इतिहास के हर पन्ने पर खून की लकीरें : इतिहास नहीं चश्मा बदलें

दूर देशों से हूण शक यूनानी अरब कई अौर आये घर बसा यहीं के हो गये देश की मिट्टी में मिली सबकी मिट्टी कौन जाने किसकी रगों में किसका खून है इतिहास के पन्ने नहीं अपना चश्मा बदलो वक्त आ गया है चश्मे का...

जसबीर चावला

मैंने हजार साल के इतिहास को साफ किया

बादशाहों को गर्दन पकड़ निकाल दिया

स्याही पोत दी हर नाम पर

बाबर हुमायूं अकबर जहाँगीर शाहजहाँ बेकिताब हुए

बहादुरशाह ज़फ़र भी निर्वासित हुए

पन्ने फाड़ दिये मंगोल मुग़ल लोधी गुलामवँश के

ताजमहल को तेजोमहल किया

कुतुबमीनार और लाल क़िला तंबू से ढक दिया

 

इतिहास से फिर भी खून का रिसाव हो रहा

तलवारों और चीख़ों की आवाज़ें आ रही

घोड़ों की टापें हाथियों की चिंघाड़

दक्षिण के चोल चेर काकितेय राष्ट्रकूट पँडियन पल्लव लड़ रहे

उत्तर में चंदेल परमार सोलंकी प्रतिहार तलवारें भाँज रहे

बंगाल के पाल सेन लड़ रहे

मौर्य गुप्त कोशल मगध सीमाओं का विस्तार कर रहे

चोल राजेन्द्र साम्राज्य को इंडोनेशिया तक ले गया

राजपूतों मराठों सिक्खों ने भी तलवारें खींची

राजदरबारों में भाईयों सामंतों के षड़यंत्र दिखे

इतिहास के हर पन्ने पर खून की लकीरें पड़ी थी

जैन बौद्ध शैव वैष्णव धर्मों में वैमनस्य था

कोई आँख फोड़ रहे किसी का घट्टे में सिर पीस रहे

राजसत्ता की सबमें एक समान लिप्सा थी

राजाओं बादशाहों का एक ही इतिहास है

 

दूर देशों से हूण शक यूनानी अरब कई अौर आये

घर बसा यहीं के हो गये

देश की मिट्टी में मिली सबकी मिट्टी

कौन जाने किसकी रगों में किसका खून है

इतिहास के पन्ने नहीं अपना चश्मा बदलो

वक्त आ गया है चश्मे का नंबर बदलो

 

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