चौथा खम्भा
मीडिया की सांप्रदायिकता  अब किसी ने नहीं लिखा “ख़िलजी की हुईं पद्मावती”
याद आयी आधी रात को --हेलो हेलो हेलो नागपुर मिल गया विकास
याद आयी आधी रात को.. --हेलो हेलो हेलो नागपुर.. मिल गया विकास

याद आयी आधी रात को.. --हेलो हेलो हेलो नागपुर.. मिल गया विकास

राजीव मित्तल
2018-11-12 18:22:26
ब्राज़ील में अच्छे दिन  फेक न्यूज़ का सहारा लेकर सत्ता में आए राष्ट्रपति अब मीडिया पर बोलेंगे हमला
ब्राज़ील में अच्छे दिन : फेक न्यूज़ का सहारा लेकर सत्ता में आए राष्ट्रपति अब मीडिया पर बोलेंगे हमला !

ब्राज़ील में फेक न्यूज़ का सहारा लेकर सत्ता में आए दक्षिणपंथी निर्वाचित राष्ट्रपति ने फेक न्यूज़ की आड़ में मीडिया पर हमला बोला है।

हस्तक्षेप डेस्क
2018-11-05 21:16:13
would love to have shared the big moment with rishi sir and the entire team- anirudh tanwar
Would love to have shared the big moment with Rishi Sir and the entire team- Anirudh Tanwar

Debutante Anirudh Tanwar talks about his movie and sharing screen with Rishi Kapoor

एजेंसी
2018-10-22 22:44:24
सांस्कृतिक राष्ट्रवाद का मीडिया पर प्रभाव ग़ायब हैं यथार्थ के चित्र और यथार्थ की ख़बरें
सांस्कृतिक राष्ट्रवाद का मीडिया पर प्रभाव, ग़ायब हैं यथार्थ के चित्र और यथार्थ की ख़बरें

यथार्थ की हत्या का तंत्र बन गया है सूचना क्रांति के नाम पर विकसित समूचा ढाँचा

जगदीश्वर चतुर्वेदी
2018-10-14 13:32:47
जो गोदी मीडिया वर्धा को गुजरात में दिखा रहा था उसे राहुल गाँधी का बर्तन धोना नौटंकी ही लगेगा
ऐरु-गैरु-नत्थु-खैरु रेडियो मैकेनिक आज पत्रकारिता में जमे हुए हैं - टीवी के पर्दे पर छाए हुए हैं
ऐरु-गैरु-नत्थु-खैरु रेडियो मैकेनिक आज पत्रकारिता में जमे हुए हैं - टीवी के पर्दे पर छाए हुए हैं

हर ऐरु-गैरु-नत्थु-खैरु सोचता है कि पत्रकारिता या रेडियो-पत्रकारिता में क्या रखा है ? सिर्फ़ लिख या बोल देना पड़ता है. यह मैं भी कर सकता हूं.

उज्ज्वल भट्टाचार्या
2018-09-07 19:35:41
टीवी 100 के पत्रकारों के ऊपर पत्रकार देवेंद्र पटवाल की हत्‍या का मुकदमा दर्ज करने की याचिका मंजूर
टीवी 100 के पत्रकारों के ऊपर पत्रकार देवेंद्र पटवाल की हत्‍या का मुकदमा दर्ज करने की याचिका मंजूर

टीवी 100 के पत्रकारों के ऊपर पत्रकार देवेंद्र पटवाल की हत्‍या का मुकदमा दर्ज करने की याचिका मंजूर

हस्तक्षेप डेस्क
2018-09-04 16:50:05
पत्रकारिता कब और कैसे मीडिया बन गई  दो दशकों में हमने पत्रकारिता को कमाई के धंधे में बदल डाला
पत्रकारिता कब और कैसे मीडिया बन गई ? दो दशकों में हमने पत्रकारिता को कमाई के धंधे में बदल डाला

पिछले 20 सालों में मीडिया मालिक ही नवउदारवाद और निजीकरण के सबसे बड़े लाभार्थी। जिन्हें अपने लाखों के शेयर बचाने हैं वे आपको सच बताएंगे? पत्रकारिता...

अतिथि लेखक
2018-08-27 09:58:00
लालूराज में जैसे उनके खिलाफ लिखा अगर आज उसी अंदाज में नीतीश के खिलाफ लिख रहा होता तो शर्तिया जेल में होता या मार दिया गया होता
लालूराज में जैसे उनके खिलाफ लिखा .अगर आज उसी अंदाज में नीतीश के खिलाफ लिख रहा होता तो शर्तिया जेल में होता या मार दिया गया होता..

लालूराज में जैसे उनके खिलाफ लिखा .अगर आज उसी अंदाज में नीतीश के खिलाफ लिख रहा होता तो शर्तिया जेल में होता या मार दिया गया होता..

हस्तक्षेप डेस्क
2018-08-21 22:58:38
हां हां  यह अघोषित इमर्जेंसी ही है
हां, हां ! यह अघोषित इमर्जेंसी ही है

ज्यों-ज्यों मोदी एंड कंपनी को 2019 का चुनाव अपने हाथ से फिसलता लग रहा है, यह हमला और तीखा हो रहा है। आखिरकार, मीडिया जनता के आंख-कान का विस्तार है।

राजेंद्र शर्मा
2018-08-05 18:26:59
हिंदी पत्रकारिता पर विधवा विलाप का कोई अर्थ नहीं प्रभाष जोशी ने क्या कहा था सुनिये
हिंदी पत्रकारिता पर विधवा विलाप का कोई अर्थ नहीं, प्रभाष जोशी ने क्या कहा था, सुनिये

फिर खुद प्रभाष जी कई छुटभैय्ये संपादकों के सिंहासन के तहत भीष्मपितामह की भूमिका में आ कर मृत्युपर्यंत नमकहलाली करते रहे... इस पूरे वाक़ये को पत्र...

राजीव मित्तल
2018-08-05 10:10:51
आज आलोचना की हर आवाज़ कुचली जा रही है यह रेंगता हुआ फ़ासीवाद है
आज आलोचना की हर आवाज़ कुचली जा रही है. यह रेंगता हुआ फ़ासीवाद है.

सवाल यह भी नहीं है कि पुण्यप्रसून कितने महान हैं. हमें आज सबसे पहले देश में लोकतंत्र को कुचले जाने की फ़िक्र है. इसका मतलब यह नहीं कि दूसरे मस...

उज्ज्वल भट्टाचार्या
2018-08-04 19:49:54
सरकार की छवि बनाना और बचाना ही पत्रकारिता है तो जनसंपर्क विभाग वाले क्या तमाशा देखने के लिए रखे गए हैं
सरकार की छवि बनाना और बचाना ही पत्रकारिता है तो जनसंपर्क विभाग वाले क्या तमाशा देखने के लिए रखे गए हैं?

सरकार की छवि बनाना और बचाना ही पत्रकारिता है तो जनसंपर्क विभाग वाले क्या तमाशा देखने के लिए रखे गए हैं?

अतिथि लेखक
2018-08-04 19:42:47
इस विरोधी दुनिया में फासीवादियों को गले लगाइए नफरत बेचने वालों को प्यार से ही खरीदा जा सकता है
इस विरोधी दुनिया में फासीवादियों को गले लगाइए, नफरत बेचने वालों को प्यार से ही खरीदा जा सकता है

आरएसएस : दुनिया का सबसे बड़ा फासीवादी संगठन.... मोदी अपनी राजनीतिक सूझबूझ और अपने शासन के ट्रैक रिकॉर्ड के आधार पर फासीवाद का साकार रूप हैं,

अतिथि लेखक
2018-08-03 11:04:26