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साहित्य का कोना। कहानी, व्यंग्य, कविता व आलोचना
Literature Corner. Story, satire, poetry and criticism

बेटे से बतरस : डेढ़ सदी के बाद फजीहत/ किससे मांगें आदर बेटा

Modi Gandhi ji

बेटे से बतरस : डेढ़ सदी के बाद फजीहत/ किससे मांगें आदर बेटा ************ वे नेशन के फादर बेटा करके बने अनादर बेटा * उनके पांव बहुत हैं लंबे छोटी …

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सुभाष राय की चिंताओं, सरोकार और लेखकीय दृष्टि से परिचित कराती एक पुस्तक ‘ जाग मछन्दर जाग’

'जाग मछन्दर जाग' वरिष्ठ पत्रकार एवं कवि सुभाष राय की दूसरी पुस्तक है।

( ‘जाग मछन्दर जाग‘ वरिष्ठ पत्रकार एवं कवि सुभाष राय की दूसरी पुस्तक है। इसके पहले बोधि प्रकाशन से प्रकाशित उनका कविता संग्रह ‘सलीब पर सच‘ काफी चर्चित रहा। ‘जाग …

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‘मैं एक कारसेवक था’ : आत्मकथा के बहाने मानवता की जरूरी लड़ाई की किताब !!

Main Ek Karsewak Tha book by Bhanwar Meghwanshi

“मेरी कहानियां, मेरे परिवार की कहानियां – वे भारत में कहानियां थी ही नहीं. वो तो ज़िंदगी थी.जब नए मुल्क में मेरे नए दोस्त बने, तब ही यह हुआ कि …

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दीदी के बोलो – इस देश का कवि न्याय मांगता है आपसे

Didi ke Bolo

दीदी के बोलो – [यह जिंदगीनामा किस्तों में चलेगा, तब तक जब तक मेरे खिलाफ हुई साजिश का अंत और इन्तेहाँ नहीं होता इन मुश्किलों का,,, – अनिल पुष्कर]  Series …

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माणिक वर्मा : दर्जी से सुप्रसिद्ध व्यंग्यकार बनने तक का संघर्षशील सफर

Famous Hasya Kavi Manik Verma Died

श्रद्धांजलि स्मृति शेष माणिक वर्मा माणिक वर्मा (Manik Verma) मंचों पर उस दौर के व्यंग्यकारों में शामिल हैं जब छन्द मुक्त व्यंग्य विधा को स्वतंत्र स्थान मिलने लगा था। एक …

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संवेदनात्मक ज्ञान को चरितार्थ करती पुस्तक “जिन्हें जुर्मे इश्क पे नाज था”

Virendra Jain वीरेन्द्र जैन, लेखक स्वतंत्र टिप्पणीकार व स्तंभकार हैं।

समीक्षा – जिन्हें जुर्मे इश्क पे नाज था मुक्तिबोध ने कहा था कि साहित्य संवेदनात्मक ज्ञान है। उन्होंने किसी विधा विशेष के बारे में ऐसा नहीं कहा अपितु साहित्य की …

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एक पूर्व संघ-कार्यकर्ता कारसेवक की आपबीती है मैं एक कारसेवक था

Main Ek Karsewak Tha book by Bhanwar Meghwanshi

“में कहता हूँ आँखिन देखी” की तर्ज़ पर यह एक पूर्व संघ-कार्यकर्ता कारसेवक की आपबीती है “मैं एक कारसेवक था” (Main Ek Karsewak Tha book by Bhanwar Meghwanshi)। यह किताब …

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मैं तो हिन्दी के बिना जी नहीं सकता, पर सरकार को जलसे की जरूरत क्यों है ॽ

Jagadishwar Chaturvedi

आज 14 सितम्बर है। सारे देश में केन्द्र सरकार के दफ्तरों में हिन्दी दिवस का दिन है। सरकार की आदत है वह कोई काम जलसे के बिना नहीं करती। सरकार …

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इस गाँव में सिर्फ कार सेवक, उस गाँव में बजरंग/ हे राम, तुम गंगातीरे कौन सा देश रच गये

Kallu Subodh Sarkar

गुलमोहर हाउसिंग कॉम्प्लेक्स   गुलमोहर, गुलाबख़ास, घुसने के साथ ही पाम डेढ़ सौ परिवारों के लिए लगभग एक आवासन जरा घुसते ही मारुती वैन, स्कूटर, साइकिल नाम बताओ – मुसलमान, …

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जानिए “लड़कियों के टॉयलेट में क्या कर रहा था” वाले सुबोध सरकार कौन हैं

सुबोध सरकार (Subodh Sarkar) सभापति, बांग्ला कविता अकादेमी, कोलकाता

जीवन परिचय : सुबोध सरकार (Subodh Sarkar), कृष्णा नगर, पश्चिम बंगाल में सन 1958 को पैदा हुए. बांग्ला के आधुनिक कवियों (Modern poets of bangla) में शुमार इनका पहला कविता-संग्रह …

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सुलह की कोशिशों में रात भर इक चाँद भटकता है…..

kavita Arora डॉ. कविता अरोरा

यह सितम्बर के गीला-सीला दिन.. फ़लक को भरमाये.. बादलों की पोटली में कुछ-कुछ धूप लटकाये… शाम को ढलकर.. हौले-हौले चलकर.. जब क्षितिज की ड्योढ़ी पर पसरता है.. बालों से बारिशें …

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मेरे शहर की/ तरक़्क़ी का यह मंज़र/ किसके हिस्से में आता है

kavita Arora डॉ. कविता अरोरा

काली रात की बस से उतरा रौशनी का छिटका, सहर की चिल्ल पौं, ट्रकों के हॉर्न की आवाज़ में भी बेसुध…बे खटका… वो रोड के डिवाइडर पर औंधे मुँह पड़ा …

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स्वप्निल का संसार और उसमें ब्रह्मराक्षस की ताकाझांकी

Jaisa Maine Jeevan dekha स्वप्निल श्रीवास्तव की कविताओं की समीक्षा

स्वप्निल को कभी स्वप्न में भी ख़याल नहीं रहा होगा कि खूंखार कवि अनिल जनविजय के रहते मुझ सा नौसिखिया उनकी कविताओं की समीक्षा लिख मारेगा और उसकी धज कुछ …

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डरना किसी से भी नहीं, गुरू से भी नहीं, मंत्र से भी नहीं, लोक से भी नहीं वेद से भी नहीं – आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी

Acharya Hazari Prasad Dwivedi

आज आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी (Acharya Hazari Prasad Dwivedi) का जन्मदिन है- काशी की संस्कृति – विद्वत्ता और कुटिल दबंगई विश्वनाथ त्रिपाठी ने ‘व्योमकेश दरवेश’ में काशी के बारे में लिखा …

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जयशंकर प्रसाद वैदिक कर्मकांड के मानवीय पक्षों का समर्थन करते हैं, उसके पाखंड का नहीं

News Analysis and Expert opinion on issues related to India and abroad

“कामायनी” के प्रकाशन को 75 वर्ष (75 years of publication of “Kamayani”) होने को हैं महानतम रूसी कहानीकार एंटन चेखव के मुहावरे (Idioms of Anton Chekhov – the greatest Russian …

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समाज की ‘फ्रोजन स्टेट’ को तोड़ने के लिए थिएटर ऑफ़ रेलेवंस’

Rajgati Theater of Relevance

समाज की ‘फ्रोजन स्टेट’ को तोड़ने के लिए थिएटर ऑफ़ रेलेवंस’ (Theater of Relevance to break the ‘frozen state’ of society) अपनी कलात्मकता से विवेक की मिटटी में विचार का …

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कविता और राजनीति का अपने साहित्य में विलक्षण संबंध स्थापित किया खूब लड़ी मर्दानी वाली सुभद्रा कुमारी चौहान ने

Jagadishwar Chaturvedi

आज है खूब लड़ी मर्दानी वो तो झाँसी वाली रानी थी, की सुभद्रा कुमारी चौहान का जन्मदिन हिन्दी आलोचकों में मुक्तिबोध के अलावा किसी बड़े समीक्षक ने सुभद्राकुमारी चौहान पर …

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मर्डर इन द कैथेड्रल और न्यू इंडिया : नाटक जो लिखा इलियट ने वह काल्पनिक नहीं इतिहास है 

Palash Biswas पलाश विश्वास पलाश विश्वास। लेखक वरिष्ठ पत्रकार, सामाजिक कार्यकर्ता एवं आंदोलनकर्मी हैं । आजीवन संघर्षरत रहना और दुर्बलतम की आवाज बनना ही पलाश विश्वास का परिचय है। हिंदी में पत्रकारिता करते हैं, अंग्रेजी के लोकप्रिय ब्लॉगर हैं। “अमेरिका से सावधान “उपन्यास के लेखक। अमर उजाला समेत कई अखबारों से होते हुए अब जनसत्ता कोलकाता में ठिकाना

मर्डर इन द कैथेड्रल (Review of Murder in the Cathedral in Hindi) गीति नाट्य विधा (opera) में लिखी गयी अंग्रेज कवि और आलोचक नोबेल पुरस्कार विजेता टीएस इलियट (play by …

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दुनिया ने प्रगति की पर मनुष्यता का क्या हुआ ? याद किए गए प्रेमचंद

Munshi Premchand

मुंशी प्रेमचंद की जयंती (Munshi Premchand Jubilee) पर उनको उत्तराखंड के दिनेशपुर (Dineshpur of Uttarakhand) में याद किया गया। बहुत ही बेहतरीन कार्यक्रम रहा। विचारगोष्ठी में प्रेमचंद का कथा-साहित्य (Story …

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अफ़सोस किताबों के लिखने वाले भी किताबों के सफ़हों में दफ़्न हैं किसी सूखे गुलाब की तरह

Munshi Premchand

खड़ा हूँ आज भी रोटी के चार हर्फ़ लिए। सवाल यह है कि किताबों ने क्या दिया मुझको ? अफ़सोस किताबों के लिखने वाले भी किताबों के सफ़हों में दफ़्न …

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अरुंधति रॉय और डॉ. राम विलास शर्मा की आँखों से गांधी और अंबेडकर देखना

अरुंधति रॉय की किताब 'एक था डॉक्टर और एक था संत', (Arundhati Roy's book Ek Tha Doctor Ek Tha Sant)

विमर्शमूलक विखंडन और कोरी उकसावेबाजी में विभाजन की रेखा बहुत महीन होती है अरुंधति रॉय की किताब ‘एक था डॉक्टर और एक था संत‘, (Arundhati Roy’s book Ek Tha Doctor …

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 समीक्षा – शैडो पॉलिटिक्स

Shadow Politics Cover PB

छाया राजनीति (शैडो पॉलिटिक्स) का इतिहास मानव इतिहास जितना ही पुराना है। किंतु, इस विषय पर हिंदी में किसी पुस्तक का सर्वथा अभाव है। इस दृष्टिकोण से अनिल राय की …

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शुद्ध रूप से एक विधवा की प्रेम कथा है, प्रणय-प्रेम गाथा है मनीषा कुलश्रेष्ठ का उपन्यास ‘मल्लिका’

Manisha Kulshreshtha's novel 'Mallika'

भारतेन्दु बाबू के प्रणय-प्रेम की एक कथा — ‘मल्लिका‘ आज मनीषा कुलश्रेष्ठ का हाल में प्रकाशित उपन्यास ‘मल्लिका’ (Manisha Kulshreshtha’s novel ‘Mallika’) पढ़ गया। मल्लिका, बंकिम चंद्र चटोपाध्याय की ममेरी …

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अपने युग की जन-विरोधी सामाजिक विसंगतियों पर जोरदार प्रहार किया कबीर ने

Kabir कबीर

मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है, समाज में अपने जीवन का अस्तित्व बनाए रखने के लिए उसे संघर्ष करना पड़ता है। यह संघर्ष उसे मानव से भी करना पड़ता है और …

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लुटियंस का मोहल्ला..

Rajeev mittal राजीव मित्तल, लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं।

पांडवों ने एक जंगल पे इन्द्रप्रस्थ (Indraprastha) क्या बसा दिया, न जाने कितने सूरमाओं को खेलने का मौका दे दिया.. पिछले हजार साल में कई ने उजाड़ा, कई ने बसाया। …

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अँधियारे पाख की इक कविता है जिसने चाँद बचा रक्खा है ..

डॉ. कविता अरोरा शुक्ल पक्ष फलक पर ढुलकता चाँद …टुकड़ी-टुकड़ी डली-डली घुलता चाँद …सर्दी ..गरमी ..बरसात ..तन तन्हा अकेली रात …मौसमों के सफ़र पर मशरिक़ से मगरिब डोलता है ..निगाहों-निगाहों …

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जब राजीव गांधी ने कहा था – ”रक्त बहाने के बजाय, घृणा को बह जाने दो’

Rajiv Gandhi

भाषाविद् डॉ. मन्नूलाल यदु की पुस्तक “राजीव गांधी: भारतीयता की तलाश” का यह अंश प्रतिष्ठित समाचारपत्र देशबन्धु में प्रकाशित हुआ था। स्व. राजीव गांधी की पुण्य तिथि पर श्रद्धांजलि (Tribute …

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कविता का सर्वोत्‍तम कालखंड है छायावाद – प्रो. रजनीश कुमार शुक्‍ल

हिंदी विश्‍वविद्यालय (Hindi University) में ‘छायावाद के सौ वर्ष’ (Hundred years of chhaayaavaad) पर राष्‍ट्रीय संगोष्‍ठी उद्घाटित

हिंदी विश्‍वविद्यालय में ‘छायावाद के सौ वर्ष’ पर राष्‍ट्रीय संगोष्‍ठी का समापन वर्धा,  11 मई 2019: छायावाद का समय (Time of Chhayawad) कविता का सर्वोत्‍तम कालखंड (Best period of poetry) …

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सत्ता की सूली : न्यायपालिका में हमेशा न्याय नहीं होता! कभी-कभी सिर्फ जजमेंट होता है!

Satta Ki Suli सत्ता की सूली, लोया की गाटेगांव यात्रा

सत्ता की सूली : अनसुलझी हत्याओं और अन्याय की कड़वी यादों को हमारे जेहन में जीवित रखती है बाम्बे हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश बी जी कोलसे पाटिल (B.J. Kolse Patil, …

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छायावाद ने हृदय से आखों तक दृष्टि और रौशनी दी है – प्रो. विजय बहादुर सिंह

हिंदी विश्‍वविद्यालय (Hindi University) में ‘छायावाद के सौ वर्ष’ (Hundred years of chhaayaavaad) पर राष्‍ट्रीय संगोष्‍ठी उद्घाटित

हिंदी विश्‍वविद्यालय (Hindi University) में ‘छायावाद के सौ वर्ष’ (Hundred years of chhaayaavaad) पर राष्‍ट्रीय संगोष्‍ठी उद्घाटित वर्धा, दि. 08 मई 2019: महात्‍मा गांधी अंतरराष्‍ट्रीय हिंदी विश्‍वविद्यालय (Mahatma Gandhi International …

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अडिग प्रेम : सच्चे प्रेम, दर्द और एक ऐसी रात की कहानी जिसका रोमांच कोई नारी शरीर ताउम्र नहीं भूल सकता

Seema Aseem Saxena Novel Adig Prem सीमा सक्सेना असीम का उपन्यास "अडिग प्रेम"

एक स्त्री के मन की यात्रा करने जैसा है सीमा सक्सेना असीम का उपन्यास “अडिग प्रेम” पढ़ना सीमा सक्सेना “असीम” का उपन्यास “अडिग प्रेम” पढ़ना एक स्त्री के मन की …

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धूल भरे मौसमों की ख़ुमारी पर दो बूँद की बारिश….

Ishq

धूल भरे मौसमों की ख़ुमारी पर दो बूँद की बारिश…. सौंधी महक से बौराई.. फ़िज़ां में…. शबनमी अल सुबहा के जोगिया लशकारे.. दरख़्तों के चेहरों से सरकते हैं.. तो.. अलसाये …

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वादा फ़रामोशी : सरकारी वादों की मुकम्मल पड़ताल

Vada Faroshi Facts not fictions based on RTI शशि शेखर, संजॉय बसु और नीरज कुमार की किताब 'वादा फ़रामोशी पढ़िए'

राहुल गांधी (Rahul Gandhi), कॉमरेड कन्हैया कुमार (Comrade Kanhaiya Kumar), आरजेडी नेता तेजस्वी यादव (RJD leader Tejashwi Yadav), समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव (Samajwadi Party President Akhilesh Yadav), जेएमएम …

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और फिर से छतों से तुम्हें प्यार हो जायेगा…

Poetry on Kite by Kavita Arora

….पतंग उड़ा कर तो देखो.. तुम डोर संग हवाओं के रिश्ते महसूस करोगे… फ़लक तक रंगीन फरफराहटों में.. यक़ीनन काग़ज़ी टुकड़े नहीं, तुम उड़ोगे.. वो ख़्वाब चिड़ियों के परों वाले.. …

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इक गढ़े सच पर अंधा राष्ट्र चल रहा है.. भक्त सोचते हैं देश बदल रहा है

RSS Half Pants jaya prada Mohd Azam Khan

इक गढ़े सच पर अंधा राष्ट्र चल रहा है.. भक्त सोचते हैं देश बदल रहा है ओ इतिहास पर पलने वाली दीमकों.. बस भी करो.. अब छिजी हुई भारतीयता में …

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लोया की गाटेगांव यात्रा

Satta Ki Suli सत्ता की सूली, लोया की गाटेगांव यात्रा

महाराष्ट्र का लातूर एक विनाशकारी भूकंप के लिए जाना जाता है। 30 सितंबर,1993 कीउस तबाही को याद कर लोगों की आज भी रूह कांप जाती है। जज लोया 30 हजार …

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अस्मिता, अंबेडकर और रामविलास शर्मा

Jagadishwar Chaturvedi

रामविलास शर्मा (Ram Vilas Sharma) के लेखन में अस्मिता विमर्श को मार्क्सवादी नजरिए (Marxist Attitudes) से देखा गया है। वे वर्गीय नजरिए से जाति प्रथा (caste system) पर विचार करते …

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भगतसिंह का लेख – लाला लाजपत राय और नौजवान

Shaheed E Azam Bhagat Singh

(यह वह दौर था जब कौंसिल के चुनावों में लाला लाजपत राय ने कांग्रेस का साथ छोड़कर उसकी मुख़ालफ़त करनी आरम्भ कर दी थी और अनेक ऐसी बातें कहीं जो …

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कहानी को अस्मिता की राजनीति से सबसे पहले मोहन राकेश ने जोड़ा

Mohan Rakesh

आज मोहन राकेश के जन्मदिन पर विशेष Special on the birthday of Mohan Rakesh जगदीश्वर चतुर्वेदी आज मोहन राकेश का जन्मदिन (Mohan Rakesh’s Birthday) है। सन् 1925 में आज के ही …

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प्रेमचंद हिंदी साहित्य के हार्डवेयर हैं, तो भीष्म साहनी हिंदी साहित्य के सॉफ्टवेयर !

Munshi Premchand

हमारे समय में भीष्म साहनी प्रगतिशील लेखक संघ की घाटशिला इकाई (झारखण्ड) का आयोजन: 14 नवम्बर, 2015 घाटशिला 14 नवम्बर, 2015. कालजयी कथाकार, नाटककार, अनुवादक, रंगमंचीय कलाकार अभिनेता भीष्म साहनी …

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राम का देश/ रामसे बंधु की हॉरर मूवी बन गया/ करकट दमनक की हुआ हुआ

देश को क्या हुआ सतत डराते जिन्न बुरी आत्माएँ सन्नाटा तोडती उल्लूओं की आवाज़ चमगादड़ों का शोर कभी डायनों का प्रलाप टी वी पर आग उगलता अगिया बेताल शांति भंग …

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कहते हैं कि बहरा हो गया है हाकिम/ तभी तो सबकी फ़रियाद नहीं सुनता

ये रास्ते हैं इंसाफ़ केजंहागीर के दरबार का भारी है घंटाहर एक के हिलानें से नहीं बजता कहते हैं कि बहरा हो गया है हाकिमतभी तो सबकी फ़रियाद नहीं सुनता …

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स्मृतिलोप से हट कर यथार्थ की ओर : हिंदी समाज में हीरा डोम की तलाश

Breaking news

स्मृतिलोप से हट कर यथार्थ की ओर : हिंदी समाज में हीरा डोम की तलाश –सुभाष गाताडे ( अकार, हिंदी समाज पर केंद्रित अंक में जल्द ही प्रकाशित) ‘देवताओं, मंदिरों …

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बीसवीं सदी में फ़ैज़ जैसा कवि भारतीय उपमहाद्वीप में नहीं हुआ

Faiz Ahmad Faiz

बीसवीं सदी में फ़ैज़ जैसा कवि भारतीय उपमहाद्वीप में नहीं हुआ गुलामी से मुक्ति का महाकवि फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ की पुण्यतिथि पर विशेष जगदीश्वर चतुर्वेदी फ़ैज उन …

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जब राजीव गांधी ने कहा था – ”रक्त बहाने के बजाय, घृणा को बह जाने दो’

Rajiv Gandhi

जब राजीव गांधी ने कहा था – ”रक्त बहाने के बजाय, घृणा को बह जाने दो’ – डॉ. मन्नूलाल यदु, भाषाविद राजीव गांधी प्रधानमंत्री बनने के बाद 31 अक्टूबर,1984 को …

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तुम मनाओ 15अगस्त…./ मैं अफ़सोस मनाऊँगी…./  इस देश में पैदा होने का अफ़सोस…..

kavita Arora डॉ. कविता अरोरा

तुम मनाओ 15अगस्त…./ मैं अफ़सोस मनाऊँगी…./  इस देश में पैदा होने का अफ़सोस….. डॉ. कविता अरोरा हाँ हमने मान लिया…. हम रिश्ते नहीं..महज़..जिस्म हैं… जिस्म…. बग़ैर फ़र्क़ कि उम्र क्या …

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प्रेमचंद किसान को सुखी देखना, स्त्री की मुक्ति और दलितों के लिए सामाजिक न्याय चाहते थे

Munshi Premchand

प्रेमचंद किसान को सुखी देखना, स्त्री की मुक्ति और दलितों के लिए सामाजिक न्याय चाहते थे प्रेमचंद के बहाने : आज के लेखकीय सरोकार (31 जुलाईः प्रेमचंद जयन्ती) विजय विशाल …

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समय जैसा है, उसे ही लिखा जाए….संदर्भ प्रेमचंद का प्रयाण दिवस

Munshi Premchand

(प्रेमचंद की तत्वमीमांसा और लेखक के पुनर्संदर्भीकरण की ज्ञान मीमांसा ) प्रेमचंद का प्रयाण दिवस पर विशेष अरुण माहेश्वरी उपन्यास सम्राट प्रेमचंद : 1880 में जन्म ; 20वीं सदी के …

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अंधेर नगरी में सत्यानाश फौजदार का राजकाज! रवींद्र प्रेमचंद के बाद निशाने पर भारतेंदु?

Bharatendu Harishchandra

क्या वैदिकी सभ्यता का प्रतीक न होने की वजह से अशोक चक्र को भी हटा देंगे? रवींद्र का दलित विमर्श-28 पलाश विश्वास डिजिटल इंडिया में इन दिनों जो वेदों, उपनिषदों, …

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कालजयी रचना : विभाजन की त्रासदी का सच है ‘तमस’

Tragedy of division tamas

विभाजन की त्रासदी पर एक से बढ़ कर एक कृतियां सामने आईं, पर भीष्म साहनी का उपन्यास ‘तमस’ सबसे अलग ही है। यह एक ऐसी कृति है जिसका नाम भारतीय …

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प्रेमचंद और भाषा समस्या

Munshi Premchand

एक है मीडिया की भाषा और दूसरी जनता की भाषा, मीडिया की भाषा और जनता की भाषा के संप्रेषण को एकमेक करने से बचना चाहिए। प्रेमचंद ने भाषा के प्रसंग …

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इतिहास लहूलुहान, पन्ना दर पन्ना खून का सैलाब! लहुलुहान फिजां है लहुलुहान स्वतंत्रता लहुलुहान संप्रभुता लहूलुहान

Palash Biswas पलाश विश्वास पलाश विश्वास। लेखक वरिष्ठ पत्रकार, सामाजिक कार्यकर्ता एवं आंदोलनकर्मी हैं । आजीवन संघर्षरत रहना और दुर्बलतम की आवाज बनना ही पलाश विश्वास का परिचय है। हिंदी में पत्रकारिता करते हैं, अंग्रेजी के लोकप्रिय ब्लॉगर हैं। “अमेरिका से सावधान “उपन्यास के लेखक। अमर उजाला समेत कई अखबारों से होते हुए अब जनसत्ता कोलकाता में ठिकाना

पलाश विश्वास मर्डर इन द कैथेड्रल गीति नाट्य विधा में लिखी गयी अंग्रेज कवि और आलोचक नोबेल पुरस्कार विजेता टीएस इलियट की अत्यंत प्रासंगिक कृति है। रवीन्द नाथ टैगोर ने …

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संगीनों के साये में स्कूल

Sangeenon ke saye men school

संगीनों के साये में स्कूल डरी फ़िक्रमंद मांओं ने बलैयाँ ली नजर उतारी दुआएँ माँगी अल्लाह ताला से जिगर के टुकड़ों को चूम कर रुखसत किया फ़ौजी संगीनों के साये …

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ख़ून के धब्बे पड़ गये हैं ‘इल्म की किताबों’ पर

Jasbir Chawla's Poetry in Hindi, जसबीर चावला की कविता हिंदी में

शूट आउट एट पेशावर स्कूल : शकील का ख़त अम्मी के नाम Shoot out at peshawar school : Shakeel’s letter to Ammi ”””””””””””””””””””””””””””””””””””””’ अम्मी लो मैंने ज़िद छोड़ दी नये …

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इति‍हास का आधार प्रेमचंद क्‍यों नहीं

Munshi Premchand

आज उपन्यासकार प्रेमचंद का जन्मदिन है । प्रेमचंद जयंती पर विशेष Today is the birthday of novelist Premchand. Special on Premchand Jayanti हिन्दी साहित्य के दो महत्वपूर्ण इतिहास ग्रंथ रामचन्द्र शुक्ल का …

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नमक का दरोगा वाले कलम के सिपाही प्रेमचंद को नमन

Palash Biswas पलाश विश्वास पलाश विश्वास। लेखक वरिष्ठ पत्रकार, सामाजिक कार्यकर्ता एवं आंदोलनकर्मी हैं । आजीवन संघर्षरत रहना और दुर्बलतम की आवाज बनना ही पलाश विश्वास का परिचय है। हिंदी में पत्रकारिता करते हैं, अंग्रेजी के लोकप्रिय ब्लॉगर हैं। “अमेरिका से सावधान “उपन्यास के लेखक। अमर उजाला समेत कई अखबारों से होते हुए अब जनसत्ता कोलकाता में ठिकाना

गोदान में खेत खाओ संस्कृति के पूँजी वर्चस्व का भी अच्छा खासा ब्यौरा है। आज सुबह सुबह बसंतीपुर से पद्दो का फोन आया। पहली बार तो लगा किसी कंपनी का …

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तमाम पीढ़ियों को प्रेमचंद के रचना-कर्म ने दिशा प्रदान की

Munshi Premchand

शैलेंद्र चौहान प्रेमचंद ने सन् 1936 में अपने लेख ‘महाजनी सभ्यता’ में लिखा है कि ‘मनुष्य समाज दो भागों में बँट गया है। बड़ा हिस्सा तो मरने और खपने वालों …

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‘वर्धा शब्‍दकोश’ में हैं ज्ञान के विविध अनुशासनों के शब्‍द भंडार : प्रो.जैन

Mahatma Gandhi Antarrashtriya Hindi Vishwavidyalaya Wardha

वर्धा, 26 अक्‍टूबर, 2013; महात्‍मा गांधी अंतरराष्‍ट्रीय हिंदी विश्‍वविद्यालय की बहुआयामी परियोजना के तहत प्रकाशित ‘वर्धा शब्‍दकोश’ का लोकार्पण हिंदी की सुप्रसिद्ध आलोचक प्रो.निर्मला जैन ने शनिवार को नागार्जुन सराय …

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हिंदी की स्त्री रचनाकारों का द्वन्द्व

News Analysis and Expert opinion on issues related to India and abroad

हिंदी साहित्य (Hindi Literature) विशेषकर स्त्री साहित्य (Female Literature) की सबसे बड़ी त्रासदी यह है कि हमारी जानीमानी लेखिकाएँ (Famous Writers) भी स्त्रीवाद (feminism), स्त्री-लेखन (Female Writing) जैसी कोटियों और …

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डॉ. रामविलास शर्मा की दृष्टि में निराला के साहित्य में प्रेम और कामुकता

suryakant tripathi nirala

प्रेम और कामुकता व्यक्ति ही नहीं सामाजिक सत्य भी है. आधुनिक पश्चिमी समाजशास्त्रियों की दृष्टि में प्रेम से अलग कामुकता, कामुक-भिन्नता और काम-चेतना आधुनिक परिघटनाएं हैं लेकिन भारतीय सन्दर्भ में …

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हिमगिरि के उत्तुंग शिखर पर, बैठ शिला की शीतल छाँह एक पुरुष, भीगे नयनों से देख रहा था प्रलय प्रवाह

News Analysis and Expert opinion on issues related to India and abroad

“कामायनी” के प्रकाशन को 75 वर्ष होने को हैं महानतम रूसी कहानीकार एंटन चेखव के मुहावरे, में कहें तो कामायनी समूचे छायावादी आन्दोलन का- प्रधान हस्ताक्षर -हैं। जिसके प्रकाशन को …

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