वीरेन्द्र जैन
वीरेन्द्र जैन

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वीरेन्द्र जैन, लेखक राजनीतिक विश्लेषक हैं।

‘गरम हवा’ और ‘साजिद’ की तरह घुट और पिस रहे मुसलमानों की आवाज उठाने की कोशिश है ‘मुल्क’ भी
आत्मविश्वासहीन पार्टी को विश्वास मत
फिल्म संजू  गाँधी दर्शन और पारिवारिक प्रेम पर एक फिल्म
लोकतंत्र की आत्मा को नष्ट कर रहा है सरकारी विज्ञापनों का वर्तमान स्वरूप
दुष्कर्मी अपराधियों से कमतर नहीं है इनका अपराध
मुँह में राम बगल में छुरी  लगभग सभी डाकुओं ने मन्दिर बनवाये और पुजारियों व बाबाओं को पाला
इस चतुर्दिक पराजय का संकेत  2019 के आम चुनाव किसी को जिताने के लिए नहीं बल्कि भाजपा को हराने के लिए होने जा रहे
लोकतंत्र की औपचारिकता में चुनाव के तमाशे बड़ी बचकानी हरकत थी येदुरप्पा द्वारा सरकार बनाने का प्रयास
दूसरा राग दरबारी है निमकी मुखिया सीरियल
लोकतांत्रिक व्यवस्था पर सवाल उठाते त्रिपुरा विधानसभा चुनाव परिणाम