जिन्ना की तस्वीर के नाम पर उत्पात मचाने वाले संघियों पर रासुका लगाओ

​​​​​​​भाजपा को यह भी जबाव देना होगा कि उसके अनुयायी डा. आंबेडकर और पेरियार की प्रतिमाएं क्यों तोड़ा करते हैं? क्या पेरियार और आंबेडकर ने भी पाकिस्तान बनाया था?...

जिन्ना की तस्वीर की आड़ में देश को नफ़रत की आग में झोंकने में जुटे हैं भाजपा और संघ परिवार : भाकपा

लखनऊ- भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव मंडल ने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय छात्र संघ भवन में लगी मोहम्मद अली जिन्ना की तस्वीर को हठाने की आरएसएस/ भाजपा की मांग और इसकी आड़ में सांप्रदायिकता फ़ैलाने, गुंडागर्दी करने तथा हिंसा भड़काने की कोशिशों की कड़े शब्दों में निन्दा की है.

यहां जारी एक प्रेस बयान में भाकपा राज्य सचिव डा. गिरीश ने कहा कि भाजपा देश चलाने और जनता से किये वायदों को पूरा करने में पूरी तरह विफल रही है. अतएव जनता को विभाजित करने को वह ऐसे संवेदनशील मुद्दे खड़े कर रही है जिनसे देश और समाज को भारी क्षति पहुंचेगी. ताज़ा मामला एएमयू में लगी जिन्ना की तस्वीर को हठाने का है.

डा. गिरीश ने कहाकि आरएसएस और जनसंघ 1977 में जनता पार्टी की सरकार में शामिल थे. 1999 से 2004 तक भाजपा के नेतृत्व वाली एनडीए की सरकार थी. और अब 4 साल से अपार बहुमत वाली भाजपा सरकार केन्द्र में है. उत्तर प्रदेश में भी 1966 से आज तक अनेकों बार भाजपा शासन में रही है लेकिन कभी संघ परिवार को जिन्ना की तस्वीर हटाने की याद नहीं आई. लेकिन अब जबकि भाजपा हर मोर्चे पर पूरी तरह विफल हो चुकी है, और काला धन वापस लाने, हर नागरिक को रु. -15 लाख देने, दो करोड़ युवाओं को हर साल रोजगार देने, किसानों की आमदनी दोगुना किये जाने तथा स्वच्छ प्रशासन देने जैसे उसके खास वायदों को पूरा करने से मुकर गयी है तो उसने तमाम विभाजनकारी मुद्दे उठाना शुरू कर दिया है. वोट की राजनीति के लिये वह देश की युवा पीढ़ी के दिलों में नफरत का जहर घोल रही है और उन्हें अपनी घ्रणित राजनीति का मोहरा बना रही है. अपने कुत्सित उद्देश्यों को पूरा करने को पहले उसने कासगंज में विद्यार्थियों को दंगों की आग में झोंका तो अब अलीगढ में छात्र- नौजवानों को नफरत की आग का ईंधन बनाया जारहा है.

जो भाजपा सरकार पूर्ण बहुमत में होते हुये न मंदिर निर्माण करा पायी, न धारा 370 को हठा पायी, 2019 के लोक सभा चुनावों के निकट आने और कर्नाटक विधानसभा चुनावों में फायदा उठाने को वह अब जिन्ना की तस्वीर हठाने के नाम पर हिंसा और उपद्रव पैदा कर रही है. रिकार्ड गवाह हैं कि हर चुनाव से पहले भाजपा गड़े मुर्दे उखाड़ना शुरू कर देती है.

आजादी के आन्दोलन से बाहर रहा संघ परिवार कभी भी देश में अनेक जगह लगी अंग्रेज शासकों की मूर्तियों को हटाने की मांग नहीं करता. ना ही भाजपा सरकार ने कभी पाकिस्तान से कूटनीतिक संबंध तोड़े हैं, अपितु श्री मोदी तो वहां बिना आमंत्रण के ही जाचुके हैं. भाजपा को यह भी जबाव देना होगा कि उसके अनुयायी डा. आंबेडकर और पेरियार की प्रतिमाएं क्यों तोड़ा करते हैं? क्या पेरियार और आंबेडकर ने भी पाकिस्तान बनाया था?

डा. गिरीश ने कहा कि जहाँ तक अलीगढ का सवाल है वहां संघी संगठनों को हिंसा और उत्पात भड़काने की खुली छूट स्थानीय प्रशासन ने दी. उन्हें एएमयू परिसर से दूर ही रोकने के बजाय पुलिस- प्रशासन कथित जागरण मंच वालों की सुरक्षा में लगा था.

भाकपा का आरोप है कि योगी राज में पुलिस प्रशासन बेहद दबाव में काम कर रहा है. इसीलिये समूचा प्रदेश अराजकता, गुंडागर्दी और सांप्रदायिकता की गिरफ्त में है. मुख्यमंत्री को क़ानून व्यवस्था सुधारने से ज्यादा भाजपा के डूबते जहाज को बचाने की फ़िक्र है. कल आये तूफ़ान में आधा सैकड़ा से अधिक लोगों के मारे जाने और भारी तबाही के बावजूद वे कर्नाटक विधान सभा चुनाव में वोट बटोरने की कबायद में लगे हैं.

भाकपा ने अलीगढ़ में उत्पात मचाने वाले संघियों के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम के तहत कार्यवाही किये जाने की मांग की है.

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