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हरियाणा : ‘अबकी बार 75 पार’ वाले कहीं 7 पर न अटक जाएं।

गुरुग्राम 17 अक्तूबर। लगभग दो महीने पहले हारियाणा में भाजपा ने मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर की अगुवाई मे 22 दिन की “जन आशीर्वाद” यात्रा में जिस समर्थन और उत्साह का प्रदर्शन किया था, और उस से अभिभूत हो कर ‘अबकी बार 75 पार’ की महत्वकांक्षा के साथ प्रदेश में एक नया इतिहास रचने की उत्सुकता दिखायी थी वो चुनाव की तारीख तक आते-आते जमीन पर बहुत बदली हुई दिखायी पड़ने लगी है।

चुनाव की घोषणा से पहले भाजपा के पक्ष में माहौल बनाने के लिए मनोहर लाल खट्टर व सभी मंत्रियों ने प्रदेश में हुये कथित विकास के नाम पर मतदाताओं को एक बार फिर सरकार बनाने का संदेश देने की जी तोड़ कोशिश की थी।

भाजपा ने प्रदेश में विपक्षी पार्टियों को पूरी तरह से खारिज करने की रणनीति के तहत हरियाणा में एक तरफा जीत को मील का पत्थर तक घोषित कर दिया था।

चुनावों की घोषणा से पहले भाजपा ने विपक्षी पार्टियों की गुटबाजी व आपसी फूट को भुनाने के प्रयोग के तहत कई नेताओं व पूर्व विधायकों को भाजपा में शामिल करके हरियाणा की राजनीति में नए समीकरण गढ़ने की कोशिश की थी।

पिछले पांच वर्षों में प्रदेश में किये गए विकास कार्यों की उपलब्धि को आधार बना कर भाजपा फिर से सरकार बनाने के सपने को लेकर चुनाव मैदान मे उतरी है, जबकि कांग्रेस प्रदेश में नये नेतृत्व कुमारी शैलजा व भूपेन्द्र हूडा के साथ भाजपा को कटघरे मे खड़ा कर रही है। इनेलो की गृहकलह में ओम प्रकाश चौटाला से अलग हो कर देवी लाल की विरासत को आधार बना दुष्यंत चौटाला जजपा को नये विकल्प के तौर पर स्थापित करने में जुटे हैं।

लेकिन प्रदेश स्तर पर जो स्थानीय मुद्दे हैं उनका कोई ठोस हल न होने के कारण मातदाता, ज़ो कि ज्यादातर खेती किसानी से जुड़े हैं, का वर्तमान सरकार के मंत्रियों व विधायकों के प्रति असंतोष व विरोध कई विधान सभा क्षेत्रों मे अब खुलकर सामने आ रहा है।

दिग्गज नेता शिक्षा मंत्री रामबिलास का उनके अपने विधानसभा क्षेत्र के कई गांवों में जबर्दस्त विरोध हो रहा है। सतनाली में चुनावी सभा में ग्रामीणो ने उनके खिलाफ नारे लगा कर वहां से बैरंग वापिस जाने को मजबूर दिया दिया। उनके बेटे गौतम शर्मा के अहंकार व्यवाहर से भी मतदाता खासे नाराज हैं। राम बिलास शर्मा इस चुनाव में संकट में हैं।

कृषि मंत्री ओम प्रकाश धनखड़ बादली विधानसभा में मतदाताओं के रडार पर हैं। स्थानीय मुद्दे, सिंचाई के पानी की समस्या, कार्यकर्ताओं की उपेक्षा के कारण अधिकतर मतदाताओं के स्वर अक्रोश के हैं।

सरकार के वित मंत्री कैप्टन अभिमन्यु को पांच महीने पहले हुये लोक सभा चुनाव में ही अपने गांव मे जबर्दस्त विरोध का सामना करना पडा था। लोगों के काम न कारवाने के आरोप अक्सर हलके के लोग लगाते रहे हैं। विभिन्न स्थानीय मांगों, युवाओं के रोजगार की उपेक्षा से गंभीर विरोध की आवाज पूरे क्षेत्र मे जोर पकड़ रही है। ग्रामींण मतदाता का गुस्सा फूट कर व्यापक प्रदर्शन में बदल रहा है।

नारनोंद की अनाज मंड़ी में 14 तारीख को सरकार की नीतियों के खिलाफ भारी विरोध प्रदर्शन हुआ, ज़िससे प्रशासन के हाथ पांव फूल गए हैं। इस अप्रत्य़ाशित विरोध ने कैप्टन अभिमन्यु के राजनीतिक भविष्य पर प्रश्न चिन्ह लगा दिया है।

प्रदेश में सत्ता पर दोबारा काबिज होने के लिए जोरदार प्रयास कर रही भाजपा के कई अन्य उम्मीदवार भी चुनावी चक्रव्यूह में फंसते नज़र आ रहे हैं।

भाजपा ने बेहतर समीकारंण के हिसाब से प्रत्याशियों को उतारा था लेकिन टिकट बंटवारे के बाद व कांग्रेस में कुमारी शैलजा, भूपेन्द्र हूडा के कमान संभालने के बाद तथा जजपा के बढते ग्राफ ने प्रदेश के सियासी हालात बदल दिये हैं। अब देखना ये है कि अमित शाह की चुनावी चाणक्य नीति और प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी धारा 370 के आसरे कितने विधायकों की नैय्या पार लगाने में सफल हो पाते हैं।

जगदीप सिंह सिन्धु

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