स्वामी सानंद ने कहा था, “मेरी मौत के साथ मेरे अनशन का अंत होगा’, मोदी सरकार ने सच साबित करा दिया

स्वामी सानंद ने कहा था, मेरी मौत के साथ मेरे अनशन का अंत होगा’, मोदी सरकार ने सच साबित करा दिया

गंगा के लिए अन्न – जल छोड़ प्राण त्याग दिए उन्होंने

प्रोफेसर जीडी अग्रवाल उर्फ स्वामी ज्ञानस्वरूप सानंद का निधन

गोपाल राठी

गंगा सफाई के लिए पिछले 112 दिनों से अनशन पर बैठे पर्यावरणविद् प्रोफेसर जीडी अग्रवाल उर्फ स्वामी ज्ञानस्वरूप सानंद का गुरुवार को निधन हो गया। बीते 9 अक्टूबर से प्रोफेसर जीडी अग्रवाल ने पानी पीना बंद कर दिया था। अगले दिन हालत बिगड़ने पर पुलिस ने उन्हें जबरन ऋषिकेश स्थित एम्स अस्पताल में भर्ती कराया था। जीडी अग्रवाल 86 साल के थे।

पिछले 22 जून से अग्रवाल गंगा सफाई की मांग को लेकर ‘आमरण अनशन’ पर बैठे हुए थे। हरिद्वार स्थित मातृ सदन के संत ज्ञानांन्द से इन्होंने दीक्षा ली थी।

अग्रवाल गंगा को अविरल बनाने के लिए लगातार कोशिश करते रहे। उनकी मांग थी कि गंगा और इसकी सह-नदियों के आस-पास बन रहे हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट के निर्माण को बंद किया जाए और गंगा संरक्षण प्रबंधन अधिनियम को लागू किया जाए।

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उन्होंने कहा था, ‘अगर इस मसौदे को पारित किया जाता है तो गंगाजी की ज्यादातर समस्याएं लंबे समय के लिए खत्म हो जाएंगी। मौजूदा सरकार अपने बहुमत का इस्तेमाल कर इसे पास करा सकती है। मैं अपना अनशन उस दिन तोडूंगा जिस दिन ये विधेयक पारित हो जाएगा। ये मेरी आखिरी जिम्मेदारी है। अगर अगले सत्र तक अगर सरकार इस विधेयक को पारित करा देती है तो बहुत अच्छा होगा। अगर ऐसा नहीं होता है तो कई लोग मर जाएंगे। अब समय आ गया है आने वाली पीढ़ी इस पवित्र नदी की जिम्मेदारी ले।’

प्रधानमंत्री कार्यालय को कई पत्र लिखे थे स्वामी सानंद ने

अनशन के दौरान जीडी अग्रवाल ने कहा था,

‘हमने प्रधानमंत्री कार्यालय और जल संसाधन मंत्रालय को कई सारे पत्र लिखा था, लेकिन किसी ने भी जवाब देने की जहमत नहीं उठाई। मैं पिछले 109 दिनों से अनशन पर हूं और अब मैंने निर्णय लिया है कि इस तपस्या को और आगे ले जाऊंगा और अपने जीवन को गंगा नदी के लिए बलिदान कर दूंगा। मेरी मौत के साथ मेरे अनशन का अंत होगा।’

प्रधानमंत्री मोदी ने 2014 में वादा किया था कि 2019 तक गंगा साफ कर दी जाएगी। हालांकि कई सारे रिपोर्ट्स बताती हैं कि गंगा की सफाई के लिए कोई खास प्रभावी कदम नहीं उठाए गए हैं।

संसदीय समिति ने बताया था गंगा सफाई के लिए सरकार के कदम पर्याप्त नहीं

एक संसदीय समिति, जिसने गंगा सफाई के लिए सरकार के प्रयासों का मूल्यांकन किया था, ने बताया था कि गंगा सफाई के लिए सरकार द्वारा उठाए गए कदम पर्याप्त नहीं हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, ‘मौजूदा स्थिति ये बताती है कि सीवर परियोजनाओं से संबंधित कार्यक्रमों को राज्य द्वारा सही तरीके से लागू नहीं किया गया और ये सरकार का गैरजिम्मेदाराना रवैया दर्शाता है। सीवर परियोजना सीवेज ट्रीटमेंट और जल निकायों में सीवेज के डंपिंग के मुद्दों का हल करने के लिए था।’

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कैग ने भी गंगा सफाई पर सरकार की कोशिश को बताया था अपर्याप्त

संसदीय समिति के अलावा नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) ने भी गंगा सफाई को लेकर सरकार की कोशिश को अपर्याप्त बताया था।

क्या कहा था कैग ने गंगा सफाई पर अपनी रिपोर्ट में

कैग ने अपनी रिपोर्ट में कहा,

‘भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान के साथ समझौता करने के साढ़े छह साल बाद भी स्वच्छ गंगा के लिए राष्ट्रीय मिशन (एनएमसीजी) की लंबी अवधि वाली कार्य योजनाओं को पूरा नहीं किया जा सकता है। इसी वजह से राष्ट्रीय गंगा नदी बेसिन अथॉरिटी अधिसूचना के आठ वर्षों से अधिक के अंतराल के बाद भी स्वच्छ गंगा के राष्ट्रीय मिशन में नदी बेसिन प्रबंधन योजना नहीं है।’

राष्ट्रीय प्रदूषण बोर्ड के पहले सदस्य सचिव भी रहे थे स्वामी सानंद

कानपुर आईआईटी में सिविल और पर्यावरण इंजीनियरिंग विभाग में प्रोफेसर रह चुके जीडी अग्रवाल राष्ट्रीय गंगा नदी घाटी प्राधिकरण के सदस्य भी रह चुके थे। वहीं वे राष्ट्रीय प्रदूषण बोर्ड के पहले सदस्य सचिव भी रहे थे। इसके अलावा सरकार अतीत में देश की तमाम नदियों की साफ-सफाई से जुड़े मुद्दों पर उनकी सलाह लेती रही हैl

स्वामी सानंद ने कहा था – उमा भारती सामने होती तो गर्दन पकड़ लेता, मोदी जी आपके के मन में क्या कभी गंगाजी की भी बात आती है ? :

स्वामी ज्ञानस्वरूप सानंद जी यानी डॉ. जी.डी. अग्रवाल के मार्गदर्शन में एकलव्य संस्था ने सन 1986-1987 में परासिया – पिपरिया में पर्यावरण जागरूकता कार्यक्रम चलाया था, जिसमें स्कूली विद्यार्थियों को पानी, मिट्टी और वायु के रासायनिक एवं भौतिक परीक्षण के सहज और किफायती प्रयोग सिखाए गए थेl विद्यार्थियों ने अपने नगर के विभिन्न जल स्रोतों से हर माह लिए गए नमूने और उनके परीक्षण पर विस्तृत रिपोर्ट डा. जी.डी. अग्रवाल के नेतृत्व में शासन को सौंपी थीl परासिया में आयोजित इस समारोह में आए म. प्र. सरकार के प्रतिनिधि शरद चन्द्र बेहार ने इस अनूठे काम की सराहना की थी और इस तरह के प्रायोगिक कौशल को स्कूली पाठयक्रम का हिस्सा बनाने की हिमायत की थीl

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जिन्हें गंगा मैया ने बुलाया था वे कहाँ है ?

"न मैं आया, न मुझे भेजा गया, मुझे तो मां गंगा ने बुलाया है" डायलॉग मारने वाले को पीएम बनाने वालों को सूचित हो, ये एक गंगापुत्र की हत्या का मामला है, भले ही मेडिकल रिपोर्ट में हत्या साबित ना हो सके। और यह पाप भक्तों के भगवान के ही खाते में क्रेडिट होगा।

मजेदार बात यह है कि स्वामी ज्ञानस्वरूप सानंद की मृत्यु के बाद श्रद्धांजलि देने में मोदी जी सब से आगे रहे l

क्या था डॉ. जी.डी अग्रवाल का पूरा नाम

इस दौरान डा. जी.डी अग्रवाल का पूरा नाम गुरुदास अग्रवाल थाl

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डॉ. अग्रवाल के सानिध्य में रहने उनके मार्गदर्शन में साथ काम करने का मौका मिलाl हम लोग उन्हें गुरदास भाई संबोधन से संबोधित करते थेl सभी विद्यार्थी और सहयोगी भी उन्हें इसी नाम से पुकारते थेl

मेरे वरिष्ठ साथी कमल महेन्द्रू, डॉ विजय दुआ, डॉ सुशील जोशी और मेरी ओर से गुरुदास भाई को और उनके संघर्ष को सलाम, हार्दिक श्रद्धांजलिl

(गोपाल राठी, पिपरियाकी फेसबुक टिप्पणियों का समुच्चय )

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