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Didi ke Bolo

दीदी के बोलो – इस देश का कवि न्याय मांगता है आपसे

दीदी के बोलो

[यह जिंदगीनामा किस्तों में चलेगा, तब तक जब तक मेरे खिलाफ हुई साजिश का अंत और इन्तेहाँ नहीं होता इन मुश्किलों का,,,अनिल पुष्कर

Series of Cold Blooded Murder – Part One

सुनिए ध्रितिकान्तो! ओनली रिवेंज –

हैरिटेज में मुन्नी और सात चौकीदार – एक

 

सुनिए ध्रितिकान्तो ! यह एम. मित्रा. की  कथा नहीं

यहाँ बॉस है – चिर कुमारी ब्राह्मण कन्या – टी. एम.

ख़ुफ़िया विभाग में चार परमानेंट फैकल्टी हैं.  

तीन प्रोबेशनर्स सबोर्डनेट- कुल सात.

यह कुमारी कोई इंडस्ट्रीयलिस्ट नहीं,

गांधियन विचार का लबादा ओढ़े हिंसक लेडी है

निहायत धूर्त, चालबाज़, मौकापरस्त व हत्यारिन.

 

टीएम रिप्लेसमेंट में यकीन रखती है. रिप्लेस्ड- HOD, 2007

और तकरीबन बिना फेरबदल दस साल एकछत्र रही HOD

यहीं से शुरू हुई रणनीति, खेल पूर्व सहकर्मियों के रिप्लेसमेंट का.

कुछ धोखे में रिप्लेस हुए, कुछ घिनौनी साजिश का शिकार हुए.

इलज़ाम लगाने का जुनून और रिप्लेस करने की बुरी लत

एक मनोरोगी – चिरकुमारी – टी. एम.

 

सुनिए ध्रितिकान्तो ! यह मजलिस में हुआ नाटक नहीं,

हेलो मिस्टर एम.एम. यह रियल इन्सिडेंट्स की पुख्ता तहरीर है

‘मुन्नी और सात चौकीदार’ –  नया रूपांतरण, न्यू फॉर्म, न्यू स्टाइल

असल जमीन पर मंचित जिंदगियों की हैरतंगेज़ दास्ताँ का सिलसिला.

 

अनिल कुमार पुष्कर : कवि और आलोचक
अनिल कुमार पुष्कर

मिस एस.एस, मिस्टर ए. एस. और मिस्टर एच.एस.

इससे भी पहले मिस्टर एस.एल और अन्य …

लेडी गांधियन चिर कुँवारी (?) के हाथों जख्मी.

न खंजर, न असलहा, न पैना धारदार हथियार

सिर्फ – अकादमिक बाज़ार की कुलीन कातिल की शरण में रौंदे गये

कई – मेहनती, अभ्यस्त, अनुभवी और अद्भुत क्षमता से भरे हुए किरदार.

 

वह गेस्टहाउस में एम. एच. के नाभिचक्र पर उंगलियाँ फिराती है, कहती है –

तुम विवाहित हो इसीलिए ये रेकी-क्रिया तुम नहीं कर सकती

मैं कुवाँरी हूँ, चिर कुँवारी. तो यह योग खासतौर से ब्रह्मकुवारियों की खातिर बना है.

टी. एम. की हमराज  – कई कत्लों, सुबूतों, झूठी तफ्तिशों और बेरहमी से इस्तेमाल

हुआ अहिंसा का खंजर. सब कुछ इसी नाभि की धुरी और चक्र में धंसा.

किन्तु बेजा डरपोक मौकापरस्त – टी.एम की पालतू फेनी चुहिया.

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Ram Puniyani राम पुनियानी, लेखक आई.आई.टी. मुंबई में पढ़ाते थे और सन् 2007 के नेशनल कम्यूनल हार्मोनी एवार्ड से सम्मानित हैं।)

जिन्होंने कानूनों का मखौल बनाते हुए मस्जिद गिराई, उनकी इच्छा पूरी की उच्चतम न्यायालय ने ?

जिन्होंने कानूनों का मखौल बनाते हुए मस्जिद गिराई, उनकी इच्छा पूरी की उच्चतम न्यायालय ने …

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