पाग़ल हो गए हैं संघी, मन्द्राक्रान्ता सेन को इस कविता के लिए दी सामूहिक बलात्कार की धमकी

संघी पाग़ल हो गए हैं। बांग्ला कवि मन्द्राक्रान्ता सेन को इस कविता के लिए सामूहिक बलात्कार की धमकी दे डाली। कविता का शीर्षक है -- बदल दो जीवन।...

पलाश विश्वास

संघी पाग़ल हो गए हैं। बांग्ला कवि मन्द्राक्रान्ता सेन को इस कविता के लिए सामूहिक बलात्कार की धमकी दे डाली। कविता का शीर्षक है -- बदल दो जीवन।

इस ओर आर. एस. एस.,

जमात या हूजी उस ओर

मुक्ति खोजूँ कहाँ, कहाँ, कहाँ, किस ठौर?

हिंसक अन्धकार युग, मानवता आज है आहत

मानव – तुम्हारे मान और बोध के शरणागत

होना है आज हमें,

लौटा दो मानवताबोध

लौटा दो प्रेम,

लौटा दो दीप्त प्रतिरोध।

ध्वंस की कैसी लीला !

कट्टरता के शिकार हैं हम

मरते हैं भाई-बहन हमारे,

मरते माता-पिता हरदम

बदला नहीं है लेना,

बदल दो जीवन का भाग

लाश नहीं,

पलाश से भर उठे प्रेम का बाग।

(मूल बांग्ला से अनुवाद : उत्पल बैनर्जी)

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