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सावधान ! जलवायु परिवर्तन का अगला शिकार हो सकती है बीयर

Environment and climate change

सावधान ! जलवायु परिवर्तन का अगला शिकार हो सकती है बीयर

जलवायु परिवर्तन के कारण कम हो सकती है दुनिया में बीयर की आपूर्ति

चरम सूखे और गर्मी के कारण वैश्विक बीयर आपूर्ति में कमी आई है

जलवायु परिवर्तन से बीयर उत्पादन प्रभावित हो सकता है

समुद्र के लगातार बढ़ते स्तर, तेज तूफान और जंगल की आग बिगड़ने के चलते वैज्ञानिकों का अनुमान है कि मानव निर्मित जलवायु परिवर्तन का परिणाम सबसे खतरनाक परिणामों में से एक होगा: वैश्विक बीयर आपूर्ति में व्यवधान।

नेचर प्लांट्स में प्रकाशित एक अध्ययन Decreases in global beer supply due to extreme drought and heat में, कैलिफ़ोर्निया विश्वविद्यालय के शोधकर्ता, इरविन और अन्य संस्थानों ने रिपोर्ट की है कि मानव प्रदत्त ग्लोबल वार्मिंग से पैदा हुए तेज सूखे और गर्मी, के कारण जौ, (बियर के मुख्य घटक) की फसल की पैदावार में तेज गिरावट आएगी।

कैलीफोर्निया विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर मौजूद एक खबर के मुताबिक बीयर दुनिया में मात्रा के लिहाज से सबसे अधिक खपत वाला एलकोहलिक पेय पदार्थ है। लेकिन अध्ययन के सह लेखक यूसी (University of California) इरविन के पृथ्वी प्रणाली विज्ञान के एसोसिएट प्रोफेसर स्टीवन डेविस के अनुसार भविष्य में जलवायु परिवर्तन के चलते बीयर की मूल्य पर पड़ने वाले प्रभाव के कारण बीयर दुनिया भर में लोखों लोगों की पहुंच से बाहर हो सकती है।

आईपीसीसी की ग्लोबल वार्मिंग पर रिपोर्ट : ऊर्जा रूपान्‍तरण एवं परिवर्तनकारी बदलाव

अध्ययन में इस्तेमाल होने वाले आर्थिक मॉडल से मालूम पड़ता है कि जलवायु परिवर्तन के कारण वैश्विक तापमेन में वृद्धि से जौ के उत्पादन में गिरावट के चलते बीयर प्रेमी कुछ देशों में इसकी कीमतों में भारी बढ़ोत्तरी हो सकती है।

प्रोफेसर स्टीवन डेविस ने कहा कि शोध दल ने जीवाश्म ईंधन जलने और कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन के वर्तमान और अपेक्षित भविष्य के स्तर के आधार पर पूरा खाका खींचा है।

आईपीसीसी की ग्लोबल वार्मिंग पर रिपोर्ट जारी, वैश्विक तापमान में 2 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि के दुष्परिणाम बहुत भयंकर होंगे

दुनिया के कुछ हिस्सों, जहां जौ उगाया जाता है, उनमें सं उत्तरी ग्रेट प्लेंस, कनाडाई प्रेयरी, यूरोप, ऑस्ट्रेलिया और एशिया के कुछ हिस्सों समेत कई स्थानों पर बार-बार सूखा और गर्मी की लहरों का अनुमान लगाया गया है, जिसके चलते जौ की फसल की पैदावार में तीन से लेकर 17 प्रतिशत तक कमी हो सकती है, जिसके चलते बीयर का उत्पादन प्रभावित होगा। 

अध्ययन के सह लेखक यूसी इरविन के सहायक प्रोफेसर नाथन मुलर का कहना है कि दुनिया जलवायु परिवर्तन केजीवन पर असर डालने वाले कई दुष्प्रभाव झेल रही है, लिहाजा इसके मुकाबले लोगों द्वारा बीयर पिए जाने पर अधिक खर्च करने की तुलना तुच्छ है।

First Global Conference on Air Pollution and Health

संयुक्त राष्ट्र के अंतर सरकारी पैनल (आईपीसीसी) की जलवायु परिवर्तन पर हाल में जारी की गई नवीनतम रिपोर्ट ने चेतावनी दी है कि वैश्विक तापमान उम्मीद से अधिक तेज गति से बढ़ रहा है। कार्बन उत्सर्जन में समय रहते कटौती के लिए कदम नहीं उठाए जाते तो इसका विनाशकारी प्रभाव हो सकता है। आईपीसीसी ने वैश्विक तापमान में वृद्धि को दो के बजाय 1.5 डिग्री से. रखने पर जोर दिया है।

इस वर्ष डब्ल्यूएचओ वायु प्रदूषण और स्वास्थ्य पर पहला वैश्विक सम्मेलन आगामी 30 अक्टूबर से 1 नवंबर 2018 को आयोजित करेगा ताकि सरकारों और भागीदारों को वायु गुणवत्ता में सुधार और जलवायु परिवर्तन में सुधार के वैश्विक प्रयासों में एक साथ लाया जा सके।

पेरिस समझौते की समीक्षा के लिए इस वर्ष दिसंबर में पोलैंड में दुनिया भर के नेता एकत्रित होंगे। ग्लोबल वार्मिंग के लिए वायु प्रदूषण भी एक जिम्मेदार कारक है।

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