खामोशियाँ ज़िंदा रहें

प्रतिभा मंच पर दिखा लघु भारत

नई दिल्ली। प्रतिभा किसी सहारे की मोहताज नहीं होती, ये साबित किया है अतहर ख़ान और डा0 असद निज़ामी ने प्रतिभा मंच फाउंडेशन की स्थापना कर के और इस के तहत तमाम नई प्रतिभाओं को अवसर और मंच दे कर।

ये दो साल से लगातार साहित्यिक और सामाजिक सेवाएँ दे रहे हैं, नई प्रतिभाओं को मंच और साझा संग्रहों में जगह दे रहे हैं। इसी कड़ी में पिछले 21 मई को हिंदी भवन में प्रतिभा मंच के तीसरे साझा काव्य संग्रह "खुशबू-ए-ग़ज़ल" का विमोचन संपन्न हुआ और साहित्य से जुड़े लोगों को सम्मान भी दिया गया।

इस अवसर पर मुख्य अतिथि के तौर पर सुलभ इंटरनेशनल के बागेश्वर झा, विशिष्ट अतिथि गण राजू रंजन यादव, एम ए जौहर, क़ाज़ी नईम, पूनम माटिया, नीना सहर, शादाब सिद्दीक़ी, विजय स्वर्णकार, शाहिद मिर्ज़ा शाहिद, डा0 मनोज कुमार मनोज, शहला अतहर, गज़ाला जलील, आदि गणमान्य लोग मौजूद थे।

समारोह की अध्यक्षता  मशहूर शायर सर्वेश चन्दौस्वी साहब ने की जबकि संचालन मंच के संस्थापक डा0 असद निज़ामी ने किया।

प्रतिभा मंच फाउंडेशन द्वारा प्रकाशित 3 और किताबों "गौहर ए नायाब" (सीमा गौहर), "खामोशियाँ ज़िंदा रहें"( अनिल कुलश्रेष्ठ ), "नग़मा ए दिल" ( गीता शुक्ला) और  मंच के ऐडमिन नज़र मगहरी के वालिद की उर्दू में प्रकाशित पुस्तक "कुललियात-ए-जौहर- मगहरी" का इज्रा भी हुआ।

प्रतिभा मंच फाउंडेशन के अध्यक्ष अतहर खान ने स्वागत भाषण और मंच के संरक्षक डा0 रहमत अली ने मंच के सदस्यों को मार्गदर्शन दिया। साथ ही मुशायरे का आयोजन हुआ जिसमें कुंवर कुशुमेश, शाहिद मिर्ज़ा, साइम क़ादरी, सीमा गौहर, आराधना प्रसाद, वरुण आनंद, गीता शुक्ला, दर्शन कुमार वसन, सुमन दुग्गल, अफ़रोज़ अज़ीज़, सागर सियालकोटी, जीविका वत्स, अखिलेश मांझी, ज्योति आज़ाद, जय कृष्ण चांडक, अंदाज़ अमरोहवी, वक़ार अहमद, रवीन्द्र कोहली, गायत्री शुक्ला, कविता शर्मा, अरशद साद,  अज़हर बख़्श, अंजना चड्ढा, नीलम श्रीवास्तव, अनिल कुलश्रेष्ठ, इक़बाल तन्हा, आबिद मिस्बाही, उर्मिला प्रसाद, जमना प्रसाद बेताब, रोमित हिमकर, फैज़ बदायूंनी, विजय कुमार स्वर्णकार, माधुरी स्वर्णकार, गुरचरण मेहता रजत, निर्मल नदीम, विजया शर्मा, शादाब सिद्दीक़ी, अपर्णा झा, नासिर अब्बासी, जावेद अब्बासी, मिलन चौरसिया, मनीष कुवेर, सागर मेरठी, असग़र अश्क, सुरेंद्र कुमार भाटिया, इरशाद अज़ीज़, मिज़ाज लखनवी,अतहर आरवी , साजिद ख़ैरो, अनुराग जैमिन आदि देश के कोने-कोने से पधारे हुए कलमकारों ने काव्य पाठ किया।

प्रतिभा मंच के इस कार्यक्रम में एक लघु भारत देखने को मिला।

प्रतिभा मंच को एक तरफ़ जहाँ साहित्य के लिए अपने उतकृष्ट कामों के लिए जाना जाता है वहीं प्रतिभा मंच सामाजिक कार्यों के लिए भी जाता है।

प्रतिभा मंच ने शायरा सीमा गौहर को उनकी किताब गौहर-ए-नायाब के लिए, गीता शुक्ला को नगमा-ए-दिल के लिए अनिल कुलश्रेष्ठ को खामोशियां जिन्दा रहें के लिए सम्मानित किया।

हिंदी फिल्मों में बड़े ही कम उम्र में बहुत तेजी से अपना नाम स्थापित करने वाले निर्देशक शादाब सिद्दीकी को प्रतिभा मंच गौरव सम्मान दिया गया और मशहूर सामाजिक कार्यकर्ता नवेद चौधरी, फरह शकेब को सामाजिक उत्थान के लिए उनके उत्कृष्ट कामों के लिए सम्मानित किया गया।

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