यह सरकार भारत विरोध में खड़ी है

भारत सिर्फ आर्यावर्त ही नहीं है, यह बात न नरेन्द्र मोदी समझ रहे हैं और न संघ परिवार

मधुवन दत्त चतुर्वेदी

गाय दुनिया भर में हैं, लेकिन गायों के लिए पागलपन आर्यावर्त में ही है। भारत सिर्फ आर्यावर्त ही नहीं है, यह बात न नरेन्द्र मोदी समझ रहे हैं और न संघ परिवार।

इन तीन सालों में कई ऐसे मुद्दे उठे हैं जिनमे 'विविधता में एकता' के सूत्र को तोड़ने की कोशिश हुई है। वस्तुतः विविध ही नहीं अपितु अनेकानेक विरोधी संस्कृतियों के बीच संतुलन स्थापित करते हुए नेहरू और उनके सहयोगियों ने नए लोकतान्त्रिक भारत की एकता अखंडता की बुनियाद रखी थी। इस संतुलन के लिए जरूरी था विविध और विरोधी विश्वासों के बीच किसी भी पक्षधरता से राज्य दूर रहे और वैज्ञानिक विचारों के समाज का लक्ष्य रखे। आरएसएस लगातार 'हिन्दू राष्ट्र' की परिकल्पना के साथ इस प्रयास का विरोध करता रहा है, जबकि उसके हिन्दूराष्ट्रवाद में खुद हिंदुओं के बीच की विविध और विरोधी प्रवृत्तियों के संतुलन का घोर अकाल है।

गाय के मुद्दे पर उत्तर, दक्षिण, पूरब और पश्चिम का भारत बंटा हुआ दिख रहा है लेकिन संघ परिवार इससे जानबूझकर आँखें चुरा रहा है। स्पष्ट है कि समर्थन और विरोध क्षेत्रीय है, कहीं भी धार्मिक नहीं है और विरोध में भी हिन्दू ही हैं तब भी आर्यावर्त में राजनैतिक प्रभुत्व के लालच के चलते वे इसे धार्मिक ध्रुवीकरण के रूप में ही निरूपित कर रहे हैं।

यह सरकार नागरिकों के बीच 'राष्ट्र की एकता और अखंडता को सुनिश्चित करने वाली बंधुता' के प्रति अपने समवैधानिक दायित्व से विमुख ही नहीं बल्कि उसके विरोध में खड़ी है। यह भारत विरोध है ।

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