90 वोट से निराश न हो ईरोम शर्मिला, कास्त्रो के साथी कुल 20 रह गए थे

90 वोट मिले ईरोम शर्मिला को, 90 कम नहीं होते। इन से बदलाव का सिलसिला शुरू किया जा सकता है। कास्त्रो के साथी कुल 20 रह गए थे।...

अतिथि लेखक
हाइलाइट्स

90 वोट मिले ईरोम शर्मिला को, कास्त्रो के साथी कुल 20 रह गए थे

 

दिनेश राय द्विवेदी

90 वोट मिले ईरोम शर्मिला को, 90 कम नहीं होते। इन से बदलाव का सिलसिला शुरू किया जा सकता है।

कास्त्रो के साथी कुल 20 रह गए थे।

दिनेश राय द्विवेदी26 नवम्बर 1956 को फ़िदेल कास्त्रो और उनके 81 अनुयायी, ज्यादातर निर्वासित क्यूबाइ, टक्स्पन, वेराक्रुज़, से एक नौका ग्रानमा पर सवार होकर क्यूबा में विद्रोह शुरू करने के लिए निकल पड़े थे। 2 दिसम्बर 1956 को मंज़निल्लो के पूर्वी शहर के निकट लास कोलोरैदास से सटे पलाया लॉस कायुएलोस में वे उतरे.ज़ल्द ही, कास्त्रो के अधिकांश साथी गुरिल्ले बतिस्ता सेना द्वारा मार डाले गए, या भगाए गए या कैद कर लिए गए। 82 में से सिर्फ 20 लोग ही इस मुठभेड़ में बच पाए और सिएरा मेस्त्रा के पहाड़ों में भागने में सफल रहे।

बच निकलने वालों में फिदेल कास्त्रो, चे ग्वेरा, राउल कास्त्रो और कैमिलो इएन्फ़ुएगोस शामिल थे। बचने वालों को गांववालों की सहायता मिली. वे ओरिएंटे प्रांत में सिएरा मेस्त्रा में फिर से संगठित हुए और फिदेल कास्त्रो की कमान में एक फौजी टुकड़ी बना ली।

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