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सेहत : मानसून के तनाव को ऐसे करें छूमंतर

मॉनसून में रिमझिम बरसता पानी वातावरण को सुंदर बना देता है. ऐसे में बारिश में भीगना और गरमा-गरम चाय की चुस्कियां लेने का एक अलग ही आनंद है. तपती गर्मी के बाद बारिश की फुहारें तन-मन को शीतल कर देती हैं. लेकिन यह भी है कि बारिश का मौसम अपने साथ कईं बीमारियों को लेकर भी आता है. बारिश के कारण उमस बढ़ जाती है, तेज बारिश के कारण लोग घरों से नहीं निकल पाते, हर जगह कीचड़ और पानी नजर आता है. धूप की कमी और सूरज न निकलने से वातावरण में एक उदासी सी छा जाती है. यही कारण है कि मानसून में मानसिक तनाव बढ़ जाता है.

Are you sad these days? Sad is actually a type of depression.

क्या आप इन दिनों उदास हैं? क्या बदलते मौसम के शुरू होते ही आपके व्यवहार में अचानक परिवर्तन आ गया है? आप खुद को अन्य दिनों की अपेक्षा कहीं अधिक सुस्त व उदास महसूस कर रहे हैं. आप का मन किसी चीज में नहीं लग रहा और आप को इन दिनों एकांत में रहना ज्यादा अच्छा लग रहा है. सैड वास्तव में एक प्रकार का डिप्रेशन या अवसाद है जिसमें व्यक्ति हर साल एक ही समय विशेष पर ग्रसित होता है. ऐसे में बेचौनी, अवसाद और थकान के लक्षण दिखाई देते हैं. काम में मन न लगना और निराशा के भाव इस दौरान व्यक्ति के दिमाग में आते हैं. सैड में सूर्य की रोशनी में कमी आने को लेकर दिमाग में एक अलग तरह की प्रतिक्रिया होती है. मानसून के दौरान अकसर इसी प्रकार का मौसम हो जाता है. वातावरण में आर्द्रता, उमस की अधिकता होती है जो आदमी को बेचौन कर देती है. मानूसन के दौरान जब दिन में कई बार सूर्य की रोशनी बहुत कम देखने को मिलती है तो दिक्कत और अधिक बढ़ जाती है.

Cause of Sad

सैड का कारण सूर्य की रोशनी के व्यक्ति के दिमाग द्वारा स्रावित होने वाले हार्मोन के स्तर को प्रभावित करना माना जाता है. सैड से ग्रसित व्यक्ति अवसाद में रहता है. इसमें मूड में बदलाव, ऊर्जा की कमी, नींद में बदलाव, ऊर्जा की कमी, नींद में बदलाव, ध्यान लगाने में तकलीफ और दोस्तों तथा परिचितों के साथ कम समय बिताने की इच्छा शामिल है. ऐसे में अपने भोजन में मैग्रीशियम की मात्रा बढ़ाएं. इस मौसम में संतुलित आहार का ध्यान रखना बहुत जरूरी है. यदि इसके बावजूद आप खुद को थका-थका महसूस करते हैं, तो इसका एक कारण आपके शरीर में मैग्रीशियम की कमी भी हो सकती हैं. हमारे शरीर को करीब 300 बायोकैमिकल रिएक्शंस के लिए मैग्रीशियम की जरूरत होती है. इसके लिए आप अपने भोजन में बादाम और काजू जैसे ड्राई फ्रूट्स को सम्मिलित कर सकते हैं.

क्यों होता है मानसून में तनाव Why there is tension in monsoon

मौसम में बदलाव का प्रभाव सिर्फ  शारीरिक स्वास्थ्य पर ही नहीं मानसिक स्वास्थ्य पर भी पड़ता है. बारिश में अधिकतर लोग खिडकी दरवाजे बंद करके घरों और ऑफिसों में दुबके रहते हैं. सूरज भी नहीं निकलता है और अगर निकलता भी है तो उसमें उतनी तेजी नहीं होती है. इससे प्राकृतिक रूप से मिलने वाले प्रकाश की मात्रा में अत्यधिक कमी आ जाती है जिससे शरीर की इंटरनल क्लॉक गड़बड़ा जाती है जिससे तनाव बढ़ता है.

सूर्य की रोशनी की कमी से सेरोटोनिन के स्तर में भी गिरावट (Serotonin levels also fall due to lack of sunlight) आ जाती है यह मस्तिष्क में पाया जाने वाला एक रसायन (न्यूररोट्रांसमीटर) है जो मूड को प्रभावित करता है और तनाव को ट्रिगर करता है.

बेहद नुकसानदेह है यह तनाव

तनाव के कारण शरीर में कईं हार्मोनों का स्तार बढ़ जाता है, जिनमें एड्रीनलीन और कार्टिसोल प्रमुख हैं. इनकी वजह से दिल का तेजी से धडकना, पाचन क्रिया का मंद पड़ जाना, रक्त का  प्रवाह  प्रभावित  होना, नर्वस सिस्टम की कार्यप्रणाली गड़बड़ा जाना और इम्यूंन सिस्टम का कमजोर होना जैसेी समस्याएं उत्प़न्न हो जाती हैं.

अगर तनाव की स्थिति लगातार बनी रहती है तो इसका असर धीरे-धीरे बाहरी रूप से भी दिखाई देने लगता है. इस कारण डिप्रेशन, डायबिटीज, बालों का झडना, हृदय रोग, मोटापा, अल्सडर, सेक्सुरअल डिसफंक्श न की समस्याएं हो सकती हैं, इसलिए तनाव से बचना बहुत जरूरी है.

तनाव को कैसे भगाएं – How to overcome stress

बारिश में कईं लोग इतने तनावग्रस्त हो जाते हैं कि उनके लिए रोज के काम करने के लिए खुद को तैयार करना भी कठिन होता है. अगर आपके साथ भी यह समस्या है तो आप इन उपायों को अपना सकते हैं.

मौसम का आनंद लें

बारिश में हर जगह कीचड़ और पानी देख तनाव न लें, हर मौसम की अपनी अच्छाईयां और बुराईयां होती हैं. ऐसा ही बारिश के मौसम के साथ भी है. अगर आप कहीं जा रहे हैं तो बारिश में होने वाले ट्रैफिक जाम को ध्यान में रखते हुए घर से थोड़ा जल्दी निकलें. कार या बस के शीशे खोलकर रिमझिम फुहारों का आनंद लें. इस दौरान आप ब्रीदिंग एक्सरसाइज भी कर सकते हैं यह आपको मानसिक शांति देगी.

पोषक भोजन का सेवन करें

मानसून में जठराग्नि मंद पड़ जाती है, इसलिए हल्के, संतुलित और पोषक भोजन का सेवन करें. इस मौसम में संक्रमण तेजी से फैलता है इसलिए साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें.

एक्सरसाइज करें

शारीरिक रूप से सक्रिय रहें. नियमित रूप से एक्सरसाइज करें. एक्सरसाइज करने से मस्तिष्क में रक्त का संचरण (Blood circulation in the brain) बढ़ता है जिससे मस्तिष्क की कार्यक्षमता (Brain function) बढ़ती है और तनाव भी कम होता है. जब हम शारीरिक रूप से स्वस्थ अनुभव नहीं करते हैं तब हमारा मस्तिष्क भी अशांत हो जाता है, जिससे तनाव ट्रिगक होता है.

पूरी नींद लें

मौसम में बदलाव शरीर में मेलाटोनिन के स्तर (Melatonin levels in the body) में परिवर्तन कर देता है, जो हमारे स्लीसप पैटर्न और मूड को निर्धारित करने में अहम भूमिका निभाता है. शरीर और मस्तिष्क को रि-इनर्जाइज करने के लिए 6-8 घंटे की नींद लें.

ग्रीन टी का सेवन करें Drink Green Tea

एक अध्ययन में यह बात सामने आई है कि जो लोग एक दिन में कम से कम दो से तीन कप ग्रीन टी पीते हैं उनका मूड और स्वास्थ्य उन लोगों से बेहतर रहता है जो इसका सेवन नहीं करते हैं. अगर आप तनाव में हैं तो एक प्याला ग्रीन टी पिएं. वैसे भी बारिश में चाय की चुस्कियां लेने का अपना ही आनंद है.

संगीत सुनें

संगीत तनाव को कम करता है और आपके मूड को ठीक रखता है. अनुसंधानों में यह बात सामने आई है कि संगीत से हृदय की धडकनों, रक्त दाब और रक्त में तनाव पैदा करने वाले हार्मोनों का स्तर कम होता है. ब्रेक लें और अपना मनपसंद संगीत सुनें.

आउटिंग पर जाएं

मानसून का अर्थ (Meaning of monsoon) यह कतई नहीं है कि आप दरवाजे, खिड़कियां बंद करके बैठ जाएं. बाहर निकले. वीकएंड पर अपने परिवार और दोस्तों के साथ धूमने जाएं. लांग ड्राइव पर निकल जाएं या किसी शांत प्राकृतिक स्थान पर घूम आएं.

डा. गौरव गुप्ता

मनोचिकित्सक

तुलसी हेल्थ केयर नई दिल्ली

(सम्प्रेषण)

Health: How to relieve monsoon stress

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