इकाॅनोमिक ऐंड पाॅलिटिकल वीकली
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इकाॅनोमिक ऐंड पाॅलिटिकल वीकली 1966 से लगातार प्रकाशित हो रहा है. शुरुआत से ही यह एक सशक्त वैचारिक मंच के तौर पर उभरा है. इसमें न सिर्फ देश की राजनीति, आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक विषयों पर शोध पत्र प्रकाशित होते हैं बल्कि इन क्षेत्रों से संबंधित विषयों पर गंभीर लेख भी प्रकाशित होते हैं.

युद्ध की मार झेल रहे सीरिया के लिए न्याय की तलाश
डियर सरकारो आपको यह समझना चाहिए कि स्वास्थ्य सेवाएं लोक सेवा हैं और ये सरकार की ही जिम्मेदारी है
राम नवमी से राम मंदिर तक  सांप्रदायिक ध्रुवीकरण के पुराने रास्ते पर भाजपा चुनाव आ रहे हैं न
स्कूली शिक्षा का मूल्यांकन जरूरी
देश के सरकारी विश्वविद्यालय एक ही दिन में ध्वस्त नहीं कर पाएगी सरकार
अगर प्रशांत भूषण-योगेंद्र यादव आज केजरीवाल के साथ होते तो भी क्या वे “माफीमैन” बनते
क्या सैन्य और खुफिया तंत्र डेमोक्रेटिक पार्टी की शह से कई ‘लीक’करा रहा है ताकि ट्रंप की कुर्सी चली जाए
ट्रंप ने शुरू की है कारोबारी जंग दुनिया फिर बढ़ रही मंदी की ओर
मुख्यधारा के मीडिया ने पूर्वोत्तर में भगवा जीत कहकर मूर्ख बनाया
सरकार न तो संसद के अंदर और न ही बाहर मजदूरों के मसलों पर बातचीत करना चाहती है