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अमरीका, ईरान और भारत के त्रिकोण में बुरी तरह फंस गया है पाकिस्तान, उसकी बत्ती हो सकती है गुल !

नई दिल्ली, 16 सितंबर 2019. दक्षिण एशियाई और मध्य पूर्वी क्षेत्रों में तनाव बढ़ाने के चलते पाकिस्तान की ऊर्जा आपूर्ति पर खतरा मंडरा रहा है। मध्य पूर्व में अरब देशों के साथ-साथ संयुक्त राज्य अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष किसी भी दिन युद्ध का रूप ले सकता है। उधर भारत के साथ भी तनाव को लेकर पाकिस्तान की चिंताएं बड़ गई हैं।

Pakistan faces a wide gap in energy demand and supply

पाकिस्तान की ऊर्जा की खपत और आपूर्ति में जमीन आसमान का अंतर है। उसकी ऊर्जा आपूर्ति का अधिकांश हिस्सा आयात होता है। इसके पहले पाकिस्तान केवल कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पाद की आपूर्ति पर निर्भर था लेकिन 2015 से गैस आयात भी पर इसकी निर्भरता बढ़ गई है, जब देश ने तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) का आयात करना शुरू किया था।

द पाक ट्रिब्यून की एक खबरAs tensions escalate in Middle East, Pakistan’s energy supply at risk” के मुताबिक पाकिस्तानी विशेषज्ञों को भय है कि मध्य पूर्व में तनाव बढ़ने या भारत-पाक के बीच तनाव बढ़ने से पाकिस्तान को ऊर्जा की आपूर्ति में कटौती होगी, जिससे संकट पैदा हो जाएगा। इस स्थिति में, पाकिस्तान का तेल और गैस आयात रुक जाएगा।

खबर के मुताबिक पाकिस्तान के पास तेल और गैस के भंडार की कमी है जो लंबे समय तक गुंजाइश प्रदान कर सकते हैं। इसकी मुश्किल से 12 से 15 दिन की तेल भंडारण क्षमता है और इसमें कोई गैस भंडारण नहीं है। देश में अधिक तेल भंडार बनाने के लिए पाकिस्तानी सशस्त्र बल पेट्रोलियम डिवीजन को और देश में अधिक तेल भंडार बनाने के लिए जोर दे रहे हैं।

पाकिस्तान वर्तमान में तुर्कमेनिस्तान-अफगानिस्तान-पाकिस्तान-भारत (तापी) गैस पाइपलाइन परियोजना (Turkmenistan-Afghanistan-Pakistan-India (Tapi) gas pipeline project) पर भी काम कर रहा है। इस और अन्य नियोजित पाइपलाइनों से गैस के आगमन के साथ, पाकिस्तान में गैस की बाढ़ आ जाएगी और भूमिगत भंडारण के निर्माण की आवश्यकता बढ़ेगी। अगर पाकिस्तान इस गैस का भंडारण न कर पाया तो उपभोक्ताओं को लाखों डॉलर का हर्जाना देने के लिए मजबूर किया जाएगा।

पाकिस्तान के लिए गैस भंडारण इसलिए भी जरूरी हो गया है , क्योंकि उसने तुर्कमेनिस्तान जैसे गैस सप्लायर देशों को तगड़ा वचन दिया है कि वह यह आपूर्ति प्राप्त करेगा। यदि पाकिस्तान उत्पादक देशों से गैस प्राप्त करने से इनकार करता है, तो उसे गैस की बिक्री और खरीद समझौते के ‘टेक एंड पे’ क्लॉज (‘take and pay’ clause of gas sale and purchase agreement) के तहत गैस की लागत (cost of gas) का भुगतान करना होगा, और इससे पाकिस्तान की रही सही कमर टूट जाएगी।

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