संत‘, (Arundhati Roy’s book Ek Tha Doctor …

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भारत में लोकतंत्र का भविष्य

Election Commission of India. (Facebook/@ECI)

देश के उदारवादी तबके के बुद्धिजीवी और प्रगतिशील लोगों के साथ साथ आमजनों का भी बहुत बड़ा तबका है जो भारत में लोकतंत्र के भविष्य (future of democracy in India) …

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अराजक ताकतवर लोगों के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय की हुंकार से आएगी नई क्रांति

Supreme Court Chief Justice Ranjan Gogoi

नई दिल्ली। मुट्ठी भर लोगों ने देश की व्यवस्था (System of the country) को ऐसे कब्जा लिया है कि आम आदमी बस इसमें इस्तेमाल हो रहा है। ये लोग कार्यपालिका, …

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बड़े पुलिस अधिकारी का दर्द : नफ़रत की खेती जब लगातार होगी तो एक सुबोध सिंह नही रहेगा हम सभी ‘सुबोध’ हो जाएंगे!

बड़े पुलिस अधिकारी बोले, “नफ़रत की खेती जब लगातार होगी तो बीज वृक्ष बनेगा ही तब कोई एक सुबोध सिंह नही रहेगा हम सभी 'सुबोध' हो जाएंगे!” लखनऊ, 05 दिसंबर। …

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सीबीआई मामले में सर्वोच्च न्यायालय के फैसले का संदेश : जनतंत्र का अर्थ है तानाशाही का प्रतिरोध

सीबीआई मामले में सर्वोच्च न्यायालय के फैसले का संदेश जनतंत्र का अर्थ है तानाशाही का प्रतिरोध Democracy means resistance to dictatorship —अरुण माहेश्वरी सीबीआई मामले में सर्वोच्च न्यायालय के कल …

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प्रकृति से खिलवाड़ और हमारे लोकतंत्र के साथ खिलवाड़ पर मैं भी … ! #MeToo

MeToo Movement Reaches the Police in Gujarat

प्रकृति से खिलवाड़ और हमारे लोकतंत्र के साथ खिलवाड़ पर मैं भी … ! मैं भी … ! तूफान का रूप ले चुका है   पी. के. खुराना भारतवर्ष इस …

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दिवाकर सिंह और राकेश टिकैत जैसे किसान नेता चुनाव में बुरी तरह हारते क्यों हैं ?

दिवाकर सिंह और राकेश टिकैत जैसे किसान नेता चुनाव में बुरी तरह हारते क्यों हैं ? किसान, राजनीति और दुर्गति सत्येन्द्र पीएस उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले में गोरखपुर औद्योगिक …

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आधार परियोजना और आधार कानून नरसंहार की संभावना को जन्म देता है, सुप्रीम कोर्ट के चार जजों ने इसकी अनदेखी कर अन्याय किया

आधार परियोजना और आधार कानून नरसंहार की संभावना को जन्म देता है, सुप्रीम कोर्ट के चार जजों ने इसकी अनदेखी कर अन्याय किया नई दिल्ली, 28 सितंबर। सिटीजन्स फोरम फॉर …

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कौन सच्चा, गोलवरकर या भागवत : आरएसएस का ‘ग्लासनोस्त’ क्षण !

कौन सच्चा, गोलवरकर या भागवत : आरएसएस का ‘ग्लासनोस्त’ क्षण ! -अरुण माहेश्वरी नई दिल्ली में भविष्य का भारत विषय पर आरएसएस के सरसंघचालक मोहन भागवत के तीन भाषणों की …

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नफरत की हिंसा को जिलाए रखने के लिए एक मॉब लिंचिंग का ही आसरा

नफरत की हिंसा को जिलाए रखने के लिए एक मॉब लिंचिंग का ही आसरा –रामशरण जोशी गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने संसद में भीड़ हिंसा पर बोलते हुए दिल्ली में 1984 …

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नवसाम्राज्यवादी जुए के नीचे राष्ट्र-भक्ति और राष्ट्र-द्रोह की फर्जी जंग

नवसाम्राज्यवादी जुए के नीचे राष्ट्र-भक्ति और राष्ट्र-द्रोह की फर्जी जंग प्रेम सिंह     भारत का नागरिक जीवन, खास कर पिछले दो दशकों से, राष्ट्र-भक्ति और राष्ट्र-द्रोह के बीच छिड़ी जंग …

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भारत में समलैंगिकता अब अपराध नहीं, सर्वोच्च न्यायालय का बेहद अहम फैसला

भारत में समलैंगिकता अब अपराध नहीं, सर्वोच्च न्यायालय का बेहद अहम फैसला नई दिल्ली, 06 सितंबर। समलैंगिकता को अवैध बताने वाली भारतीय दंड संहिता की धारा 377 की वैधता पर …

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द किंग इज़ डेड, लांग लिव दि किंग : फिसल पड़े, तो हर-हर गंगे !

पी. के. खुराना सन् 1422 में फ्रांस के सम्राट चार्ल्स-6 की मृत्यु के बाद उनके पुत्र चार्ल्स-7 द्वारा सम्राट बनने के अवसर पर पहली बार एक ऐसी घोषणा की गई …

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संविधान की रक्षक न्यायपालिका खुद भारतीय संविधान की हत्या करने पर उतारू है

चंद्रशेखर को रिहा करो लोकतान्त्रिक संस्थाओं पर हमले बंद करो      सम्मेलन राजिंदर सच्चर को याद करते हुए सहारनपुर दलित हिंसा के एक साल मीडिया विजिल के दो साल पर लोकतांत्रिक …

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आरएसएस की तरह की एक जन्मजात वर्तमान संविधान-विरोधी सरकार द्वारा संविधान की रक्षा की बातें मिथ्याचार के सिवाय और कुछ नहीं

न्यायपालिका और उसकी स्वतंत्रता का सत्य —अरुण माहेश्वरी राजनीति में जिस प्रकार लोगों के नित नये रंग दिखाई देते हैं उनसे शायद गिरगिट को भी रंग बदलने की अपनी क्षमता …

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क्या है रचनात्मक विपक्ष की भूमिका और उसमें क्या हैं अड़चनें

पक्ष, विपक्ष और जनता पी. के. खुराना चुनाव होते हैं, कोई राजनीतिक दल जीत जाता है,कोई हार जाता है। विजयी दल का नेता इसे जनता की जीत बताता है और …

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अपने मामूली हित साधन के लिए आप और भाजपा लोकशाही की महत्वपूर्ण संस्था को तबाह कर रहे

यह जनहित में है और राष्ट्रहित में है कि नौकरशाही को तबाह न किया जाए क्योंकि यह हमारी आजादी की लड़ाई के महान कारीगर, सरदार वल्लभ भाई पटेल की विरासत …

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देश में आज हिन्दू राष्ट्र के अधीन राज्य और अंबेडकरवादी प्रजातांत्रिक राज्य के बीच मुकाबला, आप किस तरफ हैं?

हिन्दू राष्ट्र बनाम अम्बेडकरवादी राज्य –इरफान इंजीनियर अब से कुछ माह बाद, भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाली केन्द्र की एनडीए सरकार अपने कार्यकाल के चार वर्ष पूरे कर लेगी। …

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उच्चतम न्यायालय इकलौती लोकतांत्रिक संस्था नहीं जिसे विश्वसनीयता के संकट का सामना करना पड़ रहा

उच्चतम न्यायालय से परे सुप्रीम कोर्ट में जो चल रहा है वह ‘प्याली में तूफान’ और ‘आपसी पारिवारिक विवाद’ से कहीं अधिक है. 12 जनवरी, 2018 को शीर्ष अदालत के …

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प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा पर महाभियोग प्रस्ताव ला सकती है माकपा

CPI-M can bring impeachment motion on Chief Justice Deepak Mishra नई दिल्ली, 23 जनवरी। मार्क्‍सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने कहा है कि वह देश के प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा के …

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प्रो.भीमसिंह की सेना प्रमुख को सलाह, भारतीय संविधान की मर्यादा का पालन करें सियासी पचड़ों में न पड़ें

प्रो.भीमसिंह ने सेना प्रमुख से की अपील, छोड़ें राजनीतिक उलझनों को संसद पर, देखें सेना की भूमिका नेशनल पैंथर्स पार्टी के मुख्य संरक्षक, नेशनल लीगल एड कमेटी के चेयरमैन एवं …

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जानिए क्यों अदालत में नहीं टिक पाएगा गुजरात में मोदी के मुख्य सचिव रहे अचल कुमार जोती का फैसला

चुनाव आयोग ने दिल्ली की आम आदमी पार्टी (आप) सरकार को तगड़ा झटका दिया है। चुनाव आयोग ने 'ऑफिस ऑफ प्रॉफिट' होल्डिंग के मामले में आप के 20 विधायकों को …

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सरकार बेईमान जज चाहती है ताकि वह उन्हें ब्लैकमेल कर सके – प्रशांत भूषण

लखनऊ, 16 दिसम्बर 2017। आतंकवाद के नाम पर कैद बेगुनाहों की रिहाई के आंदोलन के 10 साल पूरे होने पर रिहाई मंच द्वारा लखनऊ प्रेस क्लब में ‘न्यायिक भ्रष्टाचार और …

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मिस्टर मोदी बार-बार नहीं चढ़ती ‘काठ की हांडी’

 तनवीर जाफ़री इसमें कोई संदेह नहीं है कि भारतीय लोकतंत्र की विधायिका व्यवस्था में सक्रिय कोई भी राजनैतिक दल इस एकमात्र उद्देश्य के लिए पूरी तरह सक्रिय व कार्यरत रहता …

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पढ़ें मधु लिमये क्यों थे आरएसएस के विरोधी

Madhu Limaye मधु लिमये

श्री मधु लिमये जी का यह आलेख अवश्य बांचें, चाहे उससे असहमति भी हो आरएसएस क्या है? मैने राजनीति में 1937 मे प्रदेश किया। उस समय मेरी उम्र बहुत कम …

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लालू नीतीश विवाद क्या वही है जो मीडिया में दिख रहा या जड़ें कहीं और हैं?

लोकतांत्रिक व्यवस्था पर सवाल खड़े करता लालू नीतीश विवाद Lalu Nitish controversy raises questions on democratic setup वीरेन्द्र जैन एक आम नागरिक को समझने में मुश्किल हो सकती है कि …

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‘हिन्दुत्व’ के रंगमंच पर दलित कठपुतली

नरेंद्र कुमार आर्य डॉ. अम्बेडकर का मानना था कि संविधान के तहत राष्ट्रपति अंग्रेजी संविधान के तहत ब्रिटिश राजा(मुकुट) की तरह ही शासन का प्रमुख होगा : "वह राज्य का …

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राष्ट्रपति ने मीडिया को दिखाया आईना, कहा – सत्ता में बैठे लोगों से सवाल करना चाहिए

नई दिल्ली, 25 मई। मीडिया से 'कल्याणपरक पत्रकारिता' करने की बात करते हुए राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने गुरुवार को कहा कि अगर प्रेस सत्ता में बैठे लोगों से सवाल पूछने …

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न्यायपालिका का भी कुछ कम ‘योगदान’ नहीं अयोध्या मामला उलझाये रखने में

कृष्ण प्रताप सिंह मानना पड़ेगा कि बार-बार रुलाने वाली देश की थकाऊ, उबाऊ और अभिजात व अमीरपरस्त न्यायप्रणाली के प्रति देशवासियों में अभी भी गजब का विश्वास है। बाबरी मस्जिद …

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सिर्फ भाजपा विरोध से तो न होगी विपक्षी एकता, जनता का कार्यक्रम कहां है

बहुत कठिन है डगर विपक्षी एकता की 0 राजेंद्र शर्मा विधानसभाई चुनावों तथा उपचुनावों के ताजा चक्र के बाद से और खासतौर पर उत्तर प्रदेश के चुनाव के बाद से …

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मोदी सरकार : 78 मंत्रियों में से 24 के खिलाफ आपराधिक मामले, 76 करोड़पति

  अरुण तिवारी जनगणना-2011 के अनुसार, कुल भारतीय ग्रामीण आबादी में से 74.5 प्रतिशत परिवारों की आय पांच हजार रुपये प्रति माह से कम है। इसके विपरीत भारत की वर्तमान …

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दलित-मुस्लिम एकता के लिए डॉ. आंबेडकर को अनुसरण करने की जरूरत

एच.  एल.  दुसाध भाजपा-कांग्रेस के शासन में दलित-मुस्लिमों पर उत्पीड़न बढ़ा गत 10 फरवरी को देश के कई अखबारों में अमेरिका की एक स्वतंत्र संस्था की एक ऐसी रिपोर्ट छपी …

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स्वतंत्र न्यायपालिका देश में लोकतंत्र की सफलता का प्रमुख आधार – न्यायमूर्ति ठाकुर

संविधान महज दस्तावेज नहीं बल्कि पवित्र ग्रंथ है – न्यायमूर्ति ठाकुर नई दिल्ली, 1 दिसंबर। उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश तीरथ सिंह ठाकुर ने स्वतंत्र न्यायपालिका को लोकतंत्र की रीढ़ …

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मोदी सरकार के एजेंट की तरह ही काम कर रहे हैं नजीब जंग

एक तानाशाहीपूर्ण हमला/ इस जंग को रोको 0 प्रकाश कारात राष्ट्रीय राजधानी, दिल्ली में जो कुछ हो रहा है, सचमुच हैरान करने वाला है। 2015 की फरवरी में हुए विधानभाई …

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न्यायपालिका की आँखों में आँसू होना देश के भविष्य के लिए शुभ नहीं

न्यायपालिका की आँखों में आँसू होना देश के भविष्य के लिए शुभ नहीं क्या न्यायिक प्रकरणों का बढ़ता विलम्बन आपराधिक षड़यंत्र है? वीरेन्द्र जैन इन दिनों न्याय व्यवस्था पर खतरा …

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नए नरसंहार की तैयारी का मोहन भागवत का ऐलान, लेकिन बगैर गांधारी के धृतराष्ट्र साबित होंगे

‘महाभारत के लिए तैयार रहें हिंदू’ मोहन भागवत की ललकार रणधीर सिंह सुमन मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संघचालक मोहन भागवत ने  कहा है कि देश में …

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जब कार्यपालिका फेल हो जाती है, न्यायपालिका तभी दखल देती है-चीफ जस्टि‍स टीएस ठाकुर

हमारा इरादा किसी के अधिकार क्षेत्र में दखल देना नहीं  : न्यायमूर्ति ठाकुर नयी दिल्ली 06 जून। उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश तीरथ सिंह ठाकुर ने न्यायपालिका के अधिकार क्षेत्र …

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बाबासाहब की मान्यता थी हिंदू राष्ट्र, देश के लिए सबसे बड़ी आपदा होगा

अंबेडकर और राष्ट्रवाद बाबासाहब को ‘राष्ट्रवादी’ या ‘देशभक्त’ बताना, तथ्यों के साथ खिलवाड़ बाबासाहब ‘‘अल्पसंख्यकों के हितों’’ की बात करते हैं, ‘राष्ट्र’’ के हितों की नहीं -इरफान इंजीनियर जिन राजनैतिक …

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उत्तराखंड : मोदी सरकार की घिनौनी कोशिश को, सतर्क न्यायपालिका ने विफल कर दिया

Uttarakhand : Modi government’s disgusting attempt, foiled by alert judiciary उत्तराखंड : जनतंत्र का तमाचा Uttarakhand : democracy slap 0 प्रकाश कारात उत्तराखंड में हरीश रावत की सरकार को गिराने …

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उत्तराखंड की हार के बाद निशाने पर न्यायपालिका

रावत जी, बेहतर है कि घोड़ों के दम पर जीने के बजाय विधानसभा भंग कर दें और बजरंगियों से निबटने का मौका वोटरों को दें। जेटली ने कहा कि अदालती …

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बायोमेट्रिक आधार -नागरिकों को खुफिया तंत्र का गुलाम बनाने की तरकीब से लोकतंत्र को खतरा

आधार विधयेक से सरकार को यह अधिकार मिल रहा है कि वह किसी का ‘सिविल डेथ’ कर सकती है यानी कि किसी देशवासी को सरकार के रिकॉर्ड में मृत कर …

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बेटियों को कोख में मारने वाले भारत माता की जय लगाने के लिए ज़बर्दस्ती कर रहे

‘ भारत माता की जय ‘ कहना ही सिर्फ देशभक्ति नहीं हो सकता अंधराष्ट्रभक्ति देशभक्ति नहीं हो सकती महाराष्ट्र में विधायक का निलंबन आश्चर्यजनकः एसडीपीआई नई दिल्ली 17मार्च। सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ …

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न्याय की दिशा तभी सही जब सबको जल्द मिले न्याय : राष्ट्रपति

इलाहाबाद हाईकोर्ट के डेढ़ सौवें साल पर आयोजित समारोह का राष्ट्रपति  प्रणब मुखर्जी ने किया उद्घाटन दस रुपये का सिक्का और दो डाक टिकट जारी किए रतिभान त्रिपाठी इलाहाबाद, 13 …

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केजरीवाल सरकार डीडीसीए घोटाले की जाँच के लिए समिति गठित करने की अधिकारी- जस्टिस काटजू

नई दिल्ली। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल और उपराज्यपाल नजीब जंग की जंग में कूदते हुए सर्वोच्च न्यायालय के अवकाश प्राप्त न्यायाधीश जस्टिस मार्कण्डेय काटजू ने कहा है कि केजरीवाल …

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सॉरी मी लॉर्ड, अनुच्छेद 44 अदालत लागू नहीं कर सकती

पर्सनल लॉ में सुधार लैंगिक समानता के लिए हो राष्ट्रीय एकीकरण के लिए नहीं  – इरफान इंजीनियर  उच्चतम न्यायालय ने एक बार फिर केंद्र सरकार से कहा है कि वह शपथपत्र दाखिल …

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सत्ता के लिये मीडिया ही कैडर है, मीडिया ही मुद्दा है, मीडिया ही सियासी ताकत है और मीडिया ही दुश्मन है

पुण्य प्रसून बाजपेयी लोकतंत्र ताक पर और तानाशाही का नायाब लोकतंत्र सतह पर समझ ले मीडिया, सत्ता ही है पूर्ण लोकतंत्र और पूर्ण स्वराज जो सत्ता के साथ खड़ा, वह …

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राष्ट्रीय संस्कृति का प्रश्न ?

संस्कृति का मतलब मोटे तौर पर जीवन शैली से है। राष्ट्र संस्कृति का मतलब राष्ट्र के लोगों का रहन – सहन खान – पान, पहनावा – ओढ़ावा आचार – विचार …

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व्यापमं में फंसी मामा की सरकार ने की नागरिकों के मौलिक अधिकार को कुचलने की कोशिश

मध्य प्रदेश में नागरिकों के मौलिक अधिकार को कुचलने की कोशिश ‘काले कानून को चुनौती दी जाएगी भोपाल: 23 अगस्त 2015- मध्यप्रदेश सरकार ने ताबड़तोड़ ढंग से एक ऐसा विधेयक …

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1947 स्वतंत्रता की असलियत

प्रस्तावना —- 1947 की स्वतंत्रता के सन्दर्भ में देश की आम जनता मुख्यत: यही बात जानती है कि 15 अगस्त को देश ब्रिटिश आधिपत्य से पूर्ण रूप से स्वतंत्र हो …

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कानून अंधा है तो सुप्रीम कोर्ट क्या है?

कानून अंधा है तो सुप्रीम कोर्ट क्या है? हवाओं में उलझे तारों का तानाबाना हर मछली के लिए खासो इंतजाम खटमल, धीरे से नंगे फिरंगियों की बारात में जाना, यही …

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नरसंहार का सौंदर्यबोध-काली जनता को कालों के वध से क्या ऐतराज भला?

नरसंहार का सौंदर्यबोध गोरा गोरा सपना संजोये काली काली जनता को कालों के वध से क्या ऐतराज भला? अशुभ काला नहीं, कालों पर गोरों का आधिपात्य है ब्रांड को बचाओ, …

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हाशिमपुरा नरसंहार – ऊपरी न्यायालय में मजबूत पैरवी करे सरकार

लचर पैरवी के कारण बचे हाशिमपुरा नरसंहार के आरोपी -आइपीएफ लखनऊ, 22 मार्च 2015, आल इण्डिया पीपुल्स फ्रंट के राष्ट्रीय प्रवक्ता और पूर्व आईजी एस0 आर0 दारापुरी ने कहा है …

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‘अखिल भारत शिक्षा संघर्ष यात्रा-2014’ रैली व भोपाल महा-पड़ाव से एकजुट संघर्ष की शुरूआत

भोपाल। शिक्षा के निजीकरण, बाज़ारीकरण व सांप्रदायीकरण के खिलाफ़ और ‘केजी से पीजी तक’ पूरी तरह मुफ़्त व सरकार द्वारा वित्त-पोषित ‘समान शिक्षा व्यवस्था’ की स्थापना के लिए, ‘अखिल भारत …

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लोग से दूर होता ‘लोकतन्त्र’

सुनील कुमार 15 अगस्त 1947 के बाद कुछ लोग इसको सत्ता हस्तांतरण मानते हैं तो कुछ राजनीतिक स्वतन्त्रता तथा कुछ लोगों को यह पूर्ण स्वतन्त्रता लगती है। स्वतन्त्र भारत मानने …

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अनिल सद्गोपाल ने की मध्य प्रदेश में अखिल भारत शिक्षा संघर्ष यात्रा-2014 की घोषणा

अखिल भारत शिक्षा संघर्ष यात्रा-2014 की सार्वजनिक घोषणा भोपाल। महान क्रांतिकारी शहीद भगत सिंह के जन्म दिवस के मौके पर मध्य प्रदेश के अनेक जन-पक्षीय संगठनों ने अखिल भारत शिक्षा …

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कारपोरेट घरानों के कब्जे के चलते जनसाधारण की पहुंच से बाहर हो गए चुनाव

दसवां किशन पटनायक स्मृति व्याख्यान देश की संसद के 543 सदस्यों में से 400 से ज्यादा करोड़पति- पन्नालाल सुराणा जयंत कुमार कश्यप भारत की चुनाव प्रणाली की दो प्रमुख खामियां …

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कुछ इस कदर बदहवास हुए आंधियों से लोग/ जो पेड़ खोखले थे, उन्हीं से लिपट गए

भविष्य में ‘जन अपराधों की भूमि’ के तौर पर न जाना जाए ‘दुनिया का यह सबसे बड़ा जनतंत्र’ “अभिव्यक्ति के खतरे उठाने का वक्त़’ अब आ गया है” & “गैरबराबरी …

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क्यों जी, आप सेकुलर हो?

— क़मर वहीद नक़वी क्यों जी, आप सेकुलर हो? तो बन्द करो यह पाखंड! पक गये सेकुलरिज़्म सुन-सुन कर! अब और बेवक़ूफ़ नहीं बनेंगे! पुणे पर इतना बोले, सहारनपुर पर …

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मोदी जी सवाल यह है कि

सुन्दर लोहिया सवाल यह है कि अमितशाह पर जब गम्भीर आरोप के तहत सीबीआई की अदालत में फर्जी मुठभेड़ के मामले चल रहे हैं, तो उन्हें भाजपा का राष्ट्रीय अध्यक्ष …

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‘सत्ता किसकी-जनता की’ – नागरिक परिषद

जनता के बुनियादी मुद्दों पर जन आंदोलन का निर्माण होगा- नागरिक परिषद राज्य स्तरीय संयोजक मंडल व प्रदेश स्तरीय समिति का गठन किया गया लखनऊ 6 जुलाई 2014। आम नागरिकों …

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अल्पसंख्यकों के लिए क्या है राजनैतिक दलों के घोषणा पत्रों में

इरफान इंजीनियर   चुनावों के पहले लगभग सभी मुख्य राजनैतिक दल अपने-अपने घोषणापत्र जारी करते हैं। कुछ लोग इन घोषणापत्रों में कोई रूचि नहीं लेते और ना ही उन्हें कोई …

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धार्मिक उन्माद के भरोसे चुनाव गंगा को पार करने वाली शक्तियां देश को गृहयुद्ध में झोंक देंगी

इस चुनाव में देश की निगाह हम बनारसियों पर रहेगी। यह शहर न सिर्फ भगवान शिव के लिए जाना जाता है अपितु महात्मा बुद्ध, कबीर एवं रैदास की कर्मस्थली रही …

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गंदी हो चली है संसदीय लोकतंत्र की पोशाक, जरूरत है इसे धो कर नया करने की #NOTA

आंबेडकर नगर का सवाल ‘सखा’ ( #NOTA ) दबाना वोट न डालना नहीं है बल्कि अस्वीकार की आवाज उठाते हुए वोट डालना है… कुमार प्रशांत सारे देश में चुनाव की तेज …

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जब मीडिया ही बहक जाए ….

लोकतंत्र के चार स्तंभों में कार्यपालिका, न्यायपालिका, विधायिका की हालत खराब है और यदि ऐसे में चौथे स्तंभ मीडिया की भी हालत बिगड़ी तो देश का क्या होगा…. अरविंद केजरीवाल …

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चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल

अमलेन्दु उपाध्याय क्या चुनाव आयोग ने एक समुदाय विशेष को “कुत्ते का बच्चा” कहने की अनुमति प्रदान कर दी है ? ऐसा घोषित तौर पर है नहीं, लेकिन यदि आप …

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भाजपा का धर्मनिरपेक्ष उदारवादी मुखौटा- कितना झूठ कितना सच

मु. आरिफ पिछले कुछ दिनों से भारतीय जनता पार्टी के नेता मुस्लिम मतदाताओं में अपनी उदारवादी और सकारात्मक छवि बनाने का प्रयास कर रहे हैं। भाजपा के नेता अल्पसंख्यकों को …

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देश की एकता, अखण्डता और खुशहाली का है डॉ. अम्बेडकर का मिशन

आज भी प्रासांगिक हैं डॉ. अंबेडकर अमित सिंह भारत के इतिहासकारों ने अंबेडकर को वो स्थान नही दिया जिसके वो हकदार हैं। इसका कारण कुछ भी हो सकता है पर …

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लोकतंत्र का पहला खंभा बने को उतावले 5वें खंभे वाले लोग

ललित सुरजन यह हर कोई जानता है कि जनतन्त्र के तीन स्तम्भ होते हैं-विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका। इन तीनों की अपनी-अपनी स्वायत्त भूमिकाएं हैं और इनके बीच इस तरह से …

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हिटलर– मोदी का फासीवाद : भारतीय मुसलमान और 2014 का आम चुनाव

शमशाद इलाही शम्स भारत की 16वीं संसद का चुनाव कथित भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। गत दस वर्षो की कांग्रेस हुकूमत और उसके दौरान जनता के …

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चुनाव में कहां हैं बच्चे

मप्र में करीब एक लाख लोगों ने बाल अधिकारों के पक्ष में किये हस्ताक्षर भोपाल: 25 मार्च 2014. क्राई (चाइल्ड राइट्स एंड यू), मध्य प्रदेश  लोक संघर्ष साझा मंच और …

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मीडिया के लिये जनता एक “पक्ष” नहीं, बल्कि “उपभोक्ता” है

इस चुनाव से राजनीति साफ़ हुयी न हुयी, मीडिया और गंदा हो गया! जिस मीडिया की अस्मिता और अस्मत कहीं और लुट-बिक चुकी है, उसे ही “वर्जिन मीडिया” समझकर अपना …

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किसानों ने किया संघर्ष का एलान

छिंदवाड़ा। जाने-माने किसान नेता डॉ. सुनीलम ने कांग्रेस की सरकार के संरक्षण में मुकेश अंबानी का बिजली कंपनियों में घोटाला करने तथा अदानी द्वारा छह करोड़ वर्ग मीटर जमीन मिट्टी …

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घोषणा पत्र में ‘ किसान एजेण्डा 2014’ शामिल करें राजनैतिक दल- किसान संगठनों की माँग

लखनऊ, 3 मार्च। किसान संगठनों की आज यहाँ हुयी बैठक में सभी राजनैतिक दलों से अपील की गयी है कि वे लोकसभा चुनाव के लिये जारी अपने घोषणा पत्र में …

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यह कांग्रेस के अहंकार की हार है

देवेन्द्र कुमार कभी गाय-गोबर पट्टी के रूप में पहचाना जाने वाला हिन्दी भाषा-भाषी चार प्रदेशों में, लोक सभा चुनाव के पूर्व सेमीफाइनल के बतौर देखा जाने वाला विधान सभा चुनावों …

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आरडीएफ की मांग- तरुण तेजपाल के घिनौने यौन अत्याचार का दोष तय करो!

पीड़ित महिला पत्रकार के पक्ष में न्यायपूर्ण कार्यवाई करो!! साम्राज्यवादी-सामंतवादी संस्कृति को ध्वस्त करो!! नई दिल्ली। क्रांतिकारी जनवादी मोर्चा (आरडीएफ) ने तहलका में काम करने वाले आम पत्रकार और पीड़िता …

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मामा के राज्य में बच्चों की स्थिति बहुत दयनीय

नाबालिग बच्चियों के साथ बलात्कार में मप्र देश में अव्वल है विधानसभा चुनाव में राजनैतिक दल प्रदेश के बच्चों की समस्याओं को संवेदनशीलता के साथ अपने चुनावी वादों और कार्यक्रमों …

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वनांचल की गोद में स्थित सोनभद्र से क्यों प्रकाशित हो रहा है वनांचल एक्सप्रेस

शिवदास वनांचल! बहुराष्ट्रीय कंपनियों, पूंजीपतियों, माफियाओं, नौकरशाहों और सफेदपोशों की ‘लूट का केंद्र’! इन दिनों सभी की निगाहें रत्नगर्भा रूपी इस इलाके पर टिकी हैं। इसकी अकूत खनिज संपदा को …

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मोदी और राहुल दोनों को ही “पीएम इन वेटिंग” के गड्ढे में फेंक देगा इतिहास

मोदी के नहले पे राहुल का दहला। राहुल गाँधी इस घटना से एक ताकतवर संविधानेतर सत्ता केंद्र के रूप में उभरे हैं। श्रीराम तिवारी अभी कल तक तो मीडिया के …

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अंग्रेजी में काम न होगा, फिर से देश गुलाम न होगा

वाराणसी। उच्च न्यायालयों और सर्वोच्च न्यायालय में आज भी अंग्रेजी का वर्चस्व कायम है। तमिलनाडु, गुजरात और छत्तीसगढ़ की विधायिकाओं द्वारा अपने उच्च न्यायलयों में उन राज्यों की भाषा- तमिल, …

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लोकतंत्र को ढकेलती न्यायपालिका

राजनीति आज सुधार की नहीं बल्कि दवाब की राजनीति बनकर रह गयी है प्रशांत कुमार दुबे विधायिका का कार्य है कानून बनाना और न्यायालयीन एवं न्याय व्यवस्था का  जनहितकारी स्वरूप …

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बहुत जरूरी है संविधान पर हमले के विरुद्ध सार्थक जन-हस्तक्षेप

सवा सौ करोड़ भारतीयों के भाग्य का फैसला दो वेतनभोगी नहीं कर सकते  श्रीराम तिवारी भारत में लोकतांत्रिक और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा का  दायित्व यदि न्यायपालिका का है तो …

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इशरत थी निर्दोष, गुनाहगारों को सजा बाकी

केन्द्रीय जाँच ब्यूरो (सीबीआई) ने सुबूतों के साथ यह साबित कर दिया है कि इशरत जहाँ निर्दोष थी। सीबीआई का दावा है कि 2004 में गुजरात पुलिस के फर्जी एनकाउन्टर …

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भारतीय राजनीति की आकाशबेल : भाजपा

सुन्दर लोहिया यह भारतीय राजनीति की विडम्बना है कि इसके संविधान में आस्था न रखने वाली पार्टी संसद की मुख्य विपक्षी पार्टी के पद पर आसीन है और तीन राज्यों …

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गण की चिन्ता करनी ही होगी भारतीय गणराज्य को वरना न रुकेगा माओवाद

माओवादी हमले और भारतीय राष्ट्र-राज्य  अरुण कुमार हाल हाल तक माना यह जा रहा था कि माओवादियों पर भारत सरकार ने अँकुश लगाने में सफलता हासिल कर ली है। 1994 …

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ऐसे नहीं मना पाएगा आम आदमी दीपावली

डॉ. आशीष वशिष्ठ  अंधकार पर प्रकाश की विजय का प्रतीक है दीपावली लेकिन देश के राजनैतिक, आर्थिक, सामाजिक हालात इस कदर बिगड़े हुए हैं कि दूर-दूर तक अंधेरा ही अंधेरा …

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अन्ना का आंदोलन: छोटे खतरे से बड़े खतरे की ओर

उदित   राज इसमें कोई शक नहीं है कि देश में महाभ्रष्टाचार एवं महंगाई चरम सीमा पर है। मीडिया की सक्रियता एवं मुख्य रूप से सवर्ण मध्यमवर्ग में गुस्सा एवं …

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बोलने की आजादी पर सरकारी ताला डालने की कोशिश

आशीष वशिष्ठ भ्रष्टाचार पर नकेल डालने के लिए मजबूत जन लोकपाल की वकालत करने वाले समाजसेवी अन्ना के अनशन को फेल करने में पूरा सरकारी तंत्र जुटा है। कांग्रेस प्रवक्ता …

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‘हमें सरकार से कोई उम्मीद नहीं’

जस्टिस हेगड़े की मजबूरी विजय प्रताप लोकपाल पर तमाम बहसों के बीच कर्नाटक के लोकपाल जस्टिस संतोष हेगड़े को अंततः कहना पड़ा कि कर्नाटक में खनन माफियाओं के खिलाफ उनकी …

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फर्जी मुठभेड़ के गुनहगार पुलिस वालों को दे दो फांसी : उच्चतम न्यायालय का फरमान

    शेष नारायण सिंह सुप्रीम कोर्ट ने फर्जी मुठभेड़ के मामलों में बहुत ही सख्त रुख अपनाया है . राजस्थान के फर्जी मुठभेड़ के अक्टूबर २००६ के एक मामले की …

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जन – लोकपाल ही क्यों ? जन – राज्य क्यों नही ?

सुनील दत्ता ( वर्तमान दौर की सत्ता सरकारों में विद्यमान छोटे – बड़े छिद्रों से बढ़ते रहे धन पूंजी के भ्रष्टाचार ने हर विधयेक व कानून को भ्रष्टाचार रोकने में …

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पुनिया साहब, यूपी के बाहर भी दलित रहते हैं

डॉ . आशीष    वशिष्ट यूपी के बाराबंकी से कांग्रेसी सांसद एवं पूर्व नौकरशाह  पन्ना लाल पुनिया को राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग का अध्यक्ष बनाकर कंेद्र सरकार ने उनके कंधों …

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नहीं चाहिए लोकतंत्र विरोधी लोकपाल

अमलेन्दु उपाध्याय इस बार आजादी की सालगिरह कुछ अलग किस्म की होने की उम्मीद है। कारण है कि महात्मा गांधी के इक्कीसवीं सदी के अवतार अन्ना हजारे ऐलान कर चुके …

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जन प्रतिनिधित्व के अधिकार को लेकर छिड़ी बहस?

तनवीर जाफरी वैसे तो दुनिया की नज़रों में भारतीय संविधान के अंतर्गत देश की संसदीय व्यवस्था ही भाारतीय जनमानस का प्रतिनिधित्व करती है। और देश के मतदाता देश की स्वतंत्रता …

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संकट देश का जवाब पीएम का

पुण्य प्रसून बाजपेयी क्या किसी देश का कोई प्रधानमंत्री देश को इस आधार पर भी चला सकता है, जहां मंत्रियों को बनाने में उसकी न चले और वही मंत्री जब …

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मिस्र के जनांदोलन की बदलती तस्वीर

जगदीश्वर  चतुर्वेदी मिस्र के जनांदोलन की तस्वीर और भी ज्यादा जटिल रूप ग्रहण करती जा रही है और राष्ट्रपति हुसैनी मुबारक की राजनीतिक चालें पिटती चली जा रही हैं। सेना …

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सत्ता का लोकतंत्र

पुण्य प्रसून बाजपेयी विनायक सेन का राजद्रोह न्यायपालिका के आईने में देखा जाये या राजनीति के आईने में। जो कानून छत्तीसगढ़ में लाया गया उसकी धारायें ही जब गुलाम भारत …

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भ्रष्टाचार से लड़ाई

विजय प्रताप राजनैतिक व्यवस्था में समस्या को बनाये रखना और उससे लड़ने के नाम पर हवा में तलवार भांजते रहना जरुरी होता है। तभी आप योद्धा माने जाते हैं। मौजूदा …

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हर शाख पर उल्लू बैठे हैं…..

सन १९७५ में श्रीमती इन्दिरा गांधी द्वारा थोपे गए आपातकाल के दौरान बालकवि वैरागी ने एक कविता लिखी थी – बोए थे फूल, उग आए नागफनी के कांटें/ किस-किस को …

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कश्मीर में एक और बर्फीला तूफान

Prof. Bhim Singh Jammu-Kashmir National Panthers Party जम्मू-कश्मीर नेशनल पैंथर्स पार्टी के मुख्य संरक्षक प्रो.भीमसिंह

जम्मू-कश्मीर सरकार Jammu and Kashmir Government के अधिवक्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट Supreme Court में कहा कि जम्मू-कश्मीर रीसेटलमैंट एक्ट Jammu-Kashmir Resettlement Act एक संवेदनशील मामला है और इस पर उस …

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मध्य प्रदेश : ताक पर संविधान, शिवराज सरकार की हिटलरशाही

मध्य प्रदेश : ताक पर संविधान, शिवराज सरकार की हिटलरशाही जावेद अनीस भोपाल, 25 अगस्त 2018। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान को आम तौर पर भाजपा का नरम चेहरा माना …

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मोदी या सिस्टम, किसे बदलें ? व्यापार, सरकार का काम नहीं, सरकार को व्यापार में नहीं होना चाहिए

Narendra Modi An important message to the nation

मैंने कोई तीर नहीं मारा था, यह सामान्य ज्ञान की बात थी। बैंक घोटाला सामने आते ही मैंने कहा था कि यह संभव ही नहीं है कि ऐसा सिर्फ किसी …

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तीन तलाक : धर्म के स्वनियुक्त ठेकेदारों के खिलाफ संघर्ष जारी रखना होगा

Irfan Engineer

तीन तलाक निर्णय और धर्मनिरपेक्षता उच्चतम न्यायालय की पांच जजों की एक संविधान पीठ ने, 3:2 के बहुमत से, सिविल रिट याचिका क्रमांक 118/2016 (सायरा बानो विरूद्ध भारतीय संघ व …

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क्रांति और सहपराधिता : जब भारत छोड़ो आंदोलन चल रहा था तो श्यामा प्रसाद मुखर्जी कहाँ थे ?

News Analysis and Expert opinion on issues related to India and abroad

भारतीय अभिजात्य वर्ग की सहपराधिता भारत में लंबे समय तक अंग्रेजी शासन के रहने की व्याख्या करती है सत्ता में बैठे हिंदुत्ववादी राष्ट्रवादी यह दावा कर रहे हैं कि वे …

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आपातकाल और ‘आधार’ पहचान संख्या का रिश्ता

Breaking news

अनूठा पहचान/आधार संख्या मामले कि सुनवाई के दौरान 2-3 मई, 2017 को जब अटॉर्नी जनरल और भारत सरकार के वकीलों ने सुप्रीम कोर्ट को यह बताया कि उनके द्वारा उठाया …

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शहीद भगत सिंह के मामले में मुहम्मद अली जिन्ना का भाषण

Mohammad Ali Jinnah

शहीद भगत सिंह के मामले में केंद्रीय विधान परिषद में 12 और 14 सितंबर, 1929 को जिन्ना का भाषण भगत सिंह और उनके क्रांतिकारी साथियों का स्वास्थ्य जेल में लंबे अनशन …

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अगर न्यायपालिका कानून बनाने लगी तो हम खतरनाक स्थिति में हैं-काटजू

Justice Markandey Katju

सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) ने जो किया वो गैरकानूनी और असंवैधानिक (Illegal and unconstitutional,) है – काटजू दिल्ली, 08 अगस्त 2016।  भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीईआई) द्वारा खेल एवं प्रशासनिक …

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क्यों एएमयू को “आतंक का अड्डा” कहना घोर अपराध है?

Aligarh Muslim University

अंग्रेज़ों ने भारत पर सैकड़ों बरस हुकूमत की। जब उनसे पूछा जाता कि आप लोग हिन्दोस्तान (Hindustan) क्यों आये हैं, तो उनका जवाब होता कि हम हिन्दोस्तान को तहज़ीब सिखाने …

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सलमान खान प्रकरण : हत्यारा भद्रलोक और लावारिस लोकतंत्र

Anil Pushker अनिल पुष्कर कवीन्द्र, प्रधान संपादक अरगला (इक्कीसवीं सदी की जनसंवेदना एवं हिन्दी साहित्य की त्रैमासिक पत्रिका)

न्यायाधीश न्याय के मंदिर में एक किताब है जिस पर न ‘लोक’ है न ‘जन’                           संविधान की सूरत में लिपटा हुआ है ‘धर्म’ हर रोज प्रार्थना में उठे हाथ जो …

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जय लोकतंत्र, जय युवराज!!!

Amalendu Upadhyaya hastakshep अमलेन्दु उपाध्याय लेखक वरिष्ठ पत्रकार, राजनैतिक विश्लेषक व टीवी पैनलिस्ट हैं।

युवराज कथा अनंता : घर का घर पाप छिपा रखने के लिए एकजुट होना/ जितना बड़ा घर होगा, उतना ही खाएगा देश को। वंश परंपरा के लिए कांग्रेस को पानी …

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