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Cricketer Aniket after Surgery with Dr Ankit

घुटने की एडवांस सर्जरी ने बचाया इस उभरते रणजी क्रिकेटर का करियर

सड़क दुर्घटना में 19 वर्षीय क्रिकेटर के घुटने में लगी गंभीर चोट, सफल रही सर्जरी

गाज़ियाबाद 07 अक्टूबर : सड़क दुर्घटना के कारण ग़ाज़ियाबाद के 19 वर्षीय अनिकेत लोहिया का क्रिकेट करियर (Aniket Lohia’s cricket career) लगभग खत्म ही माना जा रहा था, जब एक सड़क दुर्घटना में उन्हें घुटन पर चोट लगी। कई लिगामेंट्स को चोट पहुंची और दाहिना घुटने का जोड़ डिसलोकेट हो गया। वह अपने पैरो पर खड़ा नहीं हो पा रहे थे। अस्थायी रूप से वे चलने में भी असमर्थ थे। स्पोर्ट्स इंजरी मैनेजमेंट (Sports injury Management – खेल चोट प्रबंधन) में एडवांसमेंट की बदौलत प्रसिद्ध स्पोर्ट्स मेडिसिन सर्जन डॉ. अंकित वार्ष्णेय (Sports Medicine Surgeon Dr. Ankit Varshney) ने दो चरणों में हाई-एंड लिगामेंट सर्जरी की और उभरते क्रिकेटर की सफल वापसी सुनिश्चित की।

इस दुर्घटना ने न केवल अनिकेत के खेल करियर को दांव पर लगा दिया था, बल्कि उनके सामान्य दिनचर्या को भी पूरी तरह बाधित कर दिया था। भावनात्मक और मनोवैज्ञानिक परामर्श के साथ एक पूर्ण उपचार योजना तैयार की गई थी। चूंकि, उनके घुटने के कई लिगामेंट्स फट गए थे, यह निर्णय लिया गया कि बेस्ट पॉसिबल रिजल्ट प्राप्त करने के लिए सर्जरी दो चरणों में की जाएगी। व्यापक शोध, योजना और परामर्श के बाद डॉ. वार्ष्णेय और उनकी टीम ने इस सर्जरी को अंजाम दिया।

साहिबाबाद स्थित एक्यूरेट ओर्थोपेडिक एवंस्पोर्ट्स मेडिसिन के सीनियर कंसल्टेंट, व स्पोर्ट्स मेडिसिन सर्जन डॉ. अंकित वार्ष्णेय ने बताया,

“अनिकेत की चोट काफी गंभीर थी। वह ठीक से खड़े भी नहीं हो पा रहे थे। गहन जांच के बाद हमने दो चरणों में सर्जरी की योजना बनाई। पहले चरण में, उनके एक्स्ट्रा-आर्टिकुलर (जोड़ के बाहर- पीएलसी) लिगामेंट्स की मरम्मत की गई। चार महीने बाद, उनकी दूसरी सर्जरी के दौरान उनके इंट्रा-आर्टिक्युलर (जोड़ के भीतर – एसीएल और पीसीएल) लिगामेंट्स को फिर से बनाया गया। यह एक जॉइंट प्रिजर्विंग प्रोसीजर है जहां इंट्रा-आर्टिकुलर सर्जरी को आर्थोस्कापी के ज़रिये (की – होल सर्जरी) किया जाता है।”

उन्होंने यह भी कहा, “सर्जरी के बाद, एक इंटेन्सिव रिहैबिलिटेशन प्रोग्राम बनाया गया ताकि जल्द से जल्द पहले की तरह अपने पैरों पर खड़ा किया जा सके। देश में स्पोर्ट्स इंजरी के मामले बढ़ रहे हैं। एडवांस ट्रीटमेंट के तौर – तरीकों जैसे आर्थोस्कोपी (arthroscopy) और जॉइंट प्रिजर्वेशन कई स्पेशलाइज्ड सेंटर पर उपलब्ध है।

 

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