उज्ज्वल भट्टाचार्या
उज्ज्वल भट्टाचार्या

Email
twitter: @yayawar

उज्ज्वल भट्टाचार्या , लेखक वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक चिंतक हैं, उन्होंने लंबा समय रेडियो बर्लिन एवं डायचे वैले में गुजारा है। वह हस्तक्षेप के सम्मानित स्तंभकार हैं। Former Senior Editor at Radio Berlin International (1979-90) and Deutsche Welle (1990-2011)

हिजाब पर हंसिया-हथौड़ा  माओ ने कहा था कम्युनिस्टों को पानी में मछली की तरह जीना है
पहचान हमें अलग कर सकती है जोड़ भी सकती है इन्हीं में राष्ट्र की संभावनायें और सीमायें निहित हैं
गजब समाजवादी तर्क  करात एंड कम्पनी घोर मार्क्सवादी है पर राष्ट्रीय नही
क्या सोवियत सत्ता का पतन विरोध व षडयंत्रों का ही नतीजा था
मेरी क़ौम भाटे का पानी है – जो लौटकर नहीं आता… मेरे लफ़्ज़ सितारों की तरह हैं वे मिटते नहीं…
तीन तलाक  सर्वोच्च न्यायलय का फैसला मुस्लिम समुदाय में उदारवादी ताकतों को मज़बूत करेगा
रवीश बेजोड़ हैं मैं यह नहीं कह रहा हूं कि रवीश ईमानदार हैं
हम मर्द औरतों को सताते हैं क्योंकि हम उनसे डरते हैं
सफलता के दिनों में सोते रहना वाम की दूसरी भयानक ग़लती थी
माकपा सम्मेलन ने दिया आम जनता से ‘अपनापन’ जोड़ने का मंत्र