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आपको मौत का डर सता रहा है, हरेक तानाशाह इसी तरह डर डरकर प्रतिक्षण मरता है

Narendra Modi new look

आपको मृत्यु का भय सता रहा है, हरेक तानाशाह इसी तरह डर डरकर प्रतिक्षण मरता है

मौत का डर और अवसाद (Fear and Depression of Death) – कांग्रेस (Congress) ने आजतक किसी संघी नेता की हत्या नहीं कराई, मोदी जी आपकी कांग्रेस हत्या क्यों कराएगी?

आपको अपनी मृत्यु का भय (Fear of death) सता रहा है और यह स्वाभाविक है, हरेक तानाशाह इसी तरह डर डरकर प्रतिक्षण मरता है।

हिटलर इसी तरह हर क्षण मौत से डरता था और अंत में आत्महत्या करके मरा।

मोदी जी, हिटलर आपसे हजार गुना ताकतवर और जल्लाद था, सारे जर्मनी में वह हरेक नागरिक का नायक था उसी जर्मन समाज में आज हिटलर से जनता नफरत करती है। तानाशाह हमेशा डरपोक होते हैं वे कभी जनता से निडर होकर नहीं मिलते, वही बीमारी आपको है।

एक अन्य बात वह यह कि सच्चा हिंदू निडर और सत्यवादी होता है, यह गुण भी आप विकसित नहीं कर पाए, आप अहर्निश झूठ बोलते हैं, यहां तक कि झूठ में निजी तौर पर जीते हैं। आपको जिह्वा सुख की बीमारी है उसके कारण आपके विवेक का ढक्कन एकदम बंद हो गया है, फलत: कॉमनसेंस की बातें करने, कॉमनसेंस की राजनीतिक बयान बाजी करने में आपको मजा आता है।

आप अवसाद की भाषा में हमेशा बोलते हैं। असल में तानाशाह राजनेता का अवसाद सीधे टकराव की भाषा में व्यक्त होता है। आपके पांच साल के शासन अवसाद के माहौल की सृष्टि की है। इस अवसाद के माहौल को आप चुनावी भाषण, मेले-ठेले और लफ्फाजी के जरिए ढंकने की कोशिश करते हैं। अवसाद से ध्यान हटाने के लिए कांग्रेस, राहुल गांधी, व्यापारियों, पूंजीपतियों और अभिजन के खिलाफ में बोलना एक फैशन है।

अवसाद की भाषा (Language of depression) कूपमंडूकों की अस्वाभाविक भाषा है। यह ऐसे व्यक्ति की भाषा है जिसके पास कोई सपना नहीं है, जो एकदम निठल्ला और बकबादी है।

आपकी अ-स्वाभाविक भाषा अहर्निश अशांतमन और टकराव को व्यक्त करती है।इस तरह की भाषा का सामाजिक और निजी जीवन के अवसाद से गहरा संबंध है। यह सामाजिक असमानता और सामाजिक अवसाद की अभिव्यक्ति है। इस तरह की भाषा असमानता को बनाए रखती है।

मोदी के झूठ बोलने के पीछे बड़ा कारण है उनका उन्मादी और अशांत व्यक्तित्व। यह घरेलू अभावों की देन है।

मोदी को कितना सामाजिक विकास की चिंता है और इस चिंता के पीछे वे कितना अपने निजी अशांत मन को छिपाकर रखते हैं या व्यक्त करते हैं इसे क़ायदे से खोलकर देखा जाना चाहिए।

राजनेता का उन्मादी और अशांत भाव विकास की ओर कम और वायवीय दुनिया की ओर ज़्यादा ले जाता है।

वायवीय वायदे करना, रंगीन सपनों में खोए रहना,  असंभव को संभव बनाने के दावे करना, काल्पनिक शत्रु को निर्मित करना और फिर बार बार काल्पनिक शत्रु को पीटना और अपने को विजयी घोषित करना,  आदि अशांत और असामान्य राजनेता के लक्षण हैं।यही अशांत मन आपको निरंतर झूठ बोलने के लिए मजबूर करता है। आपके इस पहलू का आपके वभक्तों और मीडिया पर भी असर पड़ा है। इन दिनों हमारा मीडिया विश्व रैंकिंग में नीचे से मात्र दो स्थान ऊपर है।

जगदीश्वर चतुर्वेदी

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