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मोदी सरकार का नया फर्जीवाड़ा, संविधान के विरुद्ध कीं सरकारी पदों पर सीधी नियुक्तियां

Socialist thinker Dr. Prem Singh is the National President of the Socialist Party. He is an associate professor at Delhi University समाजवादी चिंतक डॉ. प्रेम सिंह सोशलिस्ट पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव हैं। वे दिल्ली विश्वविद्यालय में एसोसिएट प्रोफेसर हैं

नई दिल्ली, 14 अप्रैल 2019. खबरों के मुताबिक मोदी सरकार ने विभिन्न सरकारी विभागों में निजी क्षेत्र के नौ विशेषज्ञों की संयुक्त सचिव के रैंक पर सीधी नियुक्ति (Direct appointment on the rank of Joint Secretary of nine private sector experts in different government departments) की है. राजस्व विभाग (Revenue Department) में भी इस तरह की नियुक्तियां होनी थीं, लेकिन प्रक्रियागत कारणों से वे रद्द हो गईं. मोदी सरकार ने सत्ता में आते ही भारत सरकार को ‘निगम सरकार’ में बदलने का काम तेज कर दिया था. उसी की एक बानगी ये सीधी नियुक्तियां हैं. सरकार ने एक साल पहले निजी क्षेत्र के तथाकथित विशेषज्ञों से इन नियुक्तियों के लिए आवेदन मांगे थे. यह भी खबर है कि कुछ और विभागों में इस तरह की नियुक्तियां की जायेंगी.

फिलहाल ये नियुक्तियां तीन साल के लिए हैं. यह अवधि 5 साल तक बढ़ाई जा सकती है.

सरकारी पदों पर सीधी नियुक्तियां : सोशलिस्ट पार्टी ने जताया ऐतराज

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इन नियुक्तियों पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए सोशलिस्ट पार्टी के अध्यक्ष डॉ. प्रेम सिंह ने कहा कि सरकार जिस तरह से सरकार के विभागों और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों को निजी हाथों में सौंपती जा रही है, उसका यही संकेत है कि अगला कदम सीधी नियुक्तियों को पूर्णकालिक बनाने का होगा. सरकार की इस कवायद का एक अन्य संकेत यह भी है कि भविष्य में ये विशेषज्ञ विदेशी प्राइवेट कंपनियों से भी लिए जाएं. इतना ही नहीं, आगे राज्य सरकारों में भी इस तरह की सीधी नियुक्तियां की जा सकती हैं.

डॉ. प्रेम सिंह ने कहा कि अभी तक संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की सिविल सेवा परीक्षा या अन्य केंद्रीय सेवाओं  की परीक्षा पास करने वाले नागरिक संयुक्त सचिव के रैंक पर पदासीन होते रहे हैं. संयुक्त सचिव के रैंक तक पहुंचने में उन्हें कई सालों के कार्य अनुभव से गुजरना होता है. जिन सरकारी विभागों में ये सीधी नियुक्तियां की गई हैं, वहां इस रैंक पर पहले से लोग कार्यरत हैं. सरकार के इस फैसले से कार्यकुशलता बढ़ने के स्थान पर झगड़ा बढ़ सकता है. मजेदारी यह है कि सीधे संयुक्त सचिव के पद पर बिठाये गए इन विशेषज्ञों का चयन यूपीएससी के मार्फत किया गया है! इसका मतलब है कि सरकार महत्वपूर्ण संवैधानिक संस्था यूपीएससी को निजी क्षेत्र के लिए प्रवेश द्वार बना रही है.

सोशलिस्ट पार्टी मोदी सरकार के इस निर्णय को संविधान विरोधी मानती है और इसे तुरंत निरस्त करने की मांग करती है. पार्टी देश के समस्त नागरिकों से अपील करती है कि वे इस संविधान विरोधी फैसले को निरस्त करने के लिए सरकार पर जबरदस्त दबाव बनायें.

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