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मोदी की सेवा में सीएजी, क्योंकि चौकीदार ही….

शायद कम लोग यह जानते हैं कि वर्तमान सीएजी राजीव महर्षि (CAG Rajiv Maharshi) उस समय भारत सरकार के वित्त सचिव (Finance Secretary of the Government of India) थे जब मोदी ने सीधे हस्तक्षेप करके अपने मित्र अनिल अंबानी को लाभ पहुँचाने की नीयत से रफाल विमानों की ख़रीद के इस भ्रष्ट सौदे को पूरा किया था। इन्हें मोदी ने ही 29 अक्तूबर 2014 के दिन वित्त सचिव के पद पर नियुक्त किया था जिस पर वे 30 अगस्त 2015 तक बने रहे। ये मोदी के इतने घनिष्ठ हो गये थे कि 31 अगस्त 2015 को उन्हें मोदी ने गृह सचिव बना दिया।

रफाल के बारे में सीएजी रिपोर्ट सिर्फ़ एक चुनावी हथकंडा है

अरुण माहेश्वरी

अक्तूबर 2016 में रफाल सौदे पर मोदी ने हस्ताक्षर किये और इसके साथ ही उसके बारे में तमाम सवाल उठने लगे। साल भर के अंदर ही इसमें मोदी के अवांछित हस्तक्षेप से भारत सरकार को हुए भारी नुक़सान की चर्चा पुरज़ोर शुरू हो गई थी। तभी मोदी ने इन महिर्षि जी को 25 सितंबर 2017 के दिन भारत के महालेखाकार (सीएजी) के पद पर बैठा दिया ताकि राफ़ेल के बारे में कोई भी रिपोर्ट बनने और प्रसारित होने के पहले वे उसे देख कर उसमें मोदी के पक्ष में ज़रूरी क़तर-ब्यौंत कर सके।

इसीलिये, यह बिल्कुल सही कहा जा रहा है कि रफाल पर सीएजी की यह रिपोर्ट (CAG report on Rafal) एक प्रकार से खुद सीएजी राजीव महर्षि (CAG Rajiv Maharshi) की खुद के बारे में ही एक रिपोर्ट भी है। यह मोदी की उस वक़्त की करतूत के बारे में रिपोर्ट है जब महिर्षि ही उनके आर्थिक मामलों के वित्त सचिव (Financial Secretary of Economic Affairs) हुआ करते थे। यही वजह है कि यह तथ्यों को खोलती कम, उन पर पर्दादारी ज़्यादा करती है। यह मोदी की अपराध के सबूतों को मिटाने की कला (The art of eradicating the evidence of Modi's crime) का एक और नमूना तथा कोरी चकमेबाजी है।

आज के टेलिग्राफ़ ने इस जघन्य रिपोर्ट के अंदर से भी ज़ाहिर होने वाले तथ्यों को उजागर करते हुए सही कहा है कि सीएजी की लाख कोशिशों के बावजूद वे मोदी को इस सौदे में हुई धाँधली से बचा नहीं पाए हैं। न इस बात को छिपा पाए हैं कि इस सौदे के बारे में अब तक अरुण जेटली और निर्मला सीतारमण किस प्रकार लगातार एक के बाद एक झूठ बोल कर संसद को गुमराह करते रहें हैं।

और सबसे दिलचस्प है इस रिपोर्ट में यूपीए के सौदे से की गयी तुलना का पहलू। क्या यूपीए ने कोई रफाल विमान खरीद लिया था कि सीएजी की रिपोर्ट कहती है — मोदी ने उससे सस्ता खरीदा !

सीएजी के हवाले से हर घंटे बदलते सरकारी बयानों में रफाल की खरीद में हुए लाभ के अंक अभी तो लगातार बढ़ते ही जा रहे हैं। वास्तव में जेटली, सीतारमण आदि के इन बयानों को तब तक देखते रहना चाहिए जब तक अंत में मोदी यह नहीं कहते कि हमने रफाल मुफ्त में लिये हैं। कीमत तो अनिल अंबानी ने चुकाई है !

सचमुच, सीएजी की यह कथित रिपोर्ट चौकीदार की चौकीदार के द्वारा चौकीदार के लिये तैयार की गई रिपोर्ट भर है। यह झूठ का पुलिंदा, एक कोरा चुनावी हथकंडा है।

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