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आपकी नज़र

Guest writers views devoted to commentary, feature articles, etc.. अतिथि लेखक की टिप्पणी, फीचर लेख आदि

हमारे जैसे लोग जिन्होंने अपनी पूरी जवानी जेल और सड़क पर गुज़ारी है, आज कांग्रेस को क्यों चाहते हैं ?

chanchal bhu

यह पोस्ट अपने अग्रज, समाजवादी चिंतक, ITM  विश्वविद्यालय ग्वालियर के कुलाधिपति भाई Rama Shankar Singh के लिए है। कल उन्होंने पूछा था – “बाक़ी सब ठीकई है जो है सो हइयै पर चंचल जी यह बताया जाये कि ४७ के बाद से लगातार २०१४ तक   कांग्रेस ने अपने उन विपक्षी सत्याग्रहियों के साथ भयानक दुर्व्यवहार क्यों किया जिनकी शानदार भूमिका …

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एक बड़ी चुनौती प्लास्टिक कचरे और पॉलिथीन पर नियंत्रण

plastic

स्वतंत्र टिप्पणीकार निर्मल रानी का लेख “पॉलिथीन व प्लास्टिक कचरे पर नियंत्रण : एक बड़ी चुनौती” लगभग ग्यारह वर्ष पूर्व हस्तक्षेप पर जनवरी 9, 2011 को प्रकाशित हुआ था। इन ग्यारह वर्षों में प्लास्टिक कचरे पर नियंत्रण पर नियंत्रण तो नहीं हुआ, हां इतना अवश्य हुआ कि सिंगल यूज प्लास्टिक पर प्रतिबंध, फोटो सेशन और प्रचार का जरिया बन गया। …

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आजादी का अमृत महोत्सव : भाजपा का दायरा सिकुड़ गया है, विपक्ष खिल उठा है

nitish kumar tejashwi yadav

आजादी का अमृत महोत्सव : बिहार में फासीवाद के विकल्प का नया संधान Arun Maheshwari on Nitish Phenomenon आजादी की 75वीं सालगिरह का सप्ताह और 9 अगस्त, अर्थात् अगस्त क्रांति का दिन। ‘भारत छोड़ो’ का नारा तो गांधीजी ने दिया था, पर बिहार की धरती पर इस आंदोलन को एक ऐतिहासिक क्रांति का रूप दिया था कांग्रेस सोशिलिस्ट पार्टी के …

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‘आजादी का अमृत महोत्सव’ में कहाँ है खेतिहर मज़दूर

opinion debate

आज़ादी का ख्याल ही बहुत खूबसूरत है। हालांकि यह बात अलग है कि हमारे देश में आज़ादी के 75 वर्ष तक पहुंचते-पहुंचते ‘आज़ाद ख्याल’ नाक़ाबिल-ए- बर्दाश्त हो गया है। अगस्त महीने में हमारे देश में आज़ादी का उत्सव शुरू हो जाता है। सभी तरफ तिरंगें लहराते नज़र आते हैं। हो भी क्यों न। हमने देश की आज़ादी ब्रिटानिया साम्राज्यवाद के …

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भारत छोड़ो आंदोलन : अगस्त क्रांति और भारत का शासक-वर्ग

dr. prem singh

भारत छोड़ो आंदोलन की 80वीं सालगिरह के अवसर पर (On the occasion of 80th anniversary of Quit India Movement) (यह विशेष लेख 2012 में भारत छोड़ो आंदोलन अथवा अगस्त क्रांति की 70वीं सालगिरह (70th anniversary of the august revolution) के अवसर पर लिखा गया था, और ‘युवा संवाद’ एवं ‘हस्तक्षेप डॉट कॉम’ में प्रकाशित हुआ था। इसमें भारत छोड़ो आंदोलन …

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मनोहरा देवी निराला की प्रेरक थीं

suryakant tripathi nirala

निराला की प्रेरक कौन थीं? हिन्दी में सूर्यकान्त त्रिपाठी ´निराला´ पर जब भी बातें होती हैं तो उनकी पत्नी की भूमिका का कभी जिक्र नहीं होता। सच यह है निराला को हिन्दीसेवा के लिए प्रेरित उनकी पत्नी ने किया। निराला की ´कुल्लीभाट´ रचना बेहद दिलचस्प है। रामविलास शर्मा ने ´निराला की साहित्य साधना´में बहुत ही रोचक ढ़ंग से समूचे प्रसंग …

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सुगम जी के बहाने : हे राम! अब वे कविता पर बुलडोजर चलाएंगे !

badal saroj

सुगम जी के बहाने अब कविता पर बुलडोजर लोकप्रिय जनकवि महेश कटारे सुगम का घर तोड़ने का नोटिस देश के प्रतिष्ठित लोकप्रिय जनकवि महेश कटारे सुगम की कविताओं से हुक्मरान इतना भयभीत हो गए हैं कि अब उन्हें डराने धमकाने की साजिश रचने लगे हैं। मध्य प्रदेश के बीना शहर में चंद्रशेखर वार्ड नंबर 7 की माथुर कॉलोनी के एक …

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अंधविश्वास और दैवी शक्ति की सत्ता का प्रौपेगंडा और हिटलर के अंधविश्वास

adolf hitler

हिटलर के अंधविश्वास हिटलर ने जर्मनी में अपनी सत्ता प्रतिष्ठित करने के लिए अंधविश्वास और दैवी शक्ति की सत्ता के प्रौपेगैंडा का जमकर इस्तेमाल किया। उसका मानना था शैतान को परास्त करने, पाप से मुक्ति और जीवन की समस्याओं से मुक्ति का उपाय है दैवी शक्ति में विश्वास करो। हिटलर ने कितने समय शासन किया? हिटलर ने बारह साल शासन …

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रवीन्द्रनाथ टैगोर जितने बड़े कवि थे, उससे बड़े विचारक भी थे

rabindranath tagore

आज रवीन्द्रनाथ टैगोर की पुण्यतिथि है (Today is the death anniversary of Rabindranath Tagore) | Rabindranath Tagore punyatithi रवीन्द्रनाथ टैगोर से क्या सीखें? सात अगस्त 1941 को रवीन्द्रनाथ टैगोर की मृत्यु हुई, यानी आज का दिन हम भारतवासियों के लिए स्मरणीय दिन है। इस दिन हमारा एक महान लेखक इस धरती पर अजस्र सुंदर सपने देकर चला गया। मनुष्य की …

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हिरोशिमा दिवस : पृथ्वी पर जीवन को बचाना है तो परमाणु हथियारों से दूर रहना ही होगा हमें

debate

कब मनाया जाता है हिरोशिमा दिवस? क्यों मनाया जता है हिरोशिमा दिवस? Hiroshima marks 77th anniversary of atomic bombing. Hiroshima Day 2022: History, importance and significance of the day हिरोशिमा दिवस 2022 (Hiroshima Day 2022) हत्याओं की 77वीं वर्षगांठ है। पूरे विश्व में हर साल 6 अगस्त को परमाणु बम के भयावह प्रभावों के बारे में जागरूकता फैलाने (Spreading awareness …

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राम के बहाने असल मुद्दों से मुंह न चुराए सरकार

retired senior ips officer vijay shankar singh

महंगाई पर हुए कांग्रेस के प्रदर्शन (Congress’s performance on inflation) को कपड़ों से पहचानने और उसे राम मंदिर शिलान्यास से जोड़ कर देखना, अपनी अक्षमता का प्रदर्शन और असल मुद्दों से मुंह चुराना है। गृह मंत्री अमित शाह का यह बयान कि काले कपड़े पहन कर 5 अगस्त को धरना प्रदर्शन करना राम मंदिर निर्माण का विरोध है, सरकार की …

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हर घर तिरंगा : प्रधानसेवक का चीन प्रेम!

Opinion, Mudda, Apki ray, आपकी राय, मुद्दा, विचार

प्रधानसेवक की हिम्मत का नतीजा देश भुगतता है प्रधानसेवक का आदेश है : हर घर झंडा ! उनका आदेश और पूरा देश नतमस्तक ! उनकी यह अदा पुरानी है। वे आदेश पहले देते हैं, आगे-पीछे की सोचते हैं कि नहीं, पता नहीं। कुछ लोग कहते हैं कि वे नतीजे की चिंता किए बिना, हिम्मत से कदम उठाते हैं। यह अलग …

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नेपाल में मधेसियों को नागरिकता देने का मामला : माओवादियों का ब्राह्मणवादी चेहरा

dr. pawan patel

मधेसियों को नागरिकता देने से कौन सी क़यामत आ जायेगी ! आजकल नेपाली अख़बारों और नेपाली सोशल मीडिया में मधेस के सामाजिक-राजनीतिक कैनवास (Socio-political canvas of the Madhes) पर निर्मित दो खबरें बड़े पैमाने पर प्रसारित हो रही हैं. यह कटु सत्य है कि आमतौर पर मधेस से सम्बंधित खबरों पर पहाड़िया ब्राह्मणवादी मानसिकता के रस में रस में सर …

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भारत छोड़ो आंदोलन 1942 के ख़िलाफ़ हिंदुत्व टोली-अंग्रेज़ शासक- मुस्लिम लीग हमजोली थे : जानिये हिन्दुत्व अभिलेखागार की ज़ुबानी

opinion debate

HINDUTVA GANG COLLUDED WITH BRITISH RULERS & JINNAH AGAINST QUIT INDIA MOVEMENT: A PEEP INTO HINDUTVA ARCHIVES इस 9 अगस्त 2022 को भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के एक अहम मील के पत्थर, ऐतिहासिक ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ को 80 साल पूरे हो जायेंगे। 7 अगस्त 1942 को अखिल भारतीय कांग्रेस समिति ने बम्बई में अपनी बैठक में एक क्रांतिकारी प्रस्ताव पारित किया …

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अमृत पर्व में लोकतंत्र को जहर दिया जा रहा है !

opinion debate

लोकतंत्र को अमृत पर्व में जहर दिया जा रहा है ! Professor Jagadishwar Chaturvedi’s comment. अपने विरोधियों से राजनीतिक प्रतिशोध और उनको नष्ट करने के क्षेत्र में पीएम मोदी ने अभूतपूर्व कीर्तिमान स्थापित किया है। लोकतंत्र के 75 साल होने पर यानी अमृत पर्व में लोकतंत्र को यह जहर दिया जा रहा है। अब लोकतंत्र जश्न मनाने की चीज नहीं …

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घर-घर तिरंगा : तिरंगे के जज्बे को फिर से जगाना जरूरी

Dr. Ram Puniyani

आत्मचिंतन का समय है यह इस साल (2022) के 15 अगस्त को हम अंग्रेजों की गुलामी से हमारे देश की मुक्ति की 75वीं वर्षगांठ मनाएंगे। यह समय है आत्मचिंतन का और अपने आपको एक बार फिर उस आंदोलन के मूल्यों के प्रति समर्पित करने का जिस आंदोलन ने हमारे देश को स्वाधीनता दिलवाई थी। यह वह मौका है जब हमें …

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ये ईडी…ईडी क्या है ? मीसा की ‘मौसी’ है ईडी, बच के रहिये !

opinion debate

आपातकाल के दौरान मीसा दुरुपयोग हुआ, वैसा ही अब ईडी का हो रहा है जिस तरह देश में 47 साल पहले लगाए गए आपातकाल के दौरान मीसा दुरुपयोग (Misa abuse during emergency) का हुआ था उसी तरह आजकल देश में ईडी का हुआ है. जो काम कोई दूसरा क़ानून नहीं कर सकता उसके लिए मीसा रामबाण की तरह है. आपातकाल …

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‘प्रेमचंद की परंपरा’ पर फातिहा न पढ़ें : महाकरुणा के नहीं संघर्ष के लेखक थे प्रेमचंद

munshi premchand

जब-जब प्रेमचंद की चर्चा शुरू होती है तब तब प्रेमचंद को उनके वैचारिक व रचनात्मक सरोकारों से मुक्त कर ‘प्रेमचंद की परम्परा’ के नाम पर अमूर्त बहस छेड़ दी जाती है. अमूमन इस बहस के दो छोर होते हैं. एक छोर पर इस परंपरा में प्रेमचंद के पूर्ववर्तियों से लेकर सभी समकालीनों को शामिल करने की उदारता बरती जाती है …

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यूक्रेन में जारी युद्ध के साथ नए मोड़ पर है दुनिया

vladimir putin

यूक्रेन : बदलता वैश्विक परिदृश्य, कमजोर होती साम्राज्यवादी शक्तियां और विकसित होती क्रांतिकारी परिस्थितियां    यूक्रेन की जनता 24 फरवरी से रूसी हमले के बाद से, तबाही और बरबादी से जूझ रही है। शिकार वह अमेरिका व अन्य यूरोपीय देशों के सैन्य संगठन नाटो (उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन) की साजिशों की भी है। इन्होंने ही रूस की घेराबंदी के लिए …

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हमारे नेताओं को भाषा की कितनी तमीज है? स्त्री का सम्मान कितने नेता करते हैं?

opinion debate

जोहार महामहिम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू जी। आपके पदनाम को लेकर जो विवाद चल रहा है, वह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। इसका इस देश का एक आम नागरिक होने की हैसियत से मुझे बेहद अफसोस और शर्म दोनों है। हमारे नेताओं को भाषा की कितनी तमीज है? स्त्रियों का हमारे नेता कितना सम्मान करते हैं? इससे भी बड़ा सवाल था और है …

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क्या बैंकों का निजीकरण से सभी समस्याएं सुलझ जाएंगी?

debate

सभी समस्याओं का समाधान नहीं बैंकों का निजीकरण : Ajit Ranade on Privatization of banks जुलाई 1969 की दो महत्वपूर्ण घटनाएं 1969 में जुलाई के तीसरे सप्ताह में दो महत्वपूर्ण घटनाएं हुईं थीं। उनमें से एक राष्ट्रीय और दूसरी अंतरराष्ट्रीय घटना है। 20 जुलाई को चंद्रमा पर पहली बार मानव उतरा जो भारतीय समयानुसार रविवार की सुबह लगभग 8 बजे …

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