वह लड़की जो मोटरसाइकिल चलाती है

हमारी दुनिया में इतने रंग और जटिलताएं हैं कि उन्हें समेटना हो तो कविता करने से सरल कोई तरीका नहीं हो सकता...जो समय की जटिलता को समेटती है वो कविता है। सामाजिक परिवर्तनों को रेखांकित करना ही कविकर्म है...

हाइलाइट्स

अनंत भटनागर के कविता संग्रह वह लड़की जो मोटरसाइकिल चलाती हैका लोकार्पण

उमेश कुमार चौरसिया

अजमेर। ‘‘हमारी दुनिया में इतने रंग और जटिलताएं हैं कि उन्हें समेटना हो तो कविता करने से सरल कोई तरीका नहीं हो सकता। यह आवश्यक नहीं कि जो आसानी से समझ आ जाए वह अच्छी और जो समझना जटिल हो वह खराब कविता है या इसके विपरीत भी। जो कविता समय की जटिलता को समेटती है वो कविता है। सामाजिक परिवर्तनों को रेखांकित करना ही कविकर्म है।’’

ये विचार सुविख्यात कवि, कथाकार, पत्रकार व व्यंग्यकार विष्णु नागर ने कवि, शिक्षाविद् और सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. अनन्त भटनागर के नये काव्य-संग्रह ‘वह लड़की जो मोटरसाइकिल चलाती है‘ के लोकार्पण समारोह में मुख्य अतिथि के तौर पर व्यक्त किये।

रविवार 7 मई, 2017 को सायंकाल सूचना केन्द्र, अजमेर में आयोजित कार्यक्रम में उन्होनें कहा कि संग्रह की कविताएं सामाजिक चेतना से संबद्ध हैं और समझने में भी सरल हैं। सरल अभिव्यक्ति कौशल अत्यन्त कठिन कार्य है।

समारोह में विशिष्ट अतिथि युवा आलोचक डॉ. पल्लव ने कविता के सामाजिक सरोकारों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि अनन्त भटनागर की काव्यचेतना पर जन आन्दोलनों का प्रभाव स्पष्ट दिखाई देता है।

अध्यक्षीय उद्बोधन देते हुए प्रतिष्ठित कवि-स्तंभकार प्रेमचन्द गांधी ने कहा कि इस संग्रह की कविताएं नये तेवर और प्रभावी शब्दावली को लिये हुए हैं।

चित्तौड़गढ़ से आये डॉ. राजेश चौधरी और वरिष्ठ काव्य आलोचक डॉ. बीना शर्मा ने पुस्तक पर विस्तृत आलेख पढ़ते हुए कहा कि वर्तमान की स्थितियों पर केन्द्रित होना इस संग्रह की विशेषता है। मोबाइल फोन, बाजार, नया साल और सेज में नयी सभ्यता के उपादानों को समझने की कोशिश की गई है।

संग्रह का दूसरे खण्ड उम्र का चालीसवाँ में नितांत निजी अनुभूतियों के साथ रिश्तों में आते बदलाव को अभिव्यक्त करती कविताएं हैं। शीर्षक कविता कथ्य में अनूठी और सच्चे स्त्री विमर्श की कविता है।

डॉ. रजनीश चारण, कालिंदनंदिनी शर्मा और दिव्या सिंहल ने अतिथियों का परिचय दिया। नगरनिगम उपायुक्त ज्योति ककवानी, शचि सिंह और वर्षा शर्मा ने संग्रह की चुनिंदा कविताओं का पाठ किया।

प्रारंभ में डॉ. सी.पी.देवल, जी.के.माथुर, डॉ. रश्मि भटनागर, राम जैसवाल, बख्शीश सिंह, रासबिहारी गौड, गोपाल गर्ग, गोकुल प्रसाद शर्मा, संदीप पाण्डे, दीपक शर्मा, रश्मि जैन, डी.एल.त्रिपाठी, सोमरत्न आर्य, श्याम माथुर, सिस्टर गीता कैरोल, एच पी गौड  आदि ने साहित्यकारों का स्वागत किया। स्वागत उद्बोधन में नाटककार उमेश कुमार चैरसिया ने कृति को मानवीय संवेदनाओं की अभिव्यक्ति बताया। समारोह का संचालन गीतकार कवयित्री पूनम पाण्डे ने किया। डॉ. बृजेश माथुर ने आभार अभिव्यक्त किया। इस अवसर पर नगर के अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। 

 

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