भाजपा राज में महिलाएं असुरक्षित, बलात्कारी भाजपाईयों को बचाने प्रशासन ने पीड़िता को ही बनाया बंधक-माकपा

छत्तीसगढ़ में भाजपा राज में महिलाएं किस कदर असुरक्षित हैं, इसका प्रमाण जशपुर जिले के काईकछार इलाके में 5 सितम्बर को हुआ सामूहिक बलात्कार कांड है. इस जघन्य वारदात में दो मुख्य आरोपी भाजपाई कार्यकर्ता है...

हाइलाइट्स

माकपा प्रतिनिधिमंडल ने पीड़िता के पिता व बहन के साथ थाना प्रभारी शिवानंद तिवारी से भी मुलाक़ात की. उन्होंने बताया कि चूंकि गिरफ्तार आरोपियों में से किसी ने इनका नाम नहीं लिया है, इसलिए वे निर्दोष हैं और उन्हें छोड़ दिया गया है. पीड़िता के बारे में पूछने पर उन्होंने बताया कि उसे महिला व बाल कल्याण विभाग द्वारा संचालित ‘सखी’ सेंटर में मीडिया की नज़रों से छुपाने के लिए रखा गया है, क्योंकि ऐसी घटनाओं को मीडिया मिर्च-मसाला लगाकर छापती है. लेकिन उनके पास इस बात का कोई जवाब नहीं था कि पीड़िता के पिता और परिजनों से उसे क्यों छुपाकर रखा गया है, जो कि सरासर गैर-कानूनी है.

रायपुर। छत्तीसगढ़ में भाजपा राज में महिलाएं किस कदर असुरक्षित हैं, इसका प्रमाण जशपुर जिले के काईकछार इलाके में 5 सितम्बर को हुआ सामूहिक बलात्कार कांड है. इस जघन्य वारदात में दो मुख्य आरोपी भाजपाई कार्यकर्ता हैं, जिन्हें बचाने के लिए प्रशासन ने पीड़िता को ही बंधक बना डाला था. आज तक इन आरोपियों को पुलिस ने गिरफ्तार नहीं किया है.

यह निष्कर्ष है, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य स्तरीय प्रतिनिधिमंडल का, जिसने इस घटना की छानबीन की है.

माकपा राज्य सचिव संजय पराते ने आज एक पत्रकार वार्ता में निम्न बयान जारी किया -

मीडिया द्वारा उजागर तथ्य :

जशपुर जिले से लगभग 15 किमी. दूर काईकछार इलाके में 5 सितम्बर की रात को हुए बलात्कार के तथ्य अब तक पूरी तरह उजागर हो चुके हैं. पीड़िता निर्भया (बदला हुआ नाम), उम्र 19 वर्ष, पिता ननकू नगेशिया, निवासी ढारेन गांव, बरपानी पंचायत, विकासखंड दुलदुला 5 सितम्बर की रात को बस से काईकछार उतरती है. वह ढारेन गांव की ओर पैदल आगे बढ़ती है. 15-25 वर्ष के 10-12 लफंगे उसका पीछा करते हैं. बदहवास होकर वह भागने लगती है, लेकिन नशे में धुत्त युवा उसे पकड़ लेते हैं, पास के जंगल में घसीटकर बलात्कार करते हैं और उसे मरा हुआ समझकर 20 फीट ऊंची चट्टान से नीचे एक बहते नाले में फेंक देते हैं. 7 सितम्बर को वह घायल स्थिति में घर पहुंचती है. उसका पिता ननकू उसे ईलाज के लिए बैगा के पास ले जाता है. तबियत में सुधार न होने के कारण 8 सितम्बर को वह ढारेन गांव के सरकारी अस्पताल जाता है, जहां उसका ईलाज नहीं होता. उसे जशपुर के सरकारी अस्पताल में जाने के लिए कहा जाता है. 9 सितम्बर को वह वहां जाता है, जहां से पीड़िता को पुलिस थाना पहुंचाया जाता है. जशपुर कोतवाली के टीआई शिवानंद तिवारी के अनुसार, 2 नाबालिगों सहित 10 लोगों को गिरफ्तार किया गया है.

माकपा प्रतिनिधिमंडल का दौरा

इस जघन्य और शर्मनाक घटना के उजागर होने के बाद माकपा के एक राज्य स्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने जशपुर का दौरा किया. माकपा राज्य सचिव संजय पराते के नेतृत्व में सरगुजा जिला सचिव बालसिंह, सूरजपुर जिला सचिव ललन सोनी, राज्य समिति सदस्य कृष्ण कुमार व सुरेन्द्र लाल सिंह और जनवादी महिला समिति की प्रांतीय कोषाध्यक्ष नीलम सिंह प्रतिनिधिमंडल में शामिल थे. ढारेन गांव में वह पीड़िता के पिता ननकू और चचेरी बहन संगीता से मिला, जिन्होंने उक्त घटनाक्रम की पुष्टि तो की, लेकिन बताया कि उसकी बेटी कहां, किस हालत में है, उन्हें पता नहीं. ननकू ने बताया कि जब भी वह अपनी बेटी की खोज-खबर लेने जशपुर थाना जाता है, उसे वहां से भगा दिया जाता है. एफआईआर की प्रति दिखाने का आग्रह करने पर ननकू ने बताया कि उसे अभी तक यह दिया नहीं गया है.

ननकू ने हमें यह भी बताया कि उसकी आर्थिक हालत बहुत ख़राब है और इसी कारण उसका 20 साल का एक बेटा काम करने केरल गया हुआ है, जबकि निर्भय भी जशपुर से 12 किमी. दूर घोलेंग गांव में किसी ‘तिर्की’ शिक्षक के यहां काम करती है. उसने हर माह 2000 रूपये वेतन देने का वादा किया था, आज तक इसे नहीं दिया है.

माकपा प्रतिनिधिमंडल चांपाटोली पंचायत के सरपंच कंवलराम भगत से भी मिला, जिन्होंने बताया कि पुलिस ने शुरू में दो लोगों – विनोद तिर्की (प्राथमिक शाला में शिक्षाकर्मी) और सुधीर लकड़ा - को पकड़ा था. उसने पुलिस को फोटोयुक्त मतदाता सूची पुलिस को उपलब्ध करवाई थी. पीड़िता ने इसमें फोटो देखकर इनकी पहचान की थी. लेकिन बाद में पुलिस ने इन दोनों को निर्दोष मानकर छोड़ दिया है. माकपा दल ने प्राथमिक स्कूल जाकर विनोद तिर्की से भी मुलाक़ात की, जिसने शुरू में पूरे घटनाक्रम के बारे में अपनी अनभिज्ञता जाहिर की, लेकिन बाद में 10 गिरफ्तार आरोपियों के साथ दोस्ती व पीने-पिलाने के संबंधों को स्वीकार किया. बातचीत में उसकी घबराहट स्पष्ट रूप से जाहिर हो रही थी. सरपंच व ग्रामीणों से पता चला कि दोनों भाजपा कार्यकर्ता हैं.

माकपा प्रतिनिधिमंडल ने पीड़िता के पिता व बहन के साथ थाना प्रभारी शिवानंद तिवारी से भी मुलाक़ात की. उन्होंने बताया कि चूंकि गिरफ्तार आरोपियों में से किसी ने इनका नाम नहीं लिया है, इसलिए वे निर्दोष हैं और उन्हें छोड़ दिया गया है. पीड़िता के बारे में पूछने पर उन्होंने बताया कि उसे महिला व बाल कल्याण विभाग द्वारा संचालित ‘सखी’ सेंटर में मीडिया की नज़रों से छुपाने के लिए रखा गया है, क्योंकि ऐसी घटनाओं को मीडिया मिर्च-मसाला लगाकर छापती है. लेकिन उनके पास इस बात का कोई जवाब नहीं था कि पीड़िता के पिता और परिजनों से उसे क्यों छुपाकर रखा गया है, जो कि सरासर गैर-कानूनी है.

बहरहाल, हम लोग पीड़िता के पिता व बहन के साथ ‘सखी’ सेंटर में जाकर पीड़िता से मिलने में कामयाब हुए. इस मुलाक़ात के समय विभाग की महिला अधिकारी भी पूरे समय उपस्थित रहीं. इनकी उपस्थिति में पीड़िता ने बताया कि छोड़े गए दोनों लोग इस बलात्कार में शामिल थे. माकपा प्रतिनिधिमंडल ने टीआई तिवारी को इसकी सूचना देना जरूरी समझा और उन्हें पीड़िता के कथन से अवगत कराया. तुरंत ही तिवारी वहां पहुंचे और पुलिसिया रौब के साथ पीड़िता को डांटने लगे कि वह निर्दोष लोगों को फंसाना चाहती है, जबकि सभी दोषियों को उन्होंने गिरफ्तार किया है. उनके व्यवहार पर प्रतिवाद करने पर उन्होंने अपने मोबाइल से इन दोनों लोगों के फोटो निकालकर दिखाए. इस पर पीड़िता ने पुनः पुष्टि की कि दोनों लोग दुष्कर्म की घटना में शामिल थे. इसके बाद तैश में आकर उन्होंने प्रतिनिधिमंडल से कहा कि वे इन दोनों को गिरफ्तार नहीं कर सकते, क्योंकि उनके खिलाफ कोई सबूत नहीं है, जबकि बलात्कार के मामले में पीड़िता का बयान ही उन्हें आरोपी बनाने के लिए काफी है.

माकपा दल का निष्कर्ष :

स्पष्ट है कि प्रशासन राजनैतिक दबाव में भाजपा कार्यकताओं को बचाने पर तुली हुई है. यह मामला ‘निर्भया’ जैसे तूल न पकड़े और भाजपाई बलात्कारियों को बचाने के लिए ही प्रशासन ने पीड़िता को बंधक बनाकर रखा हुआ था. माकपा प्रतिनिधिमंडल के हस्तक्षेप के बाद ही पीड़िता को छोड़ने के लिए बाध्य होना पड़ा है. हमने पाया कि जिन 10 लोगों को गिरफ्तार किया गया है, उनका अभी तक डॉक्टरी मुलाहिजा नहीं करवाया गया है. इससे प्रकरण कमजोर ही होता है और बलात्कारियों के बरी होने की संभावनाएं ही ज्यादा बनती है. पीड़िता और उसके पिता को यह भी पता नहीं है कि एफआईआर की भी गई है या नहीं. माकपा इस पूरे मामले की शिकायत राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, अनुसूचित जनजाति आयोग और महिला आयोग से करने जा रही है, ताकि प्रशासन के संबंधित अधिकारियों व छोड़े गए आरोपियों पर कार्यवाही करने के लिए सरकार को निर्देशित किया जाएं.

माकपा की मांग :

1. इस जघन्य कांड में शामिल भाजपाई कार्यकर्ताओं को पुलिस शीघ्र गिरफ्तार करें. पीड़ित पक्ष को एफआईआर की प्रति दी जाएं, जिसमें छोड़े गये दोनों लोगों के आरोपी होने का स्पष्ट उल्लेख हो.

2. पीड़िता के परिवार को सरकार पर्याप्त व उचित मुआवजा दें.

3. पीड़िता को अवैध रूप से बंधक बनाकर रखे जाने के मामले की जांच की जाएं.

4. संबंधित शिक्षक से पीड़िता को न्यूनतम मजदूरी दर पर संपूर्ण वेतन का भुगतान प्रशासन करवाएं.

भाजपा राज में महिलाएं असुरक्षित :

भाजपा सरकार के महिलाओं के प्रति सामंती-पितृसत्तात्मक दृष्टिकोण के चलते प्रदेश में महिलाएं असुरक्षित हैं और महिलाओं के खिलाफ अत्याचारों में भारी बढ़ोतरी हुई है. एनसीआरबी की रिपोर्ट के अनुसार ही, छत्तीसगढ़ में हर रोज 4 बलात्कार हो रहे हैं और यह प्रदेश बलात्कारों की सूची में देश में 8वें पायदान पर हैं. वर्ष 2001 में महिलाओं के खिलाफ अत्याचार के 3989 प्रकरण दर्ज किए गए थे, जबकि वर्ष 2013 में भाजपा राज में इनकी संख्या बढ़कर 7012 हो गई है. इसके बावजूद 4 में से 3 आरोपी अदालतों से बरी हो रहे हैं, क्योंकि सरकार-प्रशासन पीड़ित महिलाओं के केस को सही तरीके से नहीं लड़ती. यह रवैया अपराधियों को और ज्यादा अपराध करने के लिए प्रेरित करता है.

जशपुर सामूहिक बलात्कार कांड को केंद्र में रखकर मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी भाजपा राज में महिलाओं की असुरक्षा के मुद्दे पर पूरे प्रदेश में विरोध कार्यवाहियों का आयोजन करेगी.

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